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हममें से अधिकांश व्यक्तिओं को पांच ज्ञानेन्द्रियों और पांच कर्मेन्द्रियों का नैसर्गिक वरदान प्राप्त है. हम प्रकृति के चमत्कार निरख सकते हैं: सुन्दर आकाश, सुनहला सूरज, प्यारे पंछी, रंग-बिरंगे फूलों की बहार, टिमटिमाते तारे, चमचमाता चांद और चारों ओर पसरी हरियाली जिनसे आंखों को आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है. पंछियों की चहचहाहट, पत्तियों की सरसराहट, घंटियों की टनटनाहट और आस-पास व्याप्त अनगिनत ध्वनियां सुन सकना कितना सुखकारी है! हमारा देख सकना, सुन सकना, अपने प्रिय जनों से मनचाही बातें कर सकना कितनी बड़ी नियामत है साथ ही छू सकना और सूंघ सकना भी हमें अपने परिवेश से जान-पहचान बढ़ाने में अत्यंत मददगार है.

अब कुछ देर के लिए जरा अपनी आंखें बंद कीजिए, कान भी बंद कर लीजिए चाहें तो रूई डालकर और कल्पना कीजिए कि आप बोलना भी नहीं जानते हैं. अब आप अंधी आँखों से देखने की, बहरे कानों से सुनने की और गूंगी जबान से बोलने की कोशिश कीजिए. महसूस कीजिए कि आपकी ये तीनों इन्द्रियां हैं ही नहीं. यानी अंधे, बहरे और गूंगे व्यक्ति के नजरिए से दुनिया को समझने की कोशिश कीजिए. इन तीन नेमतों की कमी की प्राकृतिक बाधाओं को पार करके भी जीवन में कोई ऊंचा मुकाम हासिल करना कितना दु:साध्य है, इसका कुछ अंदाजा जरूर मिल सकेगा आपको और तब आपको एहसास होगा कि हेलेन केलर कितनी महान हस्ती थीं. वे एक ऐसी व्यक्ति थीं जिन्होंने इन बाधाओं को पार करते हुए कॉलेज की डिग्री हासिल की, बारह किताबें लिखीं, दुनिया भर की सैर की, बारह अमेरिकी राष्ट्रपतियों से मिलीं और इन सबसे बढ़कर भरपूर जिन्दादिली से अपना जीवन जिया.

हेलेन केलर 20वीं शताब्दी की एक विलक्षण महिला थीं. अंधे और बहरे होने की तमाम कठिनाइयों पर विजय पाते हुए वे जीवन की आशा का मशाल थामे दुनिया भर के ऐसे करोड़ों लोगों के लिए आदर्श बन गयीं. वे अपनी राय पर सुदृढ़ रहने वाली विदुषी थीं. वे एक जगत-प्रसिद्ध लेखिका, राजनैतिक आन्दोलनकर्ता, वक्ता, अनुकरणीय मानवतावादी और अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) की सह-संस्थापिका भी थीं. वे 44 सालों तक अमेरिकन फाउंडेशन फॉर द ब्लाइंड (AFB) के लिए काम करती रहीं. उनके परोपकारी प्रयत्नों ने अंधे और अंधे-बहरे लोगों में साहस और आत्मविश्वास का संचार कर उनकी नियति बदलने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अंधे व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से विकसित अंतर्राष्ट्रीय ब्रेल लिपि के मानकीकरण में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा. उन्होंने दुनिया को अंधे और बहरे लोगों का सम्मान करना सिखाया.

एक बार हेलेन ने कहा था, “शांति और सुविधा के वातावरण में चरित्र का विकास नहीं हो सकता है. कोशिशों और दुःख के अनुभव से ही आत्मा को सशक्त तरीके से तराशा जा सकता है, महत्वाकांक्षाओं को प्रेरित किया जा सकता है और सफलता पाई जा सकती है.”

जन्म से लेकर मृत्यु तक हेलेन की जिंदगी सबके लिए शाश्वत प्रेरणा का पर्याय बन गई. मानवता के इतिहास में उनका नाम हमेशा के लिए अमर हो गया. आइए, हम उनकी अविस्मरणीय जीवन यात्रा की झांकी देखने को चलें जिसे कई भाषाओं के नाटकों और फिल्मों में ढा़लने की अबतक बहुतेरी कोशिशें भी हो चुकी हैं.

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27 जून, 1880 को अमेरिका में उत्तर-पश्चिम अलाबामा के तस्कम्बिया नाम के एक छोटे-से कस्बे में “आइवी ग्रीन” नामक सफेद ढांचे वाले एक कॉटेज में एक सुन्दर बच्ची का जन्म हुआ. कैथरीन एडम्स केलर और कैप्टन आर्थर हेनली केलर इस बच्ची के माता-पिता थे. नानी हेलेन एवेरेट के नाम पर इस बच्ची का नाम हेलेन केलर रखा गया. इस परिवार की आय का स्रोत कपास की खेती था. उनके पिता तस्कम्बिया नॉर्थ अलाबामियन नाम के एक साप्ताहिक अखबार के सम्पादक थे. अमेरिकन गृह युद्ध (सिविल वार) के दौरान Confederate Army of Viksburg में बतौर ऑफिसर भी वे काम कर चुके थे. अपने समुदाय में कैप्टन आर्थर केलर बड़े ही प्रभावशाली थे और सक्रिय सामाजिक जीवन में उनकी गहरी रुचि थी. क्लीवलैंड के प्रशासन में 1885 में उन्हें उत्तरी अलाबामा का मार्शल नियुक्त किया गया था. उन्हें अपने कुत्तों और बंदूकों से बेहद प्यार था. हेलेन की मां केट उनकी दूसरी पत्नी थीं जो उम्र में उनसे बीस साल छोटी थीं. उनकी दो बेटियां थीं- हेलेन और माइल्डरेड. हेलेन उनकी बड़ी बेटी थी. हेलेन का एक छोटा भाई फिलिप भी था और इसके अलावा जेम्स और सिम्पसन केलर नाम के दो सौतेले भाई भी थे.

जन्म से हेलेन केलर एक स्वस्थ और सामान्य बच्ची थी. उनके सभी शारीरिक अंग तथा इन्द्रियां ठीक-ठीक काम कर रहे थे. छः महीने की उम्र से उन्होंने बोलना शुरू कर दिया था- “how d’ye”. एक दिन “tea, tea, tea” भी कहा. एक साल की उम्र में वो चलने लगी थीं. उस समय में उन्होंने एक और शब्द सीखा था “water” (पानी). लेकिन दुर्भाग्य से फरवरी 1882 में पौने दो साल की नाजुक उम्र में उन्हें एक गंभीर बीमारी हुई. उनका शरीर तेज बुखार से तपने लगा. उनका पेट और दिमाग बुरी तरह प्रभावित हुआ. पारिवारिक डॉक्टर ने इसे ‘ब्रेन फीवर’ (दिमागी बुखार) बताया. अब यह भी अंदाजा लगाया जाता है कि यह ‘स्कारलेट फीवर’ या ‘मैनिंजाइटिस’ रहा होगा.

बुखार होने के कुछ ही दिनों के भीतर हेलेन की मां ने गौर किया कि उनकी बेटी डिनर की घंटी के बजने या उसके चहरे के आगे हाथ हिलाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही है. बीमारी ने उसे अंधा और बहरा बना छोड़ा था!

बाद में एक बार हेलेन ने कहा था, “जिंदगी के पहले 19 महीनों में मैंने जिन विस्तृत हरे-भरे खेतों, चमकदार आकाश, पेड़-पौधों, और फूलों की झलक देखी थी; उसपर मेरा अंधापन पूरी तरह कभी भी अंधियारे की कूची नहीं फेर सका. यदि हमने एक बार दिन को देखा है तो फिर चाहे जैसे भी दिन आएं, दिन तो हमारा ही है.”

हेलेन की मां ने बहुत नजाकत से उनकी देख-भाल की तथा बेआवाज और अंधियारे की जिस दुनिया में उनकी नाजुक-सी बच्ची अचानक खींच ली गई थी, उसके बेहिसाब कष्टों पर मरहम लगाने की भी हरसंभव कोशिश करतीं. हेलेन के पिता भी अपने परिवार को बहुत प्यार करने वाले इन्सान थे. बोलने की शक्ति खत्म हो जाने पर भी हेलेन ‘वाटर’ के लिए ‘वाह-वाह’ की आवाज निकाला करती थी. मां ही हेलेन के लिए सबसे मजबूत आधार थीं. उनकी बुद्धिमानी और प्यार ही हेलेन की जिंदगी का उजाला था. मां के आस-पास बने रहने के लिए हेलेन हमेशा उनका स्कर्ट पकड़ी रहतीं. वे दूसरे के हाथों को महसूस कर समझाने की कोशिश किया करतीं की वे क्या कर रहे हैं. जल्दी ही कुछ संकेतों के माध्यम से वे कुछ संवाद करना सीख गईं. मां हेलेन को कई बातें सिखा सकने में कामयाब रहीं, जैसे सिर ऊपर-नीचे हिलाना यानी ‘हां’, सिर अगल-बगल हिलाना यानी ‘ना’, अपनी ओर खींचना यानी पास बुलाना, धक्का देना यानी जाने को कहना.

अंधी, बहरी और गूंगी होने के बावजूद बचपन के मस्तमौला दिनों की मस्ती से हेलेन वंचित नहीं थीं. पारिवारिक रसोइए की बेटी मार्था वाशिंगटन और बेल्ले नाम का पालतू कुत्ता हेलेन के बचपन के साथी थे. हेलेन और मार्था ने आपस में बातचीत करने के लिए 60 से ज्यादा संकेतों को तय कर लिया था. यदि उन्हें ब्रेड की जरूरत होती तो वे पावरोटी काटने का-सा इशारा करतीं. आइसक्रीम मांगने के लिए वे अपने कंधों को पकड़कर कांपने का स्वांग करतीं. मार्था के साथ वे किचन में गूंथे आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाने, कॉफी ग्राइंड करने, आइसक्रीम बनाने आदि में मदद करतीं. वे दोनों गिनी-फाउल (गिनी कुक्कुट) नाम के एक प्रकार की मुर्गी के अंडों की खोज में लम्बी-ऊंची घासों में भटकती फिरतीं. उनकी दूसरी मनपसंद जगहें थीं गौशाला और अस्तबल. अंधी और बहरी होने के बावजूद पांच साल की हेलेन कई छोटे-छोटे काम करना सीख गई थी, जैसे मां द्वारा मांगी गई वस्तुएं लाकर देना, कपड़ों में तह लगाना आदि. इतना ही नहीं, वे अपने कपड़ों को दूसरों के कपड़ों से बखूबी छांट सकती थीं. बगीचे में खिले व्वायलेट (बनफ्सा) और लिली (कुमुदिनी) के फूलों को वे सबसे पहले खोज लेतीं. घास और ठंडी पत्तियों के बीच उन्हें बड़े ही आनंद का एहसास होता.

इसी बीच हेलेन की बहन माइल्डरेड पैदा हुई. मां का प्यार और ध्यान बंटने के चलते शुरू में हेलेन को बहन से बहुत ईर्ष्या हुई. बहन उन्हें एक अवांछित घुसपैठिए की तरह लगी. वैसे भी उनकी अंधेरी दुनिया में जज्बातों और बातों की कोई जगह नहीं थी. हालांकि समय के साथ बहन से उनकी नजदीकियां बढ़ गई. हेलेन दूसरे बच्चों की ही तरह काफी नटखट भी थीं. बाद में ताला बंद करना सीख लेने पर एक दिन उन्होंने अपनी मां को भंडार-घर में तीन घंटों तक के लिए बंद कर दिया था. उनके माता-पिता यह अच्छी तरह समझ चुके थे कि हेलेन को जल्द-से-जल्द शिक्षा दिलवाने की जरूरत थी.

जल्दी ही हेलेन भी यह समझने लगी थीं कि वे दूसरों से अलग थीं. उनका ध्यान इस बात पर गया कि दूसरे मुंह से बोलते हैं उनकी तरह संकेतों से नहीं. उन्होंने अपने होंठ हिलाए लेकिन कोई आवाज नहीं फूटी. वे जैसे-जैसे बड़ी हो रही थीं बददिमाग, असभ्य और अनियंत्रित होती जा रही थीं तथा अपने आस-पास की दुनिया को कुछ-कुछ समझने भी लगीं थीं. वे अपनी भावनाएं ठीक तरीके से व्यक्त नहीं कर पाती थीं इसलिए इसकी क्षति-पूर्ति हाथ की पहुंच में आई किसी भी चीज को ठोकर मारकर, फेंककर या चिल्लाकर कर करती थीं. हकलाहट की वजह से हेलेन की बढ़ती अकुलाहट और बेचैनी माता-पिता और सहेली मार्था के लिए यातनादायक होने लगा था. उनके गुस्से का प्रचंड आवेग और अनियंत्रित खिलखिलाहट नियंत्रण से बाहर हो रहा था. हिंसक उत्तेजना के रूप में प्रदर्शित हो रही उनकी बेबस बेचैनी को सही दिशा मिलना बेहद जरूरी हो गया था. उनके माता-पिता उनकी आतंरिक व्यथा ठीक-ठीक समझते थे इसलिए वे कभी भी अपनी बेटी को कोई सजा नहीं देते थे. अपनी बात कह पाना हेलेन की सबसे बड़ी जरूरत थी. माता-पिता को इस बात का एहसास हो चुका था कि हेलेन को बाहरी मदद की सख्त जरूरत थी.

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1886 में जब हेलेन छः साल की थीं, हेलेन की मां को चार्ल्स डिकेंस का एक यात्रा-वृतांत पढ़ने का मौका मिला जो उनके लिए प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण स्रोत साबित हुआ. इस यात्रा-वृत्त में लौरा ब्रिग्मैन नाम की एक अंधी और बहरी बच्ची की सफल शिक्षा की कहानी थी. जल्दी ही माता-पिता हेलेन को लेकर मेरीलैंड के बाल्टीमोर में रहने वाले विशेषज्ञ डॉ. जे. जूलियन चिसोम (Dr.J.Julian Chisolm) के पास गए ताकि हेलेन का दृष्टिदोष दूर कर सकने की दिशा में वे कुछ मदद कर सकें. डॉ. चिसोम (Dr. Chisolm) ने खुद तो कुछ नहीं किया लेकिन बड़ी विनम्रता से अंधे-बहरे बच्चों के स्कूल और शिक्षकों के बारे में जानकारी लेने के लिए उन्हें डॉ. अलेक्जेंडर ग्रैहम बेल (Dr. Alexander Graham Bell) के पास जाने का सुझाव दिया. और फिर टेलीफोन के विश्वप्रसिद्ध आविष्कारक डॉ. बेल से उनकी मुलाकात तय हुई. डॉ. बेल तब बहरे बच्चों के लिए कुछ महत्वपूर्ण कार्य कर रहे थे. हेलेन के साथ डॉ. बेल बहुत प्रेम और कोमलता से पेश आए. वे हेलेन के संकेतों को बड़ी आसानी से समझ गए और यह मुलाकात हेलेन के लिए प्यार, दोस्ती, ज्ञान और उजाले की दुनिया का प्रवेश-द्वार साबित हुई.

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बेल की सलाह पर हेलेन और उनके माता-पिता मेसाचुसेट्स के बोस्टन में स्थित ‘Perkins Institute for the Blind’ के दौरे पर गए जहां वे Dr. Samuel Gridley Howe द्वारा अंधों के लिए किए गए महत्वपूर्ण कार्यों का अवलोकन किया. इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर माइकेल अनागानोस ने लगभग असभ्य, अंधी और बहरी हेलेन के शिक्षण के लिए उस इंस्टिट्यूट की ताजातरीन ग्रेजुएट सुश्री एनी मैन्सफील्ड सुलिवन को नियुक्त करने का सुझाव दिया.

एनी मैन्सफील्ड सुलिवन 14 अप्रैल, 1866 को मेसाचुसेट्स के अगवाम में जन्मी थीं. गरीब परिवार से होने की वजह से उन्हें 10 साल की उम्र में गरीबों के लिए बने आवास में रहने के लिए भेज दिया गया था. ट्राकोमा होने की वजह से एनी सुलिवन खुद भी कमजोर दृष्टि का शिकार थीं. हालांकि ऑपरेशन के बाद उन्हें जरूरत भर रोशनी हासिल हो चुकी थी. बाद में 14 साल की उम्र में उन्हें अंधे बच्चों को पढ़ाने का प्रशिक्षण लेने के लिए (अंधों के लिए बने) पर्किन्स स्कूल में भेजा गया. सुश्री सुलिवन बहुत उत्साही और प्रेरक शिक्षिका थीं. वे स्वयं विपरीत परिस्थितियों को भोग चुकी थीं इसलिए हेलेन की स्थिति बेहतर समझती थीं. वे अच्छी तरह जानती थीं कि यदि हेलेन को स्कूल से निकाल दिया गया तो उसकी आगे की जिंदगी दुश्वार हो जाएगी. वे क्रमबद्ध ढंग से हेलेन को तराशने की कोशिश में दृढ़तापूर्वक जुट गईं.

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और इस तरह शुरू हुआ एक अद्भुत गुरु एनी सुलिवन और उनकी शिष्या हेलेन केलर के बीच एक विलक्षण और लम्बे समय तक चलने वाला संबंध. गुरुजन कच्ची मिट्टी के समान शिष्य को एक उत्कृष्ट स्वरूप में गढ़ने के लिए प्रेम, अथाह धीरज और बुद्धिमानी जैसे औजारों की मदद लिया करते हैं और एनी ने भी ऐसा ही किया. शायद एनी का बेहद संवेदनशील होने और दूसरों का काफी ख्याल रखने के स्वभाव के कारण ही यह रिश्ता लगभग 49 सालों तक कायम रहा. जिस प्रेम, धीरज और लगन का परिचय देते हुए एक गुरु ने अपनी शिष्या को संभाला और उनकी उदास-निराश जिंदगी को प्रकाश से निहाल कर दिया इसके लिए संसार भर में एनी सुलिवन की कीर्ति ‘द मिराकल वर्कर’ (चमत्कारी कार्यकर्त्ता) के रूप में याद की जाती हैं.

3 मार्च 1887 से अलाबामा वाले घर में एनी सुलिवन ने हेलेन को प्रशिक्षित करना शुरू किया. यह दिन हेलेन केलर की जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन था. तब वे सिर्फ सात साल की थीं. यह कुछ इस तरह था जैसे हेलेन ने अपने हाथ बढ़ाए और उनकी शिक्षिका ने उन्हें अपनी बांहों में समेट लिया.

हर तूफान के बाद शांति आती है. हेलेन तब नहीं जानती थीं कि यह शिक्षिका उनके जीवन की धुरी बन जाने वाली थी तथा ज्ञान के उजालों की ओर उनका मार्गदर्शन करने वाली थी जिसके उन्होंने संभवतः सिर्फ ख्वाब ही संजोए होंगे. एनी उपहार के तौर पर हेलेन के लिए इंस्टिट्यूट के बच्चों द्वारा बनाई एक गुड़िया लाई थीं. उपहार को समझने में मदद करने हेतु उन्होंने हेलेन के हाथ पर हस्तचालित संकेत भाषा (Manual Sign Language) का प्रयोग करते हुए ‘डॉल’ लिखा और इसका उच्चारण भी किया. इसी तरह उन्होंने हेलेन को कई शब्द सिखाए. हेलेन कभी जिज्ञासु होतीं तो कभी अवज्ञा और विद्रोह कर बैठतीं. तब एनी सुलिवन को लगा कि वस्तुओं और हाथ पर लिखे जा रहे संकेताक्षरों में हेलेन ताल-मेल नहीं बिठा पा रही थीं. गुरु और शिष्या दोनों ही लगातार परिमार्जन की प्रक्रिया से गुजर रही थीं. परेशान होकर हेलेन ने गुड़िया को फर्श पर पटक दिया और यह सोचकर बहुत खुश हुई कि उनके लिए परेशानी के सबब का आखिरकार खात्मा हो गया. हेलेन के नखरे बढ़ते ही जा रहे थे लेकिन उनकी शिक्षिका ने उन्हें बिल्कुल सामान्य बच्चे की तरह बरतते हुए उनकी हर बद्तमीजी के लिए सजा दी.

कभी-कभी हेलेन आपस में बात-चीत करते दो व्यक्तियों के बीच खड़ी होकर उनके होंठों को छुआ करतीं.

शुरू में तो वे बेहद परेशान होतीं और बिना समझे-बूझे अजीबोगरीब जंगली किस्म की भाव-भंगिमाएं बनाया करतीं. गुस्से का दौरा, चीखना-चिल्लाना, चीजों की उठा-पटक, फेंकना, लात मारना आदि हेलेन के लिए आम बात होने लगी थी. धीरे-धीरे शिक्षिका ने हेलेन के जंगली प्रलापों को नियंत्रित किया. वस्तुओं के नाम सिखाने के लिए एनी ने हेलेन के हाथ पर अंगुलियों की ठकठकाहट (टैपिंग) जारी रखी. हेलेन इसे एक खेल समझती थीं और अंगुलियों द्वारा हिज्जे करने का तरीका सीख रही थीं. हालांकि वे ठकठकाहट से उच्चारित अक्षर और वस्तुओं के नाम को आपस में जोड़ कर समझ पाने में अभी भी असमर्थ थीं. यह कड़ी अभी भी कहीं गुम थी. इसके पीछे शायद अपने परिवेश में उपलब्ध वस्तुओं से पहचान बनने से पहले ही उनका अंधा-बहरा हो जाना कारण रहा हो.

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एनी सुलिवन ने हेलेन के परिवार के सामने कुछ दिनों के लिए हेलेन को उनके साथ एकांत में रहने देने का प्रस्ताव रखा ताकि हेलेन सिर्फ उनके द्वारा दिए गए निर्देशों पर ही एकाग्र रह सकें. वे दोनों बगीचे में बने एक छोटे-से घर में रहने चली गईं जहां कोई और दखलन्दाजी नहीं कर सकता था. वसंत का खुशनुमा मौसम था. 5 अप्रैल, 1887 का सुन्दर उज्जवल दिन ! लेकिन विस्तृत आकाश की नीली पृष्ठभूमि पर तैरते सफेद बादल और चारों तरफ खिले मुस्कुराते फूल हेलेन के अनदेखे ही रह गए थे. पेड़ों के पीछे से पंछियों का गाना-चहचहाना हेलेन द्वारा अनसुना ही रह गया था. अपने चारों और फैले प्रकृति के वैभव से अनजान हेलेन एक साधारण चापाकल तक उसके पाइप को छूती हुई पहुंची. ट्यूटर एनी सुलिवन लगातार पंप करती हुई हेलेन के एक हाथ पर ठंडे पानी की धार गिराती हुई दूसरे हाथ पर पांच अक्षर W-A-T-E-R ठक-ठक करती लिखती जा रही थीं. पहले धीरे-धीरे, फिर तेजी से. बार-बार, बारम्बार. अंधी और बहरी हेलेन का ध्यान पानी की ठंडी धार और हाथ पर बार-बार ठकठकाए जाते अक्षरों पर टिक गया. उनकी मूक-बधिर दुनिया और चेतना पर छाए अंधियारे पर अनवरत आघात हो रहा था.

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यह उनकी आत्मा के नवजागरण जैसा था. यूं जैसे आशा के उन्मुक्त आकाश में प्रकाश के परों से एक आनंदमग्न यात्रा का शुभारम्भ ! ‘वाटर’ उनके मूक-बधिर और अंधी होने से पहले सीखे गए कुछेक शब्दों में से एक था. भाषा का रहस्य उजागर हो जाना हेलेन के लिए काफी रोमांचक था. ‘वाटर’ शब्द उनके लिए दुनिया के बंद दरवाजे की चाभी बन गया था. तुरंत उन्होंने धरती छूकर उसके लिए शब्द बताए जाने की मांग की और रात होने तक वे तीस शब्द सीख चुकी थीं. माता, पिता, बहन, शिक्षक जैसे शब्द … खिले हुए महमहाते फूलों से भरी जादुई डाल जैसे शब्द जिन्होंने हेलेन की जिंदगी सुगंध से भर दिए. पहली बार हेलेन ने बेइंतिहां बेसब्री से अगला दिन होने का इंतजार किया था. उनका स्वभाव बिल्कुल बदल गया. उन्होंने जीवन के प्रति एक नया नजरिया पा लिया था और तब उन्हें बड़े अफसोस के साथ पटक कर तोड़ दी गई गुड़िया की याद आई.

“ज्ञान प्रेम है, प्रकाश है और दृष्टि है.”

हर वस्तु का एक नाम था और हर नाम एक नए विचार का जन्मदाता था. एक नए सवेरे ने उनकी आत्मा जागृत कर दी थी. भाषा को सीखने में उन्होंने असाधारण क्षमता का परिचय दिया और छः महीनों के भीतर वे लगभग 625 शब्दों से भली-भांति परिचित हो गईं.

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ज्ञान रूपी बीज अब अंकुरित होने लगा था. परिवार वालों के सहयोग और शिक्षक के प्रशिक्षण से धीरे-धीरे हेलेन को अपनी जिंदगी अर्थवान और खुशगवार लगने लगी थी. बाद में उन्होंने कहा था, “अंधी-बहरी होते हुए यदि मुझे यह जिंदगी इस कदर दिलचस्प लगती है तो पांचों ज्ञानेन्द्रियों के होते हुए आप सभी कितना अधिक आनंद उठा सकते हैं.” उन्हें इसका भी एहसास हो गया कि यदि वे निश्चय कर लें तो कुछ भी हासिल कर सकती हैं. उनका ऐसा उद्गार तब था जब वे केवल स्पर्श और गंध के सहारे अपने ज्ञानचक्षुओं द्वारा हर चीज की पुनर्परिकल्पना किया करती थी.

जैसा कि हम सभी जानते हैं, प्रकृति से श्रेष्ठ कोई और गुरु नहीं होता. तस्कम्बिया में हेलेन का घर पहाड़ों के निर्मल एकांत और सौन्दर्यपूर्ण प्राकृतिक परिवेश के बीच बसा था. खेतों और नदी के किनारों पर भ्रमण करते-करवाते हुए सुश्री सुलिवन ने हेलेन को प्रकृति की भव्य रमणीयता, प्रचुर वैभव और सौन्दर्य का बोध कराया. हरी दूब की मखमली-कोमल गोद में बैठकर हेलेन ने समझा कि किस तरह सूर्य से प्रकाश और वर्षा से जल पाकर सभी खूबसूरत पेड़-पौधे धरती को धानी चूनर ओढ़ा देते हैं. उन्होंने समझा कि किस तरह पशु अपना भोजन और आवास तलाशते हैं तथा पंछी किस तरह अपने घोंसले बनाते हैं. एनी के माध्यम से हेलेन इस संसार में अपने होने का अर्थ और आनंद जान पाईं. एनी ने हेलेन को फूलों को स्पर्श करना और सूंघना सिखाया और उन्होंने यह भी सिखाया कि चहरे को स्नेह से दुलारते हवा के झोकों की आत्मीयता कैसे महसूस की जाती है और प्रकृति के वैभव का आनंद किस तरह उठाया जाता है. लेकिन जल्दी ही हेलेन को एक कटु अनुभव भी हुआ जब वे एक पेड़ पर बैठीं थी और अचानक बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की कड़कड़ाहट के साथ प्रचंड तूफान आ गया. प्रकृति के रौद्र रूप की झलक पाने का उनका यह पहला अनुभव था. ऐन वक्त पर शिक्षिका ने उन्हें बचा तो लिया लेकिन उस दिन वे जान पाईं कि “प्रकृति अपने ही बच्चों के विरुद्ध युद्ध भी ठान देती है और यह अपने मृदुतम स्पर्श की ओट में छलावे का खतरनाक पंजा भी धारण किए होती है.” इस घटना ने कुछ समय के लिए उनका उत्साह छीन लिया लेकिन जल्दी ही पीले फूलों वाले मिमोसा के पेड़ ने उनका मन मोह लिया और उनका डर जाता रहा.

सुश्री सुलिवन एक बेहतरीन शिक्षिका थीं जिन्होंने हेलेन के लिए पढ़ाई-लिखाई को एक खेल बना दिया था. अंधे व्यक्तियों के साथ उनका संपर्क काफी पहले से था इसलिए वे उन्हें वस्तुओं के बारे में बहुत अच्छी तरह समझा पाने में कुशल थीं. खेल-खेल में परिवेश से सीधा साक्षात्कार करते हुए हेलेन की चीजों से जान-पहचान पहले छूकर और महसूस कर हुई. मेंढक और झींगुर को हाथ पर रखकर या फूलों को हौले से छूकर उन्होंने उनके बारे में जाना. हेलेन ने गंध और स्पर्श की शक्ति को बहुत परिमार्जित किया. उन्हें बगीचे में जाना और अपने पिनाफोर (बच्चों के कपड़ों के ऊपर पहनाया जाने वाला कपड़ा) में फल इकठ्ठा कर लाना बहुत अच्छा लगता था. शिक्षिका एनी के साथ टेनेसी नदी के तीर पर छोटे-छोटे पत्थरों से पुल बनाकर, द्वीप और झील बनाकर, मिट्टी खोदकर नदी के तल का निर्माण कर या मिट्टी में मानचित्र निर्मित कर हेलेन ने भूगोल सीखा. इसी तरह उन्होंने वनस्पतिविज्ञान और प्राणिविज्ञान भी सीखा. हालांकि उन्हें अंकों का विज्ञान यानी अंकगणित पसंद नहीं आया. एनी सुलिवन उत्कृष्ट प्रतिभासंपन्न शिक्षिका थीं. उन्होंने हेलेन को रोजमर्रा की जिंदगी से ही सबकुछ सिखाया. उन्होंने हेलेन को ऐसे विकसित किया कि वे अपनी जिंदगी और अर्थवान, प्रेमपूर्ण और उपयोगी बनाने की ओर प्रेरित हों. अंधी-बहरी होने के कारण हेलेन शब्दों को बड़ी मुश्किल से बहुत धीरे-धीरे सीख पाईं. लेकिन परिणाम बेशक चौंकाने वाला था. वे बेहद जिज्ञासु बच्ची थीं और नए-नए शब्द सीखते हुए जैसे-जैसे उनका ज्ञान बढ़ता जा रहा था वैसे-वैसे और अधिक जानने की उनकी भूख बढ़ती जा रही थी.

हेलेन की शिक्षा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव था लिखे हुए को पढ़ने की कला सीखना. एनी शुरू में हेलेन को कार्डबोर्ड पर उभरे हुए अक्षरों में छपी पर्चियां दिया करती थीं. हेलेन के पास एक फ्रेम (चौखटा) था जिसमें उन्हें शब्दों को व्यवस्थित कर वाक्य बनाना होता था. यह हर दिन के कार्य अथवा खेल के हिस्से के रूप में किया जाता था. छपी हुईं पर्चियों के बाद उभरे अक्षरों में छपी किताबों की बारी आई. और फिर बारी आई बच्चों के लिए कहानियों की एक किताब ‘Reader for Beginners’ और पृथ्वी के बारे में एक किताब ‘Our World’ की. बड़े ही धीरज से एनी ने हेलेन को हस्तमुद्राओं द्वारा अक्षर निर्माण कर अपनी बात कहना सिखाया. हेलेन अब सरल वाक्य बनाना भी सीख चुकी थी. अधिकांश बातें कहने के लिए हेलेन अंगुलियों से हिज्जे किया करती थीं लेकिन वे अक्षरों के आकार को पहचानना सीख रही थीं. ब्लॉक अक्षरों का उपयोग कर प्रिंट करना और लिखने के लिए वे ग्रूव राइटिंग बोर्ड का इस्तेमाल करती थीं. वे ब्रेल अक्षर भी सीख रही थीं.

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[शब्दार्थ: उन्होंने मेरी आंखें छीन लीं लेकिन मुझे 'मिल्टन की जन्नत' याद रही; उन्होंने मेरे कान छीन लिए तो आंसू पोछने संगीतज्ञ बीथोवन मेरे पास आ गए; उन्होंने मेरी जबान छीन लीं लेकिन मैं ईश्वर से बतियाती रही थी जब छोटी थी; लेकिन वे मेरी आत्मा ले जा सके ऐसा, उन्होंने (ईश्वर ने) होने नहीं दिया जिसकी बदौलत आज यह सम्पूर्ण संसार मेरा है.]

‘Little Lord Fauntleroy’ वह पहली किताब थी जिसे हेलेन ने आठ साल की उम्र में खुद पढ़कर समझा था. उन्हें यह कहानी बहुत पसंद आई और कहानी का नायक उनके बचपन का (काल्पनिक) साथी बन गया. शब्दों की दुनिया और ज्ञान से हेलेन चमत्कृत हो उठीं और वे उभरे हुए अक्षरों में लिखे हर पन्ने को पढ़ जाने की कोशिश करने लगीं. ‘लिटिल वुमेन’, ‘हेइडी’, ‘द जंगल बुक’ और ‘वाइल्ड एनिमल्स आई हैव नोन’ उन्हें खासतौर से पसंद आई.

इनडोर खेलों में वह चेकर्स और मित्र की सहायता से शतरंज अक्सर खेला करती थीं. उन्हें आउटडोर खेल भी बहुत अच्छे लगते थे. सवारी करना, साइकिल चलाना, चप्पू चलाना और तैराकी उन्हें खास तौर पर पसंद था. लेकिन किताबें उन्हें सबसे प्रिय थीं. किताबों से ही उन्हें अपने अंतर्जगत से बाहर की दुनिया की सभी खबरों और कारनामों का पता चलता था. हेलेन कहा करती थीं, “कागजी पंखों से उड़ना कितना आसान है.”

मई 1888 में मां और शिक्षिका के साथ बोस्टन स्थित अंधों के लिए स्थापित संस्था ‘Perkins Institute for the Blind’ का दौरा करना हेलेन की जिंदगी की अगली महत्वपूर्ण घटना थी. वहां उन्होंने खुद जैसे ही अंधे बच्चों से दोस्ती की. उन्हें यह जानकर आश्चर्य भी हुआ और दुःख भी कि वे छोटे-छोटे प्यारे और उत्साहित बच्चे जिन्होंने बातें करते वक्त उनके हाथ पर अपना हाथ रखकर मैत्री का अहसास पाया था, उनकी अंगुलियां थामकर किताब पढ़ी थी, वे भी अंधे थे. 1889 की शुरुआत में एनी के साथ हेलेन भी बोस्टन के ‘Perkins Institute for the Blind’ में रहने आ गईं. यहां उनकी औपचारिक शिक्षा प्रारंभ हुई. यह संस्थान संसाधनों से भरपूर था और यहां आकर हेलेन की क्षमता में काफी विकास हुआ. वे मन लगाकर पढ़ने लगीं. वे लैटिन, फ्रेंच, ग्रीक और जर्मन भी सीख गईं और उन्हें ‘चमत्कारी बच्चा’ (मिराकल चाइल्ड) कहा जाने लगा. बहुत जल्द ही उन्होंने हाथ से और ब्रेल बिन्दुओं से भी लिखे गए वर्णों पर अधिकार जमा लिया.

प्राचीन शहर ग्रीस और ग्रीक भाषा ने हेलेन का मन मोह लिया था. हेलेन के अनुसार, “यदि यह सच है कि वायलिन सबसे श्रेष्ठ वाद्य-यन्त्र है तो ग्रीक (भाषा) मानव विचार का वायलिन है.” शेक्सपियर उनके पसंदीदा लेखक थे और उनके ‘मैकबेथ’ से वे बहुत प्रभावित थीं. जैसे-जैसे हेलेन के उपलब्धियों की ख्याति फैलने लगी, वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शख्सियत बनने लगीं. वे उन तमाम लेखों का विषय बनीं जो ऐसे बच्चों द्वारा झेली जाने वाली परेशानियों और इनके लिए एक अच्छी जिंदगी गुजारने के लिए जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने की जरूरत पर आधारित थे. उन्हें दुनिया भर के प्रशंसकों और शुभचिंतकों की ओर से किताबों, खिलौनों, पालतू पशुओं और कई दूसरी चीजें बतौर उपहार मिलें और इस तरह अबतक वे एक नन्हीं सेलिब्रिटी बन चुकी थीं. सभी प्रशंसकों ने उनसे स्नेह दर्शाते हुए उनके सुख और स्वास्थ्य की मंगलकामनाएं की थी. हेलेन ने अपनी अर्जित प्रतिष्ठा का उपयोग आम-जन को अंधों के प्रति जागरुक और शिक्षित करने तथा अंधों के परोपकार के लिए चंदा उगाहने में किया. नौ साल की उम्र में हेलेन John Greeleaf Whittier, OLiver Wendell Holmes, Carlyle, Wordsworth, Hood, Herrick, Lowell और Mark Twen जैसी नामचीन हस्तियों से लगातार संवाद और विचार-विनिमय करने लगी थीं.

10 साल की हेलेन ने एक पत्र में अपने एक दोस्त आदरणीय फिलिप्स ब्रुक्स से जानना चाहा था कि ‘ईश्वर’ क्या है. ब्रुक्स ने प्रत्युत्तर दिया था, “हमारे हृदय में बसे प्यार की शक्ति के माध्यम से हम अपने स्वार्गिक पिता (प्रभु) को जान पाते हैं. इस चराचर जगत में मौजूद हर चीज की आत्मा में प्यार का वास है. सदा प्रसन्न रहने वाला महान ईश्वर ही सबसे अधिक प्यारा भी है. जैसे कि फूलों में बसा प्रकाश सूरज के प्रकाश का अंश है, हमारे हृदय में बसा प्रेम ईश्वर के हृदय के प्रेम का ही एक अंश है. हम जितना ज्यादा प्यार करते हैं, ईश्वर और उसके प्यार के उतना ही नजदीक होते जाते हैं.” पत्र में आगे वे समझाते हैं कि बाइबिल के अनुसार ‘ईश्वर क्या है’ प्रश्न का सबसे सुन्दर उत्तर है- “प्यार ही ईश्वर है.” (God is love.)

10 साल की उम्र तक हेलेन टाइपराइटर का उपयोग करना भी सीख चुकी थीं. वे अपनी शिक्षिका एनी सुलिवन से भी बेहतरीन टाइपिस्ट थीं.

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हेलेन एक ऐसी प्रेरक हस्ती बन चुकी थीं कि उनके नाम पर जहाजों के नाम रखे जाने लगे. उसी छोटी उम्र में वे राष्ट्रपति Grover Cleveland से भी मिलीं.

हेलेन ने चार साल के एक अंधे- बहरे बच्चे टॉमी स्ट्रिंगर, जिसकी मां गुजर चुकी थी और पिता बेहद गरीब थे, के लिए एक ट्यूटर की व्यवस्था करने हेतु चंदा इकठ्ठा करने में काफी मदद की. उन्होंने अपनी बचाई पाई-पाई तो लगाई ही, अपने सारे दोस्तों से भी अनुदान देने की प्रार्थना की. बाद में टॉमी का दाखिला पर्किंस संस्थान के किंडरगार्डन में किया गया. एक अच्छा ट्यूटर मिल जाने तक टॉमी स्ट्रिंगर हेलेन और एनी सुलिवन की देख-रेख में ही रहा था. टॉमी की पढ़ाई के चंदे के लिए हेलेन ने अखबारों में पत्र लिखे और चंदे में मिली राशि की सूचना भी प्रकाशित करवाई.

1890 में हेलेन ने बोल पाने की इच्छा का इजहार किया. एक दिन उन्होंने नॉर्वे की एक अंधी-बहरी लड़की, Ragnhild Kaata, के बारे में सुना जिसे लॉरा ब्रिडमैन की एक शिक्षिका, श्रीमती लैम्सन ने बोलना सिखाया था. फिर क्या था 26 मार्च 1890 से बहरों के लिए बोस्टन में स्थित होरास मान स्कूल में हेलेन की वाचन कला यानी बोलना सीखने की शिक्षा शुरू हुई. इस स्कूल में वाचन कला सिखाने के लिए उनकी पहली शिक्षिका बनीं सुश्री सारा फुलर (Miss Sarah Fuller). सुश्री फुलर ने बोलने के क्रम में हेलेन को मुंह के आकार, मुंह के भीतर की अनुभूति और जीभ की स्थिति पर ध्यान देना सिखाया. हेलेन अपनी आवाजों को खुद ही आकार देने लगीं. वे पहले अक्षरों का और फिर शब्दांशों का उच्चारण सीखीं. दूसरे उनका कहा समझ सकें, इसके लिए हेलेन ने कड़ी मेहनत की. जो पहला पूरा वाक्य उन्होंने बोला था, वह था: It is warm.’ उन्होंने अपनी अंगुलियों से छूकर होठों की गति पढ़ना भी सीखा. जल्दी ही हेलेन बातचीत करने का यह बिल्कुल नया तरीका आजमाने लगीं. 1891 में हेलेन के भाई, फिलिप्स ब्रुक्स केलर, का जन्म हुआ जो उनसे ग्यारह वर्ष छोटा था. अपने छोटे भाई का यह नाम भी हेलेन ने ही सुझाया था जो उनके प्यारे दोस्त आदरणीय फिलिप्स ब्रुक्स के नाम से प्रेरित था. हेलेन अबतक भाषा का माध्यम और इसमें निहित स्नेह व प्रेम की अनुभूति समझने लगी थीं. अब तो भाई-बहन से उनकी घनिष्टता भी बढ़ने लगी थी.

1892 में बोस्टन छोड़ने से पहले अपने साथियों के लिए हेलेन को अपना जीवन-चित्र लिखने को कहा गया. इसे लिखते हुए हेलेन को एहसास हुआ कि किताबों का साथ कितना अनमोल था और वे भाग्यशाली थीं कि किताबों से उन्हें बेहिसाब खुशियां मिलीं. हेलेन अपने जैसे अंधे और अंधे-बहरे बच्चों का बहुत ख्याल रखतीं और उनके लिए चंदा इकठ्ठा करने का प्रयास करतीं. मई 1892 में अंधों के किंडरगार्डन के लिए धनराशि जुटाने के लिए हेलेन ने Mr. John P Spaulding नाम के एक बड़े ही दयालु और उदार मित्र की बहन के घर पर एक टी-पार्टी का आयोजन किया था. इस आयोजन में 2000 डॉलर की राशि जमा हुई थी.

उदारमना व्यक्तियों द्वारा पुस्तकें, धन और जमीन के दान से 1893 के वसंत में ‘Helen Keller Publik Library’ की स्थापना हुई. 13 साल की उम्र में वे एनी सुलिवन के साथ न्यूयॉर्क चली गईं. यहां 1894 से 1896 तक उन्होंने बहरों के लिए बने राइट-हमसन स्कूल (Wright-Humason School) में शिक्षा पाई. सामान्य विषयों की पढ़ाई के साथ ही बातचीत करने के कौशल को बेहतर बनाने पर उन्होंने काफी ध्यान दिया. वाणी के कौशल को निखारने और होंठ-पढ़ने की कला के संदर्भ में यहां बेहतर संभावनाएं थीं. इसी दौरान हेलेन के पिता कैप्टन आर्थर हेनली केलर की अचानक मृत्यु हो गई. उस वक्त हेलेन महज 16 साल की थीं. हेलेन को यह दुखद सूचना 1896 के गर्मियों में मिली. हेलेन की जिंदगी में व्यक्तिगत दुःख का यह पहला आघात था. मृत्यु से पहला साबका. खैर, 16 वर्षीय हेलेन अब काफी अच्छी तरह बोल लेती थीं और कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए दृढ़-संकल्पित थीं. जब वे छोटी-सी थीं तब भी कहा करती थीं, “किसी दिन मैं भी कॉलेज जाऊंगी.” 1898 में उन्होंने मेसाचुसेट्स में स्थित लड़कियों के प्रारंभिक स्कूल ‘Cambridge School for Young Ladies’ में दाखिला लिया. यहां उन्हें खगोलशास्त्र, साहित्य, इतिहास, गणित और भौतिकी की शिक्षा मिली. यहां उन्हें नक्काशीदार लिपि में लिखी हुईं किताबों के साथ ही ब्रेल-राइटर जैसे यन्त्र भी मिले. कुछ समय के लिए उनकी छोटी बहन माइल्डरेड भी वहां पढ़ने के लिए आई थी. हेलेन और माइल्डरेड पढ़ाई में एक-दूसरे की मदद करतीं और साथ-साथ खेला करती थीं.

इस दौरान हेलेन की प्रतिभा और साहस के चर्चे दूर-दूर तक फैले और वे आमजन के बीच काफी लोकप्रिय होने लगीं. वे अनेक प्रसिद्ध और प्रभावशाली व्यक्तियों से मिलीं जो उनसे बेहद प्रभावित थे. हेलेन केलर प्रसिद्ध लेखक मार्क ट्वेन की दोस्त थीं.


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मार्क ट्वेन के माध्यम से उनका परिचय Henry H. Rogers से हुआ जो स्टैण्डर्ड ऑइल के एक प्रशासक थे. रेडक्लिफ में स्थित कॉलेज में हेलेन की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने के लिए रोजर्स सहमत हो गए. हेलेन की स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो सकने में उनकी मां और शिक्षिका एनी सुलिवन के अलावा श्रीमती हट्टन, श्री रोडेज, डॉ. ग्रियर और श्रीमान् रोजर्स का महत्वपूर्ण योगदान था. हार्वर्ड विश्वविद्यालय की महिलाओं के लिए बनाई गई शाखा, रेडक्लिफ कॉलेज में 1900 में हेलेन का दाखिला हुआ. ग्रेजुएशन के दौरान ही हेलेन ने अपनी आत्मकथा “द स्टोरी ऑफ माई लाइफ” (“The Story of my Life”) का पहला खंड लिखा. यह आत्मकथा लेडीज होम जर्नल में पहले धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुई और फिर 1902 में पुस्तक के रूप में. 24 साल की उम्र में 28 जून 1904 को उन्हें बैचलर ऑफ आर्ट्स डिग्री “कम लाउड” (विद ऑनर्स) यानी सम्मान के साथ स्नातक की उपाधि मिली. स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाली वे पहली अंधी-बहरी व्यक्ति बन गई थीं.

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स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई की पूरी अवधि में उनकी शिक्षिका एनी सुलिवन हमेशा उनके साथ रही थीं. कक्षाओं में भी वे हेलेन के साथ होतीं. वे शिक्षकों के व्याख्यानों को इंटरप्रेट कर हेलेन को समझातीं, बड़ी मेहनत से एक के बाद दूसरी किताबों को पढ़कर हेलेन को सुनातीं-समझातीं. सुलिवन की मदद से ही हेलेन की बातचीत करने की क्षमता में आश्चर्यजनक प्रगति हुई.

इस समय तक हेलेन ब्रेल लिपि, टाइपिंग करने, छूकर होंठ पढ़ने, बोलने और अंगुलियों से उच्चारण करने में प्रवीण हो चुकी थीं. एक बार उन्होंने कहा था, “साहित्य मेरा आदर्श-लोक है. यहां मैं एक निष्काशित नागरिक नहीं हूँ. किताबी दोस्तों से गरिमामय मधुर बातचीत करने में इन्द्रियानुभूति में कमी कभी मेरे लिए बाधक नहीं बनती. वे सभी मुझसे बिना किसी शर्मिंदगी या असमंजस के बेहिचक बतियाते हैं.”

उनके समान अन्य वंचितों की तरह हेलेन भी कभी-कभी खुद को बेहद अकेला महसूस करतीं. फिर भी कड़वे शब्द उनकी जुबान पर कभी नहीं आते. ये तो बस बिन ढ़लके आंसुओं के रूप में चुपचाप हृदय में उतरते जाते. दूसरों के लिए उनके दिल में बस आशा और खुशी की दुआ ही रहती थी- “खुद को भुला देने में आनंद-ही-आनंद है. इसलिए मेरे सूरज, तुम दूसरों की आंखों में प्रकाश भर देना; मेरी सिम्फनी, तुम दूसरों के कानों में संगीत के सुर घोलती रहना और मेरी खुशियां, तुम दूसरों के होंठों पर मुस्कराहट बनकर खिलना.”

औपचारिक शिक्षा खत्म होने के बाद भी एनी सुलिवन की मदद से हेलेन अखबारों और किताबों के जरिए अपना सूचना-संसार और ज्ञान बढ़ाती रहती थीं. इस वजह से उन्हें कई विश्वविद्यालयों की ओर से अनेक मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया. जैसे: हार्वर्ड विश्वविद्यालय; टेम्पल विश्वविद्यालय; ग्लासगो विश्वविद्यालय,स्कॉटलैंड; बर्लिन विश्वविद्यालय, जर्मनी; दिल्ली विश्वविद्यालय, भारत; जोहान्सबर्ग स्थित विटवाटर्सरैंड विश्वविद्यालय, दक्षिण अफ्रीका आदि. वे “Educational Institute of Scotland’ की ऑनररी फेलो भी मानित की गईं थीं.

1905 में एनी सुलिवन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक प्रशिक्षक, जाने-माने समाजवादी और प्रमुख आलोचक John Macy से शादी कर ली. शादी के बाद भी एनी हेलेन की मार्गदर्शिका और गुरु बनी रहीं. बाद में जब हेलेन उनके साथ रहने लगीं तब भी शुरू में मैसी दंपत्ति ने उनकी देखभाल में कोई कसर नहीं उठा रखी. वे दोनों ही उनकी पढ़ाई, और दूसरे कार्य-कलापों में पूरी मदद करते थे. हालांकि कुछ समय बाद एनी और जॉन के बीच दूरियां बढ़ने लगीं. कई सालों बाद बिना तलाक लिए एनी और जॉन अलग हो गए. तब भी एनी पूरी निष्ठा से अपनी शिष्या हेलेन के व्यक्तित्व विकास में लगी रहीं.

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“विज्ञान ने संभवतः सभी शत्रुओं पर विजय पा ली हो लेकिन सबसे खतरनाक शत्रु अब तक अविजित है – और वह है मनुष्य की उदासीनता.”

विकलांग जनों की बदहाली के प्रति आम लोगों की उदासीनता से हेलेन स्तंभित थीं. ऐसे लोगों के जीवन-स्तर में सुधार लाने की कामना के साथ उन्होंने अपाहिज व्यक्तियों की प्रतिनिधि के तौर पर कार्य करना प्रारंभ किया. उनके अनुसार, “हमें सच्ची खुशी तबतक नहीं मिल सकती जबतक हम दूसरों की जिंदगी को खुशगवार बनाने की कोशिश नहीं करते.” श्रोताओं के साथ अपने अनुभव साझा कर और व्याख्यान दे- देकर वे एक जानी-मानी हस्ती बन गईं. नवजात शिशुओं में अंधेपन की समस्या से बचाव करने के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए उन्होंने आमजन को शिक्षित करने की शुरुआत की. यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि वे उस जमाने में जी रही थीं जब उनके जैसे विकलांग व्यक्तियों को पागलखाने में रखा जाता था और ऐसे रिवाज को खत्म करने की कोशिश के क्षेत्र में हेलेन का योगदान अभूतपूर्व था. अंधे व्यक्तियों के हित के लिए उन्हें शिक्षित करने की हेलेन ने जोरदार वकालत की.

1909 में हेलेन ‘सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका’ की सदस्या बनीं. हेलेन के राजनैतिक विचार एनी और उनके पति जॉन मैसी के साथ विचार-विमर्श और एच. जी. वेल्स (H.G. Wells) की पुस्तक “न्यू वर्ल्डस फॉर ओल्ड” (“New Worlds for Old”) से प्रेरित थे. जॉन मैसी ने समाजवाद से हेलेन का परिचय तब करवाया था जब वे हेलेन की एक किताब पर उनके साथ काम कर रहे थे. हालांकि आदर्श के रूप में हेलेन के लिए समाजवाद का चयन हृदयानुभूत भी था और अनिवार्य भी क्योंकि यह उनके तई “मेरे अपने संघर्षों जैसा” ही था. 1909 से 1921 के बीच उन्होंने समाजवाद और दुनिया के सरोकारों पर “आउट ऑफ द डार्क” शीर्षक से बहुतेरे लेख लिखे. हेलेन ने महिला मताधिकार और जनसंख्या नियंत्रण के साथ ही कई सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों पर अपने विचार रखे.

तस्वीरों में हेलेन केलर का चेहरा अधिकतर एक बगल से दिखाया जाता था. इसकी वजह थी उनकी बाईं आंख का थोड़ा उभरा हुआ होना. 1910 में परिवारवालों के दबाव में चिकित्सीय और कॉस्मेटिक कारणों से शल्यक्रिया द्वारा उनकी आंखों की जगह कांच की प्रतिकृति लगाई गई थी. बीतते समय के साथ-साथ अल्प नागरिक सुविधा प्राप्त लोगों के हित के लिए स्थापित अन्य कई संस्थाओं की वे सदस्या बनीं. 1912 में उन्होंने ‘Permanent blind war relief fund’ की सदस्यता ग्रहण की जो आगे चलकर अंधेपन के कारणों और प्रभाव तथा कुपोषण के विरुद्ध लोहा लेने वाली मशहूर संस्था ‘American Braille Press’ के नाम से जानी गई. वे इस संस्था के पहले निदेशक मंडल की एक सदस्या थीं. 1912 में हेलेन एक समाजवादी मजदूर संघ ‘Industrial Workers of the world’ (IWW) की भी सदस्या बनीं जो अमेरिकन मजदूर संघ की नीतियों का विरोधी था. उन्होंने समाजवादी पत्रिका “The Masses” के लिए कई आलेख भी लिखे. उन्होंने सार्वजनिक रूप से ‘National Association for the Advancement of coloured People’ (NAACP) का समर्थन किया, रूस की क्रांति की प्रशंसा की और विश्व-युद्ध के दौरान अमेरिका के साम्राज्यवादी उद्देश्यों की निंदा की. मजदूर संघ, जनसंख्या नियंत्रण, बाल-श्रम की रोकथाम और मृत्युदंड खत्म होने जैसे कई अभियानों में वे सक्रिय रहीं. समाजवादी विचारों के प्रदर्शन के बाद हेलेन को पहली बार अपनी विकलांगता की वजह से अपमान सहने की पीड़ा का अनुभव करना पड़ा. हेलेन समाज में व्याप्त अन्याय को समझीं और वे औद्योगिकीकरण तथा पूंजीवाद को गरीबी और विकलांगता संबंधित बीमारियों के लिए मूल रूप से जिम्मेदार मानती थीं. इस दृष्टिकोण के कारण शुरू में जो प्रेस उनके उल्लेखनीय साहस और मेधा की प्रशंसा करते न थकता था, वही अब हेलेन की विकलांगता को लक्ष्य कर आलोचना कर रहा था. ब्रूकलिन ईगल नाम के एक अखबार के संपादक ने लिखा था कि उनकी “गलतियां उनके विकास में कमी का परिणाम हैं.” गुस्से से आग-बबूला होती हुई हेलेन ने ब्रूकलिन ईगल को एक शिकायती पत्र लिखा, “पहले उनकी शिकायतें क्या ही उदार हुआ करती थीं… लेकिन अब, जब मैं समाजवाद की पक्षधर हो गई हूँ तो वे मुझे और जनता को यह याद दिला रहे हैं कि मैं अंधी-बहरी हूँ इसलिए गलतियों के लिए विशेष रूप से जिम्मेदार हूँ… (यह समाज) सामाजिक तौर पर अंधा और बहरा है जो एक असह्य तंत्र की पैरवी कर रहा है… शारीरिक अंधे और बहरेपन के लिए भी यही जिम्मेदार है जिससे निबटने की कोशिशों में हम लगे हैं.”

हेलेन पर वामपंथ की पक्षधर उनकी शिक्षिका एनी सुलिवन और उनके पति जॉन मैसी की कठपुतली होने का शक भी किया गया. राजनैतिक विचारों की अभिव्यक्ति के कारण हेलेन पर कुछ समय के लिए एफबीआई ने नजर भी रखी थी. हेलेन के ही शब्दों में, “जबतक मेरे कार्य-कलाप समाज सेवा और अंधों के हित तक सीमित थे, उन्होंने मेरी भूरि-भूरि प्रशंसा की, ‘दृष्टिहीनों की प्रमुख पुजारिन’, ‘आश्चर्यजनक महिला’ और ‘आधुनिक चमत्कार’ जैसे विशेषणों से नवाजा लेकिन अब जब बात गरीबी पर विमर्श की है और मैं पक्के तौर पर मानती हूँ कि यह अर्थव्यवस्था की गलत नीतियों का परिणाम है, दुनिया भर में शारीरिक अंधेपन और बहरेपन की जड़ औद्योगिकीकरण का वह तंत्र है जिसके भीतर हम जी रहे हैं; तब बात बिल्कुल बदल गई!”

1915 में हेलेन और एनी बेहद व्यस्त थीं. हेलेन के पास दुनिया भर से उनकी किताबों के पाठकों की तरफ से लिखे गए पत्रों की बाढ़-सी आने लगी. वे हर पत्र का जवाब देना चाहती थीं ताकि दृष्टिहीनों की ज्यादा-से-ज्यादा मदद हो सके. इसी बीच शिक्षिका एनी सुलिवन का स्वास्थ्य भी गिरने लगा था. इसलिए वे एक सेक्रेटरी की तलाश कर रही थीं और इसी क्रम स्कॉटलैंड की एक युवा लड़की पॉली थॉमसन उनकी जिंदगी में शामिल हुई. पॉली बतौर सेक्रेटरी और में घर की देख-भाल करने की जिम्मेदारी संभालने के लिए नियुक्त हुई लेकिन बाद में वो हेलेन और एनी दोनों की साथी बन गई.

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1916 में जब एनी सुलिवन बीमार पड़ गईं और पॉली थॉमसन स्कॉटलैंड में छुट्टियां बिताने जा चुकी थी तब हेलेन केलर की मदद के लिए 29 वर्षीय समाजवादी और पत्रकार पीटर फागन को नौकरी पर रखा गया. 36 साल की हेलेन के जीवन का यह बेहद अवसाद-भरा दौर था. पीटर ने हेलेन के प्रति अपने प्यार का इजहार किया और उन्हें बताया कि वे बहुत सुन्दर हैं. इससे पहले कभी किसी ने उनसे ऐसा नहीं कहा था अतः वे भी पीटर से प्यार कर बैठीं. पीटर ने भी अंगुलियों से उच्चारण करने की कला सीखी. वो हेलेन की खुली हथेलियों पर अपनी अंगुलियों से उच्चारण कर अखबार और किताबों में छपे आलेख पढ़वाते. वे दोनों एक साथ टहलने जाते और एक-दूसरे के साथ का आनंद उठाते. बाद में हेलेन ने कहा था, “उसका प्यार एक चमकदार सूर्य की तरह था जिसकी रोशनी में मेरी असहायता और अकेलापन दमक गया था.” पीटर फागन ने तो शादी के लाइसेंस की अर्जी भी दे दी थी. लेकिन हेलेन अपनी मां से पीटर और शादी की योजना के बारे में कुछ बतातीं, इससे पहले ही एक अखबार में इस बाबत एक बेवकूफाना आलेख छप गया जिसमें शादी के लाइसेंस के आवेदन का भी जिक्र था. हेलेन की डरी-सहमी माता जी मामले की जानकारी लेने आ धमकीं. पीटर को तुरंत नौकरी से निकाल बाहर कर वापस भेज दिया गया. हेलेन को अल्बामा में छोटी बहन माइल्डरेड के घर पहुंचा दिया गया. उस दौर में हेलेन की स्थिति के किसी व्यक्ति का शादी करना या ऐसी लालसा रखना प्रचलित सामाजिक मान्यताओं के विरुद्ध था. ब्रेल लिपि में लिखे गए कुछ पत्रों के आदान-प्रदान के बावजूद इस प्रेम-प्रसंग का स्वाभाविक अंत हो गया. इन दोनों ने भागकर शादी कर लेने की भी योजना बनाई लेकिन ऐन वक्त पर पीटर ने पांव पीछे खींच लिए. हेलेन का दिल बुरी तरह टूट गया और उनपर उदासी का आलम तारी हो गया लेकिन इसमें शायद उनका भला ही होगा, यह सोचकर आखिरकार उन्होंने खुद को संभाल लिया. बाद में हेलेन ने इसके बारे में लिखा था, “वह अनजाना और अनपेक्षित प्रेम जो मुझ तक आया; आंधी के झोंके-सा उड़कर बिछुड़ गया.” उनके जीवन में यह प्यार काले जल से घिरे ‘आनंद के एक नन्हें द्वीप’ की तरह हमेशा उनके साथ रहा. 1916 में शिकागो डेली ट्रिब्यून में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “अगर कोई साथी मिल जाए तो हर स्त्री को शादी करना चाहिए. यह संसार में हमारी नस्ल और विकास-क्रम के लिए बेहद जरूरी है.”

1918 में हेलेन ने हॉलीवुड के लिए ‘डेलीवरेंस’ (शाब्दिक अर्थ ‘मुक्ति’) नाम की एक मूक फिल्म की. लेकिन हेलेन की चाहत थी कि उनकी जिंदगी को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाया जाना चाहिए. इसलिए हेलेन और एनी ने एक नाटिका (संक्षिप्त नाटक) तैयार करने का फैसला किया. इससे दोतरफा लाभ होने की संभावना थी- एक तो उन्हें आर्थिक मदद मिलती जिसकी उन्हें खासी जरूरत थी, दूसरे दुनिया को उनकी कहानी जानकर उन जैसे दूसरे व्यक्तियों की मदद करने की प्रेरणा मिलती. हालांकि नाटिका के प्रदर्शन का दौर उन्होंने 1922 में बंद कर दिया जब एनी बहुत ज्यादा थकने लगीं.

अपनी मां के साथ हेलेन की बहुत ज्यादा नजदीकी थी. हेलेन को यह जानकर बहुत खुशी हुई कि मां ने अपने लिए एक ब्रेल टाइपराइटर खरीदा था ताकि उन्हें पत्र लिख सकें. मार्च 1920 में हेलेन की मां कैथरीन केलर ने हेलेन को एक पत्र लिखकर अपना प्यार प्रकट करने के साथ ही यह वादा भी किया कि यदि वो मर गईं तो भी वे दूसरे जहां से उन्हें देखा करेंगी. और नवम्बर 1921 में अपनी शिक्षिका एनी सुलिवन मैसी के साथ हेलेन लॉस एंजिल्स में थीं जब उनकी बहन माइल्डरेड केलर टाईसन का भेजा हुआ तार मिला जिसमें उनकी मां की मृत्यु की सूचना थी. उस वक्त हेलेन की उम्र 41 साल की थी. मां की मृत्यु ने हेलेन की जिंदगी को सूनेपन से भर दिया. यह एक ऐसा खालीपन था जिससे उबरना हेलेन के लिए बहुत मुश्किल साबित हुआ. इस दु:खद घटना के कुछ ही दिनों बाद हेलेन के एक और घनिष्ठ मित्र और शुभचिंतक डॉ. अलेक्जेंडर ग्रैहम बेल का स्वर्गवास हो गया.

हेलेन केलर 1920 में स्थापित संस्था अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) के संस्थापक सदस्यों में से थीं. ACLU की स्थापना अमेरिकी संविधान में मौलिक अधिकारों के संरक्षण और विस्तारण के लिए की गई थी. 1924 में हेलेन केलर American Foundation for the blind, जिसकी स्थापना 1921 में हुई थी, की एक सदस्या बनीं. इस संस्था ने अपने प्रवक्ता के तौर पर हेलेन को आमंत्रित किया था. अंधों के हित में अभियान चलाने के लिए यह संस्था एक प्रभावशाली मंच साबित हुई. 1924 से मृत्यु पर्यंत हेलेन इस संस्था की ओर से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की परामर्शदात्री बनी रहीं. उन्होंने और अधिक फंड जुटाने में अपना ज्यादा-से-ज्यादा समय लगाने का निश्चय करते हुए इस संस्था के लिए “Helen Keller Endowment Fund” की शुरुआत की.

हेलेन की पुस्तक “Midstream” 1929 में प्रकाशित हुई. इसमें उन्होंने लिखा था, “पहले मैं इसपर विश्वास करती थी कि हम सब अपने भाग्य के निर्माता हैं और जैसे चाहें, अपनी जिंदगी का स्वरूप गढ़ सकते हैं. मैं अपने अंधे और बहरेपन पर काफी हद तक विजय पाकर खुश थी और साथ ही सोचती थी कि कोई भी अगर ठान ले तो जिंदगी के संघर्षों पर विजय पा सकता है. लेकिन जैसे-जैसे मैंने इस देश को जाना है, मैं समझ पाई हूँ कि इस दुनिया में विकास करने का सामर्थ्य हर किसी की पहुंच में नहीं है.”

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हेलेन की प्रिय शिक्षिका, गुरु और निष्ठावन सहेली एनी सुलिवन मैसी कई सालों से अपने स्वास्थ्य को लेकर परेशान थीं और 1932 में वे पूरी तरह दृष्टिहीन हो गईं. बाद में उन्हें कोई और अंदरूनी बीमारी हो गई और आखिरकार अक्टूबर 1936 में वे चल बसीं. एनी के शिक्षण-कौशल और धीरज के साथ किए गए अनवरत प्रयासों के बिना हेलेन संभवतः अंधेरी दुनिया में कहीं अकेली ही खोयी रहती. इसमें शक की कोई गुंजाईश ही नहीं कि एनी सुलिवन हेलेन की सबसे प्यारी सहेली, शिक्षक और सहायक थीं. हेलेन की जिंदगी संवारने में, उन्हें दुनिया में अपनी बात कह सकने और एक सोद्देश्य जिंदगी गुजारने के काबिल बनाने में एनी की भूमिका अविस्मरणीय है. एनी का गुजर जाना हेलेन के लिए असह्य था. अपनी शिक्षिका के बारे में हेलेन केलर ने बाद में कहा था, “मैं अपने सम्पूर्ण अस्तित्व में उनका होना महसूस करती हूँ और मेरे कदम उनके ही पग- चिह्नों पर चल रहे हैं. मेरा जो कुछ भी अच्छा है वह सब उनका ही (दिया) है- मुझमें ऐसी कोई प्रतिभा या प्रेरणा या कोई खुशी नहीं जिन्हें उन्होंने अपने प्यार भरे कोमल स्पर्श से जगाया न हो.”

एनी की मृत्यु के बाद हेलेन की स्थाई सहायक बनीं Polly Thomson. 1960 में पॉली थॉमसन के गुजर जाने के बाद हेलेन के लिए नर्स और सहायक के रूप में Mrs. Winifred Corbally ने काम संभाला और वे हेलेन की आखिरी सांस तक उनके साथ रहीं. हेलेन पूरी जिंदगी पालतू पशु-पक्षियों से घिरी रहीं- कबूतर, पिल्ले, खरगोश, नैडी नाम का एक प्यारा गधा, लॉएनेस (शेरनी) और पर्ल नाम के कुत्ते, एक कैनरी चिड़िया, यूमर नाम का एक मैस्टिफ (एक प्रकार का बड़ा कुत्ता) और ब्लैक ब्यूटी नाम का एक टट्टू भी उनके परिवार के हिस्से थे. ये सभी पालतू पशु-पक्षी दुनिया भर में फैले उनके मित्रों और शुभचिंतकों की ओर से उपहार में मिले थे. हेलेन को कुत्तों से बहुत लगाव था. पूरी जिंदगी उन्होंने तरह-तरह के कुत्ते पाले. 1937 में जापान में हेलेन केलर ने अकीता के नगर अध्यक्ष से हकीचो नाम के एक अकीता कुत्ते के बारे में पूछताछ की थी जो 1935 में ही मर चुका था. उन्होंने एक अकीता कुत्ता पाने की इच्छा जताई थी और उन्हें कमिकजे-गो नाम का एक अकीता कुत्ता उपलब्ध करवाया गया था. यह अकीता कुत्ता कैनिन डिसटेम्पर की वजह से मर गया. इसलिए जुलाई 1938 में उसके भाई केंजन-गो जापान सरकार की तरफ से हेलेन को भेंट किया गया. हेलेन के इन दो भाई-कुत्तों की वजह से ही अमेरिका की अकीता कुत्तों से जान-पहचान हो सकी थी.

 

 

अकीता जर्नल में हेलेन केलर ने दर्ज किया था, “फर में लिपटा यदि कोई फरिश्ता होता हो तो वह कमिकजे ही था. मैं जानती हूँ कि ठीक वैसा ही कोमल एहसास मुझे किसी भी दूसरे पालतू पशु से नहीं मिल सकता. अकीता कुत्तों में वे सारे गुण मौजूद होते हैं जो मुझे बहुत आकर्षित करते हैं- बेहद मुलायम, साथी बनाने लायक और भरोसेमंद.”

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1943 में, द्वितीय विश्व-युद्ध के दौरान हेलेन देशभर के सैन्य अस्पतालों में घूम-घूमकर अंधे, बहरे और अपाहिज सैनिकों से मिलती रहीं. ‘द अमेरिकन ब्रेल प्रेस’ को 1946 में ‘The American Foundation for Overseas Blind’ (अब जिसे ‘Helen Keller International’ के नाम से जाना जाता है) का नाम दिया गया. हेलेन इस संस्था के लिए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की परामर्शदात्री नियुक्त की गईं. मानवतावादी कार्यों के लिए हेलेन को कई पुरस्कारों से नवाजा गया. वे हमेशा ही खुद से भी कम भाग्यशाली लोगों के सरोकारों के बारे में चिंतित रहीं क्योंकि वे इस बात का महत्त्व समझती थीं कि उनकी अपनी सफलता में उनके मित्रों और शुभचिंतकों का कितना बड़ा योगदान है. वे जानती थी कि ऐसी ही मदद की बहुतेरे और व्यक्तियों को जरूरत है ताकि उनका भी अस्तित्व जीवंत और रोशन हो सके.

समय के साथ उनकी समाजवादी गतिविधियां कम जरूर होती गईं पर बंद नहीं हुईं. जागरुकता फैलाने तथा फाउंडेशन के लिए धन और सहयोग बढ़ाने के लिए पॉली थॉमसन के साथ उन्होंने काफी यात्राएं की. 1946 में अंधे-बहरे लोगों के लिए American Foundation for the blind की एक विशेष सेवा की स्थापना करने में भी हेलेन का सहयोग सराहनीय रहा.

 

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अपने कार्यों के सन्दर्भ में 1946 से 1957 तक हेलेन ने पांच महादेशों में स्थित 35 देशों की सात महायात्राएं की. 1955 में 75 साल की हेलेन पॉली थॉमसन को साथ लेकर एशिया की पांच माह तक चली 40,000 मील की सबसे लम्बी और बेहद थकाऊ यात्रा की.उनकी यात्राओं का खर्च ‘द अमेरिकन फाउंडेशन फॉर ओवरसीज ब्लाइंड’ (the American Foundation for the Overseas Blind) ने उठाया था. उनके अनेक भाषण और जनता के सामने उनका रू-ब-रू होना लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना. कई देशों जैसे भारत, रूस, इजिप्ट आदि में उनके नाम से अंधे-बहरे व्यक्तियों के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए गए.

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हेलेन केलर के लिखे अनेक आलेख, निबंध और भाषण अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए जिनमें से अधिकांश अंधेपन, बहरेपन, समाजवाद, सामाजिक सरोकार और महिला-अधिकारों पर केन्द्रित थे. उनके नाम 12 प्रकाशित पुस्तकें भी हैं.

1891 में उनका लिखा ‘The Frost King’ उनके शुरुआती लेखन का नमूना है. तब वे मात्र 11 वर्ष की थीं. इसे उन्होंने अपने दोस्त श्री माइकल एनाग्नोस (Mr. Michael Anagnos), जो ‘The Perkins Institute for the Blind’ के डायरेक्टर थे, को जन्मदिन के उपहारस्वरूप भेंट किया था. यह कहानी पसंद की गई और इसे स्कूल न्यूजलेटर के अगले अंक में प्रकाशित किया गया था. दुर्भाग्य से हेलेन पर कहानी की चोरी का आरोप लगा और हेलेन के तमाम नकार के बावजूद स्कूल न्यायाधिकरण के समक्ष उनकी पेशी हुई. यह घटना हेलेन के लिए काफी अवसादकारी साबित हुई. शायद उन्होंने काफी पहले कभी सुनी हुई किसी कहानी का कोई अंश अनजाने में लिख लिया हो. ‘द फ्रॉस्ट किंग’ कहानी मार्गरेट कैनबी की कहानी ‘द फ्रॉस्ट फेअरीज’ से मिलती-जुलती थी. बाद में हेलेन ने कहा था, “यह निश्चित है कि मैं अपने विचार और पढ़े हुए दूसरों के विचारों को अलग कर पाने में हमेशा ही असमर्थ होती हूँ क्योंकि जो कुछ भी मैं पढ़ती हूँ वह मेरे दिमाग का अभिन्न हिस्सा बन जाता है.” सालों बाद उनके मित्र मार्क ट्वेन ने जब इस घटना का जिक्र हेलेन की किताब ‘द स्टोरी ऑफ माई लाइफ’ में पढ़ा तो हेलेन को दी गई सजा पर उनके क्रोध का ठिकाना नहीं रहा. ट्वेन का तर्क था कि “मनुष्य का सारा विचार और लेखन पहले किए गए अन्य मनुष्यों के विचारों का दुहराव ही होता है, नए अंदाज में पुराने से सूत्रबद्ध.”

1902 में 22 साल की उम्र में हेलेन केलर ने एनी और भविष्य में बने एनी के पति जॉन मैसी की मदद से अपनी आत्मकथा ‘The Story of My Life’ लिखा. इसमें बचपन से कॉलेज पंहुचने तक के उनके व्यक्तित्व-परिवर्तन के दौर को समेटा गया था. यह किताब हेलेन ने तब लिखा था जब वे रेडक्लिफ कॉलेज की छात्रा थीं. किताबों के प्रकाशन से हुई कमाई से वे एक घर खरीद पाई थीं. उनकी आत्मकथा 1903 में छपी थी और यह आज भी उनकी कृतियों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. यह किताब मराठी, टेगलॉग, पश्तो और वेदु समेत दुनिया की 50 भाषाओं में अनूदित हो चुकी है. इस दुनिया में जीने के अपने अनुभवों को उकेरती उनकी किताब ‘The World I live In’ 1908 में प्रकाशित हुई. समाजवाद पर लिखे उनके निबंधों की श्रृंखला “Out of the Dark’ 1913 में छपी. 1927 में उनकी आध्यात्मिक आत्मकथा ‘My Religion’ प्रकाशित हुई. बाद में इस किताब का संशोधित और संवर्धित संस्करण ‘Light in MY Darkness’ के नाम से प्रकाशित हुआ. यह कृति दार्शनिक और धर्मशास्त्री Emanuel Swedenborg के कार्यों पर केन्द्रित थी. Emanuel Swedenborg के लेखन को आधार मानकर बनाए गए स्वेडेनबर्गीय रिलीजन की एक सदस्या थीं हेलेन केलर.

1929 में हेलेन केलर ने ‘Midstream: My Later Life’ शीर्षक से अपनी आत्मकथा का दूसरा खंड लिखा. उनकी लिखी अन्य पुस्तकें हैं: ‘Optimism’ (1903-निबंध), ‘The Song of the Stone wall’ (1910-काव्य), ‘Peace at Eventide’ (1932), ‘Helen Keller in Scotland: A Personal Record Written by Herself’ (1933), ‘Helen Kellers Journal’ (1938), ‘Let Us Have Faith’ (1940), ‘Teacher: Anne Sullivan Macy: A Tribute by the Foster Child of Her Mind’ (1955) और ‘The Open Door’ (1957).

हेलेन केलर की जिंदगी पर कई नाटक, वृतचित्र (डाक्यूमेंट्री) और फिल्में बनीं. 1919 में निर्मित एक आत्मकथात्मक मूक फिल्म ‘Deliverance’ में उन्होंने खुद अभिनय किया था. यह फिल्म ‘ सभी मनुष्यों को साहस का और उज्जवल-सुखद भविष्य का संदेश’ देने के लिए बनाई गई थी. इस फिल्म में एटना रोज (Etna Ross) ने छोटी-सी हेलेन और एन्न मसों (Ann Mason) ने बुजुर्ग हेलेन का किरदार निभाया था. फिल्म के आखिरी अंश में खुद हेलेन को अंधों की स्थिति सुधारने और उन्हें उनके योग्य काम-काज सिखाने के लिए अथक कार्य करते दिखाया गया था.

हेलेन पर बनीं डाक्यूमेंट्रीज, “Hellen Keller in her Story” और “The Story of Hellen Keller” में प्रसिद्ध अमेरिकन अदाकारा Katharine Cornell ने अपनी आवाज दी है. ये डाक्यूमेंट्रीज हर्स्ट इंटरटेंमेंट द्वारा निर्मित एक प्रसिद्ध अमेरिकन श्रृंखला का भाग थी. 1957 में प्रदर्शित टेलीविजन ड्रामा “The Miracle Worker” हेलेन केलर की आत्मकथा ‘The Story of My Life’ पर आधारित थी. इस ड्रामा को इसी शीर्षक से ब्रॉडवे प्ले के रूप में और विकसित किया गया जिसमें Patty Duke ने हेलेन की और Anne Bankroft ने एनी सुलिवन की भूमिका निभाई थी. William Gibson द्वारा लिखे इस नाटक को 1960 में पुलित्जर पुरस्कार से नवाजा गया था. 1962 में आर्थर पेन ने इन्हीं अदाकाराओं के साथ इस नाटक पर आधारित ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित फिल्म बनाई थी. “द मिराकल वर्कर” नाटक और फिल्म में यह दिखाया गया था कि किस तरह शिक्षिका एनी सुलिवन विकलांगता के अंधियारे में सिमटी लड़की हेलेन को संपर्क-संवाद की कला सिखाकर एक विलक्षण व्यक्तित्व की स्वामिनी के रूप में परिवर्तित करती हैं. 1984 में हेलेन के जीवन पर आधारित एक टेलीफिल्म “The Miracle Continues” बनाई गई. इस फिल्म में हेलेन के कॉलेज के दिनों और युवावस्था का चित्रण है. 2005 में भारत में बनी हिंदी फिल्म “ब्लैक” में हेलेन के बचपन से लेकर ग्रेजुएशन तक की कहानी दिखाई गई है. इसमें बचपन में हेलेन का किरदार आएशा कपूर और वयस्क हेलेन का किरदार रानी मुखर्जी ने बड़ी खूबी से निभाया है. इसी साल स्वेडेनबर्ग फाउंडेशन ने “Shining Soul: Helen Keller’s Spiritual Life and legacy” नामक डाक्यूमेंट्री का निर्माण किया. इस फिल्म का विषय था- हेलेन की जिंदगी पर एमानुएल स्वेडेनबर्ग के आध्यात्मिक दर्शन और धर्मशास्त्र का किस कदर प्रभाव पड़ा कि वे अपनी तीन इन्द्रियों की कमी पर विजय पाते हुए ऐसा व्यक्तित्व बना सकीं.

हेलेन केलर 1903 में थियोडर रूजवेल्ट से लेकर 1965 में लिंडन बी. जॉनसन तक अमेरिका के बारह राष्ट्रपतियों से मिलीं जिनमें से आठ राष्ट्रपतियों से उनका परस्पर संवाद कायम रहा था.

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दुनिया की कई जानी-मानी हस्तियां जैसे टेलीफोन के आविष्कारक डॉ. अलेक्जेंडर ग्रैहम बेल, लेखक मार्क ट्वेन, अभिनेता चार्ली चैपलिन, भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, अमेरिकन राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी, मशहूर पत्रकार मैक्स इस्टमैन और राष्ट्रपति फ्रैकलिन डी. रूजवेल्ट उनके दोस्तों में शुमार थे. मार्क ट्वेन ने उनके बारे में कहा था, “19वीं शताब्दी के दो सबसे दिलचस्प व्यक्ति हैं: नेपोलियन और हेलेन केलर.”

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“वे ऐसा ऐतिहासिक यश प्राप्त करेंगी जिसका गुणगान आने वाली शताब्दियां करती रहेंगी. अपनी खासियतों के साथ वे इतिहास में एक असाधारण परिघटना के तौर पर जानी जाएंगी.”— मार्क ट्वेन

आखिरी कुछ वर्षों में हेलेन केलर ईस्टन, कनेक्टिकट में स्थित अपने घर “आर्कन रिज” में रहने चली गईं. वे अपनी अंगुलियों, जो उनके लिए दुनिया की तरफ खुलने वाला झरोखा था, के माध्यम से खुद से ही बतियाती रहतीं. बाइबिल, कविताएं और दर्शन की अपनी पसंदीदा किताबें पढ़ती हुई वे अपना ज्यादा वक्त बिताती थीं. उनके परिवार के सदस्य, दोस्त और उनकी सेवाओं से संपन्न हुई ‘द अमेरिकन फाउंडेशन फॉर द ब्लाइंड’ व ‘द अमेरिकन फाउंडेशन फॉर ओवरसीज ब्लाइंड’ जैसी संस्थाओं के उनके सहकर्मी उनसे अक्सर मिलने आया करते थे. उनकी असाधारण उपलब्धियों के सम्मान में उनके जीवन काल में उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया.

1961 से ही उन्हें दिल के दौरे पड़ेने शुरू हो गए थे और 1 जून 1968 में अपने 88वें जन्मदिन के कुछ सप्ताह पहले ही अपने प्यारे घर “आर्कन रिज” में एक रात वे नींद में ही चल बसीं. पिछले 11 सालों से हेलेन की संगिनी रही श्रीमती विनिफ्रेड कोर्बल्ली उनके पास थीं. वाशिंगटन नेशनल कैथेड्रल के सेंट जोसफ्स चैपल में उनकी प्रिय साथियों एनी सुलिवन और पॉली थॉमसन के पास ही हेलेन का अंतिम संस्कार किया गया. इस समारोह पर कैथेड्रल में एक पब्लिक मेमोरियल सर्विस का आयोजन किया गया था. उनके परिवारगण, दोस्त, समाज के विभिन्न अंगों के प्रमुख व्यक्ति, सरकारी पदाधिकारीगण और अंधे-बहरे लोगों से सम्बंधित संस्थाओं से आए प्रतिनिधिगण सभी ने इस मेमोरियल सर्विस में हिस्सा लिया.

अलाबामा के सीनेटर Lister Hill ने हेलेन केलर के बारे में कहा, “वे हमेशा जीवित रहेंगी. उनका नाम उन कुछ खास लोगों में शामिल है जो मरने के लिए पैदा नहीं होते. इस संसार में उन्हें तबतक याद किया जाता रहेगा जबतक इन्सान को पढ़ने का ज्ञान रहेगा और उस महिला के बारे में कहानियां सुनाई जाती रहेंगी जिन्होंने दुनिया को यह सिखाया कि साहस और विश्वास की कोई सीमा नहीं होती.”

हेलेन जानती थीं कि उनके जीवन की सभी उपलब्धियां उनके दोस्तों के सहयोग और योगदान का नतीजा थीं. उनके शब्दों में, “मेरे जीवन की कथा मेरे दोस्तों की लिखी हुई है. हजारों तरीकों से उन्होंने मेरी सीमाओं को सुन्दर सौभाग्य में बदल डाला जिससे मैं अपने अभावों में भी सुख और शांति का एहसास पा सकी.”

हेलेन की वसीयत के अनुसार उनके पेपर्स और Memorabilia (संस्मरण) ‘The American foundation for the Blind’ के पास रखे गए हैं. उनकी उल्लेखनीय जिन्दगी विपरीत स्थितियों में सफलता की सशक्त गाथा है. अंधे और बहरेपन से जूझकर इन कमियों पर विजय पा लेने की उनकी क्षमता की हर ओर भूरि-भूरि प्रशंसा हुई थी. जिस क्षण उन्हें अपनी मानसिक क्षमताओं का पता चला उसके बाद वे एक असाधारण प्रणेता बनने की ओर बढ़ चली थीं. वे लाखों लोगों की प्रेरणा बन गईं. दृढ़ता और अनवरत प्रयासों ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रसिद्ध कार्यकर्त्ता की ख्याति दिलवाई. उन्हें एक ऐसे शख्स के रूप में जाना जाता है जो हमेशा ही दूसरों की भलाई के लिए प्रयासरत रहीं.

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हेलेन केलर एक बेहद मेधावी और बहुत ज्यादा संवेदनशील महिला थीं जिनकी याद्दाश्त कमाल की थी. जिंदगी को और ज्यादा करीब से जानने की उनकी बेचैनी ने ही उन्हें अपनी शारीरिक विकलांगता पर विजय दिलाकर एक अर्थपूर्ण जिंदगी जीने का माद्दा दिया. दुनिया की एक महानतम हस्ती हेलेन केलर अदम्य मानवीय जिजीविषा का प्रतीक बनकर हमारे बीच हमेशा रहेंगी.

जैसा कि उन्होंने खुद कहा था, “विश्वास ही वह शक्ति है जिसकी बदौलत ध्वस्त हो चुका संसार भी सुख की रोशनी से आबाद हो सकता है.”

हेलेन केलरकी बायोग्राफीज | 0 टिप्पणी >>

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