Amnesia
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ऐम्नेशिया क्या है?

आसान शब्दों में ऐम्नेशिया का मतलब है स्मृति की हानि होना। जब इन्सान अपने मन के अंदर जमा हुए घटनाओं को याद नहीं कर पाता तब इसे ऐम्नेशिया कहा जाता है। यह स्वाभाविक है कि इन्सान को अपना अतीत याद रहता है और अपने बीते हुए कल के अनुभवों के आधार पर वह भविष्य में उस तरह से कार्य करता है। ‘मेमरी में जमा हुई जानकारी (इन्फॉर्मेशन) को वापस याद ना कर पाना’ इस अक्षमता को भी ऐम्नेशिया कहा जाता है। जिन लोगों को ऐम्नेशिया की बीमारी होती है उन्हें अक्सर भविष्य के बारे में सोचने में कठिनाई महसूस होती है क्योंकि यह अधिकांश इन्सान का स्वभाव होता है कि वह अपने पिछले संदर्भों के अनुसार अपना कार्य करता है। लेकिन इस रोगी के लिए यह बात कठिन हो जाती है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का पूर्व में हॉर्स रायडिंग करते वक्त बुरी तरह से ऐक्सिडंट हो गया हो तो वह स्त्री या पुरुष अगले समय ज्यादा सावधानी बरतता है। लेकिन ऐम्नेशिया के केस में ऐसा नहीं होता। तो ऐसा कह सकते हैं कि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी जिसे इन्सान आमतौर से भूलता नहीं मगर उसी बात को वह आसानी से भूल जाता है तो उसे ‘ऐम्नेशिया’ कहते हैं।

ऐम्नेशिया के क्या कारण हैं?

ऐम्नेशिया के दो मुख्य कारण हैं। पहला शरीर के अंदरूनी भागों में होता है जिसे ‘ऑर्गेनिक या नेचरल’ कहते हैं और दूसरा परिस्थितिजन्य होता है जिसे ‘फंक्शनल कारण’ कहते हैं-

ऑर्गेनिक कारण :- इसमें सिर की चोट शामिल है जिसके कारण ब्रेन डैमेज हो जाता है।
इस वर्ग में दूसरे कारण भी होते हैं जैसे कि अल्झाइमर की बीमारी और कुछ केसेस में कुछ खास ड्रग्स, खासकर सीडेटिव ड्रग्स जो नींद को प्रेरित करते हैं।

फंक्शनल कारण :- यह मनोवैज्ञानिक कारण है जिसमें इंसान जीवन के झंझटों से बचने का आश्रय ढूंढ़ता है और वह उन बातों को भूल जाता है जिसे वह याद नहीं करना चाहता। ऐम्नेशिया एक साधारण अवस्था है और इसका असर स्त्री और पुरुष दोनों पर होता है। यह कोई घातक रोग नहीं है और ना ही यह संक्रामक है।

ऐम्नेशिया में क्या होता है?

आमतौर पर यह मनुष्य का स्वभाव है कि वह अपने ब्रेन (मस्तिष्क) में जानकारी इकट्ठा करता है और जब उसे जरूरत होती है तब वह उसे फिर याद करता है। जैसे कि अगर स्कूल पिकनिक पर कोई फ्रेंडस् का ग्रुप चला जाता है और वे उसे काफी एन्जॉय करते हैं लेकिन काफी सालों बाद जब उनमें से किसी एक को यह खास क्षण याद करने में मुश्किल होती है तो फिर यह बात चिंताजनक है। ब्रेन में जमा की गई यह जानकारी चाहे कितने भी समय की हो, कुछ मिनट अथवा घंटे या कुछ महीने, उसे भूला नहीं जाता। परंतु ऐम्नेशिया के शिकार व्यक्ति के साथ ऐसा होता है। जोर डालने पर भी उसे कुछ याद नहीं आता अर्थात आसान शब्दों में कहा जाए तो ऐम्नेशिया का मतलब है स्मृति की हानि, यानी याद्दाश्त चला जाना।

ऐम्नेशिया कितने प्रकार के होते हैं?

ऐम्नेशिया के कई प्रकार हैं-

ऐन्टीरोग्रेड ऐम्नेशिया (घटनोत्तर स्मृतिलोप) :- इसमें मरीज को हाल ही की बातें याद नहीं रहती। यह शार्ट टर्म मेमरी होती है। अक्सर सिर पर चोट लगने (ट्रॉमा) के कारण यह होता है। फिर भी मरीज को जख्मी होने से पहले की घटनाएं और बातें याद रहती हैं।

रेट्रोग्रेड ऐम्नेशिया (घटनापूर्व स्मृतिलोप) :- ऐन्टीरोग्रेड ऐम्नेशिया के उलट इसमें मरीज को जख्मी होने के पहले वाली बातें और घटनाएं याद नहीं रहती। लेकिन जख्मी होने के बाद की सारी बातें उसे याद रहती है।

ट्रॉन्सियंट ग्लोबल ऐम्नेशिया (क्षणिक तात्कालिक स्मृतिलोप) :-इसमें थोडे समय के लिए मेमरी चली जाती है। इस ऐम्नेशिया के मरीज को नई यादों को बनाना मुश्किल हो जाता है। इनमें गंभीर ऐन्टीरोग्रेड ऐम्नेशिया होता है। पिछली मेमरी का मामूली-सा नुकसान होता है। इसका प्रभाव ज्यादातर वृद्ध लोगों पर पड़ता है। जिनके ब्लड वेसल्स में समस्याएं होती हैं।

ट्रॉमैटिक ऐम्नेशिया :- इसमें सिर पर जोरदार चोट लगने से याद्दाश्त चली जाती है। इसके बाद मरीज अपना होश खो बैठता है या फिर कोमा में चला जाता है। यह ऐम्नेशिया या तो टेम्पररी (थोड़ी देर के लिए) होता है या पर्मनंट (हमेशा के लिए) होता है। कितनी गहरी चोट है इस बात पर इसकी कालावधि निर्भर करती है।

वेर्निक कोर्साकॉफ्स सायकोसिस :- शराब बहुत ज्यादा पीने की वजह से इस प्रकार मेमरी लॉस होती है। यह बीमारी वक्त के साथ और ज्यादा गंभीर हो जाती है। और यह थायमिन डेफिशियन्सी से जुड़ी है।

हिस्टॅरिकल (फ्यूग) ऐम्नेशिया :- यह दुर्लभ बीमारी है जिसमें मरीज अपनी खुद की पहचान भी भूल जाता है। इसकी शुरुआत अचानक हो जाती है या फिर किसी घटना की वजह से यह होता है जिसमें इन्सान का दिमाग उस घटना का ठीक तरह से सामना नहीं कर पाता। फिर इन्सान की स्मरणशक्ति धीरे-धीरे या अचानक वापस आ जाती है लेकिन यह पूरी तरह से वापस नहीं आती।

चाइल्डहूड ऐम्नेशिया (इन्फंटाइल ऐम्नेशिया) :- इसमें मरीज को बचपन की घटनाएं याद नहीं रहती। कुछ लोगों का कहना है कि यह शायद इसलिए होता है क्योंकि बचपन में ब्रेन के कुछ भागों का विकास पूर्ण रूप से नहीं होता। जबकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह लैंग्वेज डेफिशियन्सी के कारण होता है।

पोस्ट हिप्नोटिक ऐम्नेशिया :- हिप्नोसिस के दौरान जो घटनाएं इन्सान से मालूम की जाती है; वह उसे वापस याद नहीं कर पाता।

सोर्स ऐम्नेशिया :- इसमें आपको बातें तो याद रहती है लेकिन आपको इसका सोर्स (स्रोत) याद नहीं रहता।

ब्लैकआउट फेनोमेनन :- अक्सर शराब काफी मात्रा में पीने के बाद इन्सान घटनाओं को ठीक से याद नहीं कर पाता।

प्रोसोपम्नेशिया :- ऐसे मरीज को लोगों के चेहरे याद नहीं रहते। इसप्रकार का ऐम्नेशिया जन्मजात भी होता है या फिर यह बीमारी मरीज को बाद में होती है।

ऐम्नेशिया का उपचार करने के लिए कौन-सी पद्धतियां हैं?

ऐम्नेशिया को निम्नलिखित पद्धतियों (टेक्निक) से निदान किया जाता है :

सबसे पहले डॉक्टर को यह तय करना पड़ता है कि यह ऐम्नेशिया है या नहीं। या फिर कोई दूसरे तरीके की भूलने की बीमारी है जैसे कि अल्झाइमर की बीमारी में या ब्रेन ट्यूमर या डिप्रेशन में होता है। ऐम्नेशिया में ये टेस्ट शामिल हैं -

*          एक संपूर्ण मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है जिसमें मरीज और उसके नजदीकी फैमिली मेम्बर्स के इंटरव्यू शामिल होते हैं। इससे उनके मेमरी लॉस का मूल्यांकन किया जाता है।

*          किसी भी प्रकार की सिर की चोट, स्ट्रोक या सर्जरी।

*          ड्रग अब्यूस (नशीली दवाओं का दुरुपयोग) या अल्कोहल का सेवन

*          फैमिली हिस्ट्री जिसमें न्यूरॉलॉजिकल प्रॉब्लम्स पाए जाते हैं।

*          दूसरे कारण जैसे डिप्रेशन, मिरगी का दौरा, सिरदर्द, कन्फ्यूझन, भाषा की समस्याएं और दूसरी कोई बीमारियां।

*          कुछ खास फीजिकल टेस्ट किए जाते हैं। मरीजों के रिफ्लेक्सेस (सजगता) और बैलेन्स (संतुलन) को चेक किया जाता है।

*          ब्रेन की चोट को देखने के लिए इमेजिंग टेस्ट जैसे एमआरआई और सीटी स्कैन वगैरह किया जाता है।

*          पोषक तत्त्वों की कमी (न्यूट्रीअन्ट डेफिशिअन्सीज) को चेक करने के लिए ब्लड टेस्ट की जाती है।

ऐम्नेशिया को शुरू से ही कैसे रोका जा सकता है?

ऐम्नेशिया में मेमरी लॉस होता है इसलिए ऐम्नेशिया से पीड़ित व्यक्ति उस खास घटना को याद नहीं कर पाता जिसकी वजह से उसके ब्रेन पर चोट लगी होती है और उसकी याद्दाश्त चली जाती है। और इसी घटना को वह वापस से दोहराता है जिसकी वजह से उसे और चोट लगती है। इस कॉम्प्लीकेशन से बचने के लिए मरीज को शराब से दूर रहना चाहिए। बाइक चलाते समय हमेशा हेल्मेट को पहनिए और कार चलाते समय हमेशा अपनी सीट-बेल्ट को बांधिए।

किसी भी इन्फेक्शन का इलाज तुरंत कीजिए ताकि वो ब्रेन तक ना फैले।

यह सलाह है कि अगर कोई ऐसा लक्षण दिखाई दे जिसकी वजह से स्ट्रोक, हार्ट अटैक, तेज सरदर्द या लकवा मारने का खतरा हो सकता है तो तुरंत मेडिकल हेल्प ली जानी चाहिए।

हेल्दी लाइफस्टाइल, न्यूट्रीशन, व्यायाम, ड्रायविंग करते वक्त प्रोटेक्टिव गियर पहनना और शराब या अन्य नशीली पदार्थों का सेवन कम करना; इन बातों का खयाल रखने से इन्सान लंबे समय तक निरोगी जीवन जी सकता है और इस तरह की बीमारी से भी वह दूर रह सकता है।

क्या ऐम्नेशिया की बीमारी कभी ठीक नहीं हो सकती?

ऐम्नेशिया (भूलने की बीमारी) की बीमारी घातक नहीं है अथवा उससे जीवन के लिए खतरा नहीं होता। लेकिन कुछ ऐसी बीमारियां हैं जैसे कि ‘अल्झाइमर’ के केस में आर्गेनिक ऐम्नेशिया की बीमारी होती है जिसके कारण नर्व सेल्स लगातार कम होते जाते हैं और उसकी वजह से इन्सान के शारीरिक और मानसिक क्षमताओं पर असर पड़ता है। फिर उस वजह से याद्दाश्त चली जाना मरीज के लिए घातक हो सकता है और अंत में मरीज की मौत भी हो सकती है।

कुछ ऐम्नेशिया के केसेस में हिप्नॉसिस और सायकोथेरपी से मदद मिलती है और इन्सान अपनी खोई हुई याद्दाश्त को वापस पा सकता है। इस प्रोसेस में अपने परिवार के लोगों और प्रोफेशनल्स की मदद से मरीज काफी हद तक ठीक हो सकता है।

‘फंक्शनल ऐम्नेशीया’ की बीमारी में अगर मरीज को उसके आसपास के परिचित स्थानों और घटनाओं से वापस परिचय करवाया जाए तो कुछ हद तक उसकी याद्दाश्त वापस लाई जा सकती है।

ऐम्नेशिया बीमारी का क्लासिक उदाहरण -

हेनरी गुस्ताव मोलाइसन ऐम्नेशिया का सबसे मशहूर उदाहरण है। हेनरी गुस्ताव मोलाइसन को एचएम के नाम से ज्यादा जाना जाता है जिसका जन्म 26 फरवरी 1926 को अमेरिका में हुआ था। हेनरी को एप्लिप्सी की बीमारी थी। मिरगी (एप्लिसी) की बीमारी ठीक करने के लिए उनके ब्रेन की सर्जरी की गई जिसमें उनके ब्रेन के कुछ पार्ट्स निकाले गए। एप्लिप्सी की बीमारी उन्हें शायद उनके बायसिकल के ऐक्सिडंट की वजह से हुई थी। उनका ऐक्सिडंट सात साल की उम्र में हुआ था। उन्हें दौरे भी पड़ते थे।

साल 1953 में मिरगी का इलाज करने के लिए हेनरी के ब्रेन पर सर्जरी की गई जो सफल रही। लेकिन हेनरी रेट्रोग्रेड ऐम्नेसिक बीमारी का शिकार हो गए। उन्हें सर्जरी के पहले की कोई भी बातें, घटनाएं याद नहीं रही। लेकिन वे आसानी से नई विद्या सीख रहे थे।

इस दौरान हेनरी आसानी से क्रॉसवर्ड पझल्स को सॉल्व कर सकते थे और सन् 1953 से पहले की कुछ घटनाओं को याद कर सकते थे। साल 1953 के बाद की नई बातों को वो मॉडिफाई भी कर सकते थे। वास्तव में हेनरी का केस ‘लांग टर्म और शॉर्ट टर्म मेमरी लॉस’ दोनों का था। ब्रेन फंक्शन्स और मेमरी का अध्ययन करने में इनके केस ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें केअर इन्स्टीट्यूट में रखा गया था और उनके ऊपर शोध तथा अध्ययन किए जाते थे। इस अवधि में उन्होंने कुछ खास बौद्धिक क्षमताएं प्राप्त की।

हेनरी की मौत साल 2008 में हुई। तब वे 82 साल के थे। अब उनका ब्रेन युसी सॉन डीगो में सम्भालकर रखा गया है जहां पर उनके ब्रेन का कुछ भाग हिस्टोलॉजिकल उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया था।

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