Appendicitis
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अपेन्डिसाइटिस क्या है?

मनुष्य के शरीर में अपेन्डिक्स बड़ी आंत और छोटी आंत के बीच में मलाशय (कोलोन) के पास स्थित होता है। यह 4 इंच लम्बा पतली ट्यूब के आकार का होता है और पेट के निचले हिस्से में दाहिनी तरफ होता है। अपेन्डिक्स का विशेष कार्य पहले किसी को पता नहीं था। अपेन्डिसाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें इस अपेन्डिक्स में सूजन आ जाती है।

मनुष्य के शरीर में अपेन्डिक्स का क्या कार्य होता है?

पहले जब कुछ ज्यादा शोध नहीं हुआ था, तब लोगों ने यह मान लिया था कि अपेन्डिक्स का कोई कार्य नहीं होता और यह निरुपयोगी है। लेकिन बाद के शोध में यह पाया गया कि शरीर में इस छोटे-से वर्म्स जैसे अंग की भी एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो अपना आकार बदलता रहता है और अपने आकार को सिकोड़ भी सकता है। इसमें अच्छे बैक्टीरिया का भंडार होता है जो इन्फेक्शन्स से लड़ता है। ऍपेन्डिक्स पेट के अंदर और पाचनतंत्र (डायजेस्टिव ट्रैक्ट) में होता है।

अपेन्डिक्स का क्या कार्य होता है?

विशेषज्ञों के किए गए अध्ययन के मुताबिक अपेन्डिक्स की संरचना सामान्यत: मैमल्स में ही पाई जाती है। यह अपेन्डिक्स निरंतर अपना आकार बदलता रहता है इसी से उसके रहस्य का पता चलता है। जब डायजेस्टिव ट्रैक्ट खराब बैक्टीरिया की वजह से दूषित हो जाता है तब अच्छे बैक्टीरिया, जो अपेन्डिक्स में होते हैं, वे खुद को अपेन्डिक्स के अंदर छुपा लेते हैं और जैसे ही इन्फेक्शन दूर हो जाता है, वे अपनी संख्या बढ़ाने के लिए वापस उभरकर आते हैं और इसतरह पेट के अंदर अच्छे बैक्टीरिया का प्रभाव बढ़ता है।

इन्सान को अपेन्डिसाइटिस कैसे होता है?

अपेन्डिसाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें अपेन्डिक्स में सूजन आ जाती है तथा उसमें मवाद भर जाता है। यह बीमारी तब होती है जब डायजेस्टिव ट्रैक्ट (पाचनतंत्र) खराब बैक्टीरिया की वजह से बहुत ज्यादा दूषित हो जाता है। यह खराब भोजन खाने की वजह से होता है। दूसरा कारण यह भी होता है कि कभी-कभी मल (Stool) का कुछ अंश अपेन्डिक्स के अंदर फंस जाता है और उसके अंदर जो खराब बैक्टीरिया होते हैं, उनके कारण अपेन्डिक्स में सूजन आ जाती है और इस वजह से इस ‘उंगलियों जैसे पाउच’ के आकार के अंग के अंदर मवाद भर जाता है। जब अपेन्डिक्स को इन्फेक्शन हो जाता है और उसके कारण इन्सान को तकलीफ होती है, तब इस अवस्था को ‘अपेन्डिसाइटिस’ कहा जाता है।

अपेन्डिसाइटिस किन कारणों से होता है?

अपेन्डिसाइटिस के मुख्य कारण इस प्रकार है-

1.         इन्फेक्शन :- अगर पेट के अन्दर कोई इन्फेक्शन होता है और वह इन्फेक्शन अपेन्डिक्स तक पहुंचता है तो फिर अपेन्डिसाइटिस की बीमारी होती है।
2.         ऑबस्ट्रक्शन :- अगर अपेन्डिक्स में कठिन मल (हार्ड स्टूल) अटक जाता है और वहां पर मल सड़ने लगता है तब खराब बैक्टीरिया अपेन्डिक्स में जमा होने के कारण वहां पर सूजन आ जाती है और उसमें पीव या मवाद भर जाता है। जिसकी वजह से अपेन्डिसाइटिस की बीमारी होती है।

वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि वातावरण में फैले प्रदूषण और एपेन्डिक्स की जलन में सीधा सम्बन्ध है।

अपेन्डिसाइटिस के चिह्न और लक्षण कौन-से हैं?

शुरुआत में मरीज के पेट के किसी भी हिस्सें में दर्द होता है। लेकिन कुछ समय बाद शरीर के विशिष्ट भाग यानी पेट के निचले हिस्से में दाहिनी तरफ यह तीव्र वेदना स्थिर हो जाती है। इसके साथ ये लक्षण दिखाई देते हैं:

1.         बहुत तेज और लगातार होनेवाला दर्द

2.         खांसते और छींकते समय दर्द

3.         जी मचलना और उल्टी

4.         डायरिया

5.         शरीर की वायु के निस्तारण के दौरान दर्द का अनुवव होना

6.         बुखार

7.         अजीर्ण (कॉन्स्टीपेशन)

8.         भूख न लगना

विदित हो कि उपरोक्त लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखाई देते हैं लेकिन अपेन्डिसाइटिस में उपरोक्त तकलीफों के साथ-साथ पेट के निचले हिस्से में राइट साइड में तीव्र दर्द भी होता है।

अपेन्डिसाइटिस को कैसे डायग्नॉज किया जाता है?

चूंकि दूसरी बीमारियों में भी ऐसे ही लक्षण दिखाई देते हैं, इसलिए जनरल प्रैक्टिशनर मरीज की शारीरिक जांच करते हैं और इसमें पेट को दबाकर यह देखा जाता है कि दर्द और बढ़ता है या नहीं।

अगर सामान्य पद्धति से पता नहीं चलता है तो इसे सुनिश्‍चित करने हेतु नीचे बताए गए टेस्ट करवाए जाते हैं:-

*          इन्फेक्शन की जांच के लिए ब्लड टेस्ट कराए जाते हैं।

*          युरिन टेस्ट के जरिए एक खास प्रोटीन की जांच की जाती है जो दर्शाता है कि अपेन्डिसाइटिस बीमारी है।

*          सीटी, एमआरआई या अल्ट्रा साउण्ड स्कैन (थ्रीडी इमेजिंग) करवाया जाता है ताकि यह पता चल सके कि अपेन्डिक्स को सूजन है या नहीं। अपेन्डिसाइटिस की तीव्रता जानने के लिए प्रौढ़ लोगों में कलर डॉपलर अल्ट्रासाउन्ड का उपयोग किया जाता है।

अपेन्डिसाइटिस के लिए क्या इलाज है?

कम इन्फेक्शन की स्थिति में डॉक्टर एन्टीबायटिक्स लेने की सलाह देते हैं। लेकिन कभी-कभार उनके द्वारा सर्जरी का सुझाव भी दिया जाता है। जैसे-

अपेन्डेक्टॉमी :- यह सर्जरी की पुरानी पद्धति है जिसमें सूजे हुए अपेन्डिक्स को काटकर निकाल दिया जाता है।

लैप्रोस्कोपी :- यह थोड़ा नया मेथड है। इस पद्धति में एक पतली ट्यूब जैसी नलिका का प्रयोग किया जाता है जिसमें कैमरा फिट होता है। इसे मरीज के शरीर के अन्दर डाला जाता है और अपेन्डिक्स को निकाल दिया जाता है।

हाल ही में किए गए शोध के मुताबिक लैप्रोस्कोपी के मुकाबले पारंपरिक सर्जरी ही ज्यादा बेहतर होती है। क्योंकि एक तो लैप्रोस्कोपी काफी महंगी होती है, वहीं उसकी वजह से बाद में अन्य समस्या भी पैदा हो जाती है। जबकि पारंपरिक अपेन्डेक्टॉमी में उस खास भाग को साफ करने में मदद मिलती है और इन्फेक्शन को रोका जा सकता है।

सर्जरी हमेशा एन्टीबायटिक्स से ज्यादा प्रभावशाली होती है। चाहे इसे तुरंत किया जाए या देरी से किया जाए।

अपेन्डिसाइटिस की वजह से क्या समस्याएं हो सकती हैं?

अगर सूजा हुआ अपेन्डिक्स पेट के अन्दर फटने के बाद इन्फेक्शन रिलीज करता है तब मरीज को पेरीटोनायटिस की बीमारी होती है जिसमें इन्फेक्शन पेरीटोनियम में फैल जाता है। पेरीटोनियम पेट के भीतर और ऍबडॉमिनल ऑर्गन्स की मेम्ब्रेन लायनिंग होती है। इस इन्फेक्शन की वजह से मरीज को शौच करने में बाधा आती है जिससे बुखार आता है और इस वजह से मरीज के शॉक में जाने की संभावना होती है।

इसकी वजह से मरीज के आंत की मूवमेन्ट्स बंद हो जाती है और मरीज को बुखार आने लगता है, और इन्सान को झटका (शॉक) आने की संभावना होती है। पस (दूषित द्रव) अपेन्डिक्स से निकलकर दूसरे अंगों में भी पहुंच जाता है और इसके कारण वापस पेरीटोनायटिस की बीमारी हो सकती है। इस मवाद का इलाज एन्टीबायटिक्स देकर किया जाता है अथवा इसे ट्यूब के जरिए सर्जरी द्वारा निकाला जाता है।

अपेन्डिसाइटिस को कैसे रोका जा सकता है? क्या यह घातक है?

अनुसंधानों से यह पता चला है कि जिन लोगों के भोजन में फायबर की ज्यादा मात्रा होती है उनमें अपेन्डिसाइटिस के बढ़ने की कम संभावना होती है क्योंकि फायबर की वजह से मलत्याग करने में मदद मिलती है और इसकी वजह से अपेन्डिक्स में मल का अंश अटक नहीं पाता। इसलिए लोगों को फायबरयुक्त अच्छा भोजन खाने की सलाह दी जाती है। यह भी सुझाव दिया जाता है कि जिन खाद्यपदार्थों के खाने से इन्फेक्शन होता है, उसे टालना चाहिए। और अगर इस बीमारी के कोई लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

अपेन्डिसाइटिस की बीमारी अब इतनी घातक नहीं रही क्योंकि अब इसमें बहुत ज्यादा मेडिकल रिसर्च हुआ है और इसके लिए उन्नत उपचार भी उपलब्ध है। लेकिन तुरंत मेडिकल हेल्प लेना ज्यादा जरूरी होता है? क्योंकि इलाज में देरी करने से मरीज की जिंदगी के लिए यह खतरनाक भी साबित हो सकता है।

अपेन्डिसाइटिस आनुवंशिक नहीं होता और ना ही घातक होता है। लेकिन अगर इसकी चिकित्सा और इलाज जल्दी नहीं किया गया तो इसके कारण अपेन्डिक्स का कैन्सर हो सकता है। प्रसिद्ध अभिनेत्री ऑड्री हेपबर्न की मौत ‘अपेन्डिक्स कैन्सर’ की वजह से ही हुई थी।

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