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असाइटीज उस कंडीशन को कहते हैं जिसमें खराब तरल पदार्थ ऍबडॉमिनल ऑर्गन्स यानी पेट के आंतरिक अंगों में जमा हो जाता है। यह द्रवपदार्थ (Fluid) पेरीटोनियल कैविटी में जमा होता है जो कि ऍबडॉमिनल ऑर्गन्स की मेम्ब्रैन लाइनिंग होती है। असाइटीज की स्थिति लीवर के सिरोसिस, मानसिक आघात, ऍपेन्डिसायटिस या कुछ अन्य बीमारियों की वजह से पैदा होती है। पेट के अन्दर खराब तरल पदार्थ मौजूद होने की वजह से मरीज का पेट एक बड़े गोलाकार बैग जैसा दिखाई देता है।
असाइटीज की बीमारी ज्यादातर पुरानी लीवर डिजीज की वजह से होती है लेकिन साथ ही यह नीचे दिए गए कारणों की वजह से भी हो सकती है:-
* खून में ऍल्ब्युमिन (प्रोटीन) की मात्रा कम होना।
* लीवर से होकर गुजरनेवाली नसों में प्रेशर बढ़ना। इस कारण द्रवपदार्थ का प्रवाह तीव्र होता है। यह प्रेशर हायपरटेन्शन की वजह से होता है जो कि सिरोसिस में घाव लगने के कारण होता है।
* जॉन्डिस अथवा हेपटाइटिस।
* किडनी या हार्ट फेल्यर।
* हृदय के अन्दर के कोश में मौजूद रेशों का सख्त होना।
जब बहुत कम फ्लूइड जमा होता है तब असाइटीज के चिह्न और लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन जब इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तब नीचे दिए लक्षण दिखाई देने लगते हैं:
* वजन अचानक बढ़ना।
* पेट में बेचैनी होना या पेट बढ़ना।
* सांस की तकलीफ, टखने में सूजन, पेट की त्वचा पर खिंचाव, पेट पर टैपिंग करने के बाद थोड़ी-सी आवाज होना, उभरी हुई या सपाट नाभि।
ऊपर दिए गए लक्षणों के अलावा नीचे कुछ टेस्ट दिए गए हैं जो असाइटीज को डायग्नॉज करने में मदद करते हैं:
* कम्प्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्कैन, जो सीटी स्कैन के नाम से मशहूर है। इस तकनीक की सहायता से पेट के अंदरूनी अंगों की तस्वीर बड़े और स्पष्ट दिखाई देते हैं।
* इन्टरफियरॉन नामक प्रोटीन की मौजूदगी का पता लगाना जिसकी वजह से इन्फेक्शन होता है।
* पेरेसेन्टीसिस जिसमें इन्सिशन यानी पेट पर छोटा-सा चीरा लगाकर फ्लूइड को बाहर निकाला जाता है और इस सैम्पल की जांच की जाती है।
* अल्ट्रा सोनोग्राफी - जिसमें पेट पर जेल लगाकर साउंड वेव्स (ध्वनि तरंगों) के जरिए रक्तप्रवाह को नापा जाता है और मॉनिटर पर उसकी उनकी तस्वीरें ली जाती है।
* डॉक्टर फीजिकल एक्झामिनेशन भी करते हैं ताकि प्रेग्नन्सी, गैस, ओबेसिटी और असाइटीज की बीमारी में फर्क कर सकें।
असाइटीज के प्रकार और उसकी तीव्रता दूसरी बीमारियों पर भी निर्भर करती है जैसे कि -
सिरोसिस :- इसमें लीवर के टिश्यूस को हानि पहुंचती है जिसके कारण कुछ बीमारियां होती हैं और इस वजह से शरीर में बदलाव आते हैं। इसमें किडनी युरिन में अतिरिक्त निर्माण होनेवाले सोडियम को बाहर फेंकने में असमर्थ होती है। 80% प्रतिशत असाइटीज इसी वजह से होता देखा गया है।
कैन्सर :- 10 प्रतिशत केसेस में इसका कारण कैन्सर होता है। कैन्सर की वजह से शरीर के किसी भाग पर इसका परिणाम होता है।
पैन्क्रिएटिक असाइटीज और काइलस असाइटीज में भी शरीर में फ्लूइड जमा होता है।
इन्डोक्रिन और रेनल असाइटीज यह दुर्लभ विकार है। यह ज्यादातर स्त्रियों में पाया जाता है। खून में अलब्यूमिन का लेवल कम होने की वजह से यह बीमारी होती है।
असाइटीज का इलाज संभव है। लेकिन जिस बीमारी की वजह से असाइटीज हुआ है उसे पहले जानना जरूरी होता है। ताकि सही उपचार किया जा सके। हल्का या गंभीर रूप का असाइटीज नमक कम खाने से ठीक हो सकता है।
मूत्रवर्धक दवाएं लेने से तथा पेरेसेन्टीसिस से भी यह बीमारी दूर हो सकती है। लेकिन जब असाइटीज दूसरी बीमारियों की वजह से होता है जो जानलेवा होती है जैसे कि हेपटाइटिस, सिरोसिस, कैन्सर इत्यादि, तो फिर पहले घातक बीमारी को ध्यान में रखना जरूरी होता है तथा उसका सही उपचार करना जरूरी होता है।
अगर लीवर का सिरोसिस बहुत ज्यादा शराब पीने से अथवा कॉपर के सम्पर्क में आने से हुआ है तो फिर मरीज को शराब पीना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। लेकिन फिर कितनी हानि पहुंची है, इस पर इस बीमारी की तीव्रता निश्चित की जाती है। इसी तरह अगर कैन्सर और दूसरी बीमारियों को इलाज से ठीक किया जाए तो भी असाइटीज की तीव्रता कम हो सकती है। अगर लीवर को बहुत ज्यादा हानि पहुंची है तो फिर एक ही पर्याय बच जाता है, वह है लीवर ट्रान्सप्लांट, जिसमें दुर्भाग्यवश डोनर से ज्यादा उसे पानेवालों की संख्या है।
ज्यादातर केसेस में असाइटीज सिरोसिस की वजह से होता है। इसका कारण है शराब का ज्यादा सेवन। इसे कम पीना चाहिए।
शराब का बुरा असर पुरुषों के मुकाबले स्त्रियोंपर ज्यादा होता है। इसलिए पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों को कम पीना चाहिए।
* हेपेटाइटिस से बचें और उसके लिए टीकाकरण (वॉक्सिनेशन) कराएं।
* डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा ना लें।
* नसों में इस्तेमाल हुई सुइयों को शेयर ना करें।
* नमक कम खाएं ताकि शरीर में सोडियम कम जाए।
* डॉक्टर की सलाह से ही डाइयुरेटिक दवाइयां लें।
हां! लीवर से संबंधित सिरोसिस का उपचार करने के लिए डॉक्टर होते हैं जिन्हें हेपेटोलॉजिस्ट कहते हैं जो आपका इलाज कर सकते हैं। अगर शराब पीने की वजह से लीवर का सिरोसिस है तो उसके लिए काउन्सलर और रिहैबिलिटेशन सेंटर्स मौजूद हैं जो आपकी शराब पीने की आदत को छुड़वा सकते हैं।
बीमारी का और उसके कारणों की जांच करके डॉक्टर उन एक्सपर्ट डॉक्टर का सुझाव देते हैं जो आपका इलाज कर सकते हैं। जैसे अगर कैन्सर की वजह से असाइटीज हुआ है तो ऑनकोलॉजिस्ट का सुझाव दिया जाता है।
लेजेंडरी हिन्दी फिल्म ऐक्ट्रेस मीना कुमारी की मौत बहुत कम उम्र में हुई। वह उस समय 40 साल की थीं। लीवर के सिरोसिस की वजह से 31 मार्च 1972 को उनकी मौत हुई। बचपन से ही मीनाकुमारी एक प्रतिभाशाली ऐक्ट्रेस थीं। उन्होंने स्टारडम हासिल किया। लेकिन वह दिल-ही-दिल में दु:खी थी और अपने पति से अलग हो जाने के कारण तथा दूसरे कारणों की वजह से वह बहुत ज्यादा शराब पीती थीं। बहुत शराब पीने के कारण उन्हें सिरोसिस और असाइटीज की बीमारी हो गई और इसी कारण उनकी मौत हुई। उनके लीवर को जो हानि पहुंची थी उसे सुधारा नहीं जा सका था।