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इन्फ्लूएन्जा का आसान शब्दों में मतलब है ‘फ्लू’। यह बहुत कंटेजियस वायरल इन्फेक्शन है जो इन्फ्लूएन्जा-वायरस के द्वारा फैलता है और जिसका असर इन्सानों पर होता है। इन्फ्लूएन्जा एक साधारण बीमारी है जो दुनियाभर के करोड़ों लोगों को प्रभावित करती है। इस बीमारी की विशेषता है ठंड और बुखार, दर्द और गले में खराश।
कभी-कभी फ्लू का इन्फेक्शन महामारी (एपिडेमिक) की तरह फैलता है। जिसके कारण एक ही समय बहुत सारे लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं।
‘इन्फ्लूएन्जा’ सीजनल फ्लू के नाम से भी जाना जाता है और इन्फ्लूएन्जा-वायरस के कारण यह बीमारी होती है। ये वायरस एक खास मौसम में ऐक्टिव हो जाते हैं और मौसम के अनुसार उनमें परिवर्तन भी आते रहते हैं।
इन्फ्लूएन्जा गंभीरता के आधार पर विभिन्न स्तर के हो सकते हैं जो कि हवा में मौजूद वायरस की किस्म पर निर्भर करता है।
इस बीमारी से ग्रस्त इन्सान के सम्पर्क में आने से यह बीमारी आसानी से संक्रमित हो जाती है जैसे कि मरीज से हाथ मिलाना, उसका छींकना और उसके गंदे रुमाल को दूसरे व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल करना।
इन्फ्लूएन्जा के लक्षण अचानक दिखाई देते हैं और इसके दिखाई देनेवाले संकेत और लक्षणों (साइन और सिम्पटम) में शामिल हैं :-
* तेज बुखार जो 100 और 104 डिग्री फरेनहाइट के बीच होता है
* बुखार आता है और चला जाता है
* मसल और बॉडी पेन
* सिरदर्द और आंखों के मूवमेंट में दर्द होना
* थकावट और भूख की कमी
* धीरे-धीरे गले में खराश का बढ़ना।
इसके रिस्क फैक्टर्स हैं :-
* बच्चे जिनकी उम्र 2 साल से भी कम होती है
* गर्भवती महिलाएं
* बुजुर्ग जिनकी उम्र 65 साल से ज्यादा होती है
* जिन लोगों को अन्दरूनी बीमारी होती है खासकर मूडस् या इम्यूनिटी की कमी वाले लोगों में यह ज्यादा फैलती है।
इन्फ्लूएन्जा या फ्लू की बीमारी बहुत आम है और यह महामारी की तरह फैलती है। इसलिए फ्लू के लक्षणों को देखकर इस बीमारी को डायग्नॉज करना जनरल प्रैक्टिशनर के लिए आसान हो जाता है। इसमें कभी-कभार ही ब्लड टेस्ट कराने का सुझाव दिया जाता है। फ्लू सीजनल होता है और विशेष समय के दौरान फैलने के कारण यह इन्फेक्शन निश्चित ही फ्लू है, यह तय किया जाता है लेकिन यह बहुत ज्यादा कंटेजियस होता है।
इस बीमारी के लिए फ्लू वैक्सीन उपलब्ध है और अगर लक्षण गंभीर नहीं है तो इसे उपचार के जरिए ठीक किया जा सकता है। मरीज को एक से ज्यादा बार भी फ्लू का इन्फेक्शन हुआ है तो भी उसे ट्रीटमेन्ट के जरिए ठीक किया जा सकता है। अगर मरीज को कोई अन्दरूनी बीमारी जैसे कि एचआयवी एडस् या किडनी डिजिज या लंग की बीमारी है तो फिर बात चिंताजनक हो जाती है।
फ्लू के लिए वैक्सीन उपलब्ध हैं लेकिन इसे हर साल लेना चाहिए।
इसे रोकने के दूसरे तरीके :-
* जब फ्लू की बीमारी फैली होती है तब हाथों को बार-बार धोना चाहिए
* बार-बार अपने मुंह, नाक और आंखों को छूने से बचें
* एक बैलेन्स हेल्दी डाइट जिसमें हॉट सूप शामिल हो
* नो स्मोकिंग, एक्सरसाइजिंग और प्रो-बायोटिक फुड (अच्छे बैक्टीरिया वाले खाद्य-पदार्थ) खाना जिसके कारण इम्यूनिटी को बढ़ावा मिलता है।