Steve-jobs-hadding

-    Text Size    +

 

Content on this page requires a newer version of Adobe Flash Player.

Get Adobe Flash player

 

 

 

inspirational-life

5 अक्टूबर, 2011 को स्टीव जॉब्स के गुजरने के बाद ऑनलाइन की दुनिया में एक कार्टून चित्र काफी ज्यादा आदान-प्रदान और ईमेल किया गया।उसका शीर्षक थाः तीन सेब जिन्होंने दुनिया बदल दी, उस कार्टून में हौवा, आइजक न्यूटन और स्टीव जॉब्स के हास्यचित्र थे।सच तो ये है कि पहले दो सेब स्टीव जॉब्स के सेब से जुड़े थे, मतलब यह कि आखिरी सेब भी पहले दो सेबों जितना ही प्रभावपूर्ण था।कार्टून ट्वीटर और फेसबुक उपयोगकर्त्ताओं के बीच तत्क्षण ही लोकप्रिय हो गया था।

हमने सुना और पढ़ा है : हौवा ने आदम को सेब का क्या करने को कहा, पेड़ से गिरते हुए एक सेब ने कैसे न्यूटन को सोचने पर मजबूर किया; लेकिन स्टीव जॉब्स ने सेब को लेकर कुछ ऐसा किया जिसके बारे में हमलोग अभी भी बातें किया करते हैं।

स्टीव जॉब्स, जो अपने असली नाम स्टीवन पॉल जॉब्स से कम ही जाने जाते हैं, एप्पल और पिक्सर एनिमेशन स्टूडियो के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे।अपने प्रेरक और प्रभावशाली कैरियर में इस करिश्माई कारोबारी व्यक्ति और डिजाइनर ने कंप्यूटर और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।2006 में जब डिज्नी ने पिक्सर को अधिगृहित किया (खरीदा) तो उस समय वे वाल्ट डिज्नी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल थे।एप्पल के उत्पादों के माध्यम से उन्होंने पर्सनल कंप्यूटर क्रांति लाई और हमारे संगीत सुनने, फिल्में देखने और मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के अनुभवों को बेहतर ढंग से बदल दिया।

 

आर्थर शीबल की बेटी जोआनी शीबल विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में स्नातक की छात्रा थी।उनके पिता जर्मन मूल के थे जो ग्रीन-बे के बाहरी इलाके में आकर बस गए थे।बसने के शुरुआती दिनों में शीबल के पास एक मिंक-फार्म(उदबिलाव पालन केंद्र) था और उन्होंने रियल एस्टेट और लैंडस्कैप बनाने सहित दूसरे व्यवसायों में भी अपना हाथ आजमाया था।

जोआनी की परवरिश कैथोलिक परंपराओं के अनुसार हुई थी।उसके पिता उनके रिश्तों को लेकर काफी सजग थे।उन्होंने उसके पहले प्यार अब्दुलफतह जंदाली को पूरी तरह नामंजूर कर दिया क्योंकि वह लड़का कैथोलिक नहीं था।अब्दुलफतह जंदाली एक सीरियन था और एक मुस्लिम परिवार के नौ बच्चों में सबसे छोटा था।वह विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में शिक्षण सहायक के तौर पर कार्य करता था।वह एक बहुत ही अच्छे व संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता था जिसका दमश्कस और होम्स में काफी प्रभाव था।वे इतने अमीर और प्रभावशाली थे कि एक समय ऐसा भी आया जब वे अपने क्षेत्र में गेहूं की कीमत नियंत्रित करने लगे थे।उनकी मां एक परंपरागत मुस्लिम महिला और एक रुढ़िवादी गृहिणी थी।जंदाली के घर में शिक्षा को हमेशा से काफी तरजीह दी जाती थी।इसलिए उन लोगों ने अपने बेटे अब्दुलफतह को एक ईसाई बोर्डिंग स्कूल भेजा, बाद में एक अंडरग्रेजुएट डिग्री के लिए बेरुत स्थित एक अमेरिकन विश्वविद्यालय में और अंत में राजनीतिशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने के लिए विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय भेजा।

अब्दुलफतह और जोआनी विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में मिले और प्यार में पड़ गए।1950 के दौर में पारंपरिक ईसाई समाज में एक मुस्लिम लड़के और एक कैथोलिक लड़की के बीच शादी की स्वी।ति नहीं थी।लेकिन जैसा कि लोग कहते हैं, ’प्यार अंधा होता है’, नये प्रेमियों को कोई भी रोक नहीं सका।जब यह युगल तेइस साल का था, वे 1954 की गर्मियों में अब्दुलफतह के सीरिया स्थित घर होम्स चले गये।वहां जोआनी ने सीरियन भोजन बनाना सीखा।दो महीने बिताने के बाद जब वे वापस लौटे तो जोआनी को पता चला कि वह गर्भवती है।जहां एक तरफ एक नयी जिन्दगी शुरू होने को थी, वहीं दूसरी तरफ जोआनी के पिता मर रहे थे।जोआनी के पिता आर्थर शीबल एक पारंपरिक ईसाई थे और उन्होंने अब्दुलफतह से शादी करने की स्थिति में उसे घर से निकाल देने की धमकी दी।गर्भवती जोआनी जल बिन मछली की तरह तड़पकर रह गई थी।उस समय समाज बगैर शादी के पैदा होने वाले बच्चे को स्वीकार नहीं करता था और कैथोलिक चर्च गर्भपात की निंदा करता था।इसलिए वह सान फ्रांसिस्को चली गई।वहां उसे एक डॉक्टर ने सहारा दिया जो अविवाहित मांओं की देखभाल करता था अैर उनके बच्चों को गोद लिए जाने में मदद करता था।

 

फरवरी, 1955 को जोआनी ने एक बच्चे को जन्म दिया।लेकिन पिता की नाजुक तबीयत और खराब न हो जाए, इसकी परवाह करते हुए उसने बच्चे को गोद लेने के लिए दे आई।हालांकि उसकी सिर्फ एक ही शर्त थी और वो ये कि बच्चे को गोद कॉलेज के स्नातकों द्वारा ही लिया जाना चाहिए।एक वकील और उसकी पत्नी उस बच्चे को गोद लेने के लिए आये, लेकिन यह कहते हुए मना कर दिया कि वे एक लड़की को गोद लेना चाहते हैं।अगला दम्पति पॉल और क्लारा जाब्स थे जिन्होंने हाई स्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी।पॉल को यंत्रों से जुनूनी प्यार था और क्लारा एक मुनीम थीं।ये पता चलने पर कि दम्पति ने स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं की है, जोआनी ने गोद लेने संबंधी कागजात पर दस्तखत करने में काफी वक्त लिया।उसके दिमाग में कहीं यह बात चल रही थी कि अगर कहीं उसके पिता गुजर जाते हैं तो वह बच्चे को अपने साथ रख सकती है।प्रसिद्ध गायक जॉन लेनन के  शब्दों में- जब आप दूसरी योजनाएं बनाने में व्यस्त होते हैं, उस दौरान जो आपके साथ होता है वही जिन्दगी है।उसके पिता बच गए।सोच विचार में काफी वक्त गंवाने के बाद आखिरकार जोआनी ने इस वादे के साथ कागजात पर दस्तखत किये कि गोद लेने वाले माता-पिता को बच्चे को कॉलेज में स्नातक तक की शिक्षा दिलवानी होगी।इधर गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होने के दो-चार दिन बाद ही आर्थर शीबल की मौत हो गई।उधर शादी के लगभग नौ सालों के बाद क्लारा और पॉल जॉब्स का दामन खुशियों से भर गया था।उन्होंने उस बच्चे का नाम स्टीवन पॉल जॉब्स रखा।

पिता की मौत के बाद अगस्त 1955 में जोआनी ने क्रिसमस के तुरंत बाद अब्दुलफतह से शादी कर ली।एक साल बाद उनके घर में एक बच्ची ने जन्म लिया जो बाद में बड़ी होकर प्रसिद्ध उपन्यासकार मोना सिम्पसन बनी।हालांकि उनकी शादी लम्बे समय तक नहीं चली और बहुत जल्द 1962 ई0 में तलाक हो गया।

 

 

 

स्टीव के पालक पिता पॉल रिनहोल्ड जॉब्स जर्मन मूल के थे।एक शराबी पिता द्वारा परवरिश होने के बावजूद वे एक शांत और विनम्र स्वभाव के व्यक्ति थे।पॉल का पालन-पोषण जर्मनी के एक शहर विस्कॉन्सिन में डेरी फॉर्म में हुआ।उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई अधूरी छोड़ दी, मकैनिक के रूप में कुछ समय तक काम किया और फिर उन्नीस साल की उम्र में तट-रक्षक सेना से जुड़ गये।वे एक बेहतरीन मिस्त्री और इस्तेमाल की गई कारों (यूज्ड कार) के सेल्समैन थे।द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तट रक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद पॉल ने एक वित्तीय कंपनी में नौकरी कर ली।वे ’डूबे हुए ऋण की उगाही करने वाले’ विभाग में थे।खाली वक्त में वे इस्तेमाल की गई कारों को ठीक करके बेचते थे।उन कारों के बेचने से कमाये हुए रुपये ही भविष्य में स्टीव के कॉलेज की पढ़ाई पर खर्च होने थे।क्लारा एक अर्मेनियन-अमेरिकन थी जिसका जन्म न्यू जर्सी में हुआ था।जब वह छोटी बच्ची थी, उसके माता-पिता तुर्कों से बचने के लिए अर्मेनिया छोड़कर भागे और सान फ्रांसिस्को के मिशन जिले में आकर बस गए।क्लारा का अपना एक अतीत था जिसके बारे में वह पॉल को नहीं बताई थी।उसका पहला पति जंग में मारा जा चुका था।चूंकि पॉल के साथ अब वह एक नयी शुरुआत करना चाहती थी, इसलिए उसने पॉल को इसके बारे में बताना जरूरी नहीं समझा।

द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव अनिवार्य रूप से लगभग सभी लोगों पर पड़ा।जॉब्स भी इसके अपवाद नहीं थे।उनके पैसे लगभग खत्म हो चले थे इसलिए वे विस्कॉन्सिन चले गए और कुछ सालों तक पॉल के माता-पिता के घर ही रहे।फिर पॉल अंतर्राष्ट्रीय हार्वेस्टर के साथ एक मिस्त्री के तौर पर काम किया और बाद में एक सेल्समैन के रूप में पूर्णकालिक नौकरी कर ली।उनकी शादी को नौ साल हो चुके थे, लेकिन कुछ तो था जिसकी कमी महसूस हो रही थी।क्लारा अस्थानिक गर्भ ( Ectopic Pregnancy ) की समस्या से पीड़ित थी।इसके अंतर्गत जननक्षम अंडे गर्भाशय के बजाय फॅलोपियन ट्यूब में आरोपित किए जाते हैं और इसीलिए गर्भावस्था की प्रक्रिया कभी पूरी नहीं हो पाती है।आखिरकार उन्होंने एक और बच्चे को गोद लेने का फैसला किया।

जब स्टीव दो साल के हो गए तब जॉब्स दम्पति ने एक लड़की को गोद लेने का फैसला किया।उन्होंने उसका नाम पैट्टी रखा।बच्चे बड़े हो रहे थे।जब स्टीव पांच और पैट्टी तीन साल की थी तभी क्लारा ने सोचा कि उन्हें सान फ्रांसिस्को में पढ़ाना और पालन-पोषण करना ज्यादा बेहतर होगा।किसी तरह उसने पॉल को राजी कर लिया और बच्चे सान फ्रांसिस्को के माउंटेन व्यू के एक बड़े से मकान में रहने चले गए।

 
 

बचपन की यादें हमारी जिन्दगी की कुछ सबसे बेहतरीन तस्वीरें बनाती हैं।नन्हे स्टीव के बारे में उनके माता-पिता और शिक्षक बताते हैं कि वह एक जिज्ञासु बच्चा था जो कि अपनी उम्र से काफी आगे था।अपनी जिज्ञासा की वजह से वह अक्सर ऐसे चक्करों में फंस जाता था कि अंत में उसे अस्पताल तक जाना पड़ता था।एकबार उन्होंने एक इलेक्ट्रिकल आउटलेट में हेयरपिन डाल दिया था और अपना हाथ जला लिया था।

एक दूसरे मौके पर तो उन्होंने चींटी मारने वाला जहर पी लिया था।स्टीव जैसे बच्चे को पालना-पोसना आसान नहीं था।उनकी मां ने भी एकबार बताया था कि नन्हे स्टीव को संभालना बहुत ही मुश्किल था।वह घर में सबसे पहले जग जाता था।इसलिए उसे व्यस्त रखने के लिए उनके माता-पिता ने उनके लिए एक उछलने वाला घोड़ा, एक रिकॉर्ड प्लयेर और कुछ लिट्ल रिचर्ड्स के रिकॉर्ड्स खरीद दिए थे।

जब स्टीव थोड़े बड़े हुए तो उनके पिता ने अपने गैरेज में उनके लिए एक कार्यशाला बनाया।उन्होंने स्टीव को कार्यशाला दिखाया और कहा,’’ स्टीव अब यह तुम्हारे कार्य करने की जगह है।’’ उन्होंने अपने बेटे को एक टूल कीट (औेजारों का समूह) दिया और हथौड़ा कैसे चलाते हैं, वह भी चलाकर दिखाया।स्टीव को याद है- वे अपने पिता के साथ काफी वक्त बिताते थे और यंत्रों के पुर्जों को अलग-अलग करना और फिर उन्हें सही ढंग से आपस में जोड़ना सीखते थे।वह अपने पिता की कुशल कारीगरी और ब्यौरों के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतने से काफी प्रभावित थे।

उनके पिता चीजों को सही ढंग से करने के महत्व पर जोर देते थे।उनके पिता कहते थे,’’ जब तुम एक बढ़ई हो तो ड्रॉवर के ऊपरी भाग को खूबसूरत बनाते हो, आप पीछे की तरफ प्लाईवुड का कोई टुकड़ा नहीं इस्तेमाल करते, क्योंकि वह दीवार की तरफ होता है और कोई भी उसे कभी नहीं देखता।सिर्फ आप जानेंगे कि वह वहां होगा, इसलिए आप पीछे की तरफ भी प्लाईवुड का एक खूबसूरत टुकड़ा लगाओगे।’’ स्टीव जॉब्स बाद में इस सबक को एप्पल के उत्पादों में बार-बार इस्तेमाल किया।

स्टीव को अच्छी तरह याद है।वह छह या सात साल का रहे होंगे और वह एक लड़की, जो रास्ते पर रहती थी, को बता रहे थे कि उसके माता-पिता ने उससे कभी ये बात नहीं छिपाई कि उन्होंने उसे किसी से गोद लिया है।लड़की ने उनसे पलटकर पूछा,’’ इसका मतलब है कि तुम्हारे असली माता-पिता तुम्हें नहीं चाहते हैं?’’ उस सवाल ने उन्हें बहुत आहत किया।स्टीव ने कहा,’’ मेरे दिमाग में जैसे अंधेरा छा गया और मुझे याद है मैं घर में दौड़ रहा था, रो रहा था।मेरे माता-पिता ने कहा, ’देखो, तुम बात को समझो।’ वे बहुत गंभीर थे और सीधा मेरी आंखों में देखते हुए बोले, ’हमने खास तौर पर तुम्हें चुना है।’ मेरी माता और पिता दोनों ने कहा और धीरे-धीरे मुझसे कई बार दोहराया।उन्होंने ये कहते हुए उस वाक्य के एक-एक शब्द पर जोर दिया।’’

गोद लिये जाने के एहसास ने स्टीव को ’परित्यक्त पर चयनित और खास होने’ का एहसास कराया।उसके करीबी दोस्त कहते हैं कि पैदा होने के बाद छोड़ दिये जाने की बात की जानकारी ने उसपर कुछ गहरे निशान छोड़ गई।उसके दोस्त कहते थे कि अपने माता-पिता द्वारा छोड़ दिए जाने के गहरे एहसास ने उसे उच्श्रृंखल बना दिया था।हालांकि गोद लिए जाने के बारे में अपने जीवनी लेखक से बात करते हुए स्टीव ने कहा,’’ मुझे गोद लिया गया है इस बात की जानकारी से शायद मैं और आजाद महसूस करता था, लेकिन मैंने कभी परित्यक्त महसूस नहीं किया।मैंने हमेशा महसूस किया कि मैं खास हूँ।मेरे माता-पिता ने मुझे खास महसूस कराया।’’

बाद में मीडिया ने जब स्टीव से उनके ’दत्तक माता-पिता’ के बारे में पूछा तो वे उनपर बरसते हुए बोले, ’’ वे 1000 प्रतिशत मेरे माता-पिता हैं।’’ अपने जैविक माता-पिता के बारे में कड़क रुख अख्तियार करते हुए बोले : ’’वे मेरे वीर्य और अंडाणु बैंक थे।यह कठोर बात नहीं है, बात जैसी थी मैंने सिर्फ वैसी कह दी है।एक वीर्य बैंक वाली बात और उससे ज्यादा कुछ नहीं।’’

 

 

स्टीव जॉब्सकी बायोग्राफीज | 0 टिप्पणी >>

0 टिप्पणी

एक टिप्पणी छोड़ दो

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| आवश्यक क्षेत्रः चिह्नित कर रहे हैं|


*:

*:

:

*:



Proudly owned by Aatman Innovations Pvt. Ltd. Mumbai, India.   |   प्रायवेसी पॉलिसी   |   डिस्कलेमर   |   साइट मैप   |   Best View - (1280x720) Latest Browsers
Feedback/Testimonials
* इस वेबसाइट के किसी भी विवरण का किसी भी रूप में अंशतः या पूर्णतः निजी हित में उपयोग करते पाए जाने वाले व्यक्ति/कंपनी/संस्था के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।