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संतरों को चूमता सूरज…चांदनी रात में महकता हुआ बागीचा…सुर में गाती हुई बुलबुल… झिलमिलाती, लहराती हुई नदी…रात को आसमान में टिमटिमाते हुए तारे…

आंखों को सुकून और रूह को ठंडक पहुंचाने वाली ऐसी खूबसूरती के बिना, वास्तव में ये दुनिया कितनी नीरस होती। यह हमें विविध रूपों में लुभाती है, जिनमें से एक है संगीत। हरे-भरे जंगलों से लेकर समुद्री जल-राशि तक जाति, नस्ल और राष्ट्रीयता से परे संगीत की भाषा एक ही है। इसमें दिलों में उमंगें भर देने की प्रबल शक्ति है और इसका असर भी तुरंत होता है। हममें से लगभग हर किसी की अपनी पसंदीदा धुन है, जिससे हम कभी थकते नहीं हैं बल्कि जिसे सुनकर हम हमेशा अच्छा महसूस करते हैं। जिसका असर लगभग एक हथियार की तरह होता है, संगीतकारों की बिरादरी से ताल्लुक रखनेवाले धन्य हैं वे स्त्री और पुरुष, जो इसे रचना जानते हैं।

युगों से अनगिनत संगीतकार इस दुनिया में आते रहे हैं; जिनके संगीत ने मनोहर मुस्कुराहटें और हंसी-खुशी बिखेरी हैं, मीठा-मीठा दर्द और सुकून-शांति भी दी है। उन श्रेष्ठ संगीतकारों में से एक शख्स ऐसा है जिसे दुनिया वोल्फगैंग अमेडस मोजार्ट के रूप में जानती है। मोजार्ट और संगीत के आपसी प्यार ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है- सुमधुर, परियों-सी प्यारी धुनें, निर्मल, आरामदेह, तूफानी, गहरा और जोरदार संगीत; यानी हर किसी के मन और मूड को भानेवाला संगीत दिया है उसने। आईंस्टाइन ने एक बार कहा था कि जहां बीथोवन ने अपना संगीत रचा, वहीं मोजार्ट का संगीत इतना विशुद्ध है कि जैसे यह अपने उस्ताद द्वारा अपने खोजे जाने के लिए सदा से ब्रह्मांड में मौजूद ही था। इतनी सहजता से महारत हासिल कर लेने के पीछे आखिर क्या राज था? उसकी धुनें हमेशा इतनी ताजा कैसे लगती हैं? आइये चलते हैं एक संगीतमय सफर पर और एक ऐसे उस्ताद की जिन्दगी में झांकते हैं, जिसकी धुनें 200 सालों के बाद भी हमारे दिलो-दिमाग से मिटने का नाम नहीं लेती हैं।

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यह 1756 की सर्दियों की बात है। ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग शहर में एक परिवार अपनी सातवीं संतान के पैदा होने की खुशियां मना रहा था। वह बच्चा क्राइस्टेण्ड जोआनेस क्राइसोस्टोमस वोल्फगैंगस थियोफिलस मोजार्ट था। उसके नाम का पहला हिस्सा संत जॉन क्राइसोस्टोमस के सम्मान में रखा गया था, क्योंकि बच्चे के जन्मदिवस 27 जनवरी को ही संत जॉन का ‘उत्सव दिवस’ भी था।

वोल्फगैंग उसके नाना का नाम था। थियोफिलस नाम (ग्रीक में जिसका मतलब है- ईश्वर जिसे प्रेम करता है) मोजार्ट के गॉडफादर जोआनेस पर्गम्यर के सम्मान में रखा गया था। बचपन में उसे वोल्फगैंग या वोल्फगैंग्रल उपनाम से पुकारा जाता था। बाद के सालों में वह अक्सर अपने नाम के साथ थियोफिलस जोड़ लिया करता था, जिसे फ्रेंच में अमेडे, जर्मन में गट्टलिएंब या लैटिन में अमेडस कहा गया। आज दुनिया उसे वोल्फगैंग अमेडस मोजार्ट के रूप में जानती है। वोल्फगैंग लियोपोल्ड और उनकी धर्मपत्नी अन्ना मारिया का इकलौता जीवित बेटा था। उस दम्पति के केवल दो ही बच्चे नवजात अवस्था के बाद जीवित रहे- वोल्फगैंग और उसकी बहन मारिया अन्ना वॉलबुर्गा इग्नैश्यिा (उपनाम नैनर्ल), जो उससे पांच साल बड़ी थी। भाई-बहन के बीच बहुत गहरा लगाव था। नैनर्ल उसकी राजदार और करिसिस्मा सोरेल्ला यानी प्यारी बहन थी।

वोल्फगैंग के पिता लियोपोल्ड एक प्रतिभाशाली वायलिनवादक और संगीतकार थे, जो चर्चों और राजदरबारों में नियमित रूप से अपनी कला का प्रदर्शन किया करते थे। वे एक संगीत शिक्षक भी थे और वायलिन बजाने के बुनियादी सिद्धांत पर लिखी उनकी किताब- वरसच ईनर ग्रनडलीचेन वायलिनस्चुले (Versuch einer grundlichen Violinschule) (अ ट्रिटिज ऑन द फंडामेंटल प्रिंसिपल्स ऑफ द वायलिन प्लेयिंग) (A Treatise on the Fundamental Principles of Violin Playing) वायलिन सीखने के लिए अपने वक्त की बेहतरीन किताबों में से एक थी और आज भी प्रयोग की जाती है। लियोपोल्ड ने साल्जबर्ग के राजकुमार आर्कबिशप के दरबारी ऑर्केस्ट्रा में वायलिनवादक के रूप में काम किया। लगातार पांच राजकुमारों के अंतर्गत वे इस पद पर 44 सालों तक बने रहे। उन्होंने चौथे वायलिनवादक के रूप में काम करना शुरू किया था और धीरे-धीरे काम करते हुए काउंट सिगिसमंड क्रिस्टोफ एस. (Count Sigismund Christoph Schrattenbach) के अंतर्गत 1763 में उप कॅप्पेलमिस्टर के पद तक पहुंचने में कामयाब रहे। मोजार्ट की मां अन्ना मारिया अपना फर्ज बखूबी समझने वाली एक भद्र और दयालु महिला थीं।


कॅप्पलमिस्टर एक जर्मन शब्द है जिसका मतलब है- एक ऐसा व्यक्ति जिसे संगीत रचने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


यह शब्द कप्पेल जिसका अर्थ है गायक-मण्डल ऑर्केस्ट्रा या उपासना और मिस्टर जिसका अर्थ है उस्ताद, के मिश्रण से बना है।

मोजार्ट परिवार के सदस्य आपस में गहरे जुड़े थे। वे न ज्यादा अमीर थे और न ही गरीब। उनका घर, जहां मोजार्ट का जन्म हुआ था (अब एक संग्रहालय), सहूलियत के लिहाज से बीच में था और वहां संगीत सीखने, रियाज करने के लिए काफी जगह थी। मोजार्ट के घर उनके दोस्त और परिचित हमेशा आते-जाते रहते थे तथा उनका घर साल्जबर्ग में घरेलू संगीत केन्द्रों में से एक था।

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वोल्फगैंग का बचपन असामान्य था। वह कभी स्कूल नहीं गया, बल्कि उसके पिताजी ने उसे घर पर ही पढ़ाया। वह छोटा बच्चा गणित में बहुत अच्छा था और वह दीवारों और टेबल क्लॉथ्स को गणितीय आ.तियों से भर देता था। वह सात अलग-अलग भाषाओं में भी बात कर सकता था! संगीतकार लियोपोल्ड ने संगीत से अपने बच्चों का परिचय बहुत कम उम्र में ही करवा दिया था। नैनर्ल की संगीत-शिक्षा क्लेवियर (कीबोर्ड) के माध्यम से सात साल की उम्र में शरू हो गई थी। जब भी उसकी बहन कीबोर्ड बजाती थी, नन्हा बच्चा वोल्फगैंग उसे उत्सुकता से देखता रहता था। जल्द ही कीबोर्ड उस बच्चे का सबसे प्यारा खिलौना बन गया और वह अपनी क्षमता के अनुसार अधिक – से- अधिक समय धुनें सीखने में बिताने लगा। अपने बेटे की रुचि को देखते हुए लियोपोल्ड ने उसे चार साल की उम्र से ही संगीत सिखाना शुरू कर दिया।

नन्हें वोल्फगैंग को उसके पिता ने मिनट्स(Minuets) (एक प्रकार का धीमा संगीत) सिखाना शुरू किया। बच्चे ने इसे न सिर्फ बहुत तेजी से सीखा बल्कि आसानी से और बहुत ही संवेदनशीलता के साथ बजाने भी लगा। नन्हें संगीतकार के पास पर्याप्त संगीत नहीं था। फिर भी बहुत जल्द उसने खुद ही वायलिन बजाना सीख लिया। उस समय वह पांच साल का था। वोल्फगैंग छोटी-छोटी धुनें रचता था जिन्हें वह अपने पिताजी को सुनाता था और वे उन धुनों को लिख लिया करते थे। लियोपोल्ड ने अपने बच्चों को बहुत अच्छी तरह सिखाया, इसके लिए उन्होंने हर पाठ (सबक) को मजेदार और रुचिकर बनाया, लेकिन साथ ही वे कला के लिए सर्वाधिक (परम) तन्मयता और सम्पूर्णता के भी आग्रही थे। संगीत शिक्षक के रूप में वे जानते थे कि उनके बच्चे बेहद प्रतिभाशाली हैं और वे बहुत ही आसानी से उनके लिए एक भरोसेमंद संपत्ति बन सकते हैं। एक तरह से देखा जाए तो वे अपने बच्चों की सेहत और शायद उनके बचपन को भी जोखिम में डाल रहे थे। लेकिन उनके इस निर्णय को इतनी तल्खी से नहीं आंका जाना चाहिए। वे भी एक इंसान ही थे और आखिरकार उन्होंने भी तो अपने बच्चों के लिए अपने करियर की कुर्बानी दी। साथ ही, लियोपोल्ड एक संगीतकार के रूप में न सही, एक लेखक के रूप में ही सही, अभी भी नाम कमाने और अपनी एक पहचान बनाने का सपना पाले ही हुए थे। उन दिनों, आमतौर पर संगीतकारों से ज्यादा लेखकों को सम्मान मिलता था। संगीतकार बावर्चियों, खानसामा और नौकरानियों के बराबर हैसियत वाले एक दूसरे तरह के नौकर थे, जिनकी सेवायें अमीर लोग किराये पर लेते थे। इसलिए शुरुआती दिनों से ही लियोपोल्ड वोल्फगैंग से संबंधित एक-एक चीज का विस्तृत रिकॉर्ड रखते थे। ज्यादातर इसके लिए ही, जब वे साल्जबर्ग से बाहर होते थे, अपने दोस्तों को डायरीनुमा पत्र लिखते थे। शायद इस मकसद से कि बाद में वे इनका इस्तेमाल जीवनी लिखने में कर सकेंगे।

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जब वोल्फगैंग छह साल का था, उसके पिताजी के नियोक्ता काउंट श्रटनबैक (Count Schrattenbach) ने लियोपोल्ड को अपने बच्चों के साथ यूरोपियन दरबारों में जाने और अपनी कला का प्रदर्शन करने हेतु छुट्टी दी। उन्होंने अपना पहला प्रदर्शन बावारिया के निर्वाचक, मैक्सिमिलियन (तृतीय) जोसफ के लिए म्यूनिख में जनवरी, 1762 में किया। सितम्बर 1762 से जनवरी 1763 के दौरान दोनों भाई-बहन ने ऑस्ट्रिया में प्रदर्शन किया। छह साल की छोटी-सी उम्र में नन्हें वोल्फगैंग को महाराजा (सम्राट) फ्रान्सिस प्रथम और महारानी (साम्राज्ञी) मारिया थेरेसा के सामने प्रदर्शन करने का सम्मान प्राप्त हुआ था। जब वह नन्हा बच्चा दरबार की पॉलिश्ड फर्श पर फिसला था, एक छोटी-सी लड़की ने उसे संभलने में मदद की थी। वह लड़की मैरी एण्टोनेट थी जो बाद में फ्रांस की रानी बनी!

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कितने मां-बाप हैं जो ये दावा कर सकते हैं कि उनके बच्चों ने इतनी कच्ची उम्र में शाही उपस्थिति में अपनी कला का प्रदर्शन किया है? मां-बाप का अपने बच्चों पर गर्व करना न्यायोचित ही था और लियोपोल्ड ने उस यादगार अवसर के बारे में लिखा, “महामहिम हमारे साथ इतनी शालीनता से पेश आए कि जब मैं इसके बारे में बताउंगा, तो लोग बोलेंगे कि मैं झूठ-मूठ की बातें बना रहा हूँ। यही कहना पर्याप्त होगा कि वोल्फगैंग महारानी की गोद में कूद गया, उनकी गरदन के चारों ओर अपनी बांहें रखीं और उन्हें दिल से चूम लिया।”

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थोड़ा-सा आराम करने के बाद, जून 1763 में फिर से एक तूफानी यात्रा की शुरुआत हुई, जो साढ़े तीन सालों तक चली। पड़ाव म्यूनिख, बॉन, कोलोन, ब्रुसेल्स, पेरिस, वर्साइल्स, लंदन, द हेग, जिनेवा और ज्यूरिख में रखे गये। मोजार्ट्स ने 1763 का क्रिसमस महारानी मारिया लेसजिंस्का और लूइस XV के फ्रांसीसी राजदरबार में मनाया। नववर्ष के दिन मोजार्ट परिवार को शाही जोड़े के साथ रात का खाना खाने के लिए निमंत्रित किया गया। लियोपोल्ड ने वर्णन किया, “मेरे वोल्फगैंग को पूरे वक्त शालीनता के साथ रानी के बगल में खड़े रहने, उनसे बातें करने, उनका मनोरंजन करने और उनके हाथों को बार-बार चूमने का जैसे विशेषाधिकार प्राप्त था। इसके अलावा, शाही भोज में भी शरीक होने पर, रानी ने खुद मेज से उठाकर उसे खाना दिया…मैं उनके बगल में खड़ा था और राजा के दूसरी तरफ…मेरी धर्मपत्नी और बेटी खड़ी थी।”

गौरवान्वित पिता ने बहुत सारे पर्यवेक्षकों को अपने चमत्कारी (अद्भुत) बच्चे की प्रतिभा परखने के लिए आमंत्रित किया। नामी ब्रिटिश वकील, पुरातत्ववेत्ता और प्रकृतिवादी डेन्स बैरिंग्टन ने ऐसी एक जांच की थी जब वोल्फगैंग आठ साल का था। नन्हें बालक को लंदन के एक संगीतकार द्वारा रची गई एक नये ओपेरा के पांच भागों वाले मुक्त स्वर की पांडुलिपि दी गई। समस्या को और बढ़ाने के लिए, पांच में से दो पंक्तियां ऑफबीट (अपारंपरिक) इटालियन स्टाइल कॉण्ट्राल्टो क्लिफ में दी गईं, जिसे वोल्फगैंग ने पहले कभी नहीं देखा था। क्या नन्हा मोजार्ट इस परीक्षा में पास हुआ? वह निश्चित रूप से पास हुआ, न सिर्फ उसने बिना किसी नुक्स के बजाया, बल्कि संगीतकार के टेम्पोज (लय-ताल), डाइनैमिक्स (गतिशीलता) और म्यूजिकल इंटेन्शन्स (संगीतात्मक भाव-भंगिमा) को भी अभिव्यक्त किया। ब्रिटिश वकील वोल्फगैंग की प्रतिभा से हतप्रभ थे और उन्होंने वोल्फगैंग के बारे में कुछ ऐसा कहा था, “एक आठ साल का बच्चा जिसका कद सात फीट ऊंचा था।”


क्लिफ- क्लिफ या की संगीत का एक संकेत है, जिसे स्वर के उतार-चढ़ाव को लिखित रूप में दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
कॉण्ट्राल्टो – यह भाग पुरुषों या स्त्रियों के समूह द्वारा सबसे ऊंचे या सबसे नीचे स्वर में गाया जाता है।

वोल्फगैंग अपनी खूबसूरत प्रस्तुतियों से राजघराने के लोगों को तो मोहित कर ही रहा था, साथ-ही-साथ वह नन्हा संगीतकार लगातार धुनें भी बना रहा था। सन् 1763-1765 के दौरान वोल्फगैंग ने पेरिस में दो सोनाटा, लंदन में सात सोनाटा, दो सिम्फनी, दो एरिआज, एक मोटेट और बहुत सारी प्रकीर्ण रचनायें की और हेग में रहते हुए एक एरिआ और एक सिम्फनी बनाई। नन्हा वोल्फगैंग निश्चित रूप से एक प्रतिभाशाली बच्चा था। इसके साथ ही, उस समय वह बहुत सारे संगीतज्ञों से मिला और दूसरे संगीतकारों के कार्यों से भी अवगत हुआ। 1764-65 के दौरान वह लंदन में जॉन क्रिष्चियन बैक (Johann Christian Bach) से मिला, जिनका उसके ऊपर विशेष प्रभाव था।


सोनाटाज- एक धुन जो एक या एक से अधिक एकल वाद्ययंत्रों के लिए बनाई जाती है, जिनमें से आमतौर पर एक कीबोर्ड जरूर होता है।
सिम्फनीज- किसी ऑर्केस्ट्रा के बहुत सारे अलग-अलग वाद्ययंत्रों के लिए तैयार किये गये संगीत की एक लम्बी रचना।
एरिआज- एकल स्वर के लिए एक व्यापक और जटिल गीत।
मोटेट- पवित्र गीतों वाला एक पोलिफोनिक भजन रचना, जो चर्च में सेवा कार्यों के एक भाग के रूप में गायी जाती है।

लेकिन युवा संगीतज्ञ और उसके परिवार के लिए ज़िन्दगी पूरी तरह रोमांचक और जादू भरी नहीं थी। उन दिनों यात्रा घोड़ों और रथों से हुआ करती थी जो धीमी गति की वजह से काफी तकलीफदेह होती थी। यात्री को, खुद को मौसम की मेहरबानी पर छोड़ देना पड़ता था। मौसम सर्दियों में बेहद ठंडा होता था, गर्मी में झुलसाने वाला होता था और बारिश में तो कहना ही क्या था? इसके अलावा, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मोजार्ट्स जब अमीर घरानों द्वारा गृह-अतिथि के रूप में आमंत्रित किये जाते थे, तब धनवान लोगों के साथ सम्पर्क बनाने के लिए उन्हें उनकी सनक और खास इच्छाओं का भी ध्यान रखना पड़ता था, जिसमें से उनकी एक आदत थी कि वे नकद की बजाय सुंघने वाली चांदी के डिब्बे (सिल्वर स्नफ बॉक्सेस) भेंट के रूप में देते थे। लियोपोल्ड ने इसे गहराई से महसूस किया और लिखा, “हमारे पास तलवारें, फीते, दुपट्टे, स्नफ बॉक्सेस, गोल्ड केसेस हैं जो एक दुकान सजाने के लिए काफी हैं लेकिन जहां तक धन की बात है, यह एक दुर्लभ वस्तु है, और मैं सकारात्मक सोच रखने वाला एक गरीब आदमी हूँ।” इसके अलावा, सर्कस जैसी ये घुमक्कड़ी जिन्दगी बच्चों के लिए ठीक नहीं थी और इसीलिए वे अक्सर बीमार पड़ जाते थे। वोल्फगैंग को स्ट्रेप थ्रोट, रूमटॉइट आर्थराइटिस/(संधिवात या गठिया) और टाइफॅाइड फीवर (मियादी बुखार)- ये सभी बीमारियां थीं।

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जब परिवार वापस साल्जबर्ग लौटा, वोल्फगैंग ग्यारह साल का हो चुका था। युवा लड़का अब एक संगीतकार जैसा दिखता था, जो कि एक विलक्षण प्रतिभा संपन्न बच्चा था। यहां, वह लैटिन ओपेरा ‘अपोलो एट ह्यासिन्थस’ (Appollo et Hyacinthus) रचा, जिसे बहुत से लोगों द्वारा उसका पहला असली आपेरा माना गया। उसने अंत्येष्ठि संबंधी भी एक संगीत तैयार किया जो ग्रैबम्यूजिक के रूप में जाना जाता है। लेकिन लियोपोल्ड के भ्रमण की लालसा की वजह से बहुत जल्द ही परिवार को एक और सफर के लिए रवाना होना पड़ा। नौ महीने के भीतर ही परिवार वियना की तरफ निकल पड़ा जहां उन्होंने वोल्फगैंग का पहला इटालियन ओपेरा बुफ्फा ‘ला फिन्ता सिम्प्लेस’ (La finta semplice) (दि प्रिटेण्डेड सिम्पल्टन) (The Pretended Simpleton) प्रस्तुत करने की योजना बनाई। लेकिन चेचक की महामारी ने उन्हें मोरविया’ (अब चेक गणराज्य में) के लिए पलायन करने को मजबूर कर दिया और फिर वहां से वे ओल्मज(ओलोमक) चले गए जहाँ बच्चे रोगग्रस्त हो गये। बच्चों की हालत सुधरने के बाद, परिवार वियना लौट गया। लेकिन लियोपोल्ड का दुर्भाग्य कि ओपेरा का प्रदर्शन नहीं हो सका। अफवाह फैलने लगी कि सिर्फ एक छोटा-सा बच्चा पूरे ओपेरा के लिए संगीत नहीं रच सकता। गुस्साया लियोपोल्ड परिवार को लेकर साल्जबर्ग लौट आया, जहां 1769 में एकबार ओपेरा का प्रदर्शन हुआ। उस समय तक 13 साल का यह प्रतिभाशाली लड़का कोचल कैटलॉग की शुरूआती 65 धुनें तो रच चुका था।

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ओपेरा बुफ्फा- 18वीं सदी का इटली का एक कॉमिक ओपेरा।
कोचल कैटलॉग- दि कोचल वर्जीचनिस मोजार्ट की संगीत रचनाओं का एक सम्पूर्ण क्रोनोलोजिकल कैटलॉग है, इसे संक्षेप में के. या केवी. कहा जाता है। लुडविग वॉन कोचल द्वारा बनाये जाने के बाद से, बहुत सारे सुधार करने के लिए यह सूची कई बार संशोधित की जा चुकी है। मोजार्ट की आखिरी रचना रिक्विम के. 626 है।

अपने बेटे की शानदार प्रगति को देखते हुए, मंचीय अभिभावक लियोपोल्ड ने उसे संगीत की भूमि, इटली ले जाने का फैसला किया। नैनर्ल और उसकी मां को साल्जबर्ग में ही छोड़कर, वे दोनों दिसम्बर 1739 में चल पड़े। ऐसा लगता है कि संगीत में नैनर्ल का पेशेवर सफर खत्म होने वाला ही था। लड़की शादी करने की उम्र की हो रही थी और उन दिनों लोगों के सामने जवान लड़कियों द्वारा अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करना अनुचित माना जाता था।

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पिता और पुत्र रोम में इस्टर के वक्त पहुंचे और वहां वोल्फगैंग ने अपनी कला का सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। वेटिकन के पैपल एनक्लेव में सिस्टाइन चैपल वोकल म्यूजिक का केन्द्र माना जाता था। वे ग्रेगोरियो ऐलेग्री के इस केन्द्र को मिसेरिरि (साम 51) के लिए सुरक्षित रखते थे, जिसकी नकल करने की अनुमति नहीं थी और इसके प्रदर्शन पर सिस्टाइन चैपल को छोड़कर दुनिया में हर जगह प्रतिबंध था। वोल्फगैंग किसी बुधवार को सेवा में भाग लेते समय सुना था और उसी दिन बाद में उसने पूरी तरह अपनी स्मरणशक्ति की मदद से उसे लिख लिया था। गुड फ्राईडे को दूसरी बार सुनने के बाद, अपनी टोपी में छुपाई हुई पांडुलिपि में उसने मामूली सुधार किये।

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वोल्फगैंग ने उस पांडुलिपि को एक ब्रिटिश संगीत इतिहासकार डॉ. चार्ल्स बर्नी को सौंप दिया जो उस समय रोम में ही थे। फिर डॉ. ने उस रचना को प्रकाशित कर दिया। जब यह खबर पोप के पास पहुंची तो उन्होंने वोल्फगैंग को रोम बुलाया। युवा संगीतकार ने आज्ञा का पालन तो किया, पर वह बेहद डरा हुआ था। लेकिन वोल्फगैंग को डरने की जरूरत नहीं थी। उसे चर्च से बहिष्.त करने के बजाय पोप ने उसकी जमकर तारीफ की और मिसेरिरि पर लगे प्रतिबंध को भी हटा दिया। इसके अलावा, उसे ऑर्डर ऑफ द गोल्डन स्पर प्रदान किया जो कि एक प्रकार का नाइटहुड जैसा सम्मान है और यह उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने चर्च की महिमा बढ़ाने में योगदान दिया हो।

इसी दौरान, वोल्फगैंग ने अपना पहला वृहत् ओपेरा- मिट्रीडेट रे डी पोण्टो या मिथ्रीडेट्स, किंग ऑफ पोण्टस (Mitridate re di Ponto or Mithridates, King of Pontus) लिखा, जिसका प्रदर्शन मिलान में हुआ। उस वक्त, मोजार्ट की आवाज फट रही थी। ये उसे परेशान कर रही थी और लियोपोल्ड ने साल्जबर्ग पत्र लिखा कि वोल्फगैंग अब अपनी बनाई हुई धुनों पर भी अपना संगीत नहीं गा सकता। और अफसोस कि यह एक ”सीरिया ओपेरा” था जिसमें लगभग पूरे रेसिटेटिव्स और एरिआज शामिल थे।


ओपेरा सिरिया - गंभीर कथानक पर आधारित एक प्रकार का ओपेरा जिसका प्रदर्शन इटली में 18 वीं सदी में हुआ करता था।
रेसिटेटिव्स - किसी संगीतात्मक रचना में वर्णित कहानी का एक वोकल पैसेज।

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ओपेरा को उत्.ष्ट बनाने के लिए, वोल्फगैंग को गायकों के साथ बहुत मेहनत करनी पड़ती थी। रेसिटेटिव्स पर काम करना थका देने वाला होता था और मोजार्ट अपनी मां से अक्सर शिकायत करता रहता था कि इससे उसकी अंगुलियों में दर्द होने लगता है। उस ओपेरा का प्रदर्शन 1771 में क्रिसमस के दौरान हुआ और लगभग छह घंटों तक चला। हालांकि मोजार्ट के जीवनकाल में उसका दोबारा प्रदर्शन नहीं हुआ, लेकिन लोगों को ओपेरा पसंद आया। उसी की मदद से मिलान में काम करने के दो और मौके मिले- पहला सेरेनाटा एस्केनिओ (serenata Ascanio) अल्बा में और दूसरा ओपेरा सीरिया, लुसिओ (seria, Lucio) सिल्ला में।

अल्बा का ‘द सेरेनाटा एस्केनिओ’ महारानी मारिया थेरेसिया के एक बेटे आर्कड्यूक फर्डीनैण्ड की शादी के लिए तैयार किया गया था। इसके बाद अंगुलियों में और ज्यादा दर्द होने लगा, लेकिन यह कुल मिलाकर एक सार्थक प्रयास था। मोजार्ट का सेरेनाटा जर्मनी के प्रसिद्ध संगीतकार ‘हस्से’ के ओपेरा सीरिया पर पूरी तरह छा गया। मजे की बात है कि वह भी शादी के लिए ही तैयार किया गया था। लियोपोल्ड ने खुशी से साल्जबर्ग संदेश भेजा : ‘इससे मुझे वाकई बहुत दुख पहुंचा है, लेकिन वोल्फगैंग के सेरेनाटा ने हिस्से के ओपेरा का खात्मा कर दिया है।’ फर्डीनैण्ड वोल्फगैंग के प्रदर्शन से प्रभावित थे और उसने अपनी मां से पूछा कि क्या वे उस युवा संगीतकार को काम पर रख सकते हैं। लेकिन महारानी ने उससे कहा कि ”वह फालतू लोगों का बोझ ना ढोए…जो भिखारियों की तरह रहते हैं…इसके अलावा उसका परिवार भी बड़ा है।”


कैनटाटा- धार्मिक कथावस्तु पर आधारित आवाजों और ऑर्केस्ट्रा के लिए बनाई जानी वाली एक संगीतात्मक रचना। सेरेनाटा- 18वीं सदी की नाटकीय कैनटाटा।

एस्केनियो की सफलता से गद्गद दोनों साल्जबर्ग लौटे, लेकिन यहां आते ही उन्हें एक बहुत बड़ा आघात लगा। हमेशा उपकार करने वाले आर्कबिशप श्रटनबैक (Archbishop Schrattenbach) मर चुके थे और एक नया राजकुमार आर्कबिशप हाइरोनिमस कोलोराडो (Archbishop Hieronymus Colloredo) में नियुक्त किये गये थे। यह नियुक्ति आने वाले सालों में मोजार्ट के लिए बहुत ज्यादा दुख और परेशानी की वजह बनने वाली थी। वोल्फगैंग बहुत जल्द उस झटके से उबरकर धार्मिक संगीत, सिम्फनीज़, नृत्य और डायवर्टिमैण्टी रचने में व्यस्त हो गये। अक्टूबर में दोनों ओपेरा ‘सिरिया लुसियो सिल्ला’ के प्रदर्शन के लिए मिलान के लिए रवाना हुए और वह ओपेरा मिट्रीडेट के 26 प्रस्तुतियों से कहीं ज्यादा सफल साबित हुआ!


डायवर्टिमैण्टी- मनोरंजक संगीत वाली एक रचना।

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वोल्फगैंग और उनके पिता इटली के अपने आखिरी दौरे से 1773 में वापस लौटे। जल्द ही नये आर्कबिशप ने कम वेतन पर वोल्फगैंग को सहायक संगीत गुरु के रूप में नियुक्त कर लिया। उस दौरान युवा उस्ताद ने ज्यादातर अपने धार्मिक संगीत के खजाने को ही बढ़ाया। किंतु दोनों मोजार्ट नये आर्कबिशप के लिए काम करते हुए खुश नहीं थे। काउण्ट कोलोराडो बहुत ज्यादा समारोह में रुचि न लेते हुए नियमबद्ध तरीके से पूजा करने में विश्वास रखता था, जिसकी वजह से उनके सेवाकार्य में संगीत का हिस्सा बेहद कम हो गया था। इसके अलावा, वह छुट्टी लेकर विदशों में जाने वाले अपने कर्मचारियों के खिलाफ था; क्योंकि वह सोचता था कि जरूर वे काफी रुपये कमाते होंगे और फिर भी उन्हें वेतन देना पड़ता है जैसे वो साल्जबर्ग में ही हों।

वोल्फगैंग ओपेरा भी रचना चाहता था लेकिन साल्जबर्ग में इसके लिए बहुत कम ही अवसर उपलब्ध था। 1775 में जब दरबारी थियेटर बंद हुआ तब स्थिति और खराब हो गई, खासकर इसलिए क्योंकि साल्जबर्ग में दूसरे थियेटर ज्यादातर आगंतुक नाट्य दलों के लिए आरक्षित थे। युवा संगीतकार बंधा हुआ महसूस करने लगा और इस बंदिश से कम-से-कम वह आजाद होना चाहता था! उसके पिता ने भी उसी तर्ज पर सोचते हुए ये महसूस किया कि वोल्फगैंग को साल्जबर्ग के बाहर कोई नौकरी ढ़ूंढ़नी होगी। इसे ध्यान में रखते हुए, अगस्त 1777 में लियोपोल्ड ने कोलोराडो से एक और छुट्टी के लिए अनुमति मांगी जिसे तुरंत खारिज कर दिया गया। आर्कबिपश ने ठीक ही अंदाजा लगाया था कि छुट्टी नौकरी ढ़ूंढ़ने जाने के लिए मांगी जा रही थी और इसीलिए उसने पिता और पुत्र दोनों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। बाद में बहुत खुशामद करने पर वह वोल्फगैंग को उसकी सेवाओं से मुक्त करने के लिए राजी हुआ और लियोपोल्ड को रहने दिया लेकिन इस शर्त पर कि वह साल्जबर्ग में ही रहेगा।

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लियोपोल्ड ने इस सफर में बेटे के साथ अपनी पत्नी को भेजने का फैसला किया। इसतरह उस साल सितम्बर महीने में वोल्फगैंग पहली बार लियोपोल्ड के बिना सफर पर निकला। युवा संगीतकार काफी उत्तेजित था, स्वतंत्रता की अनुभूति उसे उन्मत्त किए जा रही थी। हालांकि उसकी मां उसके साथ थी लेकिन वह उसके पिता की तरह आग्रही नहीं थी। लियोपोल्ड ने सारी तैयारियां कर दीं और उस मार्ग की योजना भी बनाई जिसका अनुसरण इन लोगों को हर हाल में करना था। ऐसा करने से रास्ते में उन्हें वे दोस्त मिल सकते थे जो मददगार साबित हो सकते थे। हालांकि वह वोल्फगैंग के साथ नहीं जा रहा था, लेकिन उसका दिल पूरी तरह सफर में ही लगा था और वह चाहता था कि घर से ही वह उनकी सफर पर पूरी नजर रखे। वोल्फगैंग को उसके पिता ने कड़े आदेश दिये थे- या तो कोई अच्छी नौकरी ढ़ूंढ़ो या फिर पैसे कमाओ।

उनका पहला पड़ाव म्यूनिख था। युवा वोल्फगैंग ने अपने पिता लियोपोल्ड की योजना के अनुसार ही काम किया, जो कि रसूखदार लोगों से अपनी जान-पहचान बढ़ाने, कमीशन्स मिलने की उम्मीद में संगीत कार्यक्रम करने, स्थानीय जनता को संगीत सिखाने और उनके लिए संगीत रचने के बारे में था। लेकिन योजना फायदेमंद साबित नहीं हुई! म्यूनिख में निराशा ही हाथ लगी। उसके बाद दोनों ऑग्सबर्ग चले गये जहां वोल्फगैंग ने अपना ज्यादातर वक्त अपनी कजन मारिया अन्ना थेक्ला मोजार्ट, जिसका उपनाम ‘बसले’ था, के साथ बिताया। कुछ लोग मानते हैं कि वे दोनों एक-दूसरे से रोमानी स्तर पर जुड़े थे। शायद ऐसा इसलिए माना जाता है, क्योंकि ऑग्सबर्ग से दूर रहते समय वोल्फगैंग ने बसले को प्रेमभरा पत्र लिखा करते थे। जहां तक संगीत की बात है, वोल्फगैंग ने वहां सिर्फ एक कन्सर्ट (संगीत कार्यक्रम) किया। दूसरे ऑग्सबर्ग में कोई राजदरबार भी नहीं था जो उसे नौकरी दे। अक्टूबर बीतते-बीतते मां और बेटे मैनहेम पहुंच चुके थे। यह पड़ाव कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ पर यहीं वोल्फगैंग और उसके पिता के बीच संघर्ष के बीज भी पड़ गये।

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मैनहेम कई मायनों में वोल्फगैंग की जिन्दगी को बदल दिया। अपने वयस्क जीवन में पहली बार वह संगीत से ओत-प्रोत वातावरण में कार्य कर रहा था। मैनहेम के बारे में लियोपोल्ड खुद कहते थे, ”वह प्रसिद्ध राजदरबार, जिसकी किरणें सूरज की किरणों की तरह हैं और जो पूरे जर्मनी को प्रकाशित करती हैं।” सीधे पेरिस जाने की बजाय बिना उनसे पूछे मैनहेम में ठहरने के कारण लियोपोल्ड ने अपने बेटे को बुरी तरह फटकारा। लियोपोल्ड एक बेहद तेज आदमी था, इसलिए वह जानता था कि मैनहेम जैसी जगह, जो प्रतिभाओं से भरी हुई है, वहां वोल्फगैंग का स्वागत सिर्फ एक आगन्तुक की तरह ही किया जायेगा। पिता और पुत्र के रिश्ते में दरारें पड़ने लगी थीं, जो कि उनके इटली प्रवास के दौरान अपने चरम पर पहुंच गई और जिस तरह की नजदीकियां उनके बीच हमेशा से थीं, वह भी खत्म होने लगी थीं।

लियोपोल्ड वोल्फगैंग को अंधाधुंध पत्र भेजने लगे थे जो हमेशा सलाहों के शक्ल में आदेशों से भरे होते थे। वोल्फगैंग को अपना आहार जरूर लेना चाहिए और अपनी मां का भी पूरा खयाल रखना चाहिए। बेशक, ये सब वे नेक इरादे से कर रहे थे। लेकिन इससे वोल्फगैंग को चिढ़ होने लगी थी, क्योंकि अब वह स्वतंत्र विचार और राय रखनेवाला एक बालिग व्यक्ति था। क्या उसके पिता का नियंत्रण करना थोड़ा कम नहीं हो सकता? इसके अलावा, लियोपोल्ड यह भी चाहता था कि वह उसी की तरह बेहद सावधान रहने वाला तेज आदमी बने। तुम भी मेरी तरह पत्र क्यों नहीं लिखते? लियोपोल्ड उसे डांटते थे। अगर मैं एक पत्र लिखते हुए रुक जाता हूँ, तो अगले दिन फिर से शुरू करता हूँ। फिर चाहे वह इतवार हो या सोमवार।

वोल्फगैंग के पत्र विवरणात्मक होते थे लेकिन वे एक ऐसी शैली में लिखे गये होते थे जो लियोपोल्ड से बिल्कुल अलग थी। वे पत्र प्रकाशन-सामग्री के रूप में भी उपयुक्त नहीं थे। वोल्फगैंग के एक पत्र से लिया गया एक अंश नीचे दिया जा रहा है जिसे उसने अपने पिता को मैनहेम से लिखा था और जो मैनहेम के एक कॅप्पलमिस्टर क्रिश्चियन कैनबिच (Kappelmeister Christian Cannabich) के साथ एक पार्टी के बारे में था।

मैं, जोहानिस क्राइसोस्टोमस अमेडस वोल्फगैंगस सिग्सिमंडस मोजार्ट, अर्द्ध रात्रि 12 बजे तक घर न आ पाने का दोषी हूँ…10 बजे से कथित समय तक मैं कैनबिच के यहां था, मैंने कथित कैनबिच, उनकी पत्नी और पुत्री की मौजूदगी में कुछ तुकबंदियां कीं…ज़्यादा गंभीर नहीं, बल्कि कुछ हल्का-फुल्का और अपरिपक्व चीजें हैं….मैं इतना दुष्टतापूर्ण बर्ताव नहीं किया होता, अगर लिजल के रूप में जाने जाने वाले हमारे दल-प्रमुख, जिनका नाम एलिसबेट्टा कैनबिच है, ने मुझे इस हद तक प्रेरित और उत्तेजित नहीं किया होता। मुझे यह भी स्वीकार करना चाहिए कि मैंने इन सभी चीजों का पूरा मजा लिया।” (“I, Johannes Chrisostomus Amadeus Wolfgangus Sigsimundus Mozart, am guilty of not coming home until 12 o’clock midnight…from 10 o’clock until said hour at Canabich’s, I did some rhyming in the presence of said Canabich, his wife and daughter…nothing too serious but rather light and frothy, actually nothing but crude stuff…I would not have behaved so godlessly if our ringleader, known as Lisel, namely Elisabetta Canabich, had not inspired and excited me to such high degree. I must also confess that I thoroughly enjoyed it all.”)

लेकिन वहां केवल नाटक ही चला, ऐसा नहीं था, वोल्फगैंग ने काफी कठिन मेहनत भी की। उसके अंदर का संगीतकार मैनहेम में काफी व्यस्त था। उसे वायु वाद्ययंत्रों में रुचि पैदा हो गई थी और बहुत जल्द ही वह वायु वाद्ययंत्र बजाने वाला अपने वक्त का सबसे कुशल संगीतकार बन गया। हालांकि उसे बांसुरी नापसंद थी और जब उसे किसी संगीत कार्य के लिए एक कुशल शौकिया बांसुरी वादक के तौर पर एक प्रस्ताव आया, तब वह कार्य पूरा नहीं कर पाया और इसलिए उसे 200 के बजाय, जो कि तय था, उसे सिर्फ़ 96 गलडन (gulden) (फ्लोरिंस) मिले। इस गलती के लिए उसे माफ करने में उसके पिता को काफी दिन लग गये।


सिग्सिमंडस वोल्फगैंग के नाम का हिस्सा नहीं था लेकिन शायद यह उन्होंने स्वर्गीय आर्कबिशप को श्रद्धांजलि देने के लिए जोड़ लिया था।

लेकिन वहां केवल नाटक ही चला, ऐसा नहीं था, वोल्फगैंग ने काफी कठिन मेहनत भी की। उसके अंदर का संगीतकार मैनहेम में काफी व्यस्त था। उसे वायु वाद्ययंत्रों में रुचि पैदा हो गई थी और बहुत जल्द ही वह वायु वाद्ययंत्र बजाने वाला अपने वक्त का सबसे कुशल संगीतकार बन गया। हालांकि उसे बांसुरी नापसंद थी और जब उसे किसी संगीत कार्य के लिए एक कुशल शौकिया बांसुरी वादक के तौर पर एक प्रस्ताव आया, तब वह कार्य पूरा नहीं कर पाया और इसलिए उसे 200 के बजाय, जो कि तय था, उसे सिर्फ़ 96 गलडन (gulden) (फ्लोरिंस) मिले। इस गलती के लिए उसे माफ करने में उसके पिता को काफी दिन लग गये।

लेकिन वोल्फगैंग मैनहेम में खुश था। वह जानता था कि अगर उसे लम्बे समय के लिए वहां रहना है तो लियोपोल्ड को इस शहर में अपनी संभावनाओं के बारे में राजी करना होगा। इसलिए, अपने पिता को साप्ताहिक पत्रिकायें भेजा करता था जिसमें मैनहेम में उसकी सफलताओं के बारे में लिखा होता था।

इलेक्टर, इलेक्ट्रेस और पूरा राजदरबार मुझसे पूरी तरह खुश है। एकेडमी में मैंने दो बार प्रदर्शन किया। वे दोनों सीधे मेरे पास आये और क्लेवियर में मेरे पास खड़े हो गये…मैंने इलेक्टर से इसतरह बातचीत की जैसे कि वे और मैं बहुत अच्छे दोस्त हों….इलेक्टर ने खुद मुझसे पूछ-परछ की, वे मेरे बगल में दाहिने तरफ काफी देर तक बैठे रहे।” (“The Elector, the Electress and the entire court are well pleased with me. In the Academie, the two times I performed, both he and she came right up to me and stood next to me at the Clavier…I talked with the Elector as if he and I were the best of friends…The Elector himself asked again and again; he sat right next to me and sat perfectly still.”)

मैनहेम में ही वोल्फगैंग फ्राईडोलिन वेबर के परिवार से मिला। वह परिवार संपन्न नहीं था। वेबर एक ओकेजनल सिंगर (अंशकालिक गायक), प्रॉम्प्टर (अनुबोधक) और थियेटर में कॉपिइस्ट (नकलनवीस) था। वोल्फगैंग को बताया गया कि वेबर उसके लिए संगीत की नकल का काम कर सकता है। वेबर की चार बेटियां थीं और सभी प्रतिभाशाली संगीतज्ञ थीं। हो सकता है युवा वोल्फगैंग ने उम्मीद की होगी कि वह उन्हें पसंद आयेगा। हांलाकि वह कद में छोटा और पतला था, लेकिन दिखने में बुरा नहीं था। बहुत जल्द ही वह वेबर की दूसरी बेटी एलोसिया के प्यार में पड़ भी गया। हालांकि, बेहद निराश हो चुके उसके पिता ने उसे एक स्थाई नौकरी खोजने का निर्देश दिया या फिर ऐसी किसी जगह जाने को कहा जहां ज्यादा-से-ज्यादा पैसे कमाया जा सके; लेकिन वोल्फगैंग मैनहेम में ही रहा और एलोसिया की संगत का आनंद लेते हुए संगीत भी रचता रहा। 1778 की शुरुआत में एलोसिया के लिए संगीत संबंधी कुछ काम ढ़ूढ़ने के लिए, उन दोनों ने इटली जाने की योजना बनाई। वोल्फगैंग ने बेधड़क अपनी योजनाओं के बारे में अपने पिता को बताया।

लियोपोल्ड पहले से ही उससे खफा था। वह जानता था कि शादी हो जाने के बाद अपने बेटे पर से उसका नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो जायेगा। साथ ही, उसने अच्छी तरह देख लिया कि उसके बेटे की योजना मूर्खतापूर्ण है। उसने गुस्से में फौरन अपने बेटे को एक पत्र लिखाः ”4 फरवरी का तुम्हारा पत्र पढ़कर मुझे ताज्ज़ुब हुआ और डर भी लगा…तुम्हारे हर वेबर तथा नोटा बीन के साथ यात्रा करने के विचार ने मुझे पागल बना दिया है… तुम्हे अपने साथ पेरिस ले जाना है।” लियोपोल्ड ने परिवार की आर्थिक बागडोर अपने हाथ रखी और बहुत जल्द पत्नी और बेटे को पेरिस की यात्रा के लिए मनाने में भी सफलता पा ली।

mozart-tragedy-strikes-in-paris पेरिस में शुरू से ही नाकामी हाथ लगी। मुख्य कारण ये कि पेरिस पहले से ही अलग-अलग देशों के संगीतज्ञों से भरा था। इस वजह से उनके लिए वोल्फगैंग कोई खास कलाकार नहीं था बल्कि उनके लिए वह प्रतिभाशाली संगीतकारों की जमात का सिर्फ एक संगीतकार था जिसे वे सुनते आ रहे थे। युवा वोल्फगैंग को यह बहुत बुरा लगा और उसने अपने पिता को लिखा ”ये बेवकूफ फ्रांसीसी सोचते हैं कि मैं अब भी सिर्फ सात साल का हूँ… वे मेरे साथ नौसिखिया जैसा व्यवहार करते हैं, सिर्फ संगीतज्ञ ही हैं जो मुझे अच्छी तरह समझते हैं। लेकिन असल मायने तो आम जनता रखती है।” उससे पूरा ओपेरा लिखाने का कोई प्रस्ताव नहीं आया। उस दौरान, उसने सिर्फ एक बैले – लेस पिटिट रीन्स (Les petit riens) या अ बिट ऑफ नथिंग (A bit of nothing) लिखी, जो उसकी सबसे कम महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक है। उसने संगीत शिक्षक के रूप में भी अपना भाग्य आजमाया और कुछ हद तक आगे भी बढ़ा, लेकिन लगता है कि अपने छात्रों के घरों तक जाने का किराया ने इस प्रयास पर विराम लगा दिया। उसके इस दौरे की सफलता सिर्फ़ यह रही कि उसने एक सिम्फनी ‘पेरिस’ की रचना की। पिता और पुत्र दोनों के एक शुभचिंतक ने कहा कि पेरिस में वोल्फगैंग इतने ज्यादा अनौपचारिक और आलसी हो गये थे कि अपनी जगह नहीं बना सके।

इसी दौरान वोल्फगैंग और उसकी मां के रुपये खत्म होने लगे थे और इसलिए वोल्फगैंग को रहने और यात्रा के खर्चे पूरे करने के लिए अपने बहुत सारे निजी चीजों को गिरवी रखना पड़ा। स्थिति तो और खराब हो गई जब जुलाई 1778 में उसकी मां बीमार पड़ गई। चिकित्सीय सहायता लेने में थोड़ी देरी इसलिए हो गई क्योंकि उसकी मां जर्मन डॉक्टर से इलाज कराना चाहती थी, या शायद फिर इसलिए क्योंकि पैसों की बहुत ज्यादा तंगी थी। आखिरकार एक डॉक्टर आया लेकिन वह वोल्फगैंग की मां को बचा नहीं सका और 3 जुलाई को उनकी मौत हो गई। वोल्फगैंग टूट गया। एक अजनबी शहर में पूरी तरह अकेला हो गया। अब अपना सहारा वह खुद ही था। अपनी मां की मृत्यु की प्रतिक्रिया में उसने अपना सबसे शोकपूर्ण लेकिन सबसे महान पियानो सोनाटा ‘के.310 इन अ माइनर’ लिखा।

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लियोपोल्ड, जो उसी की तरह टूट चुका था, चाहता था कि उसका बेटा साल्जबर्ग वापस आ जाये। यहां पर उसने दरबारी ऑर्गन वादक के रूप में उसके लिए एक नौकरी का जुगाड़ (इंतजाम) किया था। वोल्फगैंग साल्जबर्ग वापस जाने के विचार के खिलाफ था और इसीलिए अपनी वापसी को जहां तक हो सकता था, टालता रहा। शायद भावनात्मक सहारे की जरूरत महसूस होने पर उसने एलोसिया से मिलने के लिए वापस मैनहेम जाने का फैसला किया, साथ ही अभी भी वह साल्जबर्ग से बाहर ही कोई नौकरी पाने की उम्मीद में था। लियोपोल्ड अपने जिद्दी बेटे से नाराज था और इसीलिए एक चुभता हुआ पत्र लिखा-”मुझे वाकई नहीं पता है कि मैं और क्या कहूँ ? या तो मैं अपना आपा खो दूंगा या फिर थकान से मर जाऊंगा… अगर तुम्हारा इरादा मुझे बर्बाद करना है तो तुम हवा में रेत के महल बना सकते हो… पेरिस में तुम्हारी मां के मरने के बाद मुझे उम्मीद है कि तुम अपनी अंतरात्मा पर जल्द ही अपने पिता की मौत का भी बोझ नहीं डालोगे।” जिद्दी वोल्फगैंग फिर भी मैनहेम गया लेकिन उसे खाली हाथ लौटना पड़ा, क्योंकि वहाँ न तो उसे कोई नौकरी मिली और न ही एलोसिया। वह म्यूनिख चली गई थी। वोल्फगैंग भी म्यूनिख गया जहां वह एक बिल्कुल अलग ही एलोसिया से मिला। एक सफल एलोसिया, जिसके जिसके पास उसके लिए संभवतः जज़्बात या वक्त नहीं था। हारकर वह अपने कारागार साल्जबर्ग लौटने का फैसला किया। उसने लियोपोल्ड को लिखा, “मैं आपसे मिलने आ रहा हूँ, साल्जबर्ग से नहीं…मैं साल्जबर्ग और वहां के निवासियों के साथ नहीं रह सकता…मुझे उनकी भाषा, उनके तौर-तरीके असहनीय लगते हैं।”

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फरवरी 1779 में, वोल्फगैंग ने साल्जबर्ग में एक दरबारी ऑर्गन वादक के रूप में अपना कार्य शुरू किया जहां उसे नयी धुनें बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कमीशन्स आता नहीं देख वोल्फगैंग ने दिलो-दिमाग से अपने आप को पवित्र और ऑर्केस्ट्रल संगीत तैयार करने में डुबो दिया जिसकी खूबसूरती आज तक कायम है। इसी दरम्यान वियना जाने के लिए एकबार जब वह साल्जबर्ग छोड़ा तो पुनः उसे साल्जबर्ग में गंभीर काम पाना बहुत ही मुश्किल लगा। जो बीज उसने मैनहेम और पेरिस में बोये थे, आखिरकार उनमें जड़ें आने लगीं और 1780 में उसे एक ओपेरा द इदोमेनियो, रे दी टा (The Idomeneo, re di Creta) या इदोमेनियो, किंग ऑफ क्रेटे इन म्यूनिख (Idomeneo, King of Crete in Munich) के लिए एक कमीशन दिया गया, जिसे बहुत सारे लोग उसका सबसे महान ओपेरा मानते हैं। हर्षित वोल्फगैंग बहुत जल्द म्यूनिख आ गया और दीवानों की तरह संगीत रचने लगा। पांच सालों में यह उसका पहला ओपेरा था और इसीलिए उसने अपनी सारी ताकत इसमें लगा दी। ओपेरा का एक किरदार समुद्र देवता नेपच्यून थे। वोल्फगैंग, जो कि पर्फेक्शनिस्ट(पूर्णतावादी) था, उसने हर सेटिंग (समायोजन) में शब्दों को कम करते हुए उस उक्ति को चार बार जोड़ा, क्योंकि उसका मानना था कि अलौकिक आवाज़ सुनने पर जो झटका लगता है, वो तुरंत बेअसर हो जाता है। वोल्फगैंग ने अपने पिता लियोपोल्ड को लिखा-”अगर ‘हैमलेट’ में प्रेतात्मा की उक्ति बहुत ज्यादा लम्बी नहीं होती, तो वह बहुत ज्यादा असरदार होता।”

पेशेवर स्तर पर ही सही, पिता और पुत्र फिर से करीब आये, क्योंकि ओपेरा के बारे में उनके बीच पत्रों का आदान-प्रदान हुआ। हालांकि कुछ पुराने जख्म अभी भी हरे थे, फिर भी दोनों ने पहले जैसे सहज होने की काफी कोशिश की। जब वोल्फगैंग सर्दी की वजह से अस्वस्थ था, लियोपोल्ड ने उसे इलाज के बारे में सलाह दी और अपने साथ रहने के लिए बुलाया, लेकिन साथ ही ईर्ष्यापूर्ण एक छोटी-सी टिप्पणी जोड़ने से खुद को नहीं रोक सका, ‘मैं इस पर विश्वास करना चाहूंगा कि अगर मैं तुम्हारे मां के साथ होता तो वह अभी भी जिन्दा होती।’ वह ओपेरा के प्रदर्शन के लिए आया और नैनर्ल को भी अपने साथ लाया। श्रोताओं को ओपेरा पसंद आया, लेकिन म्यूनिख में इसका प्रदर्शन सिर्फ़ तीन बार ही हुआ।

वोल्फगैंग अभी भी म्यूनिख में ही था और अपने ओपेरा की सफलता का मजा ले रहा था और सोच रहा था कि क्या होता अगर वह और ज्यादा ओपेरा पाने के लिए कोशिश करता। तभी आर्कबिशप कोलोराडो द्वारा उसे वियना बुलाया गया जो अपने पिता से मिलने वहां गया हुआ था। इसलिए वोल्फगैंग वियना के लिए रवाना हुआ जबकि लियोपोल्ड वापस साल्जबर्ग चला गया। दोनों को जरा भी एहसास नहीं था कि उनका अलग होना कितना महत्वपूर्ण साबित होने वाला था।

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युवा संगीतकार बड़ी उम्मीदों के साथ वियना के लिए रवाना हुआ। उसे लगा कि वह निश्चित रूप से ‘क्लेवियर की धरती’ पर अपना करियर बनाने में कामयाब होगा। लेकिन उसे तो आर्कबिशप के बुलावे के इंतजार में कोने में खड़ा रहना था, ऐसे में वह महत्वपूर्ण सम्पर्क कैसे बना सकता था? इसके अलावा, कौन जानता था कि उसे कब साल्जबर्ग के लिए अपना बोरिया-बिस्तर बांधना पड़ जाए? लेकिन ऐसा स्वर्णिम अवसर वह यूं ही नहीं गंवाना चाहता था। इसीलिए, वह आगे बढ़कर संभावित सरपरस्तों, संगीतज्ञों और नाटक से जुड़े लोगों से सम्पर्क बनाने लगा। जब आर्कबिशप को अपने इस ‘नौकर’ की गतिविधियों के बारे में पता चला तो वह क्रोधित हुआ और उसने वोल्फगैंग पर ‘एक बदमाश, घटिया और बेवकूफ आदमी’ होने का आरोप लगाया। इस पूरे प्रकरण के स्त्रोत वोल्फगैंग के वे पत्र हैं जो उसने अपने पिता को लिखे थे। इसलिए, मुख्य रूप से यह जानकारी एकतरफा है।

भोला-भाला दिखनेवाले वोल्फगैंग को लगा कि उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है और उसने अपने पिता को पत्र लिखा, जिसका उसने भी जवाब दिया। उसने बताया कि व्यावहारिक स्तर पर मौखिक बातों का कोई कानूनी महत्व नहीं होता है। वह अभी भी आर्कबिशप कोलोराडो का कर्मचारी था, वह इस्तीफा नहीं दे सकता था। वह एक नौकर था। उसके पास सिर्फ एक ही विकल्प था कि पद से बर्खास्त किये जाने के लिए वह लिखित आवेदन दे और इसके लिए भी उसे उसके पिता की मंजूरी जरूरी थी, जबकि वह 25 साल का हो चुका था!

आखिरकार, वोल्फगैंग के बताये अनुसार, उसे आर्कबिशप के कर्मचारी प्रबंधक काउण्ट आर्को से बर्खास्तगी का आदेश मिला। लियोपोल्ड की तरह काउण्ट आर्को ने भी पहले वोल्फगैंग को इस मामले में थोड़ा ज्यादा समझदारी से काम लेने के लिए मनाने की कोशिश की थी, लेकिन इससे वह जवान आदमी और भड़क गया और वह लिखा, ”निवेदन स्वीकार करने से मना किया ….अपने गुरु को बताया भी नहीं, क्योंकि आपमें ऐसा करने का साहस नहीं है और चूंकि आप ज्ञानी नौकरशाह होना पसंद करते हैं, अपने अनुचर को चार-चार हफ्तों तक अपने पीछे-पीछे घुमाते रहते हैं और आखिरकार इस अनुचर को अपना निवेदन खुद ही देने के लिए मजबूर किया जाता है, आप उसे घर से बाहर निकाल देते हैं और उसकी पीठ पर लात भी मारते हैं। और यह वही दरबार है जो आपके अंतिम पत्र के अनुसार दिल से सिर्फ मेरे हित के बारे में सोचता है।…”

वोल्फगैंग फिर से जोरदार वापसी करना चाहता था। लेकिन जवानी के जोश में बह गया, क्योंकि अपने से ऊंचे पद के किसी व्यक्ति पर हमला करना उसका दुःसाहस ही था। इसके लिए उसे कारावास में डाला जा सकता था या कोड़े भी बरसाये जा सकते थे। जैसा कि अपेक्षित था, लियोपोल्ड चाहता था कि वह साल्जबर्ग वापस आ जाए लेकिन वोल्फगैंग के दिमाग में इसके बारे में दो तरह की बातें चल रही थीं। उसके पिता के चिंतित होने के पीछे कुछ कारण थे। उसकी संगत और तथाकथित पीने की आदतों के बारे में साल्जबर्ग में गंदी अफवाहें फैल गई थीं। इन सब बातों की सफाई देने में वोल्फगैंग को काफी तकलीफ हुई और उसने लिखा, “आपको मेरी आत्मा की शुद्धि (मुक्ति) के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।” हो सकता है इन अफवाहों के पीछे कुछ सच्चाई रही भी हो, लेकिन प्रतिफल से साबित होता है कि वोल्फगैंग और चाहे जो भी कर रहा था पर वह कड़ी मेहनत भी जरूर कर रहा था। अंततः, खासकर अपने पिता की परेशानी बढ़ाने के लिए, वोल्फगैंग ने एक स्वतंत्र कलाकार और संगीतकार के रूप में वेनिस में ही रुकने का फैसला कर लिया।

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आर्कबिशप के द्वारा बर्खास्त किये जाने के पहले ही वोल्फगैंग ने एक निजी ठिकाने का बंदोबस्त कर लिया था। लेकिन इससे लियोपोल्ड गुस्सा हुए क्योंकि यह घर वेबर परिवार का था। फ्रिडोलिन मर चुका था और उसकी विधवा अपने तीनों बेटियों जोसेफा, कॉन्सटैन्ज और सोफी के साथ वियना में बस गई थी। उसकी भूतपूर्व प्रेमिका एलोसिया ने अभिनेता और चित्रकार जोसेफ लान्ज से शादी कर ली थी और वह अब एक जानी-मानी दरबारी गायिका थी। बहुत जल्द बातों- ही- बातों में वोल्फगैंग का नाम कॉन्सटैन्ज के साथ जोड़ा जाने लगा और उसे उनका घर छोड़कर किसी दूसरी जगह जाना पड़ा। उसने कॉन्सटैन्ज वाले पूरे प्रकरण के बारे में अपने पिता को बताने की कोशिश की और कहा कि अफवाहें तो अक्सर उसका नाम उसकी सुसंस्कृत शिष्या जोसेफा ऑर्नहैमर से भी जोड़ती रही हैं, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है। ”वह किसी गंवार लड़की की तरह मोटी है, इतनी प्यारी है कि आपको अपना दीवाना बना सकती है…लोग ये सोच रहे हैं कि उसके जैसे चेहरा वाली किसी लड़की को मैं क्यों पसंद करने लगा।”

हालांकि वह अपने पिता को बेवकूफ नहीं बना पाया और दिसम्बर 1781 में वोल्फगैंग ने सही बात बताते हुए स्वीकार किया कि वह कॉन्सटैन्ज से शादी करने का वादा कर चुका है। वेबर परिवार चाहता था कि उन दोनों की शादी जल्द हो जाए, लेकिन जब वोल्फगैंग को पता चला कि कॉन्सटैन्ज की मां और अभिभावक ने कोई योजना बनाई है जिसके अनुसार उन्हें (जोड़े को) समझौता करना होगा और उन्हें शादी करने के लिए मजबूर किया जायेगा, तब उसने मना कर दिया। हालांकि उसे वह सुन्दर नहीं लगी, फिर भी उसने लिखा- ”वह कुरूप तो नहीं है लेकिन उसकी पूरी सुंदरता उसकी दो छोटी-छोटी काली आंखों और सुडौल बदन में ही समाहित है। वह बहुत बुद्धिमान नहीं है लेकिन एक पत्नी और मां के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए उससे पास सामान्य बुद्धि है।” लियोपोल्ड को लिखे अपने पत्रों में उसने उसकी हल्के-फुल्के ढ़ंग से तारीफ की थी और उन्हें राजी करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन लियोपोल्ड कुछ सुनने को तैयार नहीं था।

निजी जिन्दगी में चल रहे इस नाटक के दौरान, प्रतिभाशाली संगीतकार की पेशेवर जिन्दगी सुधरने लगी थी। 1781 के उत्तरार्द्ध में वह ओपेरा ‘डाई एंटफरंग अउस डेम सिरेल” (Die Entfuhrung aus dem Serail) या ‘द अब्डक्शन फ्रॉम द हरम’ (The Abduction from the Harem) रचने में व्यस्त रहा। दरअसल वह ओपेरा सितम्बर 1781 में प्रदर्शित किया जाना था, लेकिन उसका प्रदर्शन अगले साल जुलाई में हुआ। वोल्फगैंग इस अतिरिक्त समय में उन क्षेत्रों में व्यस्त रहा जिनमें उसे महारत प्राप्त थी। उसने धड़कते और बेचैन दिल वाले नायक के लिए संगीत बनाया जो अपनी प्रेमिका से मिलने का इंतजार करता है। उस ओपेरा का प्रदर्शन हुआ और वह सफल साबित हुआ और उसकी काफी संख्या में प्रस्तुतियां हुईं। कहा जाता है कि सम्राट जोसफ द्वितीय अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वोल्फगैंग से कहा कि उसका ओपेरा तो बहुत सुंदर था लेकिन उसमें टिप्पणियां कुछ ज्यादा ही थीं। एक बार फिर उसे कमीशन्स की उम्मीद बंधी थी पर निराश ही होना पड़ा। युवा संगीतकार को अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरे तरीके खोजने थे क्योंकि बहुत जल्द वह शादी करने वाला था।

आखिरकार 4 अगस्त 1782 को 26 साल की उम्र में वोल्फगैंग ने कॉन्सटैन्ज से वियना के सेंट स्टीफन्स कैथेड्रल चर्च में शादी कर ली। लियोपोल्ड और नैनर्ल शादी के खिलाफ थे क्योंकि वे सोचते थे कि वेबर परिवार सामाजिक रूप से उनसे नीचे है और यही वजह है कि उनके और कॉन्सटैन्ज के बीच कभी अच्छा संबंध नहीं बन पाया। लेकिन अंत में लियोपोल्ड ने शादी को अपनी मंजूरी दी और इस बारे में उसका पत्र शादी के ठीक एक दिन बाद ही पहुंचा। उन्हें छह बच्चे हुए, जिनमें से सिर्फ दो जिन्दा रहे।

वोल्फगैंग बेहद खुश था और उसका खुशी जाहिर करने का तरीका यह था कि वह एक लम्बा पारंपरिक संगीत रचने लगा लेकिन वह वियनावासियों को पसंद नहीं आया। उसने उसे कभी पूरा नहीं किया, हो सकता है कि उसे एहसास हो गया हो कि ये बिकने लायक नहीं है। उनमें से कुछ संगीत की प्रस्तुति उस समय हुई, जब 1783 में वोल्फगैंग और कॉन्सटैन्ज विवाहित जोड़े के रूप में साल्जबर्ग आये थे। यह आखिरी बार था जब नैनर्ल ने अपने भाई को देखा, क्योंकि बहुत जल्द उसने भी शादी कर ली। वोल्फगैंग का पहला बच्चा कार्ल थॉमस 21 सितम्बर, 1784 को पैदा हुआ और जो शैशवास्था के बाद भी जीवित रहा। अगले साल जब लियोपोल्ड उनलोगों से मिलने गया तो उसने उस बच्चे की ख़ूब तारीफ की। उसने नैनर्ल को लिखा कि वह वोल्फगैंग के संबंध, घर और प्रतिष्ठा से प्रभावित हैं।

उसी साल वोल्फगैंग फ्रीमेसन्स का सदस्य बना। वह सच्चे दिल से बैठकों में भाग लेता था और उसे मेसनिक संगीत (Masonic Music) के संग्रह और रचना का कार्य-भार मिला था। जीवन और मृत्यु के बारे में युवा संगीतकार के विचारों को मेसन्स के शिक्षण ने बहुत ज़्यादा प्रभावित किया। संगठन के सदस्यों के बीच भाईचारे का संबंध था जो काफी मज़बूत था और कई बार आर्थिक समस्याओं में वोल्फगैंग को उनसे भाईयों की-सी मदद का लाभ भी मिला। वोल्फगैंग इस संगठन से किसी आर्थिक लाभ से नहीं जुड़ा था। क्योंकि इस दौरान तो वह अपने जीवन के सफलतम शिखर पर मौजूद था।

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वियना में वोल्फगैंग के शुरुआती साल खुशगवार और व्यस्तता भरे रहे। वह सभी तरह के वाद्य संगीत तैयार कर रहा था और साथ-ही दूसरे संगीतकारों के कार्यों का अध्ययन भी कर रहा था, जिससे कई बार उसकी अपनी शैली भी प्रभावित हो जाया करती थी। उस जमाने के सबसे प्रसिद्ध संगीतकारों में से एक, जोसफ हेडन ने अपने एक वियना दौरे पर लियोपोल्ड से कहा था कि- ”मैं एक ईमानदार आदमी हूँ और ईश्वर को साक्षी मानकर कह रहा हूँ कि आपका बेटा सबसे बड़ा संगीतकार है, जिसे मैं व्यक्तिगत रूप से या उसे उसके शोहरत की बदौलत जानता हूँ। संगीत की उसे अच्छी समझ है और इसके अलावा वह इस कला में पूरी तरह पारंगत भी है।”

सन 1782 से 1785 के बीच, वोल्फगैंग ने बहुत सारे स्वनिर्मित संगीत कार्यक्रम पेश किये जिसमें वह ‘एकल कलाकार’ था। वियना में थियेटर के लिए जगह बहुत ही कम थी और इसीलिए वह अपरंपरागत जगहें आरक्षित करता था जैसे- आवासीय भवनों के बड़े-बड़े कमरे और महंगे रेस्तरां के नृत्य-कक्ष। कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हुए थे क्योंकि वोल्फगैंग ने अपने श्रोताओं से सीधे तौर पर जुड़ने का आनंद लिया था। सन 1784 का साल उसके लिए सबसे सफल साल रहा क्योंकि इसी साल एकबार लगातार पांच हफ्तों के दौरान उसने 22 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उस समय तक तो वह अपने साथ अपने संगीत की सूची रखना भी प्रारंभ कर दिया था।

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सन 1786 में ली नोज्जे डी फिगेरो (Le nozze di Figaro) या द मैरिज ऑफ फिगेरो (The Marriage of Figaro) के साथ वोल्फगैंग ने ओपेरा में फिर से प्रवेश किया। लिब्रेटिस्ट ‘लोरेन्जो डा पोण्टे’ के साथ वह उसका पहला ओपेरा था। साथ मिलकर दोनों ने कुल तीन ओपेरा लिखे- इन्हीं की साझेदारी ने संभवतः दुनिया को सबसे बेहतरीन ओपेरा दिया। फिगेरो काफी लोकप्रिय था लेकिन उसकी सिर्फ नौ प्रस्तुतियां ही हुईं। 1787 के शुरू में वोल्फगैंग उस ओपेरा के साथ प्राग गया, जहां शानदार सफलता मिली। वोल्फगैंग तो खुशी के मारे सातवें आसमान पर था। उसने अपने एक दोस्त को लिखा-”हर कोई मेरे ‘फिगेरो’ संगीत की बेहिसाब मस्ती में थिरक रहा था, झूम रहा था जो कॉन्ट्रेडांसेस और जर्मन नृत्यों में रूपांतरित हो गया था। यहां फिगेरो के सिवाय कोई किसी के बारे में बात ही नहीं कर रहा है। फिगेरो के अलावा न कोई कुछ बजा रहा है, न गा रहा है। यहां तक कि कोई सीटी भी नहीं बजा रहा है। कोई भी ओपेरा इतना नहीं देखा जा रहा है जितना कि ‘फिगेरो’। बार-बार लोग ‘फिगेरो’ ही देख रहे हैं। ये सब मेरे लिए बहुत ही सम्मान की बात है।” वोल्फगैंग को अगले शरद ऋतु के लिए ‘द डॉन जियोवानी’ पर एक ओपेरा लिखने का काम अलग से मिला।


लिब्रेटिस्ट- किसी ओपेरा में शब्दों का लेखक

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लेकिन 1787 तक वोल्फगैंग की स्थिति बदली पर बदतर ही हुई। मोजार्ट परिवार अपनी विलासितापूर्ण (फिजूलखर्ची वाली) जीवनशैली की जरूरतें नहीं पूरी कर पा रहा था। वह बड़ा घर खटकने लगा था और इसीलिए अप्रील आते-आते वे एक किफायती घर में रहने चले गये। उसका सबसे पसंदीदा काम शिक्षण की अपनी ही समस्याएं थीं। वोल्फगैंग को अपनी शिष्याओं के घरों में जाकर पढ़ाना था जो उसके जेब पर बहुत भारी पड़ता था। इतना ही नहीं, सम्मानजनक दिखने के लिए उसे उनके जैसा दिखना जरूरी था जो उसे फीस देते थे। इसका मतलब था, उसे अपने पहनावे वगैरह पर काफी ध्यान देना। यह ऐसी बात नहीं थी जिसे स्वीकार करने के लिए वह बिल्कुल तैयार ही नहीं था क्योंकि ऐसी चीजों से तो खुशी ही मिलती थी।

अच्छे कपड़े वैसे भी वोल्फगैंग की कमजोरी थे। उसके पत्रों का एक अंश पोशाक के प्रति उसके लगाव को दर्शाता है-

“मेरे पास एक ऐसी जैकेट होनी चाहिए जिसमें मेरा वे बटन्स लगाना सार्थक हो, जिन्हें मैं अपने दिमाग से निकाल नहीं सकता….किनारे के चारों ओर बहुत सारे सफेद पत्थरों के साथ मौक्तिक (मुक्ताभ) और बीच में एक खूबसूरत पीला पत्थर होना चाहिए।” उसे अपने बारीक बालों पर बहुत गर्व था और वो रोजाना उनकी देखभाल करता था। बालों को घुंघराले बनाने, संवारने और उनमें पाउडर लगाने के लिए हर सुबह एक नाई आता था। (उन दिनों बालों में पाउडर लगाना एक फैशन था)

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उसी महीने, लुडविग वान बीथोवन (Ludwig van Beethoven) नाम का एक 16 साल का लड़का उसके पास कुछ सीखने के लिए आया लेकिन सिर्फ़ दो ही हफ्ते बाद उसे छोड़कर जाना पड़ा क्योंकि उसकी मां बीमार थी। दोनों फिर कभी नहीं मिले। जल्द ही, वोल्फगैंग किडनी की समस्याओं के कारण बीमार हो गया। उसी साल उसके बचपन का दोस्त सिगमंड बरिसनी जो एक डॉक्टर था, मर गया और वोल्फगैंग की पालतू चिड़िया भी चल बसी। (जिसपर उसने एक कविता भी लिखी थी।) वोल्फगैंग और कॉन्सटैंज की चौथी संतान थेरेसिया कॉन्सटैन्जिया एडेहीड फ्रीडेरिका मारिया (Theresia Constanzia Adelheid Freiderika Maria Anna) पैदा हुई लेकिन वह छह महीने बाद ही मर गई। लेकिन सबसे बड़ा आघात उसे 28 मई, 1787 को अपने पिता की मौत पर लगा। लियोपोल्ड कुछ समय से बीमार तो चल रहा था लेकिन उसकी मौत अचानक ही हुई। आखिरी बार अपने पिता को देखने के लिए मोजार्ट को साल्जबर्ग जाने का मौका नहीं मिला। मोजार्ट ने अपने पिता को आखिरी खत 14 अप्रैल को लिखी थी।

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निःसंदेह, लियोपोल्ड अपने बेटे से ये बातें सुनकर खुश था, लेकिन वह जल्द ही मर गया और वोल्फगैंग अपने पिता को फिर कभी नहीं देख पाया। मोजार्ट को अपने पिता की मौत का बहुत ज्यादा दुःख हुआ। वे एक दूसरे के साथ इतना ज्यादा रहे थे कि उसे अपनी उस जिन्दगी को संभालना बहुत मुश्किल लग रहा होगा जिसमें उसे लिखने के लिए, उसे सुनने के लिए और नाराज होने के लिए भी लियोपोल्ड नहीं था। उसे अब एक अच्छी और स्थायी नौकरी चाहिए थी और इसका मतलब था किसी राजदरबार की नौकरी। दरबार की प्राथमिकता और कप्पेलमिस्टर एंटोनियो सेलीरि के प्रभाव के कारण इटली के लोग ही दरबार के लिए प्राथमिकता बने रहे। पिता और पुत्र के पत्रों से पता चलता है कि आम तौर पर दोनों को इटैलियन संगीतकारों पर भरोसा नहीं था, खासकर सेलीरि पर।

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अभी भी डॉन जियोवानी का ही इंतजार करना था और वह सफल भी साबित हुआ था। लेकिन पहले की तरह, अब नये कमीशन्स नहीं आ रहे थे। दिसम्बर 1787 में, सम्राट जोसेफ द्वितीय ने मोजार्ट को अपने ‘चैम्बर कम्पोजर” (सभा संगीतकार) के रूप में नियुक्त किया। वह पद प्रसिद्ध ओपेरा संगीतकार ग्लक की मौत के बाद खाली पड़ा था। हालाँकि यह कोशिश तो मोजार्ट को अलग साबित करने के उद्देश्य की गई थी लेकिन सम्राट का एक अप्रत्यक्ष उद्देश्य भी था। जोसफ नहीं चाहता था कि वह वियना छोड़े। वेतन कम था और उसकी जिम्मेदारी सिर्फ़ इतनी थी कि उसे वार्षिक समारोह के लिए नृत्य तैयार करना था। मोजार्ट ने कहा भी था कि ” मैं जो करता हूँ, उसके लिए यह वेतन बहुत ज्यादा है पर जो मैं कर सकता हूँ, उसके लिए बहुत ही कम है।” फिर भी, यह कम आमदनी भी उसके लिए काफी अहमियत रखती थी।

जब सम्राट ने तुर्की के समा्रट के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी तब 1788 में हालात और खराब हो गये। देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी और संगीत के प्रति जनता का प्यार दब गया क्योंकि लोगों के पास बहुत ही कम समय था और उससे भी अहम बात ये थी कि उनके पास अब संगीत पर खर्च करने के लिए पैसे भी कम थे। फिर भी लोग ओपेरा के लिए पैसे खर्च करने को तैयार थे, लेकिन बदकिस्मती से वोल्फगैंग के हाथ में अभी कोई ओपेरा नहीं था। इसे विडम्बना ही कहा जायेगा कि संगीत संबंधी अन्य गतिविधियां जैसे- शिक्षण, संगीत कार्यक्रम, जो कि उसकी जीविका के साधन थीं, भी बुरी तरह प्रभावित हुईं। संकटग्रस्त संगीतकार की आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई और इसीलिए एक बार फिर वह अपनी कीमती चीजें गिरवी रखने पर मजबूर हो गया। साथ ही, पैसे मांगने के लिए उसने बहुत सारे दयनीय पत्र लिखे जिसमें से ज्यादातर पत्र उसने अपने दोस्त और साथी मेसन माइकल पचबर्ग को लिखे। उसने अपने आप को अपने काम में पूरी तरह डुबो दिया, लेकिन वह कुछ खास नहीं रच सका, हालांकि वह नियमित रूप से देर रात जगकर काम करता रहता था। मोजार्ट धीरे-धीरे अवसाद का शिकार होने लगा और इसीलिए उसका मूड बार-बार बदलने लगा। अपनी किस्मत बदलने की उम्मीद में 1789 के वसंत ऋतु में उसने लिपजिग, ड्रेसडेन एवं बर्लिन की और 1790 में फ्रैंकफ्रण्ट, मैनहेम और जर्मनी के दूसरे शहरों की लम्बी यात्रायें कीं। लेकिन, इन यात्राओं में मामूली सफलता ही मिली और परिवार को आर्थिक समस्याओं से उबरने में कोई खास राहत नहीं मिल सकी।

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आखिरकार 1790 में मोजार्ट को एक ओपेरा ‘कोसी फैन ट्यूट’ (Cosi fan tutte) या ऑल वीमेन डू दिस (All women do this) मिला, यहां ‘दिस’ का मतलब ‘लैच ऑन्टू द नियरेस्ट मैन’ (latch onto the nearest man) है। वह ओपेरा इस बार भी डा पोण्ट द्वारा वास्तव में सेलीरि के लिए तैयार किया गया था जिसने देखने से इन्कार कर दिया था। बाद की देखें तो ऐसा लगता है कि उसने इन्कार करके समझदारी दिखाई, क्योंकि उस ओपेरा के तथाकथित ‘अनैतिक’ कथावस्तु के कारण लोगों में बहुत ज्यादा गुस्सा और नाराजगी थी। एक ओपेरा में ऐसा कुछ होने और करने को लेकर जाने-माने संगीतकार भी मोजार्ट से गुस्सा हो गये। खैर, ओपेरा सफल रहा और इसका प्रस्तुतियां फरवरी 1790 में सम्राट जोसफ द्वितीय की मौत की वजह से बाधित हुईं। नया सम्राट लियोपोल्ड द्वितीय, जोसफ का भाई बहुत बड़ा संगीत प्रेमी था लेकिन दुर्भाग्यवश संगीतकार के रूप में उसने मोजार्ट को पसंद नहीं किया। नये सम्राट ने मोजार्ट को पूरी तरह नजरअंदाज किया और उसे फ्रैंकफ्रण्ट में अपने राज्याभिषेक में नहीं आमंत्रित किया। फिर भी मोजार्ट इस उम्मीद में गया कि हो सकता है उसे कुछ काम मिल जाए। लेकिन इस यात्रा में उसे कोई माली सफलता नहीं मिली और हतोत्साहित मोजार्ट वियना लौट आया।

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आखिरकार 1791 में मोजार्ट की हालत सुधरनी शुरू हुई। जनवरी में, उसने अपना आखिरी पिआनो संगीत (के.622) रचा और एक ऐसे कार्यक्रम में पेश किया जिसका उसे फायदा हुआ। युवा संगीतज्ञ को भी नहीं पता था कि लोगों के सामने ये उसका आखिरी प्रदर्शन है। अपने दरबारी कर्तव्यों को पूरा करने के क्रम में उसने दो खूबसूरत फैण्टेसियाज (Fantasias) (के.594, के.608), दो मेसोनिक कैंटेटाज (Masonic Cantatas) (के.619, के.623) और एक क्लेरिनट (Clarinet Concerto) (के.622) रची। हालांकि उस साल का, उसका सबसे बड़ा काम उसके दो ओपेरा थे। जिन्दगी में पहली बार और बदकिस्मती से आखिरी बार, उसके पास एक साल में दो ओपेरा थे!


फैण्टेसियाज- संगीत रचना का स्वच्छंद रूप
कन्सर्टो- एकल कलाकार और ऑर्केस्ट्रा के लिए रचना

‘डाई जॉबरफ्लोट’ (Die Zauberflote) या द मैजिक फ्लूट (The Magic Flute) का पहला प्रदर्शन सितम्बर में हुआ। सिंग्सपील (Singspiel) में साहस, जादू और संगीत का मजेदार समावेश था और इसीलिए वह दर्शकों के दिलों से जुड़ने में सफल रहा। वह एक सीरिया ओपेरा (opera seria) था जो लियोपोल्ड द्वितीय (Leopold II) के बोहेमिया के राजा बनने पर, उनके राज्याभिषेक के लिए तैयार किया गया था। उस ओपेरा को ला क्लेमेंजा दि टिटा (La clemenza di Tito) या द मर्सिफुलनेस ऑफ टाइटस (The Mercifulness of Titus) कहा गया और जो दरअसल सेलिरी को पेश किया गया था लेकिन उसने इन्कार कर दिया था और इस तरह वह मोजार्ट के पास आ गया। युवा संगीतकार काफी खुश था क्योंकि उसका प्रदर्शन प्राग में होना था, जहां वह अभी भी एक लोकप्रिय और पसंदीदा कलाकार था। वक्त की कमी के कारण उसे पूरा करने के लिए मोजार्ट को पूरे जोश से काम करना था। अंततः जब ओपेरा का प्रदर्शन हुआ तो सम्राज्ञी को वह उबाऊ लगा और उन्होंने अपने एक दोस्त को कहा कि संगीत बहुत ही खराब था पर बाद में पता चला कि यह बात साम्रज्ञी ने नहीं बल्कि पिगस्विल नामक किसी जर्मन ने कही थी। किंतु प्राग में इसे पसंद किया गया और 1790 में ला क्लेमेन्जा (La clemenza) का व्यापक प्रदर्शन हुआ और वह मोजार्ट का पहला ओपेरा बन गया जिसका प्रदर्शन लंदन में भी हुआ (1806 में)। हालांकि आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं आईं कि वह ओपेरा मोजार्ट की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर पाया।


सिंगस्पील- जर्मनी का एक हास्य ओपेरा जिसमें संवाद भी बोले जाते हैं।

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मोजार्ट की आखिरी रचना एक रिक्विम (Requiem) या मास फॉर द डेड (Mass for the Dead commissioned) थी जो एक सनकी काउंट, फ्रांज वेल्सग-स्टूपैच (Franz Walsegg-Stupach) ने अपनी दिवंगत पत्नी की याद में लिखी थी। संभवतः प्रचार से बचने के लिए काउंट अपना नाम जाहिर नहीं होने दिया था। इसकी वजह से बहुत सारी खराब अफवाहें फैल गईं : एक अफवाह यह थी कि ‘एक अधेड़ अजनबी’ मोजार्ट के पास आया और उसे बोला कि मौत उसकी तरफ बढ़ रही है और एक अफवाह यह भी थी कि संगीतकार ने खुद अपने लिए रिक्विम तैयार की है। एक कहानी यह है कि कॉन्सटैन्ज (Constanze) ने वह काम अपने हाथ में ले लिया क्योंकि इसके चलते मोजार्ट बीमार हो गया था और इस संगीतकार के बारे में यह भी कहानी है कि वह अपनी मौत से घटों पहले तक ऑल्टो का पूर्वाभ्यास कर रहा था और गा रहा था।


ऑल्टो- गाने वालों में से सबसे ऊंची पुरुष आवाज।

मोजार्ट खुद रिक्विम (requiem) को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्साहित था क्योंकि उसमें वह धार्मिक संगीत के अपने व्यापक अनुभव का इस्तेमाल कर सकता था। उसने उस पर काम करना शुरू किया और प्रस्तावित चार भागों में से दो पूरा भी कर चुका था, तभी उसे अचानक काम रोकना पड़ा क्योंकि वह बीमार पड़ गया। बहुत सारी ऐसी ख़बरे हैं जो बताती हैं कि जब वह बीमार पड़ा, तब वह प्राग में था, लेकिन ऐसे दावों की सच्चाई संदिग्ध है। जहां तक हमें पता है, मोजार्ट नवम्बर के उतरार्द्ध में, अपनी मौत के सिर्फ दो हफ्ते पहले या उसी के आस-पास बीमार पड़ा। उसके शरीर में काफी सूजन आ गई थी जिसकी वजह से उसका चलना-फिरना असंभव हो गया था। इसके अलावा, वातरोग की वजह से उसे बुखार था। बार-बार उल्टी हो रही थी और संभवतः उसके गुर्दे काम काम नहीं कर रहे थे। ऊपर से ललाट पर कोल्ड कॉम्प्रसेस का इस्तेमाल करना, मौत के करीब पहुंच चुके संगीतकार के लिए प्राणघातक सिद्ध हुआ। कोई डॉ. क्लोसेट थे जिन्होंने अच्छे इरादे से उपचार के दौरान उसका इस्तेमाल किया, लेकिन उसका परिणाम सिर्फ यह हुआ कि मोजार्ट बेहोश हो गया और कोल्ड कॉम्प्रेसेस उसके बहुत ज्यादा गर्म हो चुके शरीर के लिए घातक साबित हुआ।

सिर्फ 35 साल की उम्र में, मोजार्ट का निधन 5 दिसम्बर, 1791 को तड़के सुबह हुआ। दो दिनों के बाद उसे वियना से बाहर एक गुमनाम कब्र में दफन कर दिया गया। उसका अंतिम संस्कार विएनिज परंपरा के अनुसार सामान्य तरीके से हुआ। अफवाह उड़ी थी कि जल्दबाजी में उसे एक भिखारी के कब्र में दफना दिया गया, जो कि सिर्फ एक काल्पनिक कहानी है। हालांकि, प्राग और वियना में उसके श्राद्ध और कार्यक्रमों में काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया।


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मोजार्ट सामान्य मौत मरा या उसकी हत्या हुई थी? मोजार्ट की मौत के कारणों के बारे में बहुत सारी अटकलें लगाई जाती रही हैं। उसकी मौत संभवतः तेज बुखार के कारण हुई। एक डॉक्टर ने कहा था कि उसी बुखार की वजह से दूसरे बहुत सारे विएनिज भी मौत के शिकार हुए। मोजार्ट, जो वैसे भी पूरी तरह कभी तंदुरुस्त नहीं रहा, बहुत आसानी से उस बुखार का शिकार हो गया। लेकिन, बहुत सारे लोग हैं जो अपनी बीमार मानसिकता के कारण मोजार्ट की मौत को सामान्य मौत नहीं मानते। कुछ लोगों ने दावा किया कि मोजार्ट को सेलिरि द्वारा जहर दिया गया। लेकिन यह अतर्कसंगत लगता है क्योंकि जब दोनों जीवित थे, सेलिरि उससे कहीं ज्यादा सफल था और इसीलिए ऐसा कोई काम करने का उसके पास कोई कारण नहीं था।

मोजार्ट के अंतिम पत्र से यह बात अपने आप जाहिर होती है कि सेलिरि ने उसे ‘डाई जॉबरफ्लोट’ (Die Zauberflote) पर गर्मजोशी से बधाई दी थी और इसे एक ओपेरोन (भव्य ओपेरा) कहा था। वे पेशे में प्रतिद्वंद्वी थे, इससे ज्यादा या कम कुछ नहीं थे।

सेलिरि की कहानी को मोजार्ट की एक शिष्या, मारिया मैग्डलेना होफ्डेमेल (Maria Magdalena Hofdemel) के ईर्ष्यालु पति की कहानी खारिज करती है। मोजार्ट की मौत के एक दिन बाद ही उसने अपनी गर्भवती पत्नी पर हमला किया था और फिर आत्महत्या कर ली थी। लेकिन इसका कोई सबूत नहीं है कि उसने किसी तरह की बेवफाई के कारण उसकी हत्या की और अगर ऐसी कोई बात थी भी, तो मोजार्ट उसमें शामिल था, इसका भी कोई प्रमाण नहीं है। मोजार्ट के तथाकथित मौत से जुड़ी कहानियों की कोई कमी नहीं है। अगर एक प्रतिद्वंद्वी, एक ईर्ष्यालू पति ने ऐसा कुछ नहीं किया, तो फिर कोई फ्रीमेसन सदस्य या सरकार ही ऐसा घिनौना काम कर सकती है। दुनिया ने अब तक जितने संगीतकारों को देखा-सुना है, उनमें एक महान संगीतकार का बुखार के कारण एक सामान्य मौत मर जाना, बहुत ही तुच्छ लगता है। लेकिन जैसा कि हमारा अनुमान है और हम मानते हैं कि मोजार्ट सामान्य मौत मरा।

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इसे विडम्बना ही कहा जायेगा कि मोजार्ट की मृत्यु के तुरंत बाद ये दुनिया जागी। प्रकाशकों, गायकों और श्रोताओं ने मोजार्ट की अनोखी खूबियों को पहचानना (खोजना) शुरू किया और उनकी धुनों की खूबसूरती से मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सके। उसकी पत्नी कॉन्सटैंज और उसका दूसरा पति, डेनमार्क का राजनयिक जॉर्ज निकोलस निस्सन (Georg Nikolaus Nissen) और उनके करीबी दोस्तों को उनके अप्रकाशित संगीत को प्रकाशित करने, अधूरे कार्य को पूरा करने और मोजार्ट की जिन्दगी के बचे हुए दस्तावेजों को सरंक्षित करने का श्रेय दिया जाना चाहिए।

‘सिर्फ जिन्दगी ही जीत नहीं है और न मौत पराजय ही है’… यह मुहावरा मोजार्ट के बारे में बिल्कुल सही और सटीक बैठता है। उस्ताद मोजार्ट अपने कालातीत धुनों की बदौलत आज भी जिन्दा है। उसकी सरस धुनें आपके दिलो-दिमाग को अपने वश में कर लेती हैं और आप खुद को रोक नहीं पाते हैं। मोजार्ट ने जब धुनें बनाई थीं, उसके बाद कई सदियां गुजरीं लेकिन वे हमेषा की तरह ताजा हैं और इसीलिए जो भी इन्हें सुनता है वो हमेषा के लिए जुड़ जाता है, चाहे वह जवान हो या बुजुर्ग, कोई शौकिया संगीतकार हो या पेषेवर। उसके संगीत में सभी के लिए कुछ-न-कुछ है। मोजार्ट के संगीत की वजह से ही आज ये दुनिया एक बेहतर जगह है।

उसका संगीत इतना प्रभावषाली है कि लगता है कि उसमें आरोग्यकर (उपचारात्मक) षक्ति है। जब मिरगी के मरीजों को उसका सोनाटा के.448 सुनाया गया तो उसके प्रभाव से उनको मिरगी का दौरा आना काफी कम हो गया। षोध के आधार पर यह दावा किया जाता रहा है कि रोजाना मोजार्ट का संगीत सुनने से गणितीय कुषलता सुधरती है, तनाव घटता है और आईक्यू बढ़ता है। फ्रेंच षोधकर्ता डॉ. अल्फ्रेड ए. तोमातिस (Dr. Alfred A. Tomatis) ने अपनी पुस्तक ‘पोरक्वोई मोजार्ट’ (Pourqoi Mozart) या ‘व्हाई मोजार्ट’ (Why Mozart?) में इस सिद्धांत को ‘मोजार्ट इफेक्ट’ (Mozart effect) का नाम दिया है। ऐसा लगता है कि उसके संगीत की सार्थकता दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। जर्मनी का एक सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लांट सीवेज की गंदगी को तेजी से तोड़ने(बहाने) के लिए मोजार्ट का संगीत बजाता है। कहा जाता है कि प्लांट के प्रचालकों को विष्वास है कि मोजार्ट के संगीत का कम्पन हर चीज से गुजर सकता है जैसे- पानी, सीवेज और कोषिका आदि।

यह बात अभी तक अस्पश्ट है कि मोजार्ट का संगीत वाकई इतना षक्तिषाली है भी या नहीं, लेकिन यह जानने का केवल एक ही तरीका है- आज ही मोजार्ट का संगीत सुना जाए। क्या पता, हो सकता है कि आपको अपनी अगली परीक्षा में 100 में से 100 नम्बर मिल जायें!

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वोल्फगैंग अमेडस मोजार्टकी बायोग्राफीज | 0 टिप्पणी >>

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