Cirrhosis
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सिरोसिस क्या है?

सिरोसिस एक गंभीर बीमारी है जिसमें लीवर धीरे-धीरे खराब होता है। इसमें हानिकारक टिशू अच्छे और स्वस्थ टिशू की जगह लेते रहते हैं जिसकी वजह से लीवर खराब होने लगता है। बहुत ज्यादा शराब पीने से, हेपटाइटिस और लीवर का आकार बड़ा होने के कारण सिरोसिस की बीमारी होती है।

क्या सिरोसिस जटिल बीमारी है?

हां, सिरोसिस एक गंभीर समस्या है। लीवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसके बहुत सारे कार्य होते हैं जैसे कि फैट को कम करना, पित्त निर्माण करना, ग्लूकोज और न्यूट्रीअन्ट्स को जमा करना और प्रोटीन को प्रोड्यूस करना। लीवर खराब होने की वजह से ब्लड सर्क्युलेशन का फ्लो भी कम हो जाता है जिस कारण प्लीहा (स्प्लीन) में मोटाई आ जाती है और हाइपरस्प्लेनिज्म की बीमारी हो जाती है। इस अवस्था में प्लेटलेट की संख्या काफी कम हो जाती है जिसकी वजह से हायपरटेन्शन की बीमारी भी होती है।

सिरोसिस के कितने प्रकार हैं?

सिरोसिस 12 प्रकार के होते हैं और यह शरीर के अंदरूनी कारणों पर निर्भर करता है। अल्कोहलिक लीवर डिजीज, नॉन-अल्कोहलिक डिजीज, क्रॉनिक हेपटाइटिस C, क्रॉनिक हेपटाइटिस B, प्राइमरी बिलिअरी सिरोसिस (PBC), कोलनजीटिस, ऑटोइम्यून हेपटाइटिस, हेरिडेटरी हेमोक्रोमाटोसिस, विल्सन्स डिजीज, कार्डियाक सिरोसिस, लाइपेस डेफिशियन्सी और सिस्टिक फाइब्रोसिस।

सिरोसिस की विशेषता क्या है?

इस बीमारी को मोटे तौर पर 15 लक्षणों से पहचाना जाता है: धमनियों पर घाव, हाथों पर चकत्ते आना, नाखून में परिवर्तन, हड्डियों के जोड़ों में दर्द, उंगलियों में विकृति, पुरुषों में ब्रेस्ट डिजीज, हायपोगोनॉडिजम, लीवर का सिकुड़ना या बड़ा होना, प्लीहा के आकार में वृद्धि, पेरीटोनियल कैविटी में पानी आ जाना, फैली हुई नसें, हायपरटेन्शन, सांस की बदबू और जॉन्डिस।

सिरोसिस का इन्फेक्शन होनेपर किससे कन्सल्ट करना चाहिए?

सिरोसिस के इन्फेक्शन के लिए मरीज को जनरल प्रैक्टिशनर, हेमेटोलॉजिस्ट, या गैस्ट्रोइन्ट्रोलॉजिस्ट की सलाह लेनी चाहिए।

क्या सिरोसिस की बीमारी ठीक हो सकती है?

सिरोसिस का स्थायी इलाज नहीं है। इस बीमारी को पूरी तरह से हटाया नहीं जा सकता। लेकिन ट्रीटमेन्ट के जरिए इसके प्रोग्रेस को रोका जा सकता है। ध्यान रखें कि सिरोसिस के ऐडवान्स्ड स्टेज में लीवर ट्रान्सप्लांट ही सिर्फ एक उपाय है।

क्या सिरोसिस (इन्फेक्शियस) संक्रामक है?

नहीं, सिरोसिस फैलने वाली बीमारी नहीं है। सिरोसिस के रोगी के सम्पर्क में आने से दूसरे व्यक्ति को यह बीमारी नहीं होती।

क्या मुझे सिरोसिस के साथ हमेशा जीना होगा?

हां, सिरोसिस का असर इन्सान पर हमेशा के लिए होता है। सिरोसिस आपको हमेशा के लिए प्रभावित करता है क्योंकि इसकी वजह से जॉन्डिस, सेरेब्रल डैमेज, हायपरटेन्शन, पेट में दर्द, रीनल फेलियर (गुर्दा बेकार होना) और सांस लेने में तकलीफ होती है। यह घातक भी हो सकता है। शराब से परहेज, नियमित व्यायाम और बैलेन्स डाएट से सिरोसिस को रोकने में मदद मिलती है।

सिरोसिस को कैसे डायग्नॉज किया जाता है?

चूंकि यह बीमारी गंभीर होती है, इसलिए अनेक प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं ताकि सिरोसिस की बीमारी को सुनिश्‍चित किया जा सके। मूल कारणों का पता लगाने के लिए और इसकी तीव्रता जानने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। इसके कॉम्प्लिकेशन्स को देखने के लिए इसे लगातार मॉनिटर भी किया जाता है :-

लीवर बायोप्सी :- सिरोसिस की बीमारी का निर्णय लेने के लिए लीवर बायोप्सी सबसे उत्तम तरीका है। इस प्रक्रिया में लीवर का एक छोटा टुकड़ा निकाला जाता है ताकि इस बीमारी द्वारा किया हुआ नुकसान और लक्षण माइक्रोस्कोप द्वारा देखा जा सके। लीवर बायोप्सी तीन प्रकार से होती है: पर्क्युटेनियस, ट्रान्सविनस और लैप्रोस्कोपिक।

इमेजिंग टेस्ट :- लीवर की स्थिति का पता करने के लिए या फिर सिरोसिस से संबंधित कोई कॉम्प्लिकेशन्स है या नहीं, यह देखने के लिए ‘इमेजिंग टेस्ट’ जैसे कि अल्ट्रासाउन्ड का सुझाव दिया जाता है। सिर्फ सिरोसिस डायग्नॉज करने के लिए इमेजिंग टेस्ट नहीं किए जाते।

ब्लड टेस्ट :- सिरोसिस के मूल कारण को जानने के लिए और समय-समय पर लीवर फंक्शन को मॉनिटर करने के लिए ब्लड टेस्ट कराए जाते हैं।

सिरोसिस से बचने के क्या उपाय हैं?

वैक्सिनेशन :- हेपटाइटिस A और B के लिए लोगों को टीका लगाया जा सकता है। न्यूमोकोकल वैक्सीन और साल में एक बार इन्फ्लुएंझा के वैक्सीन का भी सुझाव दिया जाता है।

लीवर ट्रान्सप्लान्टेशन :- सिरोसिस के सभी मरीज को लीवर ट्रान्सप्लान्टेशन की जरूरत नहीं होती और सभी इसके लिए योग्य भी नहीं होते।

डाएटरी ऍडवाइज :- जिन लोगों को ऐडवान्स्ड स्तर का सिरोसिस होता है उन्हें ऐसे खास डाइट की जरूरत होती है जिसमें कम नमक इस्तेमाल किया जाता हो। जिन लोगों में सिरोसिस की बीमारी शुरुआती स्टेज में होती है और जिसमें फ्लुइड जमा होने का खतरा रहता है, उन्हें नमक कम खाने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर खाने में प्रोटीन पर नियंत्रण रखना आवश्यक नहीं है।

एक्सरसाइज :- जिन लोगों में सिरोसिस की ऐडवान्स्ड स्टेज नहीं होती, उनके लिए व्यायाम आमतौर पर सुरक्षित होता है।

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