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डिफ्थीरिया एक सीरियस बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जो ऊपरी श्वासनलिका में कॉर्निबैक्टेरियम डिफ्थीरिया के संक्रमण की वजह से होता है। इन्फेक्टेड मरीज के फीजिकल कॉन्टैक्ट में आने से भी डिफ्थीरिया की बीमारी होती है। इसका असर नाक और गले के म्यूकस मेम्ब्रन पर होता है।
डिफ्थीरिया दो प्रकार के होते हैं :-
* रेस्पीरेटरी डिफ्थीरिया :- इसमें गला, नाक और टॉन्सिल प्रभावित होता है।
* कोइटेनिअस डिफ्थीरिया :- इसमें मरीज की त्वचा प्रभावित होती है।
सामान्यतया यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रामित (ट्रान्समिटेड) होती है। इस बीमारी से ग्रस्त इन्सान के शारीरिक सम्पर्क में (जैसे कि नाक, गला, त्वचा और आंखें) आने से यह फैलती है। अगर इसके मरीज को कफ होता है या वह छींकता है तो भी यह बीमारी फैलती है। इस बीमारी से ग्रस्त इंसान के वस्त्र, टिश्यू, बर्तन या अन्य उपयोग में लाई जानेवाली वस्तुओं का दूसरे लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने पर भी यह बीमारी नए लोगों में फैलती है।
डिफ्थीरिया के लक्षण अक्सर बैक्टीरिया के शरीर में प्रवेश करने के 1-7 दिन के बाद दिखाई देते हैं। डिफ्थीरिया के लक्षणों में शामिल हैं :-
* गले में खराश
* गर्दन के ग्लैन्ड में सूजन
* ब्रीदिंग प्राब्लम- खासकर तेज सांस लेने में तकलीफ होती है
* बुखार और ठंड लगना
* भोजन का ग्रास निगलते वक्त कष्ट महसूस होना
* त्वचा का रंग नीला पड़ना
* जोर-जोर से खांसना
* गले और टॉन्सिल में ग्रे मेम्ब्रेन का आवरण
स्किन डिफ्थीरिया त्वचा को प्रभावित करती है जिसके कारण त्वचा लाल होती जाती है और वह जगह-जगह फूलने लगती है। इसके साथ दूसरे स्किन इन्फेक्शन्स भी जुड़े हुए होते हैं। यह ज्यादातर उन लोगों में दिखाई देता है जो भीड़-भाड़ वाले इलाके में रहते हैं या जिनके यहां पर स्वास्थ्यकर माहौल नहीं होता है।
* ऐसे बच्चे या वयस्क जो रोग-प्रतिरोधी दवाओं का नियमित सेवन नहीं करते
* जो प्रदूषित वातावरण में रहते हैं
* जो लोग भीड़-भाड़ वाले इलाके में रहते हैं
* जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है
* डिफ्थीरिया की बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों के संपर्क में आनेवाले लोग
हां! डिफ्थीरिया ठीक हो सकता है। इसका इलाज वैक्सीन से किया जाता है।
मरीज को पीडिट्रीशियन या जनरल फिजीशियन को कन्सल्ट करना चाहिए।
डिफ्थीरिया के मरीज को सर्वप्रथम ठीक होने तक बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है। अगर इससे हार्ट अफेक्ट हुआ है तो शारीरिक श्रम टालना चाहिए। इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए मरीज को खासतौर पर अलग रखना चाहिए। घर के हर इन्सान को रोज ठीक से हाथ धोने चाहिए ताकि इन्फेक्शन ना फैले। चूंकि मरीज को खाना निगलने में तकलीफ होती है, इसलिए उसे तरल पौष्टिक आहार लेने का सुझाव दिया जाता है। यह बीमारी वापस ना हो, इसके लिए इसके ट्रीटमेन्ट का कोर्स मरीज को पूरा करना चाहिए। यह सुझाव सभी मरीजों को दिया जाता है।