Guglielmo-marconi-hadding-1

-    Text Size    +

Content on this page requires a newer version of Adobe Flash Player.

Get Adobe Flash player

हममें से कितने लोग रेडियो मिर्ची, 91.5 एफएम जैसे जाने कितने चैनल लगभग रोज सुनते होंगे। एक क्लिक से आपको घंटों का मनोरंजन, दुनिया भर की खबरें और कहानियां और न जाने क्या-क्या सुनने को मिल जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए आपको किसी वायर में कोई प्लग भी नहीं लगाना पड़ता। अब तक आप समझ गए होंगे कि मैं किसकी बात कर रहा हूँ। जी हां, मैं बात कर रहा हूँ बेतार तकनीक के अगुआ रेडियो की। आज इस तकनीक के जरिए हम अंतरिक्ष में घूमते उपग्रह से या समुद्र में तैरते जहाज से संपर्क रख सकते हैं, कहीं भी, कभी भी, कोई भी काम कर सकते हैं, निर्जन इलाकों तक पहुंच सकते हैं। आपातकालीन चेतावनियां, पलक झपकते हाजिर मनोरंजन, और दूर-दराज तक संचार की सुविधा फैला सकते हैं, फिर चाहे वह अंतरिक्ष, महासागर या धरती पर कहीं भी हो। और इस सबका श्रेय जाता है, उस मनुष्य को, जिसने इस बेतार तकनीक पर ऐसे समय में विश्वास किया, जब इसे असंभव समझा जाता था। और इस अटल विश्वास से जिस मनुष्य ने रेडियो का आविष्कार किया, उसका नाम था गुल्येल्मो मार्कोनी।

गुल्येल्मो मार्कोनी एक ऐसा व्यक्ति था, जो अपने आस-पास हो रहे वैज्ञानिक आविष्कारों से काफी उत्साहित था और उसका विश्वास था कि वह भी एक दिन कोई ऐसा आविष्कार अवश्य करेगा जिसे आज तक असंभव माना जाता है। उसमें कभी हार न मानने की आदत थी। लोग उसे एक आकर्षक, भावुक, कार्य-समर्पित और सफलता पाने के अभ्यस्त व्यक्ति की तरह देखते थे। दृढ़-प्रतिज्ञता, परिश्रम और आत्मविश्वास - ये तीन गुण गुल्येल्मो मार्कोनी की पहचान थे। आज रेडियो तमाम आधुनिक लम्बी दूरी के संचार-माध्यमों का मूल आधार है।

रेडियो एक ऐसा आविष्कार था जिसने डूबते टाइटेनिक जहाज से कई जानें बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन यह कैसे संभव हुआ, इसे जानने के लिए आइए, गुल्येल्मो मार्कोनी के जीवन में थोड़ी चहल-कदमी करके देखें कि किस तरह एक नवयुवक ने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के अपने कौशल और दृढ़-निश्चय से खुद को एक महान आविष्कारक के रूप में स्थापित किया।

guglielmo-marconi-had-img

Guglielmo-Marconi-famous

एक आयरिश मद्य-निर्माता परिवार में जन्मी स्कॉटिश युवती एनी जैमसन ने 16 अप्रैल 1864 को घर से भागकर एक युवा, खूबसूरत इतालवी विधुर और मलमल के समृद्ध व्यापारी गिउसेप्पे मार्कोनी से विवाह किया। उत्तरी इटली के बोलोग्ना शहर में 25 अप्रैल, 1874 को एनी ने अपने दूसरे पुत्र को जन्म दिया और उसका नाम अपने पिता के नाम पर गुल्येल्मो रखा। उसका पहला पुत्र 1865 में पैदा हुआ था और उसका नाम अल्फांसो था। गुल्येल्मो का बप्तिस्मा एक कैथोलिक गिरिजाघर में हुआ था और उसकी परवरिश उसकी माता ने एक प्रोटेस्टेंट माहौल में की थी, अतः वह आगे चलकर एक एंग्लिकन चर्च का सदस्य बना। अपने मलमल के कारोबार के कारण, सदैव यात्रा में लगा मार्कोनी परिवार अपने बच्चों को विद्यालय भेज पाने में असमर्थ था। सो इसकी भरपाई करने के लिए उन्होंने निजी शिक्षकों की मदद ली थी।

Guglielmo-Marconi-out

मार्कोनी परिवार को घूमने-फिरने से बहुत प्रेम था, और गुल्येल्मो मार्कोनी (जिसे हम आगे से सिर्फ मार्कोनी कहेंगे) भी अपनी माता के साथ अक्सर ऐसी कई यात्राओं पर जाया करता था। इन यात्राओं के दौरान उसने विभिन्न शिक्षकों द्वारा विभिन्न विषयों पर काफी ज्ञान प्राप्त किया जिनमें अंग्रेजी और इतालवी भाषाओं का ज्ञान भी सम्मिलित था।

इसी काल में बिजली के क्षेत्र में कई परीक्षण चल रहे थे। नन्हें मार्कोनी को इसमें बहुत रुचि थी और वे कम उम्र में ही इन परीक्षणों में शामिल होने लगे थे। उनकी इस रुचि को उनकी माता ने पहचाना और उन्हें उत्साहित करते हुए अपने चार मंजिला सफेद घर की सबसे ऊंची मंजिल पर एक छोटा-सा कमरा परीक्षण के लिए उपलब्ध करवा दिया। इस कमरे को "बग रूम" के नाम से जाना जाता था। इस कमरे में घुसने के बाद मार्कोनी घंटों बाहर नहीं निकलता था और परीक्षणों की अपनी समझ के आधार पर लगातार पुनर्परीक्षण करता रहता था।

1880 से 1894 के दरम्यान 20 वर्ष की आयु तक मार्कोनी ने फ्लोरेंस में विद्यालयीन शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद लेगहॉर्न इंस्टीट्यूट गए जहां उन्होंने भौतिक शास्त्र में अत्यधिक रुचि विकसित की। परन्तु जैसे ही उन्हें यह एहसास हुआ कि पढ़ाई में लग रहा समय उनके परीक्षण कर पाने की राह में बाधा बन रहा है, वैसे ही उन्होंने इस इंस्टीट्यूट को छोड़ दिया। उनके पिता उनके इस निर्णय से काफी अप्रसन्न हुए परन्तु उनकी माता जानती थी कि उनके पुत्र में कुछ विशेष बात है और उसका भविष्य उज्ज्वल है। एक समझदार और निष्ठावान मां की तरह उन्होंने अपने एक पड़ोसी, प्रोफेसर रिघी को अपने पुत्र को सलाह देने के लिए निवेदन किया। यह भविष्य में होनी वाली कुछ उन महान घटनाओं की शुरुआत थी जो लोगों का जीवन बदल देने वाली थीं।

guglielmo-marconi-knowledge-img

Guglielmo-Marconi-factor

1888 के शुरुआत में, एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई। "हेनरिक हर्ट्ज नामक वैज्ञानिक ने विद्युत-चुम्बकीय विकिरण के अस्तित्व की पुष्टि की, जिन्हें "हर्ट्जियन तरंग" या बाद में "रेडियो" कहा जाने लगा। हर्ट्ज के कामों का प्रकाशन सर्वप्रथम 1888 में हुआ, जिस समय मार्कोनी सिर्फ 14 साल के थे। 1894 में हर्ट्ज चल बसे, और इन 6 सालों में मार्कोनी उनके बारे में सब कुछ पढ़ते रहे और साथ ही उनके कार्यों का अनुसरण करते रहे। इस बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए उन्होंने ऑगस्टो रिघी की कक्षा में बैठने की अनुमति प्राप्त की। रिघी युनिवर्सिटी ऑफ बोलोग्ना में फिजिसिस्ट थे जो उच्च फ्रीक्वेंसी रेडियो संकेतों पर शोध भी कर रहे थे। ठीक इसी समय, कई आविष्कारक बेतार से तार करने की पद्धति का विकास करने में लगे हुए थे जिससे विद्युतीय टेलीग्राफ को बिना किसी तार के माध्यम से जोड़ा जा सके। परंतु दुर्भाग्यवश अब तक कोई सफल नहीं हो पाया था।

Guglielmo-Marconi-try

अगर कोई है, जिसने उपरोक्त कथन को सिद्ध कर दिखाया है, तो वह मार्कोनी ही है। हालांकि प्रोफेसर रिघी के द्वारा सिखाए गए परीक्षण और प्रसारण सिर्फ छोटी दूरी तक के लिए ही सीमित थे, फिर भी मार्कोनी का विश्वास था कि इन्हें लम्बी दूरी के बेतार टेलीग्राफ करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

1894 की शरद ऋतु में, मार्कोनी ने अपने अटल विश्वास और लक्ष्य के प्रतीक ‘‘लम्बी दूरी का संचार यन्त्र’’ के निर्माण की यात्रा आरम्भ की। उन्होंने अपनी पहली प्रयोगशाला अपने पिता के गांव पोंतेच्चियो स्थित घर के बग रूम में स्थापित की। यहीं पर उन्होंने अपने पूर्ववर्ती आविष्कारकों जैसे मैक्सवेल, रिघी, लॉज और अन्य द्वारा किए हुए परीक्षणों का पुनर्प्रयोग आरम्भ किया। साथ ही वह इनमें अपने खुद के उपकरण भी जोड़ते गए। कई सारी कोशिशों एवं गलतियों के पश्चात उन्हें अपने इस यन्त्र के बारे में काफी भौतिक ज्ञान प्राप्त हुआ।

इस दौरान उनके द्वारा अपनाए गए कुछ मौलिक प्रायोगिक उपकरणों की सूची इस प्रकार है: पहला - एक साधारण स्पार्क-गैप ट्रांसमीटर जो काफी कुछ रिघी के ट्रांसमीटर पर आधारित था और साथ ही वह हर्ट्ज द्वारा इस्तेमाल किए गए ट्रांसमीटर से भी मेल खाता था। दूसराः - एक तार-संचार कुंजी, जिसके माध्यम से ट्रांसमीटर को नियंत्रित करते हुए उनसे दीर्घ एवं लघु कम्पन ध्वनि पैदा की जाती है, जिनसे संकेत प्रणाली में मोर्स कोड संकेतों की भांति बिंदुओं और रेखाओं को बनाया जा सकता है। (मोर्स कोड किसी भी विषय-वस्तु को कई विभिन्न ध्वनियों और खट-खट की आवाजों के माध्यम से प्रक्षेपित करने का तरीका है जिन्हें एक प्रशिक्षित श्रोता या प्रेक्षक, बिना किसी यन्त्र के सहारे सीधे समझ सकता है); तीसराः- एक फाइलिंग-कोहिरर रिसीवर जो रेडियो-संकेतों से सीधे सक्रिय हो जाता था। यह एडोवार्ड ब्रान्ले के मौलिक आविष्कार "रेडियो-कंडक्टर" का एक विकसित संस्करण था, जो आकार में छोटा पर ज्यादा संवेदनशील, और भरोसेमंद था। (मार्कोनी ने स्वीकार किया था कि इस कोहिरर को परिशुद्ध करने में उन्होंने लगभग 1000 घंटे लगाए थे। चौथा - एक रिकॉर्डिंग यन्त्र, जो एक कोहिरर के प्रसारण से सक्रिय होता था। शुरुआत में यह बजने वाली घंटी-मात्र था, परन्तु मार्कोनी ने अपने अंतिम लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इसकी रूपरेखा में बदलाव कर इसे एक टेलीग्राफ गति मापक यन्त्र में परिवर्तित किया जो प्रक्षेपण से प्राप्त मोर्स कोड को एक कागज पर अंकित कर सकता था।

तीन महीनों के दिन-रात के प्रयोगों के पश्चात एक दिन मार्कोनी ने अपनी माता को जगाया और उन्हें अपनी प्रयोगशाला में लाया, जो विभिन्न उपकरणों एवं प्रायोगिक यंत्रों से भरी पड़ी थी। उन्होंने खिड़की के नीचे रखी टेबल पर पड़े एक टेलीग्राफी चाबी को खटखटाया, और तभी नजदीक के दूसरे कमरे से मां को घंटी की आवाज सुनाई दी। यह स्पष्ट था कि इन दोनों दूर की वस्तुओं के बीच कोई तार नहीं जोड़ा गया था। तो फिर यह क्या था? क्या मार्कोनी ठीक इसी क्षण प्रसिद्ध हो गए थे? आइए, जानते हैं।

guglielmo-marconi-try-img

Guglielmo-Marconi-stuggle

मार्कोनी के पिता इस घंटी की आवाज से कुछ खास प्रभावित नहीं थे क्योंकि उन्हें लगता था कि यह तुक्के से हो गया। वे अपने बेटे के इस तरह निरर्थक प्रयोगों पर खर्च हो रहे धन से भी अप्रसन्न थे। उन्होंने उसे आर्थिक सहायता देना इस हद तक कम कर दिया कि मार्कोनी को उपकरण बनाने हेतु सामान खरीदने के लिए अपने जूते तक बेचने पड़े। लेकिन उनकी माता अपने पुत्र को हार मानते नहीं देख सकती थी, सो वह तरह-तरह से उन्हें बढ़ावा देने के तरीके ढूंढ़ ही लेती थीं। जहां से भी उन्हें पैसे मिलते, वे चुपके से मार्कोनी को देती रहीं।

guglielmo-marconi-stuggle-img

मार्कोनी अपने पिता के इस व्यवहार से खुश नहीं थे, और वे अपनी काबीलियत और आविष्कार करने की प्रबल इच्छा को उनके सामने साबित कर देना चाहते थे। अतः अगले छह महीने वे घंटी के साथ लगातार अपने घर से भिन्न-भिन्न दूरियों पर प्रयोग करते रहे। अलग-अलग फैलाव के कम्पनों को उपयोग में लाते हुए उन्होंने अपनी घंटी की आवाज सफलतापूर्वक अपने चार मंजिला घर के सबसे निचले कमरे तक और जल्दी ही बगीचे के दूर छोर तक परीक्षित की। उधर उनकी यह सारी प्रगति उनके पिता लगातार देख रहे थे। आखिर एक दिन वे उनके पास गए और उन्हें सुझाव दिया कि सिर्फ एक क्लिक संकेत देने के लिए पर्याप्त नहीं है क्योंकि यह संयोग से भी हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि उन्हें मोर्स कोड (अंग्रेजी अक्षर 'एस') के लिए तीन बिन्दुओं का इस्तेमाल करना चाहिए, और यही आगे चलकर मार्कोनी का मानक परीक्षण बन गया। मार्कोनी को अपने पिता की इस स्वीकृति में अपनी विजय का एहसास हुआ। अब उनके पिता उनकी आर्थिक सहायता करने के लिए तैयार थे जिसकी उन्हें एक व्यवसाय को आरम्भ करने के लिए जरूरत थी। और इसी कारण उन्होंने मार्कोनी से उनके आविष्कार और उसके सिद्धांतों का ब्यौरा देने को कहा।

अब तक मार्कोनी 30 फूट लम्बाई की सीमा को पार कर चुके थे और अपने संकेत को घर के चारों ओर भेज सकते थे। उनके पिता गिउसेप्पे भले ही हिचकिचा रहे थे, लेकिन वे यह भी महसूस कर ही रहे थे कि मार्कोनी का भविष्य एक बड़े व्यवसाय की ओर सफलतापूर्वक अग्रसर है। इसलिए उन्होंने उसे आविष्कारों के लिए लगने वाली सामग्री हेतु पर्याप्त धन प्रदान किया।

Guglielmo-Marconi-out

guglielmo-marconi-out-img

अपने परीक्षणों के दौरान मार्कोनी अक्सर अगुस्तो रिघी से मिलते थे, और उनकी बातें सदैव उन्हें उनके परीक्षणों के लिए उत्तर ढूंढ़ने और सुधार करने में मदद करता था। सितम्बर 1895 में, जब मार्कोनी 21 वर्ष के थे, उन्होंने अपना पहला बाहरी सफल परीक्षण किया। उन्होंने 95% निकल धातु और 5% चांदी के धातु से अपना उपकरण बनाया। इस परीक्षण को "सलेस्तिन पहाड़ी के परीक्षण" नाम से जाना जाता है, क्योंकि इस नाम का एक पहाड़ जो उनके घर से लगभग 1700 मीटर की दूरी पर था, वहां तक उन्होंने सफलतापूर्वक संकेतों का प्रक्षेपण किया था।

सबसे पहला लम्बी दूरी का सिग्नल ट्रायल और एरर मेथड से भेजा गया था। मार्कोनी ऐन्टीना के उपयोग के बारे में यह तो जानते थे कि किस तरह ऊंचाई और धातु के खम्भों की मदद से वायु में और धरती पर लम्बी दूरी के संकेत भेजने में सहायता मिलती है। परंतु इसके बाद उन्हें यह भी पता चला कि वे बिना तार के भी दूर तक खुले आसमान में संकेत पहुंचा सकते हैं। उनके पिता, जिन्होंने उनके परीक्षणों में निवेश किया था, पूर्ण रूप से मार्कोनी के विचारों के कायल हो चुके थे और उन्हें पूरा सहयोग दे रहे थे।

Guglielmo-Marconi-time

guglielmo-marconi-time-img

19 वीं शताब्दी में लन्दन को इंग्लैंड का वाणिज्यिक एवं आर्थिक केंद्र माना जाता था। अतः फरवरी 1896 में मार्कोनी अपनी माता के साथ अपने आविष्कार के व्यावसायिक और सैनिक उपयोग हेतु प्रचार करने के लिए इंग्लैंड पहुंचे। इसका एक कारण यह भी था कि इटली के मंत्रियों ने उनके इस आविष्कार को स्वीकार नहीं किया था क्योंकि उनके अनुसार विद्युत-चुम्बकीय तरंगें, दूरसंचार के लिए उपयुक्त नहीं थीं। इंग्लैंड में वे अपने चचेरे भाई हेनरी जेम्सन डेविस से मिले, जो एक इंजीनियर थे। उन्होंने मार्कोनी को एक स्कॉटिश सलाहकार इलेक्ट्रिक इंजीनियर ए ए कैंपबेल स्विंटन से मिलवाया जो स्वयं हर्ट्ज के परीक्षणों से काफी प्रभावित था और उनका काफी संजीदगी से अनुसरण करता था। स्विंटन ने किसी तरह विलियम प्रीस नामक डाक विभाग के मुख्य अभियंता से संपर्क स्थापित किया जो कई बिन-तारी परीक्षण कर चुके थे और बिन-तार दूर-संचार के क्षेत्र में एक जानी-मानी हस्ती थे। समान दिलचस्पी होने के कारण स्विंटन ने मार्कोनी को प्रीस से मिलवाया जो उनके परीक्षणों से अत्यधिक प्रभावित हुए। उन्होंने मार्कोनी के प्रदर्शन को ब्रिटिश सरकार से आर्थिक सहायता दिलाने का निर्णय लिया।

उनका पहला प्रदर्शन, लन्दन की दो ऊंची इमारतों की छत पर जुलाई 1897 में रखा गया। यह एक सफल प्रदर्शन रहा और अब आगे और प्रदर्शनों की जरूरत थी। मार्च 1897 में पहला मोर्स कोड प्रक्षेपण सेलिस्बरी के मैदान पर लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी तक किया गया, और इस बार युद्ध विभाग और सेनाध्यक्ष कार्यालय के प्रतिनिधि भी इसे देखने के लिए उपस्थित थे। इन प्रदर्शनों में तरंगों के दिशात्मक गुण दर्शाने हेतु परवलय आकार के रिफ्लेक्टर ट्रांसमीटर और रिसीवर इस्तेमाल किए गए थे। इससे यह सिद्ध हुआ कि प्रेषण के समय गोपनीयता भी रखी जा सकती है। अब चूंकि ढाई किलोमीटर एक छोटी दूरी थी, अतः मार्कोनी अगले छह महीने लगातार प्रयोग करते रहे और लगभग सात किलोमीटर की दूरी तय करने में सफल रहे। इस समय उन्होंने परंपरागत एंटीना की ऊंचाई बढ़ाने के लिए गुब्बारों की मदद ली।

इस सफलता के बाद मार्कोनी ने प्रीस के कार्यों को दोहराने का निश्चय किया। और इस बार पंद्रह किलोमीटर की सफलता हाथ लगी। प्रभावित होकर प्रीस ने मार्कोनी के कार्य से आम जनता को परिचित कराने का निर्णय किया। मार्कोनी ने दो व्याख्यान दिए; "बेतार का दूरसंचार" - उनका पहला व्याख्यान था, जो उन्होंने तोयन्बी हॉल में 11 दिसम्बर 1896 को दिया। इसके बाद उनका दूसरा व्याख्यान ‘‘अंतरिक्ष में बिना तारों के संकेतन’’ 4 जून को रॉयल इंस्टीट्यूट में हुआ। 22 वर्षीय मार्कोनी इन व्याख्यानों के साथ ही एक प्रसिद्ध व्यक्ति बन गए थे।

Guglielmo-Marconi-commercial

2 जून 1897 को अपनी नई हासिल प्रसिद्धि से उत्साहित मार्कोनी ने ब्रिटिश पेटेंट कार्यालय में अपने आविष्कार के पेटेंट के लिए आवेदन किया जिसमें उन्होंने अपने रेडियो उपकरण का विस्तृत वर्णन किया। उन्हें 2 जुलाई 1897 को बेतार की दूरसंचार व्यवस्था के तहत विद्युतीय स्पंदन और संकेतों के प्रक्षेपण के विकास और उपकरणों के लिए ब्रिटिश पेटेंट क्र. 12.039 प्रदान किया गया। और इसतरह अब वे एक उद्योगपति की तरह अपना स्वयं का उद्योग डालने के लिए तैयार थे। जुलाई 1897 में वे इटली वापस लौटे और उसी महीने की 20 तारीख को अपने परिजनों की आर्थिक सहायता के साथ, उन्होंने अपनी एक युनिट "वायरलेस टेलीग्राफी एवं सिग्नल कंपनी" के नाम से स्थापित की। इससे उन्हें अपने अन्य प्रयोगों और विकासों के लिए और अधिक आर्थिक सहायता प्राप्त करने में भी मदद मिली।

मार्कोनी अपने प्रयोगों में लगे रहे और 1897 के अंत तक उन्होंने विट टापू पर स्थित नीडल्स होटल के बाहर लगभग 40 मीटर ऊंचे खम्भों1 को खड़ा किया। यहां से उन्होंने सोलेंट नामक व्यस्त जल-मार्ग पर तैरती एक नाव पर सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इसके बाद उन्होंने ला स्पेजिया में शृंखलाबद्ध प्रयोग किए जो इतालवी सरकार द्वारा प्रायोजित थे। यहां उन्होंने संकेतों को 30 किलोमीटर की दूरी तक भेजा और यह सिद्ध किया कि ये प्रक्षेपण पानी के ऊपर भी सफलतापूर्वक किए जा सकते हैं। (यह Footnote है इसे पेज के बॉटम में ॲड कर देना)

नोट:- रेडियो खम्भे या टावर वे ऊंची संरचनाएं हैं जिनका उपयोग उन पर एंटीना (या एरियल) लगाने के लिए किया जाता है जो कि दूरसंचार, प्रसारण एवं दूरदर्शन के लिए आवश्यक है। यह मनुष्य द्वारा निर्मित सबसे ऊंची संरचनाओं में गिनी जाती हैं।}

नवम्बर 1897 में, दुनिया का सबसे पहला रेडियो स्टेशन इंग्लैंड के दक्षिण तट पर स्थित विट टापू के नीडल्स में बनाया गया। 1898 में मार्कोनी ने दुनिया की पहली 'वायरलेस टेलीग्राफ' की फैक्ट्री चेम्सफोर्ड के हॉल स्ट्रीट में स्थापित की, जिसमें शुरुआत में 50 कर्मचारी थे। एक व्यापारिक कंपनी लॉयड्स, बंदरगाह की ओर आते समुद्री जहाजों से संपर्क करने के लिए एक रेडियो स्टेशन स्थापित करना चाहती थी। इसके फलस्वरूप, दो जहाजों पर मार्कोनी का रेडियो टेलीग्राफ यन्त्र स्थापित किया गया जिसने 140 कि.मी. की दूरी से रेडियो संकेतों का आदान-प्रदान किया। और इसे ही टेलीग्राफी के रूप में जाना गया।

 

guglielmo-marconi-time-get-img

 

जुलाई 1898 के परीक्षणों के दौरान मार्कोनी "रागाटस ऑफ डब्लिन" नामक जहाज पर यात्रा कर रहे थे और उन्होंने अपने पहुंचने का सन्देश समय रहते ही डब्लिन के डेली एक्सप्रेस अखबार को दिया और जिसे जहाज के बंदरगाह पर पहुंचने के पहले छाप भी दिया गया। इसतरह मार्कोनी धीरे-धीरे प्रसिद्ध होते जा रहे थे और यह खबर जल्द ही महारानी विक्टोरिया तक जा पहुंची, जिन्होंने उन्हें अपने विट द्वीप स्थित निवास से नहर पर तैरती राजकीय नौका के बीच संपर्क स्थापित करने का कार्य सौंप दिया। इस नौका पर वेल्स के राजकुमार सवार थे, जिनके पैरों में चोट लग गई थी। यहां 16 दिनों में लगभग 150 संदेशों का आदान-प्रदान हुआ था।

मार्कोनी ने अब एक अंतर्राष्ट्रीय प्रयोग करने का निर्णय किया। उन्होंने 1899 में बोलोग्ना के निकट दक्षिणी फोरलैंड में एक ऊंचा एंटीना-टावर खड़ा करवाया और फिर विश्व का पहला सफल अंतर्राष्ट्रीय वायरलेस प्रक्षेपण किया। इस प्रक्षेपण को 130 कि.मी. दूर चेम्सफोर्ड तक भेजा गया जो कि एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। इस सफलता के परिणामस्वरूप उन्हें ब्रिटिश नौसेना से वायरलेस ट्रांसमीटर के लिए एक बहुत बड़ा आर्डर मिला।

मार्कोनी अबतक अपने अनुसंधान पर काफी धन खर्च कर चुके थे पर उन्हें कोई खास आर्डर नहीं मिल रहे थे लेकिन वे हतोत्साहित नहीं थे। और इसी दौरान 8 नवम्बर, 1899 को 'मार्कोनी वायरलेस टेलीग्राफ कंपनी ऑफ अमेरिका इंक' (जिसे अमेरिकन मार्कोनी भी कहा जाता है) की स्थापना की गई। साथ ही मार्च 1900 में उनके द्वारा स्थापित पहली कंपनी का नाम उनके पिताजी के सुझाव पर बदलकर '"मार्कोनी इंटरनेशनल एण्ड सिग्नल कंपनी"' कर दिया गया। इसके बाद, 25 अप्रैल 1900 में "मार्कोनी इंटरनेशनल मरीन कम्यूनिकेशन लिमिटेड" की स्थापना हुई जो न सिर्फ जहाजी कंपनियों को "मार्कोनी उपकरण" प्रदान करती थी, बल्कि वायरलेस कंपनियों को अपने ग्राहकों के लिए संचालक भी मुहैय्या कराती थी। शीघ्र ही जहाज के यात्री रेडियो की मदद से टेलीग्राफ भेज सकते थे, जिन्हें उन दिनों 'मार्कोनी-ग्राम' कहा जाता था।

मार्कोनी ने अब ऐसे महत्वपूर्ण सहयोगियों की भरती करना शुरू कर दिया था जो उन सारी तकनीकों में कुशल थे जिनकी मार्कोनी को जानकारी नहीं थी। ऐसे कर्मचारियों में से प्रमुख थेः ओलिवर लॉज - जिन्होंने तड़ित (आकाशीय बिजली) एवं कृत्रिम विद्युत पर शोध किया था, जॉन अम्ब्रोसे फ्लेमिंग - एक अग्रेज विद्युत इंजीनियर और भौतिकशास्त्री, आर. एन. वीवियन जो एक इंजीनियर थे। 26 अप्रैल, 1900 में उन्होंने एक और आविष्कार के लिए पेटेंट का आवेदन किया, जो न सिर्फ उनके एक उपकरण ‘लिथ्रतो’ की कार्यक्षमता बढ़ाता था, बल्कि वह एक साथ दो या उससे अधिक स्टेशनों से संपर्क पर नियंत्रण भी कर सकता था। उन्हें दिया गया पेटेंट क्रमांक 7777 अपने चार बार 7 के अंकों के कारण प्रसिद्ध काफी हो गया था। उनका यह नया आविष्कार कुछ अंश तक सर ओलिवर लॉज के कार्य पर आधारित था, जिसमें उन्होंने प्रक्षेपण और रिसीवर एरियलों के तालमेल को सुधारा था।

Guglielmo-Marconi-failed

उनका पहला कदम था अपने निवेशकों को यह विश्वास दिलाना कि उनके निवेश की पाई-पाई का बराबर मोल किया गया है। एक प्रयोग के दरम्यान अटलांटिक महासागर के दोनों छोरों से एक-एक स्थल चुना गया- कॉर्नवेल का पोल्दू शहर और मेसाचुसेट्स का केप कॉड. इन स्थलों से लम्बी दूरी के रेडियो परीक्षण होने वाले थे। पोल्दू में 60 मीटर लम्बाई के लगभग 20 खम्भों से बना एक विशाल चक्राकार एंटीना लगाया गया तथा इस चक्राकार संरचना के मध्य में तारों का एक शंकु बनाया गया था जो दरअसल एंटीना था। मार्कोनी के सहायक वीवियन को इस एंटीने की संरचना पर आपत्ति थी परन्तु मार्कोनी ने उन पर विशेष ध्यान नहीं दिया। एक दिन हवा के एक बहुत तेज झोंके से दोनों जगहों का एंटीना बुरी तरह विकृत हो गया। कहा जाता है कि उस दिन वीवियन शायद मारे ही जाते जब एंटीना का एक हिस्सा लगभग उन पर गिरते-गिरते बच गया था।

 

guglielmo-marconi-failed-img

 

ये दोनों एंटीना बुरी तरह से ध्वस्त हो चुके थे। यह मार्कोनी और उनकी कंपनी के लिए एक बहुत बड़ा झटका था। लेकिन मार्कोनी ने हार नहीं मानी और एक बार फिर उन्होंने एंटीना का निर्माण किया। इस बार यह पहले से कुछ छोटा था। साथ ही उन्होंने अमेरिकन स्टेशन को न्यू फाउंडलैंड में स्थानांतरित किया जिससे दूरी थोड़ी कम हो सके। उन्होंने एंटीना को हरसंभव सरल रखने की कोशिश की और उसे पतंगों और तारों से बंधे गुब्बारों की मदद से सहारा दिया।

दिसम्बर 1901 में परीक्षण पुनः प्रारंभ किया गया। पोल्दू स्टेशन ने तीन बिन्दुओं से बने, अंग्रेजी के अक्षर एस (S) का प्रक्षेपण रोज तीन घंटे लगातार किया। उन्होंने यह अक्षर इसलिए चुना क्योंकि यह आसानी से पहचाना जा सकने वाला अक्षर था और इसलिए भी क्योंकि नई रूपरेखा वाले इस ट्रांसमीटर से बिन्दुओं के बजाए डैश का चिह्न भेजने से ट्रांसमीटर के खराब हो जाने का खतरा था।

guglielmo-marconi-failed-img-2

12 दिसम्बर, 1901 को मार्कोनी ने घोषणा की कि उन्होंने रात 12.30, 1.10 और 2.20 बजे संकेतों को सुना था। यह खबर तेजी से फैल गई लेकिन कुछ लोगों ने इस पर यकीन नहीं किया क्योंकि न्यू फाउंडलैंड का मौसम इस परीक्षण के लिए अनुकूल नहीं था।

यूं तो मार्कोनी को विश्वास था कि उन्होंने संकेत सुने थे लेकिन वे यह भी जानते थे कि ये संकेत काफी क्षीण थे और उनसे पूर्ण सन्देश अटलांटिक के पार पहुंचाना संभव नहीं था। परंतु मार्कोनी को अपने परीक्षण की पुनरावृत्ति करने की अनुमति नहीं मिली क्योंकि स्थानीय दूरसंचार कंपनी ने अपने एकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए मार्कोनी के न्यू फाउंडलैंड स्टेशन को बंद करवा दिया।

लेकिन मार्कोनी ने हार नहीं मानी और अपने परीक्षण को बेहतर ढंग से आयोजित करने के लिए उन्होंने एक समुद्री जहाज एस. एस. फिलाडेल्फिया को चुना। साथ ही उन्होंने पोल्दू में नई तरह की एंटीना का इस्तेमाल किया और इस दौरान उन्होंने गौर किया कि जमीन पर पड़े एक तार जिसकी दिशा ग्लेज बे की तरफ थी, वह अन्य एंटीनाओं से ज्यादा शक्तिशाली संकेत दे रही थी। इस सुधार से अंग्रेजी के उलटे 'एल' आकार के एंटीना बने जो आज तक प्रचलित है। फरवरी 1902 में यह जहाज पश्चिम में ग्रेट ब्रिटेन की ओर पहुंचा जहां पर मार्कोनी ने पोल्दू स्टेशन से भेजे हुए संकेत लगातार रोज, एक तय अंतराल पर प्राप्त किया। इस समय ये संकेत स्पष्ट और शक्तिशाली भी थे तथा दिन के मुकाबले रात में और दूर तक सुनाई देते थे। इस समय वे लगभग 2490 कि.मी. की दूरी तक सुनाई दे रहे थे। और इस तरह मार्कोनी ने निष्कर्ष निकाला कि मध्यम और लम्बी तरंगें दिन के बजाए रात में अधिक दूरी तय करती हैं।

इस दौरान मार्कोनी ने चुम्बकीय संसूचकों (डिटॆक्टर) का प्रयोग शुरू किया जिनसे ऊंचे दर्जे की संवेदनशीलता और तेज गति का संकेतन न्यूनतम अवरोधों पर संभव था। इस सुधार के उपरांत उन्हें विश्वास हो चला था कि वे अब जल्द ही रेडियो दूरसंचार सेवा उपलब्ध करा पाएंगे । उनके मन से अब अटलांटिक पर कब्जा करने का समय आ चुका था। उनका यह आकलन निराधार नहीं था क्योंकि 1902 तक सत्तर जहाजों पर मार्कोनी-प्रणाली लगाई जा चुकी थी। और 17 दिसम्बर, 1902 में कनाडा के नोवा स्कोटिया में ग्लेज बे स्थित स्टेशन ने पूर्व दिशा में पहला रेडियो संकेत अटलांटिक के उस पार भेजा। 18 जनवरी, 1903 में मार्कोनी ने बोस्टन के नजदीक केप कॉड में एक रेडियो स्टेशन खोलते हुए राष्ट्रपति थिओडोर रूजवेल्ट का रेडियो टेलीग्राफ इंग्लैंड के राजा एडवर्ड-सप्तम को भेजा। 1904 में गुल्येल्मो मार्कोनी को उनके कामों की प्रशंसा स्वरूप बोलोग्ना विश्वविद्यालय से मानद उपाधि प्रदान की गई।

Guglielmo-Marconi-air

1904 की गर्मियों में अपनी एक लन्दन यात्रा के दौरान मार्कोनी ने एक 19 वर्षीया युवती को देखा जो उनके अनुसार बहुत ही बेढंगे कपड़े पहने हुई थी। फिर भी मार्कोनी इनके प्रेम में पड़ गए। यह लड़की थीं 13वें बेरोन इंचीक्विन की पुत्री, बीट्राइस ओ'ब्रायन. मार्कोनी एक साहसी, देहाती लड़की से विवाह करना चाहते थे और 'बी', जैसा बाद में मार्कोनी उन्हें प्यार से पुकारते थे, वैसी ही लड़की थी। मार्कोनी ने बी के समक्ष विवाह का प्रस्ताव एक धर्मार्थ नृत्य के दौरान रखा जिसे उसने ठुकरा दिया था। उन्हें यकीन नहीं था कि मार्कोनी अपनी भारी प्रसिद्धि के बाद, अपनी उम्र के दूसरे युवकों की तरह सामान्य हो सकते हैं।

इसी दौरान एक बार बाल्कन की यात्रा के समय मार्कोनी बीमार हुए और उन्हें मलेरिया हो गया। तभी अचानक एक दिन उन्हें बी से एक पत्र प्राप्त हुआ जिसमें उसने उन्हें ठुकराने के लिए क्षमा मांगी और पुनः मिलने के लिए कहा। मार्कोनी को तो इसी बात का इंतजार था। वे तुरंत उनसे मिलने गए और फिर जैसे-जैसे दिन बीतने लगे, बी भी मार्कोनी के प्रेम में पड़ने लगी। कुछ दिनों के प्रेमालाप के बाद बी ने उनका विवाह-प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। दिसम्बर 1904 में जब बी और मार्कोनी कांढ़न में थे तब मार्कोनी उनके लिए एक सगाई की अंगूठी लाए और उनकी माता से बी से विवाह की अनुमति मांगी। बी के बड़े परिवार में बहुत सारी चर्चा, सहमति और असहमति के बाद अंततः सभी सहमत हो गए। 16 मार्च, 1905 में बी और मार्कोनी लन्दन के एस. ए. जॉर्ज हनोवर स्क्वेयर में विवाह-बंधन में बंध गए।

Guglielmo-Marconi-surprises

संयोगवश मार्कोनी को अपने कार्य की जिम्मेदारियों के कारण हनीमून बीच में ही छोड़कर लन्दन लौटना पड़ा और बी को यह बात बिलकुल पसंद नहीं आई। दूसरे, मार्कोनी हमेशा होटलों में रहते थे जो बी के लिए एक अलग अनुभव था। इसकी उन्हें आदत नहीं थी क्योंकि वे एक ऐसे परिवार से आई थीं जो विशाल घरों में रहता था।

मार्कोनी अटलांटिक के पार बिछाई अपनी तारों को जांचने के लिए नोवा स्कोटिया के स्टेशन का निरीक्षण करना चाहते थे। इसके लिए वे अपनी पत्नी बी के साथ काम्पानिया नामक जहाज से अमेरिका की ओर चल पड़े। इस यात्रा के दौरान मार्कोनी ने बी को संवाददाताओं से मिलने और उनके प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार किया। यहां तक कि उन्होंने उसे मोर्स कोड भी सिखाया। बी अब मार्कोनी की मेज पर पड़े ढेर सारे अनुत्तरित पत्रों के उत्तर देने में लग गई थीं। लेकिन उन्हें यह काफी नीरस काम लग रहा था।

1905 में बी को लेकर मार्कोनी ग्लेज बे की बाहरी सीमा पर स्थित पोर्ट मोरिन नामक एक नन्हे-से गांव में पहुंचे। इस जगह का चुनाव वीवियन ने ज्यादा बड़ी तरंग-दैर्घ्य के लिए उपयुक्त एंटीने बनाने के लिए किया था। इधर नौकर-चाकरों से भरे धनाढ्य परिवार में जन्मी बी को अब श्री व श्रीमती वीवियन के साथ साझे में एक ही घर में रहना पड़ रहा था।

guglielmo-marconi-life-img

फरवरी 1906 में बी ने एक सुन्दर-सी बेटी को जन्म दिया जिसे उन्होंने 'डेगना' नाम दिया। इसी वर्ष पोल्दू और केप कॉड के बीच पहला नियमित रेडियो प्रक्षेपण आरम्भ हुआ। 1907 में इंग्लैंड के सम्राट और कनाडा सरकार के बीच, आधिकारिक सन्देश के आदान-प्रदान के साथ यूरोप और अमेरिका के बीच पहली अंतर-महाद्वीपीय रेडियो प्रक्षेपण सेवा का शुभारम्भ हुआ। अब तक मार्कोनी ने अटलांटिक-पार बेतार में महारथ हासिल कर ली थी। और 1907 की सर्दियों के बाद मार्कोनी पूरी तरह से संपूर्ण भरोसेमंद सेवा प्रदान करने में सक्षम हो चुके थे। लेकिन वे दिन की रोशनी में और विशेषकर गर्मियों में अब भी साफ और भरोसेमंद प्रक्षेपण नहीं दे पा रहे थे।

1908 में मार्कोनी कंपनी ने आम जनता के लिए ब्रिटेन और कनाडा के बीच तार समाचार भेजने की सेवा की शुरुआत की। और इसतरह वायरलेस के व्यापारिक उपयोग का जन्म हुआ। 10 दिसम्बर, 1909 में मार्कोनी और फर्डीनांड ब्राउन को बेतार के टेलीग्राफ में उनके योगदान के लिए संयुक्त रूप से भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

Guglielmo-Marconi-issues

1910 के आरम्भ में मार्कोनी को अपने पेटेंट अधिकारों की रक्षा करने के लिए कई मुकदमों का सामना करना पड़ा। उनके प्रसिद्ध पेटेंट क्र. 7777 ने कई सारी कानूनी चुनौतियों को झेला। किन्तु उन्होंने ये सारे मुकदमे जीत लिए। ब्रिटिश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री पारकर ने मार्कोनी के पक्ष में फैसला सुनाया। कुछ ही दिनों में मार्कोनी की कंपनी ने ओलिवर लॉज को मिले टयूनिंग के पेटेंट पर अधिकार पाने के लिए उनकी कंपनी लॉज-मुइरहेड सिंडिकेट को खरीद लिया। इससे उनकी ब्रिटिश, अमेरिकन और अन्य अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों को काफी मुनाफा हुआ।

कुछ साल पहले 1904 में मार्कोनी का संघर्ष निकोला टेल्सा से हुआ था जो रेडियो के आविष्कार के पेटेंट के पहले मालिक माने जाते थे और जिसे बाद में यू. एस. पेटेंट कार्यालय ने संशोधित करते हुए इसका श्रेय मार्कोनी को दे दिया था। इनमें से एक मुकदमे में 1914 में न्यायाधीश वैन वेकटेन वीडर ने मार्कोनी की सारी पेटेंट याचिकाओं का समर्थन करते हुए कहा - 'सबूतों के आधार पर मैंने मार्कोनी के इस तर्क को सही पाया है कि कृत्रिम रूप से बनीं हर्ट्ज तरंगों का उपयोग करते हुए, प्रभावी टेलीग्राफ प्रक्षेपण के व्यावहारिक तरीके की खोज एवं उसका उपयोग करने वाले वे पहले व्यक्ति हैं'. आगे चलकर मार्कोनी ने अमेरिका को प्रथम विश्व-युद्ध के दौरान अपने पेटेंट के अनधिकृत उपयोग के लिए मुआवजा देने के लिए न्यायिक चुनौती दी। हालांकि यह मुद्दा 1943 तक खिंचता गया और आखिरकार अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने मार्कोनी के 7777 पेटेंट क्रमांक के अमेरिकी संस्करण को खारिज करते हुए यह निर्णय दिया कि यह कार्य जॉन स्टोन ने पहले ही अपेक्षित किया था और उनके कार्य में कार्ल ब्राउन और निकोला टेलसा के कामों के अंश शामिल हैं।

1902 से 1912 तक मार्कोनी ने अन्य कई आविष्कारों को पेटेंट किया जिनमें "चुम्बकीय संसूचक" भी शामिल था जो भविष्य के कई वर्षों तक वायरलेस रिसीवरों में एक मानक बन गया था।

Guglielmo-Marconi-eye

एक बार कार चलाते हुए मार्कोनी दुर्घटनाग्रस्त हुए और अपनी बाईं आंख खो बैठे। लेकिन इसके बाद भी उनके परीक्षण नहीं रुके। वेनिस के एक डॉक्टर रब्बी ने उन्हें एक कृत्रिम आंख प्रदान की। लोग आज भी याद करते हैं कि किस तरह मार्कोनी अपनी एक आंख बाहर निकालकर उसे रूमाल से पोंछते थे। ऐसा वे तब करते थे जब उनकी आंखें थकान और दबाव से सूज जाती थीं।

Guglielmo-Marconi-titanic

टाइटेनिक के डूबने की कहानी सब जानते हैं लेकिन मार्कोनी का इससे क्या लेना-देना? सवाल अच्छा है और उत्तर बिलकुल आसान - रेडियो टेलीग्राफ।

जब 25 अप्रैल, 1912 को टाइटेनिक जहाज किसी हिमखंड से टकराया था, तब उसमें मार्कोनी की एक टेलीग्राफ मशीन भी लगी हुई थी। इसी यन्त्र की उपलब्धता के कारण टाइटेनिक के रेडियो कक्ष के अधिकारियों ने करीब सात सौ से ज्यादा लोगों की जानें बचाईं। जब जहाज डूबने लगा तब दो मार्कोनी रेडियो ऑपरेटर लगातार संकट का संकेत भेजते रहे। इन संकेतों को नजदीक सफर कर रहे दो जहाजों 'कैलिफोर्निया' और 'कार्पेथिया' के मार्कोनी रेडियो पर प्राप्त किया गया। प्राप्त सन्देश था, अंग्रेजी अक्षर "सीक्यूडी (-.-/-.-/…)" जिनका अर्थ था : "कम क्विक डेंजर यानी "जल्दी आएं, हमें खतरा है"। इस दुर्घटना में संयोग से रेडियो चालक बच गया और मार्कोनी स्वयं उससे मिलने पहुंचे। उन्होंने उससे अपने रेडियो के कार्य के बारे में प्रति-पुष्टि की। दिलचस्प बात तो यह है कि उनकी पत्नी बी स्वयं टाइटेनिक में सफर करने वाली थीं, परन्तु उनके पुत्र गिउइलो (जो 21 जून, 1910 को पैदा हुआ था) की बीमारी के कारण उनकी यात्रा स्थगित करनी पड़ी थी।

इस मशहूर जहाज के नुकसान के लिए हुई न्यायिक जांच के दौरान मार्कोनी ने रेडियो के चलन पर जोर दिया। आगे चलकर मार्कोनी ने संकट के संकेत को सी.क्यू.डी से बदलकर "एसओएस (…/-/…)" यानी "सेव अवर सोल" अर्थात "'हमारी जान बचाएं' कर दिया जो भेजने में ज्यादा आसान और तेज था। कार्पेथिया जहाज के रेडियो चालक के अनुसार उसे प्राप्त हुए संकेत काफी क्षीण थे। दूसरे जहाज के चालकों ने भी इस बात की पुष्टि की कि प्राप्त संकेत साफ सुनाई नहीं दे रहे थे और उनमें केप कॉड से आ रहे समाचार बुलेटिन के कारण बाधा आ रही थी।

 

guglielmo-marconi-titanic-img

संवाद-प्रेषण में आ रही इन बाधाओं को दूर करने हेतु मार्कोनी अब एक वायरलेस चक्र (वायरलेस-रिंग) पर काम करने में जुट गए। यह एक ऐसा चक्र था जो संकट के समय एक अग्नि-सूचक यन्त्र की तरह घंटी बजाए। और इस समस्या का हल उन्होंने ढूंढ़ लिया। टाइटेनिक संकट ने उनका ध्यान उच्च क्षमता वाले ट्रांसमीटर की जरूरत पर केन्द्रित कर दिया था जो जहाजों पर संकेत ग्रहण कर सकें। यह ट्रांसमीटर बीच समुद्र से लेकर दोनों छोरों तक संदेश प्रेषित करने लायक होने चाहिए थे। अतः ये परीक्षण काफी लम्बे चले थे और काफी लम्बे अंतराल के बाद अंततः 1 अक्टूबर, 1927 तक सभी जहाजों में यह स्वचालित अलार्म अनिवार्य कर दिए गए।

इधर टाइटेनिक की दुर्घटना के बाद जीवित बचे लोगों ने मार्कोनी को एक स्वर्ण पदक प्रदान किया। मार्कोनी खुश थे कि उनके आविष्कार ने कई लोगों की जानें बचाई लेकिन यह सोचकर उदास भी थे कि कई और जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। उसी समय वैज्ञानिक समाज में यह सुझाव भी आया कि 'हर्ट्ज तरंगों' को मार्कोनी का नाम दिया जाए।

 

guglielmo-marconi-titanic-img-2

Guglielmo-Marconi-lieutenant

इस घटना के बाद दिसंबर 1914 में इटली की सरकार को भी एहसास हुआ कि कैसे वह एक महान वैज्ञानिक का सम्मान करने में असफल साबित हुई और कैसे उसने उनकी उस खोज को नकारा है, जो जीवन बचाने वाली साबित हुई थी और अब दुनियाभर में प्रसिद्ध भी है। जल्द ही इटली सरकार द्वारा उन्हें किंगडम ऑफ इटली और नाइट ग्रैंड क्रॉस का सिनेटर चुना गया। उसी साल वे एक लेफ्टिनेंट के रूप में इटालियन सेना में शामिल हुए और बाद में उन्हें पदोन्नत करके कैप्टन बनाया गया। पहला विश्वयुद्ध शुरू होने पर उन्हें इटालियन वायरलेस सेवा का इंचार्ज बनाया गया। यह वही समय था जब उन्होंने शॉर्ट वेव कम्यूनिकेशन ट्रांसमिशन के विकास की शुरुआत की थी। मार्कोनी ने पानी के जहाज और पहली बार हवाई जहाज में 'मार्कोनी रेडियो' उपकरण लगाने में सहायता की। उन्होंने जेनोआ में पहले शॉर्ट वेव उपकरण के लिए उपकरण बनाना शुरू किया।

Guglielmo-Marconi-YACHT

चूंकि मार्कोनी को बहुत अधिक यात्रा करनी पड़ती थी, इसलिए उन्होंने अपने परिवार के लिए बोरगेस गार्डन के पास घर खरीदा, जहां युद्ध के दौरान उनका अधिकतर समय प्रयोग करने में बीतता था। इस दौरान कार्यवश उन्होंने इंग्लैंड की भी बहुत यात्रा करनी पड़ती थी। जिसमें उनका बहुत-सा मूल्यवान समय चला जाता था और वे ठीक तरह से प्रयोग नहीं कर पा रहे थे, अत उन्होंने अपनी व्यक्तिगत सहूलियत के लिए एक नाव खरीदने का सोचा और फिर फरवरी 1919 में उन्होंने अपना घर बेचकर एक नाव खरीद ली। हालांकि उनका यह निर्णय उनके परिवार की समझ से बाहर था। बी बहुत दुखी थीं, क्योंकि उन्हें और उनके बच्चों को फिर से होटल में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उनका घर रोम के डच मंत्री वेन रोयेन को दुगूनी कीमत पर बेचा गया। यह एक 220 फीट लंबी आदर्श नाव थी। यह वास्तव में आस्ट्रिया की आर्कडचेस मारिया थेरेसा के लिए स्कॉटलैंड में बनवाई गई थी और एडमिरल ने इसे युद्ध के समय मिनी स्वीपर के रूप में उपयोग किया था।

मार्कोनी इस नाव का नाम साइंटिला रखना चाहते थे जिसका मतलब है चिनगारी। लेकिन अंग्रेजी शब्द में इसका उच्चारण सिंटिला होता, इसलिए उन्होंने इलेट्रा चुना, जो दुनियाभर की सभी भाषाओं में लगभग एक ही तरह से उच्चारित होता है। नाव में मार्कोनी के कार्य के लिए सभी उपकरण और यंत्र मौजूद थे। उन्होंने दिन-रात इसी नाव में बिताना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि इससे चंचल आंखों से होने वाले ध्यान भंग से बचे रहते हैं। उधर चूंकि घर बिक चुका था, इसलिए बी और उनके बच्चे इटली के होटल डे रसी में रह रहे थे।

काम के प्रति समर्पण से मार्कोनी का वैवाहिक जीवन पहले ही प्रभावित था और अब यह बिल्कुल ही बिगड़ चुका था। वे अपने बच्चों के साथ कम-से-कम समय बिता पाते थे, जो समुद्र में उनकी नाव देखने के लिए टकटकी लगाए रहते थे। और इसतरह दिन-ब-दिन मार्कोनी का अपने परिवार से मिलना कम होता चला गया।

Guglielmo-Marconi-elletra

1920 की सर्दी में अपने सहयोगी प्रसिद्ध ब्रिटिश रेडियो के जनक चार्ल्स सैमुअल फ्रैंकिन द्वारा डिजाइन किए गए रेडियो बीम एरियल की सहायता से मार्कोनी ने इंग्लैंड में शॉर्ट वेव रेडियो स्टेशन स्थापित किया। अगले साल 1921 की गर्मी में मार्कोनी ने अपने परिवार को क्रूज पर ले जाने का निर्णय लिया। मार्कोनी का बेटा इस समय का लंबे समय से इंतजार कर रहा था। इस यात्रा पर उन्होंने बी की छोटी बहन लीला को भी आमंत्रित किया। वे लोग वेनिस नदी में अमाल्फी ताओरमिना और मेसिना के तट के लिए निकले थे।

अपनी पहली डायरी 'माय फादर मार्कोनी' में डेगना ने इलेट्रा को बहुत-से सलून वाली बताया (नाव के कमरों को सलून के नाम से जाना जाता था)। इसमें एक छोटा-सा वायरलेस कक्ष भी था जहां हर कोई रसायन की गंध महसूस कर सकता था, यहां तक कि चार्ट-रूम में भी तेजाब की गंध आती थी। मुख्य सलून बहुत ही छोटा और उदासीन-सा था। इसमें एक पियानो भी था, मार्कोनी बड़े चाव से इसे अपने बच्चों के लिए बजाया करते थे, खासकर "बोहमे और मैडम बटरफ्लाय" नामक गीत।

नाव में वॉलनट पैनल वाली दीवारें थीं, जहां राजाओं और रानियों की तस्वीरें लगी थीं। डाइनिंग रूम सलून सबसे बड़ा था जहां खाने की खूशबू आती, यहां एक बड़ी टेबल को घेरे हुए आरामदायक कुर्सियां थीं। यह इकलौता सलून था जहां बड़ी खिड़कियां थीं जहां से समुद्र और जमीन का अच्छा नजारा दिखाई देता था। नाव में दो छोटे कक्ष भी थे, मार्कोनी के अनुसार ये उनकी बेटी और बेटे गियूलियो के लिए थे। वेजवुड ब्लू और व्हाइट के साथ बी और मार्कोनी का कक्ष अच्छा-खासा बड़ा था। नाव पर मेहमानों के लिए भी दो कक्ष थे, जहां बी की बहनें रह रही थीं।

Guglielmo-Marconi-calling

बी खुश थीं कि उनके वैवाहिक जीवन में अब भी सबकुछ ठीक-ठाक होने की उम्मीद बची है, लेकिन यह सोच वेनिस बंदरगाह पर इंतजार करती एक नौजवान महिला के नजर आने पर दब गई। जब मार्कोनी ने अपना घर बेचा तो बी को पक्का यकीन था कि कोई महिला उनके निर्णयों को प्रभावित कर रही थी। फिर भी, वे इस बात से भी निश्चिंत थी कि अगर ऐसा था भी तो भी मार्कोनी आखिरकार निश्चित ही पलट कर उनकी तरफ आएंगे।

मार्कोनी की गहरी दोस्त, रोम की प्रिंसेस एलिस टोरलोनिया बी और मार्कोनी के बीच संबंध सुधारने के लिए बहुत कोशिश कर रही थीं, इसलिए उन्होंने बी और उनके बच्चों के साथ कुछ समय बिताने का निर्णय लिया। बाद में उन्हें खुश करने के लिए वे इन्हें ड्यूविले लेकर गईं। मार्कोनी उन्हें लेने ड्यूविले आए, लेकिन इस समय तक यह कोई रहस्य नहीं रहा था कि उनका प्रेम संबंध चल रहा है। अखबारों ने 'मार्कोनी और एक विशिष्ट महिला' के शीर्षक से खबर छापी। मार्कोनी इस नौजवान लड़की से शादी करना चाहते थे जिसकी उम्र लगभग 17 साल थी। लेकिन बी की सलाह पर उन्होंने यह रिश्ता तोड़ दिया, क्योंकि उनके बीच उम्र का फासला बहुत अजीब लगता।

Guglielmo-Marconi-work

खैर, मार्कोनी ने अब अपना सारा समय व्यवसाय और प्रयोग को समर्पित कर दिया। उन्होंने अधिकतर समय अपनी नाव पर ही बिताना शुरू कर दिया जो अब उनका घर और प्रयोगशाला दोनों था। इस दौरान उन्होंने अपनी नाव से ही पार्टियां तथा बैठकें कीं और लोगों से संवाद किया। जून-जुलाई 1923 में उन्होंने शॉर्ट-वेव बीम प्रणाली पर काफी कार्य किए। हालांकि उनकी नाव लंबी जलयात्रा के योग्य नहीं थी, फिर भी प्रयोग करने के लिए उन्होंने एटलांटिक महासागर में एक लंबी क्रूज की। पोल्दू के स्टेशन के साथ लगातार संपर्क में रहते हुए वे केप वर्दे के द्वीप तक गए। यहां 2250 किमी की दूरी पर भी सिग्नल प्राप्त हो रहे थे, जो लगभग सौ गुना अधिक आवाज वाले थे। यानी उनका प्रयोग काम कर रहा था, और क्रूज पर रहते हुए ही उन्होंने घोषणा कर दी कि लंबी-दूरी के संचार की समस्या सुलझ गई है। उन्होंने रेडियो तकनीक के लिए एक नया चलन शुरू किया, लांग वेव ट्रांसमीटर से सस्ते शॉर्ट वेव ट्रांसमीटर का। यह एक बिल्कल नया चलन और नई खोज थी।

1924 में मार्कोनी कंपनी (मूलतः वायरलेस टेलीग्राफ एंड सिग्नल कंपनी लिमिटेड के नाम से प्रसिद्ध) को इंग्लैंड पोस्ट ऑफिस से इंग्लैंड और कॉमनवेल्थ कंपनियों के बीच शॉर्ट वेव संचार स्थापित करने का ठेका मिला।

Guglielmo-Marconi-love

1924 में मार्कोनी ने जब पूरी तरह घर जाना छोड़ दिया और उनका बच्चों से मिलना लगभग शून्य हो गया, तो इस दंपति ने तलाक के लिए आवेदन किया। कहा जाता है कि इसी समय बी ने अपने पड़ोसी मारक्विस लिबोरियो मारिग्नोली से विवाह कर लिया, जिसने उसी साल सितंबर में बी के सामने प्रस्ताव रखा था। शुरुआत में बी ने प्रस्ताव ठुकरा दिया था लेकिन मार्कोनी से तलाक के बाद उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। अब मार्कोनी फिर से विवाह करने के लिए स्वतंत्र थे। तलाक के बाद वे अक्सर बच्चों से मिलने जाने लगे, उन्हें छोटी यात्राओं और गर्मियों की छुट्टी में घुमाने ले जाते। इस दौरान इंग्लैंड में जिन बहुत-से लोगों से उनकी मुलाकात हुई उनमें से क्रिस्टिना बेज्जी स्केली उनके लिए खास साबित हुईं। वे अच्छे नैन-नक्श और नीली आंखों वाली एक खूबसूरत लड़की थी। मार्कोनी उनके सौम्य-शांत व्यवहार से प्रभावित थे। बी के विपरीत उनमें सार्वजनिक रूप से कैसे बात करें, कैसे व्यवहार करें और कैसे कपड़े पहने, ये सभी गुण थे। ऐसा शायद इसलिए था क्योंकि क्रिस्टिना एक संभ्रांत परिवार से थीं, उनके अभिभावक पोप के गार्जियन मोबिल के सदस्य थे। उनके पिता मारचेसे साचेती के पास रोम के विया गिवलिक में एक महल भी था।

जब भी मौका मिलता, मार्कोनी उनसे मिलने लगे। काम के मामले में वे निश्चिंत थे, क्योंकि उनका व्यवसाय बढ़ रहा था, उनके पास नाम और प्रसिद्धि थी। वे क्रिस्टिना से वायारेजियो बीच या सायूओया के छोटे-से रेस्तरां में मिला करते थे। इस समय मार्कोनी 52 साल के थे, लेकिन उनकी बेटी डेगना कहती हैं, "वे 'उम्र से परे' थे, उनका स्वास्थ्य शानदार था, ऊर्जा कमाल की थी, उनके सिर पर कुछ ही सफेद बाल थे। वे किसी भी महिला का स्वप्न थे।" उधर क्रिस्टिना 26 की थीं और कभी भी रोम से बाहर नहीं गई थीं।

कहा जाता है कि क्रिस्टिना से विवाह करने के बारे में मार्कोनी ने डेगना से सलाह ली। डेगना बहुत खुश थी, उन्होंने अपनी सहमति दे दी। डेगना जानती थीं कि मार्कोनी जीवन में बहुत अकेले हैं। डेगना चाहती थीं कि उनके पिता के जीवन में महिला का साथ हो, जो उनका साथ दे और उन्हें खुश रखे। बड़े होते हुए डेगना ने अपने माता-पिता के बीच संबंध खराब होते देखे थे। बी एक परंपरागत गृहणी थीं जिन्होंने कभी भी अपने पति के काम में दखलंदाजी नहीं की और न कभी प्रसिद्धि से तालमेल बिठा सकीं। मार्कोनी ने बी को कपड़े पहनने और बोलना सिखाया, यहां तक कि उन्हें मोर्स कोड भी सिखाया, लेकिन वे कभी भी उनके काम में रुचि नहीं ले पाईं।

इन सब मामलों में क्रिस्टिना सही महिला थीं सो मार्कोनी ने किसी भी प्रकार उनसे शादी करने का निर्णय लिया। परंतु क्रिस्टिना के माता-पिता इस संबंध से सहमत नहीं थे, क्योंकि मार्कोनी एक तलाकशुदा थे और उम्र में भी उनसे काफी बड़े थे। उनका नाम और प्रसिद्धि उनकी नजरों में किसी काम के नहीं थे। लेकिन इन सब बातों से क्रिस्टिना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

Guglielmo-Marconi-divorce

रोमन चर्च कानून के अनुसार मार्कोनी को तलाकशुदा नहीं माना जाता था। अपनी पहली शादी के निरस्तीकरण के बाद ही वे क्रिस्टिना से शादी कर सकते थे। रोम में इस निरस्तीकरण के अनुमोदन के तीन भाग थेः पहला - यदि कोई शादी नैतिक या शारीरिक दबाव में की गई है, दूसरा - सहमति न होना सिद्ध किया जा सके और तीसरा - यदि दंपति में से कोई गैर-कैथलिक कैथलिज्म में परिवर्तित हुआ है और दोनों शांतिपूर्वक साथ में रहने के लिए सहमत हैं।

मार्कोनी के वकील के अनुसार केवल दूसरी स्थिति यानी सहमति का अभाव ही ऐसा मुद्दा था जिसके आधार पर वे शादी नहीं कर सकते थे। मार्कोनी को सिद्ध करना था कि बी के साथ तलाक आपसी सहमति से हो रहा था। दूसरी तरफ वे सिद्ध कर सकते थे कि उनकी पहली शादी में दोनों पक्षों की ओर से बहुत-से मानसिक बंधन थे। यदि यह सिद्ध हो जाता तो पहली शादी समाप्त मानी जाएगी। लेकिन यह सिद्ध करने के लिए उन्हें गवाह की जरूरत थी। मार्कोनी को याद आया कि पहले बी की मां उनके प्रस्ताव से सहमत नहीं थीं क्योंकि मार्कोनी विदेशी थे, बी ने भी उनका प्रस्ताव यह कहकर ठुकरा दिया था कि वे उनसे प्यार नहीं करतीं। मार्कोनी को यह भी दिखाना था कि उनका बी के साथ समझौता हुआ था कि यदि शादी विफल होती है तो वे तलाक ले लेंगे।

यह सब सिद्ध करने के लिए मार्कोनी को बी से बात करनी थी तथा बी अब शादीशुदा थीं और अपने दूसरे पति से उनके पास फ्लेमिनिया नाम की बेटी भी थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि बी से कैसे संपर्क करें, इसलिए जून 1926 में उन्होंने अपनी समस्या से अवगत कराने के लिए बी को पत्र लिखा। बी के दूसरे पति ने बी को गवाही देने के लिए समझाया कि उन्हें मार्कोनी की खुशी के रास्ते में 'अवरोध' नहीं बनना चाहिए। अपने परिवार के लोगों, दोस्तों से बात करने और कई चिट्ठियों के आदान-प्रदान के बाद बी ने रोम की अदालत में मार्कोनी के लिए गवाही देने के लिए हामी भर दी। 27 अप्रैल, 1927 को सैक्रा रोटा एक्लेस्टियास्टिक ने 'गैर सहमति' के आधार पर मार्कोनी और बी के विवाह को अमान्य घोषित कर दिया।

Guglielmo-Marconi-happiness

12 जून, 1927 को 53 वर्षीय मार्कोनी ने क्रिस्टिना बेज्जी स्केली से विवाह कर लिया। 15 जून को एंगली, सैंटा मारिया डेगली के चर्च में एक धार्मिक समारोह आयोजित किया गया। मार्कोनी ने रायेती के निकट विला सैन माउरो में अपना हनीमून मनाया। अबकी मार्कोनी 28 साल बाद अटलांटिक के सफर पर गए थे। वे 'बाइएनकामानो' नामक जहाज पर अपनी नई पत्नी के साथ अक्टूबर में अमेरिका गए। नए दूल्हा-दूल्हन का स्वागत न्यूयॉर्क ने एक रोमन छुट्टी आयोजित करके किया। 20 जुलाई, 1930 को इस दंपति के यहां पुत्री का जन्म हुआ। अपने काम के अलावा मार्कोनी जिस चीज से सबसे अधिक प्यार करते थे, वह थी उनकी नाव, इलेट्रा और मार्कोनी ने अपनी इस बेटी को वही नाम दिया - इलेट्रा.

Guglielmo-Marconi-back-to-work

जैसे-जैसे समय बीता, मार्कोनी ने टेलीविजन की तकनीक में रुचि लेनी शुरू कर दी। उन्होंने EMI (इलेक्ट्रिक एंड म्युजिक इंडस्ट्रीज लिमिटेड) हाई डेफिनेशन सिस्टम को पर्याप्त सहयोग किया। उनकी कंपनी 1934 में टेलीविजन से जुड़ गई। इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग के साथ एक कैथोड ट्यूब पर तस्वीरें प्रदर्शित हो सके, इसलिए उन्होंने एक हाई डेफिनेशन टेलीविजन विकसित करने हेतु ईएमआइ से साझेदारी की। यह सिस्टम जॉन लोगी बर्ड का प्रतिद्वंद्वी था जिन्होंने इस हेतु मैकेनिकल सिस्टम विकसित किया था और नौ साल पहले ही 30-लाइन छवियां निर्मित की थीं। इसमें घूमने वाली डिस्क का उपयोग किया गया था और इन छवियों को अटलांटिक के पार भेजा गया था। लेकिन विकास और फ्लेक्सिबिलिटी के मामले में ईएमआइ-मार्कोनी सिस्टम अधिक सक्षम साबित हुआ और दोनों ने साथ मिलकर बर्ड को हरा दिया था।

इस समय काम में डूबे होने के बावजूद मार्कोनी अपने बच्चों से मिलने जाना नहीं भूलते थे। इसी दौरान क्रिस्टिना ने मार्कोनी को उन सम्मानों और उपाधियों को लेने के लिए मनाना शुरू कर दिया जो उनकी राह देख रहे थे। क्रिस्टिना ने उन्हें उनके दायरे और 'अत्यधिक व्यस्त' होने से बाहर निकाला। अब वे कैमरे के सामने जाना और पत्रकारों के अनंत सवालों के जवाब देना सीख रहे थे। क्रिस्टिना भी रिबन काटने और अपने पति की ओर से उद्घाटन करने में व्यस्त थीं। उन दिनों लोगों की नजर में इस शादी ने सिद्ध कर दिया कि पहली शादी की विफलता के लिए सिर्फ मार्कोनी ही जिम्मेदार नहीं थे।

Guglielmo-Marconi-death

खैर, मार्कोनी समुद्र के पास अपने घर इंग्लैंड में वापस आ चुके थे। उनकी बेटी डेगना के अनुसार जो व्यक्ति बूढ़ा नहीं होने वाला था, अब उसकी आंखों के नीचे झुर्रियां पड़ गई थीं और वह छड़ी के सहारे चलते थे। उनकी पत्नी हमेशा उनके साथ रहती थीं। समुद्र को देखते हुए दूर तक चहलकदमी करने वाले मार्कोनी को अब हवा के हल्के झोंके भी झकझोर देते। इसी दौरान उन्हें अपने सीने में दर्द महसूस होने लगा था। पहले तो उन्हें लगा कि उन्हें सर्दी हो गई है जिसके कारण उनके सीने में दर्द हो रहा है, लेकिन यह ठंड और दर्द बीतते दिनों के साथ बढ़ते ही चले गए। और जब वे लंदन पहुंचे तो ऐंठन और अधिक तेजी से बढ़ गई। लंदन में एक हृदयरोग विशेषज्ञ मिस्टर प्रिंस ने उनका 'एंजिना पेक्टोरिस' (तनाव या रक्त धमनियों में रक्त का प्रवाह ठीक से न होने कारण होने वाला छाती का दर्द) का इलाज किया।

लेकिन उनकी खराब होती सेहत उन्हें और प्रयोग करने से नहीं रोक पाई। 1933 की वसंत में वे फिर से काम पर लग गए थे। उन्होंने यात्राएं, भाषण और बैठकें पुनः आयोजित करनी शुरू कर दीं। लेकिन यह सिलसिला ज्यादा नहीं चला। एक दिन पेरिस और इटालियन फ्रंटियर के बीच एक यात्रा में उन्हें सोने के लिए बहुत कम समय मिला, परिणामस्वरूप सुबह नाश्ते के लिए क्रिस्टिना के पास जाते समय वे गिर पड़े। उस समय डेगना भी अपने पिता से मिलने गई हुई थीं, उन्हें एक वेटर ने बताया, "महामहिम की तबियत ठीक नहीं है।" डेगना दौड़ पड़ी और उसने अपने पिता को नाश्ते की टेबल पर आंखें बंद और गर्दन एक तरफ झुका हुए पाया। संयोगवश उसी जहाज में जेनोआ के डॉ. पेस भी यात्रा कर रहे कर रहे थे, उन्होंने आगे बढ़कर मदद की। मार्कोनी बेहोश थे, उन्हें उनकी बर्थ पर ले जाया गया। डॉ. पेस ने उन्हें एक इंजेक्शन दिया ताकि वे शांति से सो सकें। इतना ही नहीं, डॉ. पेस ने उनके साथ रोम तक चलने में भी नहीं हिचके।

रोम पहुंचने पर डॉ. पेस ने मार्कोनी को कुछ हफ्तों के लिए पूरे आराम की सलाह दी। यह उनके इटली के समुद्र से बाहर की यात्रा का अंत था। अब उनका समय घर पर आराम करते हुए बीत रहा था। 25 अप्रैल, 1936 को अपने 62वें जन्मदिन पर मार्कोनी ने अपने बड़े भाई अलफांसो की मौत की खबर सुनी, उनकी मौत दिल की बीमारी से हुई थी, उनकी मां की मौत भी इसी बीमारी से हुई थी और अब मार्कोनी को भी यही बीमारी थी। इस समय मार्कोनी लंदन जाना चाहते थे, लेकिन उनके गिरते स्वास्थ्य ने इसकी इजाजत नहीं दी। वे अब भी अपनी नाव से लंदन जाना चाहते थे लेकिन मई में उन्हें तीन छोटे हार्ट अटैक हुए, इसलिए डॉक्टरों ने उन्हें रोम के नजदीक ही रहने की सलाह दी।

और 20 जुलाई, 1937 की सुबह 3 बजकर 45 मिनट पर रोम के वाया कानडियोटी के घर में मार्कोनी ने अंतिम सांस ली। शोक-सभा अगले दिन शाम छः बजे हुई। एक तत्कालीन अखबार के अनुसार मार्कोनी की शवयात्रा में हजारों अधिकारी और सामान्य लोग शामिल हुए। सैंटा मारिया डेगली एंजेली चर्च ले जाने से पहले उनका शव पूरे रोम में घुमाया गया। कोई फूल या मोमबत्ती नहीं थी - बस लोगों का हुजूम था इस महान व्यक्ति को श्रद्धांजलि देने के लिए। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए दुनियाभर के रेडियो स्टेशनों ने दो मिनट का मौन रखा और पूरा जापान तीन मिनट के लिए खड़ा रहा। जनरल पोस्ट ऑफिस के ऑपरेटर अपने ट्रांसमीटरों के पास खड़े रहे और अपने स्विच-बोर्ड बंद कर दिए। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सबसे सटीक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अपने एयरवेव्ज को बंद कर दिया। पूरे यूनाइटेड किंगडम में कोई रेडियो संदेश भेजा या प्राप्त नहीं किया गया, सभी बीबीसी वायरलेस स्टेशन बंद हो गए।

वस्तुतः यह ऐसी श्रद्धांजलि थी जो पहले कभी नहीं देखी गई, तथा यह एक ऐसे व्यक्ति के लिए थी जिसने दुनिया के संचार करने के तरीके को बदल कर रख दिया था। बाद के वर्षों में मार्कोनी की खोज मनोरंजन और जानकारी का मोड बन गई। उन्होंने लोगों को सिखाया कि जो चीजें हम देख नहीं सकते, उनका भी होना संभव बना सकते हैं। उनके ही वायरलेस रेडियो ने वायरलेस स्पेक्ट्रम या वायरलेस तकनीक को जन्म दिया।

1912 में "रेडियो" शब्द संयुक्त राष्ट्र नेवी द्वारा अपना लिया गया और उसके बाद यूरोप और एशिया द्वारा इसे ग्रहण किया गया ताकि इसे अन्य वायरलेस संचार तकनीकों से अलग रखा जाए। लेकिन ब्रिटिश कॉमनवेल्थ देशों ने आमतौर पर 20वीं सदी के मध्य तक "वायरलेस" शब्द का प्रयोग जारी रखा, हालांकि 1920 में प्रकाशन के समय से ही बीबीसी पत्रिका "रेडियो टाइम्स" कहलाती थी।

बीतते समय के साथ इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली में शामिल यह तकनीक अनवरत रूप से उतनी विकसित हो चुकी है, जहां हम आज हैं। आज की रेडियो या वायरलेस प्रणाली अपने शुरुआती 80 के दशक से मीलों आगे है।

guglielmo-marconi-death-img

वायरलेस संचार ने कार्य करने के वातावरण और लोगों और कार्यबल के आवागमन के स्वरूप को बदल दिया है। किसी निश्चित स्थान पर अटके होने या औपचारिक कार्य-आधारित वातावरण के बजाय, अब पेशेवर या आमलोग अपनी रुचि या सुविधानुसार कार्य कर सकते हैं, संचार कर सकते हैं, खुद का मनोरंजन कर सकते हैं वे कहीं से भी, कभी भी अपना वायरलेस जीवन बिता सकते हैं।

“अगर आप विश्वास करते हैं तो आप कर सकते हैं, और अगर आप प्रयास करते हैं तो निश्चित ही कर सकते हैं”

गुल्येल्मो मार्कोनीकी बायोग्राफीज | 0 टिप्पणी >>

0 टिप्पणी

एक टिप्पणी छोड़ दो

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| आवश्यक क्षेत्रः चिह्नित कर रहे हैं|


*:

*:

:

*:



Proudly owned by Aatman Innovations Pvt. Ltd. Mumbai, India.   |   प्रायवेसी पॉलिसी   |   डिस्कलेमर   |   साइट मैप   |   Best View - (1280x720) Latest Browsers
Feedback/Testimonials
* इस वेबसाइट के किसी भी विवरण का किसी भी रूप में अंशतः या पूर्णतः निजी हित में उपयोग करते पाए जाने वाले व्यक्ति/कंपनी/संस्था के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।