Bronchitis
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ब्रोन्काइटिस क्या है?

ब्रोन्काइटिस का मतलब है श्वासनलियों में सूजन। श्वासनलियां (ब्रोन्किअल ट्यूब्स) वे वायु मार्ग हैं जिनसे होकर फेफड़ों की हवा सांस-नली (ट्रेकिऑ) तक पहुंचती है। ब्रोन्काइल ट्यूब, जो फेफड़ों और श्वासनली से जुड़ी होती है, सांस लेने में मदद करती है। जब ब्रोन्काइल ट्यूब के लाइनिंग में सूजन या इरिटेशन होती है तब हवा के आवागमन में रुकावट पैदा होने लगती है और उस कारण कफ का निर्माण होता है। कफ के साथ एक पतला द्रव निकलता है जिसे बलगम कहा जाता है और इस कंडीशन को ब्रोन्काइटिस कहते हैं।

ब्रोन्काइटिस में क्या होता है?

ब्रोन्काइटिस श्वास से सम्बन्धी बीमारी (रेस्पीरेटरी डिसीज) है। जिसमें म्यूकस के पर्दे को अथवा फेफड़ों के ब्रोन्काइल ट्यूब्स की जो लाइनिंग होती है, उसमें सूजन आ जाती है। जैसे ही सूजन और जलन बढ़ती है, ब्रोन्काइल ट्यूब्स में स्वेलिंग आती है और जैसे ही स्वेलिंग में मोटाई आ जाती है तब उस कारण लंग्स की ब्रोन्काइल ट्यूब सिकुड़ जाती है और उसका परिणाम यह होता है कि इसमें खांसी आती है या अटैक आता है।

ब्रोन्काइटिस दो प्रकार का होता है- ऍक्यूट और क्रॉनिक। यह बीमारी कभी-कभी ब्रोन्काइल अस्थमा से भी जुड़ी होती है।

एक्यूट ब्रोन्काइटिस और क्रोनिक ब्रोन्काइटिस में क्या फर्क है?

एक्यूट ब्रोन्काइटिस का मतलब है जो बीमारी थोड़े समय के लिए यानी 2-3 हफ्ते तक रहती है जिसमें खांसी के साथ बलगम भी बाहर आता है। यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन या ऊपरी श्वासनलिका के वायरल इन्फेक्शन का परिणाम होता है। अच्छी हेल्थ और दवाइयों से आपको एक्यूट ब्रोन्काइटिस में कुछ दिनों के अंदर राहत मिल जाती है।

क्रोनिक ब्रोन्काइटिस गंभीर स्वरूप का होता है। यह एक साल से भी ज्यादा समय तक रह सकती है। जैसा कि आप जानते हैं, लंग्स का मुख्य कार्य होता है हवा को शुद्ध करना और सांस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना। लेकिन क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस में लंग्स के इस फंक्शन पर ही असर पड़ता है। यहां गाढ़ा बलगम जमा होते रहने के कारण लंग्स के मूवमेंट में रुकावट पैदा होती है और उसके कारण इन्फेक्शन होता है जो हमेशा के लिए लंग्स को नुकसान पहुंचाते हैं और इस कंडीशन को क्रॉनिक ऑबस्ट्रकटिव्ह पल्मोनरी डिसीज (COPD) कहते हैं। स्मोकिंग क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस की सबसे मुख्य वजह है।

ब्रोन्काइटिस के और कौन-से कारण हैं?

एक्यूट ब्रोन्काइटिस की आमतौर पर वजह होती है फेफड़ों (लंग्स) में इन्फेक्शन होना जो कि ज्यादातर वायरल इन्फेक्शन के कारण होता है। एक्यूट ब्रोन्काइटिस के लक्षण दवाइयों से और घरेलु नुस्खों से कम हो सकते हैं लेकिन एक्यूट ब्रोन्काइटिस के अटैक अगर बार-बार आते हैं तो उससे क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस की बीमारी की संभावना बढ़ जाती है।

क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस की वजह होती है लगातार स्मोकिंग करना जिसके कारण ब्रोन्काइल ट्यूब के छोटे बालों को नुकसान पहुंचता है। जो कि परेशान करनेवाले पदार्थों को रोकने का कार्य करता है। दूसरे कारणों में शामिल है - इंडस्ट्रियल प्रदूषण, गाड़ियों से निकलनेवाला धुंआ, धूल और कणों के सम्पर्क में ज्यादा समय तक रहना, अनाज की देखरेख, सल्फर ऑक्साइड और कोल माइन में काम करना। लेकिन सामान्य तौर पर स्मोकिंग ही इसका मुख्य कारण है।

ब्रोन्काइटिस के क्या लक्षण हैं?

ब्रोन्काइटिस के दोनों प्रभेदों के लक्षण हैं -

एक्यूट ब्रोन्काइटिस :- खांसी के साथ बलगम आना, सीने में कठोरता, बुखार और ठंड लगना, सांस की तकलीफ और ब्रेस्टबोन के नजदीक दर्द होना।

क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस :- लगातार खांसी जिसके साथ गाढ़ा पीला-हरा बलगम आना। यह स्थिति साल में तीन महीने या उससे भी ज्यादा समय तक रहना। घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ होना।

ब्रोन्काइटिस में क्या जटिलताएं आती हैं?

अगर नीचे दिए गए लक्षण दिखाई देते हैं तो जल्द-से-जल्द डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए:-

*          लगातार आ रही खांसी गंभीर रूप धारण लेती है और उसका रोज के जिन्दगी पर असर पड़ता है

*          सात दिनों से ज्यादा ये लक्षण दिखाई देते हैं

*          इसके साथ सीने में दर्द होता है

*          बलगम या म्यूकस गाढ़ा, गहरे रंग का होता है जिसमें म्यूकस बहुत ज्यादा होता है और उसके साथ खून आता है

अगर मरीज को एक्यूट ब्रोन्काइटिस के साथ-साथ एचआयवी/एड्स या हार्ट की बीमारी है तो उसे न्यूमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए डॉक्टर से तुरंत कन्सल्ट करना चाहिए।

ब्रोन्काइटिस को कैसे डायग्नॉस किया जाता है?

नॉर्मल ब्रोन्काइटिस के लिए इन्सान को डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं है। यह अपने-आप ही ठीक होता है।

एक्यूट ब्रोन्काइटिस आसानी से कफ को और दूसरे लक्षणों को देखकर डायग्नॉज किया जा सकता है। डॉक्टर आपसे कई सवाल पूछते हैं और स्टेथोस्कोप की मदद से दिल की धड़कन को सुनकर बीमारी की गहराई का पता लगाते हैं।

क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस के लक्षणों को देखकर आसानी से उसे डायग्नॉस किया जा सकता है। लेकिन अगर कोई खास बीमारी है जो यही लक्षण दर्शाती है तो फिर चेस्ट एक्स-रे के साथ-साथ और भी दूसरे टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है ताकि यह पता चल सके कि कोई लंग इन्फेक्शन या दूसरी सीरियस बीमारी तो नहीं है।

ब्रोन्काइटिस का क्या इलाज है?

नॉर्मली ब्रोन्काइटिस के लिए ट्रीटमेन्ट की जरूरत नहीं है और इसका इलाज आसानी से घर पर खुद ही कर सकता है। जबकि क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन हेल्दी जिन्दगी अपनाकर या स्मोकिंग छोड़कर इनके लक्षणों को कम किया जा सकता है।

अगर आपको ब्रोन्काइटिस है तो फिर स्मोकिंग छोड़िए और खूब सारा पानी पिएं। सरदर्द और अन्य दर्द या पीड़ा की सही दवाइयां लेकर इलाज करें। घरेलू उपायों में शहद और अदरक का रस एकसाथ मिलाकर पीने से ब्रोन्काइटिस में काफी आराम मिलता है। मेडिकल ऍडवाइस के बिना खुद ही जाकर दवाइयां लेना टालें।

ब्रोन्काइटिस को कैसे रोका जा सकता है?

अच्छी हेल्थ के लिए जरूरी है स्मोकिंग छोड़ देना और इससे आपको क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस में काफी आराम मिलेगा। स्वच्छता बनाए रखें। ब्रोन्काइटिस संसर्गजन्य (कन्टेजस) बीमारी है। इसलिए इस बीमारी से ग्रस्त इन्सान से अपने-आपको दूर रखने की कोशिश कीजिए। अपने हाथ को बार-बार धोएं और डिस्पोजेबल टिश्यू का इस्तेमाल कीजिए। जो फैक्टर्स आपको परेशान करते हैं उनके सम्पर्क में आने से पहले मास्क पहनिए। स्वास्थ्यवर्धक रहन-सहन से आप ब्रोन्काइटिस पर काफी हद तक नियंत्रण पा सकते हैं।

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