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क्रॉनिक पैन्क्रीअटाइटिस में लगातार पैन्क्रीअस को सूजन आती है जिसकी वजह से यह नॉर्मल तरीके से कार्य नहीं कर पाता क्योंकि उसका आकार बदल जाता है। इसकी वजह होती है बहुत ज्यादा शराब पीना या फिर यह शायद हेरेडिटरी (आनुवंशिक) भी हो सकता है। यह सिस्टिक फायब्रोसिस (पित्ताशय का फाइब्रोसिस), ट्रॉमा, प्रोटीन की कमी, हायपोकैलेसेमिया, कैल्सिफाइड स्टोन्स या कुपोषण की वजह से भी यह बीमारी होती है।
क्रॉनिक पैन्क्रीअटाइटिस एक गंभीर बीमारी है। इसमें थोड़े-थोड़े समय के बाद मरीज को दर्द होता है जो उनके शरीर के सिस्टम को कमजोर बनाता है। इस कंडीशन की वजह से शरीर का पोषण सही नहीं होता क्योंकि यह प्रोटीन का शोषण नहीं कर पाता है और उसके कारण वजन कम होने लगता है। पैन्क्रीअस प्रोटीन, कार्बोहाइड्रैट और फैट्स को पचाने में मदद करता है। जब पैन्क्रीअस ठीक से काम नहीं कर पाता तब उसकी वजह से डायबिटीज की बीमारी होती है तथा जेनेटिक में परिवर्तन होने लगता है। इसका परिणाम यह होता है कि मरीज को भोजन कम पचता है, मल चिकनाई युक्त हो जाता है और मरीज खुद को अस्वस्थ महसूस करने लगता है। उसके बाद यह एक गंभीर समस्या बन जाती है।
क्रॉनिक पैन्क्रीअटाइटिस तो सिर्फ एक ही प्रकार का होता है लेकिन उसके अलग-अलग कारण होते हैं। पैन्क्रीअटिक फंक्शन कितना कम हो रहा है और उसका परिणाम क्या हो रहा है, उसे देखकर इलाज में परिवर्तन किए जाते हैं। इसके कारण इंसुलिन संबंधी मधुमेह होता है और शायद इसकी वजह से भी पेट का दर्द, साइकोलॉजिकल मूड स्विंग्स और पैन्क्रीअटिक रोग से संबंधित अन्य डिसबिलिटीज मरीज में आती हैं।
पैन्क्रीअस हमारे शरीर में एन्जाइम का निर्माण करता है जो निगले हुए खाद्य-पदार्थ में से कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और लिपिड जैसे पदार्थों को अलग-अलग छांटने का काम करता है। लेकिन जब एन्जाइम ही कम निर्मित होते हैं या बनते ही नहीं, तब समस्या पैदा होती है। फैट के कम अवशोषण होने के कारण पैन्क्रीअस होता है तथा उस कारण पेट में दर्द होता है। पैन्क्रीअस में इन्सुलिन कम हो जाने के कारण डायबिटीज की बीमारी होती है।
क्रॉनिक पैन्क्रीअटाइटिस के लिए मरीज को जनरल फिजीशियन के पास जाना चाहिए। फिर चाहे वे बच्चे हों या बड़े लोग हों।
क्रॉनिक पैन्क्रीअटाइटिस का इलाज हो सकता है लेकिन इलाज का प्रोसेस धीमा होता है क्योंकि इसमें लांग टर्म थेरेपी शामिल होती है। रोग के मूल कारण पर रोग का इलाज निर्भर होता है। गंभीर केसेस में दर्दनाशक दवाओं की थेरेपी का सुझाव दिया जाता है। अच्छी न्यूट्रीशनल आदतों से भी इस बीमारी को रोका जा सकता है। मूड स्विंग और स्मोकिंग की वजह से मरीज को तकलीफ होती है। पैन्क्रीअस की लकीर हटाने के लिए सर्जरी की जाती है।
क्रॉनिक पैन्क्रीअटाइटिस इन्फेक्शियस नहीं है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को यह बीमारी नहीं होती।
अगर केस गंभीर है तो क्रॉनिक पैन्क्रीअटाइटिस का असर इन्सान पर हमेशा के लिए होता है। शुरुआती स्टेज में पैन्क्रीअटाइटिस का इलाज हो सकता है। लेकिन क्रॉनिक पैन्क्रीअटाइटिस का असर मरीज पर जीवनभर रहेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर होता है कि उसका मूल कारण क्या है? इन्सुलिन से संबंधित पैन्क्रीअटाइटिस में डायबिटीज की बीमारी होती है जिसका असर मरीज की जिन्दगी पर हमेशा के लिए होता है। इन्सुलिन थेरेपी में पर्मनन्ट मेडिकेशन की जरूरत होती है।
यहां पर दिए गए कुछ पदार्थ ऐसे हैं जिसे आप अपने डाएट में शामिल कर सकते हैं :-
* क्रॉनिक पैन्क्रीअटाइटिस में दही सबसे महत्वपूर्ण पदार्थ है और यह मरीज की इम्यूनिटी को रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
* वेजिटेबल सूप में अधिक ऍन्टीऑक्सिडन्ट होते हैं।
* पालक भी उत्तम पर्याय है क्योंकि इसमें आयरन लेवल ज्यादा होता है।
* ब्लूबेरीज या रेड ग्रेप्स और रेड वाइन पैन्क्रीअटाइटिस के लिए अच्छे होते हैं।
* रेड वाइन और रेड ग्रेप्स, जिसमें रेस्वरेट्रॉल नामक एन्टीऑक्सिडंट शामिल होता है, पैन्क्रीअटाइटिस के लिए अच्छा होता है।
* ऐसे खाद्यपदार्थ, जिसमें विटामिन B ज्यादा हो जैसे होल ग्रेन, सी वेजिटेबल्स और डार्क लीफी ग्रीन्स।
* गोश्त के बदले बिना चर्बीवाले मांस के टुकड़े और टोफू खाना चाहिए।
* खूब सारा पानी और ज्यूस पीना चाहिए।
इनसे परहेज करें :-* रिफाइन्ड फुड जैसे पास्ता, शुगर और व्हाइट ब्रेड।
* रेड मीट।
* मार्गारीन और वह फुड जिसमें ट्रांस फैट्स है जैसे कि केक, कुकीज और डोनट्स।
* अगर आपकी पाचनसंस्था (पैन्क्रीअस) अतिसंवेदनशील है तो शराब से दूर रहें।
* उत्तेजक पदार्थ जैसे कॉफी और चाय ना पिएं।
* पिझ्झा, बिन्स, चीज, तले हुए पदार्थ, बटर और एग ना खाएं।
* सिगरेट जो स्टिम्युलेट करता है, उसे छोड़ें।
* साथ ही ढेर सारा पानी पिएं और दिन में तीन बार से ज्यादा खाना न खाएं। उसके बदले दिनभर थोड़े-थोड़े समय बाद थोड़ा-थोड़ा खाना खाने की आदत डालें।