Chicken_pox
अन्य सामान्य ज्ञान
» चिकन पॉक्स (चेचक)
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चिकन पॉक्स क्या है?

चिकन पॉक्स एक संक्रामक (इन्फेक्शस) बीमारी है। यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो जाती है। यह वेरीसेला जॉस्टर नामक वायरस की वजह से होती है। इसके कारण शरीर पर छाले और चकत्ते आ जाते हैं और इसकी वजह से खुजली होने लगती है। जिस मरीज को यह बीमारी होती है उसकी त्वचा पर फुन्सी आ जाती है। अगर कोई दूसरा इन्सान उसके सम्पर्क में आता है तो उसे भी यह बीमारी होने का डर रहता है।

क्या चिकन पॉक्स घातक है?

चिकन पॉक्स साधारणतया एक खुजलीवाली बीमारी है और यह ज्यादातर बचपन में यानी 4-10 साल की उम्र में होती है। यह बीमारी युवा लोगों को बहुत कम होती है लेकिन जब होती है तब यह गंभीर होती है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह बहुत गंभीर है। इसका शरीर, नर्वस सिस्टम, ब्रेन और आंखों पर विपरीत परिणाम होता है। यह बीमारी घातक नहीं है लेकिन गंभीर स्थिति में मरीज को स्ट्रोक आता है तथा कभी-कभी शरीर पर दाद (शिंगल्ज) आ जाता है।

चिकन पॉक्स के कितने प्रकार हैं?

चिकन पॉक्स एक ही प्रकार का होता है। यह वेरीसेला इन्फेक्शन होता है जो बेहद कन्टेजियस होता है। यह हवा में फैलनेवाला वायरस है जो रोगी के छींकने या खांसने से भी आसानी से फैल जाता है। सामान्यत: वायरस संक्रमित होने के 10 से 20 दिन बाद दाने दिखाई देते हैं।

चिकन पॉक्स की क्या विशेषता है?

चिकन पॉक्स की विशेषता है भूख कम लगना, सिरदर्द, मतली, और मांसपेशियों में दर्द। चेहरे सिर, हाथ, पैर और पूरे शरीर पर फुन्सियां आ जाती है। जब शरीर पर दाने आते हैं तब त्वचा पर छाले पड़ने लगते हैं। फिर फफोले आते हैं और सूखने पर पपड़ी जमा हो जाती है।

युवा लोगों में दानों का आना ज्यादा गंभीर माना जाता है और उसके कारण न्यूमोनिया भी हो सकता है। गंभीर मामलों में दानों के आसपास का भाग लाल हो जाता है। जिसके साथ सीने में दर्द होता है और सांस लेने में तकलीफ होती है।

चिकन पॉक्स होने पर किसे कन्सलट करना चाहिए?

अगर छोटे बच्चे को चिकन पॉक्स हुआ है तो पीडिअट्रिशन (शिशुरोग विशेषज्ञ) से इलाज कराएं और बुजुर्गों (एडल्ट) के लिए जनरल प्रैक्टिशनर की सलाह लेनी चाहिए।

क्या चिकन पॉक्स का इलाज हो सकता है?

चिकन पॉक्स का एक साइकल (चक्र) होता है और आखिर में यह अपने-आप ही ठीक हो जाता है। टीका (वैक्सनैशन) लगाने से इस बीमारी के फैलने का रिस्क कम होता है और मरीज को अलग रखना या उन्हें घर पर ही रखने का रिस्क कम हो जाता है। इस बीमारी में मरीज को त्वचा को खरोंचने से रोकना चाहिए और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। ओटमील से स्नान करने से खुजली कम होती है।

क्या चिकन पॉक्स फैलनेवाली (इन्फेक्शियस) बीमारी है?

चिकन पॉक्स बहुत ज्यादा इन्फेक्शियस (संक्रामक) बीमारी है। जब फफोलों पर पपड़ी आती है तब यह और बदतर हो जाती है और उस समय इसके फैलने का ज्यादा खतरा होता है। जब मरीज के घावों में चोट आती है या जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है उनके सीधे सम्पर्क में आने से यह बीमारी और फैलती है।

क्या चिकन पॉक्स जानलेवा है?

हेल्दी इम्यून सिस्टम की वजह से तथा दवाइयों से चिकन पॉक्स का बुखार जल्दी कम होता है। फिर भी ऍडल्ट को इसका खतरा ज्यादा होता है। मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) और न्यूमोनिया तो होता ही है, स्थिति गंभीर होनेपर मरीज की मौत तक हो जाती है। समय पर दवाइयां लेने से और देखभाल करने से इसके घातक परिणामों को रोकने में मदद मिलती है।

चिकन पॉक्स के इफेक्ट्स और घटनाओं को कैसे कम किया जा सकता है?

चिकन पॉक्स से बचने का एक ही तरीका है और वह है इस बीमारी से ग्रस्त इन्सान को अलग रखना। इसके टीके को ओका स्ट्रेन से विकसित किया गया है। हालांकि वेरीसेला वैक्सिनेशन का डोज लेना स्कूलों में कम्पल्सरी नहीं है, लेकिन अगर यह डोज पहले ही दिया गया है तो बीमारी होने पर इसका इन्फेक्शन मामूली होता है। एक साल की उम्र में एक टीका और पांच साल के बाद दूसरा टीका, यह नॉर्मल इम्यूनाइजेशन का शेड्यूल है।

क्या वैक्सिनेशन ही इसका एकमात्र इलाज है?

गियोवन्नी फिलिपो (1510-1580) वह प्रथम व्यक्ति हैं जिन्होंने वेरीसेला वैक्सीन विकसित (डेवलप) किया था, जो चिकन पॉक्स वैक्सीन के नाम से मशहूर है। साल 1970 में वेरीसेला वैक्सीन जापान में मिकीआकी ने डेवलप किया था। जिन बच्चों को पहले कभी चिकनपॉक्स की बीमारी नहीं हुई है, उन्हें चिकनपॉक्स वैक्सीन के 2 डोज लेने चाहिए :-

पहला डोज - 12-15 महीनों में।

दूसरा डोज - 4-6 साल की उम्र में।

जिन लोगों की उम्र 13 साल के ऊपर है (जिन्हें कभी चिकनपॉक्स नहीं हुआ था या जिन्होंने चिकनपॉक्स का वैक्सीन लिया है) उन्हें दो डोज लेने चाहिए। पहला डोज लेने के बाद एक महीने का अंतर रखकर दूसरा डोज लेना चाहिए।

चिकन पॉक्स का टीका इन लोगों को कभी नहीं देना चाहिए :-
*          जिन लोगों को एचआयवी एड्स या दूसरी बीमारी है, क्योंकि इसकी वजह से इम्यून सिस्टम पर असर पडता है।
*          जिनको स्टरॉइड जैसी दवाइयां दी जा रही हों।
*          ऐसे कैन्सर के मरीज को, जिनका रेडियो थेरेपी या केमोथेरेपी चल रहा हो।
*          जिनका हाल ही में ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ है या जिन्हें दूसरी ब्लड मेडिसीन दी गई है।

चिकन पॉक्स के दौरान किस प्रकार की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए?

उबाले हुए नीम के पत्तों वाली पानी से स्नान करने और अच्छी तरह से नाखून काटने से इसके इन्फेक्शन्स को रोका जा सकता है। चिकन पॉक्स एक कन्टेजियस वायरल बीमारी तो है ही, यह मौसम के अनुसार उभरता है और फैलता है। कुछ वर्ष पहले यह दुनियाभर में महामारी की तरह फैली थी। पहले से ही मौजूद सांस की समस्या की वजह से यह वायरस तेजी से फैला था। यह बीमारी बच्चों में आम है।

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