Copyright © 2012. ---
एनीमिया एक ऐसी अवस्था है जिसमें खून में रेड ब्लड सेल्स या हिमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है। सामान्यतः रेड ब्लड सेल्स और हिमोग्लोबिन का स्तर स्त्री और पुरुष दोनों में अलग-अलग होता है। अगर पुरुषों के खून में हिमोग्लोबिन का लेवल हर 100 ml. के पीछे 12.0 ग्राम से भी कम है तो फिर उस कंडीशन को ऍनीमिया कहते हैं और उस व्यक्ति को अनिमिक कहते हैं। सेल्स के कम निर्माण होने की वजह से अथवा सेल्स का नाश होने के कारण यह मात्रा कम हो जाती है।
एनीमिया के मुख्य कारण ये हैं:-
एक्सेसिव्ह ब्लड लॉस :- मासिक धर्म में ज्यादा रक्तस्राव होने से यह होता है। पाचन संबंधी (डायजेस्टिव) या मूत्रपथ (युरिनरी ट्रैक्ट) में रक्तस्राव होने से, ऑपरेशन, ऐक्सिडंट अथवा कैन्सर में भी बहुत ज्यादा रक्तस्राव होता है।
रेड ब्लड सेल्स का कम निर्माण होना :- यह ‘इनहेरिटेड’ या ‘ऍक्वायर’ दोनों वजह से होता है। ‘इनहेरिटेड’ का मतलब होता है माता-पिता से बच्चों में आगे जाना और ‘ऍक्वायर्ड’ का मतलब है कुछ कारणों की वजह से विकसित होना जैसे कि पोषक आहार ना लेने से अथवा कुछ दूसरी बीमारियों की वजह से। आयरन, जो कि आरबीसी (लाल रक्त कोशिकाएं) और हिमोग्लोबिन के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होता है, की भोजन में कमी या अभाव होना इसका प्रमुख कारण है। आरबीसी का निर्माण बोन मॅरो में होता है जिसके लिए प्रोटीन की जरूरत होती है जिसे (इरिथ्रोपॉइटिन) कहा जाता है और इसका लेवल कम होने से एनीमिया होता है।
कुछ बीमारियां जैसे (एचआयवी/एडस्), कैन्सर और किडनी की बीमारियों के कारण भी आरबीसी का निर्माण होना कठिन हो जाता है। क्योंकि इन बीमारियों में इन्फेक्शन होता है और कुछ खास दवाइयां इनमें रुकावट पैदा करती हैं।
गर्भावस्था के दौरान आयरन और फोलिक एसिड की मात्रा शरीर में कम हो जाने के कारण भी एनीमिया हो सकता है।
कुछ बच्चों को जन्म से ही ‘अप्लास्टिक एनीमिया’ होता है। कुछ खास दवाइयों के कारण, टॉक्सिन्स और कुछ बीमारियों की वजह से वे पर्याप्त मात्रा में आरबीसी उत्पन्न नहीं कर पाते।
रेड ब्लड सेल ज्यादा नष्ट होना :- रेड ब्लड सेल्स या तो ‘इनहेरिटेड’ अथवा ‘ऍक्वायर’ कंडीशन की वजह से नष्ट होते हैं। आरबीसी का नाश होने का एक कारण स्प्लीन का बड़ा होना या रुग्न होना है। यह शरीर का एक ऐसा अंग है जो घिसे हुए आरबीसी को शरीर के अंदर से बाहर निकालकर फेंकता है। लेकिन जब यह रुग्न हो जाता है तब यह नॉर्मल आरबीसी को भी बाहर कर देता है जिसकी वजह से एनीमिया होता है। दूसरे कारण जिसमें शामिल हैं: थैलेसेमिया, एन्झाइम की कमी, इम्यून डिसऑर्डर, ब्लड ट्रान्सफ्यूजन मेडिकेशन्स इत्यादि।
एनीमिया एक साधारण-सी अवस्था है जो किसी में भी और कभी भी पैदा हो सकती है। फिर उसका धर्म, उम्र, सेक्स या रेस कुछ भी हो। लेकिन यह ज्यादातर स्त्रियों में होता है। यह खासकर मां बनने की उम्र में, हेवी मेन्स्ट्रूएशन, प्रेग्नन्सी के दौरान और बच्चे को जन्म देते समय डेवलप होता है। शिशुओं में 6 महीने तक अगर आयरन डेफिशिअन्सी हो, सिर्फ वे ब्रेस्ट फेड हो या ऐसे फॉर्म्यूला मिल्क लेते हो जिसमें आयरन नहीं होता तो उनमें एनीमिया डेवलप होने की संभावना बढ़ जाती है।
मुख्य जोखिमकारक फॅक्टर्स जिसमें शामिल है आयरन, विटामिन और मिनरल डेफीशियन्सी सर्जरी या इन्जरी (चोट), लंबी अवधि की गंभीर बीमारियां और इन्फेक्शन्स और फॅमिली हिस्ट्री।
एनीमिया का सबसे सामान्य लक्षण है थकान। दूसरा लक्षण जो एनीमिया में दिखाई देता है वो है: पीली त्वचा, सांस की तकलीफ, चक्कर आना, सिरदर्द, हाथ-पैर ठंडे पड़ना और सीने में दर्द। माइल्ड एनीमिया में ये लक्षण कम दिखाई देते हैं या फिर कुछ भी लक्षण दिखाई नहीं देते।
पहले तो डॉक्टर यह चेक करते हैं एनीमिया के सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं या नहीं अथवा दूसरी कंडीशन चेक करते हैं जैसे फैमिली हिस्ट्री और डाइट की कमतरता। इसके बाद ही वे एनीमिया है या नहीं, यह निश्चित करते हैं।
एनीमिया के लिए शारीरिक जांच :- तेज अथवा अनियमित हार्टबीट, अनियमित सांस का पैटर्न और बढी हुई प्लीहा की जांच।
विभिन्न ब्लड टेस्ट :- एनीमिया की तसल्ली के लिए रक्त सैंपल को कम्प्लीट ब्लड काउन्ट (सीबीसी) के लिए भेजी जाती है। जिसमें आरबीसी, प्लेटलेट्स, हिमोग्लोबिन इत्यादि का लेवल देखा जाता है। लो काउन्ट और लेवल एनीमिया दर्शाता है।
दूसरे डायग्नॉस्टिक टेस्ट :- जैसा कि आप पढ़ चुके है, एनीमिया कई कारणों से होता है; इसलिए यह कई प्रकार का होता है। इसलिए एनीमिया की मौलिक पहचान हेतु और भी अनेकों तरह के टेस्ट डॉक्टरों द्वारा करवाए जाते हैं ताकि अल्पता की वास्तविक स्थिति का पता चले या कोई अन्य तकलीफ हो तो वह सामने आए या फिर बोन मैरो के आरबीसी उत्पन्न करने की क्षमता का सही-सही पता चले।
कारण और लक्षण के आधार पर एनीमिया के विभिन्न प्रकार होते हैं :-
(1) आयरन डेफिशियन्सी एनीमिया
(2) अप्लॉस्टिक एनीमिया
(3) ब्लड लॉस एनीमिया
(4) सिकल सेल एनीमिया
(5) पर्निशस एनीमिया
(6) फोलिक एसिड एनीमिया
(7) हेमोलाइटिक एनीमिया
(8) फानकनी एनीमिया
(9) डायमंड ब्लैकफॅन एनीमिया
(10) थैलेसेमिया (मेजर या माइनर)।
एनीमिया का इलाज, उसका टाइप और उसकी तीव्रता और बीमारी कौन-सी है, उसपर निर्भर होता है। डाएटरी रेमिडीज में शामिल है-
डाएटरी चेंजेस :- अगर एनीमिया आयरन डेफिशियन्सी की वजह से है तो अच्छा आहार जिसमें पालक, हरी सब्जियां, मटर, प्रून्स, लेन्टिल्स, बीन्स, आयरन से युक्त ब्रेड और सेरल, सोयाबीन और टोफू इत्यादि जिसमें शामिल हो, उपयुक्त होता है। फोलिक एसिड सप्लीमेंट भी फायदेमन्द होता है उसके साथ विटामिन सी खाने की सलाह की जाती है।
बी12 :- बी12 सप्लीमेन्ट लेने से और आहार में लीवर, मीट, मिल्क या अन्य डेअरी प्रॉडक्ट्स, सोया ड्रिंक्स, बीफ, फिश और पोल्ट्री के पदार्थ खाने से यह कमी दूरी हो सकती है।
हां। एनीमिया को रोका जा सकता है, अगर यह किसी डेफिशियन्सी की वजह से हो। जैसे आयरन, विटामिन्स और मिनरल्स की वजह से है तो उसे हेल्दी और बैलेन्स डाएट के जरिए दूर रखा जा सकता है। अगर ऐसे कोई एनीमिया के चिह्न या लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। वे शायद आपको दवाइयां लिखकर दें अथवा आपकी चालू दवाइयां बदलकर भी दे सकते हैं जिसके कारण एनीमिया हुआ है।
एनीमिया जो इनहेरिटेड (आनुवांशिक) होते हैं उसे दूर नहीं किया जा सकता। लेकिन डॉक्टर इसके लक्षणों को नियंत्रण में रखने के लिए जरूर दवाइयां देते हैं और अगर एनीमिया किसी पुरानी बीमारी की वजह से है तो उस बीमारी की पहले जांच करानी चाहिए।
एनीमिया कोई रोग नहीं है बल्कि एक अवस्था है जिसे ठीक किया जा सकता है। जैसे आयरन और दूसरी डेफिशियन्सीज को और ब्लड लॉस को नियंत्रित कर तथा डाएट के जरिए इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ एनीमिया जैसे सिकल सेल और अप्लॉस्टिक एनीमिया और पर्निशस एनीमिया घातक सिद्ध हो सकते हैं। इनका जल्दी निदान होना जरूरी होता है।
एलेक्जेंडर ग्राहम बेल, जो टेलीफोन के आविष्कारक थे, की मौत पर्निशस एनीमिया की वजह से हुई। इसका कारण था विटामिन बी12 की डेफिशियन्सी और उनके शरीर के अंदर विटामिन बी12 का अवशोषण कम होना।