मनोविज्ञान
मन के अस्तित्व का जबसे पता चला है, तब से लेकर अबतक लगभग हर व्यक्ति के लिए यह सर्वाधिक रहस्यमय रहा है तथा सर्वाधिक गलतफहमियां भी इसी के बारे में रही है। जैसे जीवन का विकास क्रमिकरूप से होता है, ठीक उसी तरह हमारे मन का भी कोरे अभिधारणा से लेकर सूक्ष्म बौद्धिक विश्लेषण-क्षमता तक का विकास हुआ है। हम यहां मनोविज्ञान का इतिहास लेकर उपस्थित हैं जो वस्तुतः मन तथा उसके व्यवहार का शास्त्र है साथ ही इसमें शताब्दियों पूर्व तक के मनोवैज्ञानिकों एवं उनके कार्यों का यथोचित लेखा-जोखा भी संकलित है। यह अनादि काल से मनुष्यों द्वारा झेले जा रहे समस्याओं का एक क्रमबद्ध अध्ययन है तथा इसमें समस्याओं के कारण-तत्व एवं उनकी कार्यप्रणाली की विवेचना भी की गई है। अतः आइए हमारे साथ इस विषय की परिक्रमा करें ताकि मानव-मन के द्वारा अबतक की यात्रा तथा उनलोगों के उल्लेखनीय कार्यों की पड़ताल की जा सके जिन्होंने हमें हमारी नकारात्क सोच से छुटकारा दिलाकर अपना जीवन खुशहाल व शांतिपूर्ण बनाने में हमें मदद की हैं।