आविष्कार
जरा जगत के मूल स्वरूप की कल्पना करें और उत्तर दें कि क्या अनुसंधान उस अवस्था में नहीं हो रहा था? क्या हम उसी आदिम अवस्था में नहीं रह गए होते, जिस अवस्था में हम दुनिया में लाए गए थे? आपका उत्तर सिर्फ ‘‘हां’’ में होगा। इस तरह हम अपने को चाहे जितना प्रगतिशील, आधुनिक और समुन्नत मान लें, लेकिन इसका श्रेय उन आविष्कारों को ही जाता है जिनने इस विश्व का रूप बदल कर हमें चंद्र तथा मंगल तक पहुंचने में मदद की हैं। उनमें से बहुतों ने तो अपना कोई चिह्न भी नहीं छोड़ा है जिससे हम उनका इतिहास जान सकें, फिर भी जहां तक संभव हो सका है हम उन आविष्कारों के इतिहास को आप तक लाने का प्रयास किया है जिनके कारण हमारा जीवन सफलता और उन्नति के मार्ग पर लग पाया है। हमारे आविष्कारों की दुनिया में पधार कर खुद का अन्वेषण करें......