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कॉलरा की बीमारी छोटी आंतों में बैक्टीरियम विब्रियो कॉलरा के इन्फेक्शन से होता है। जब दूषित पानी या खाना पेट में चला जाता है तो उसकी वजह से बहुत बडी मात्रा में यह बैक्टीरिया पेट के अंदर जमा हो जाते हैं और टॉक्सिन्स का निर्माण करना प्रारंभ कर देते हैं। फिर इस टॉक्सिन के कारण इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इस बीमारी की शुरुआत उल्टी और दस्त से होती है। इसका असर मनुष्य के डायजेस्टिव सिस्टम खासकर छोटी आंतों पर पड़ता है।
अगर कॉलरा गंभीर स्वरूप का है तो यह चिंताजनक है क्योंकि इसके कारण मरीज की मौत भी हो सकती है। बहुत ज्यादा उल्टी होने से और डायरिया (अतिसार) की वजह से डिहाइड्रेशन होता है। इसके कारण शरीर का इलेक्ट्रोलाइट कम्पोजिशन इम्बैलेन्स्ड हो जाता है और जब शरीर के सिस्टम में यह बढ़ जाता है तब ज्यादा घातक हो जाता है। अगर मरीज को अतिसार बहुत ज्यादा हो रहा है और उसके शरीर को तुरंत रिहायड्रेट नहीं किया गया तो कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो सकती है।
कॉलरा की बीमारी का सिर्फ एक ही प्रकार है। यह दूषित अन्न या पानी की वजह से फैलती है।
कॉलरा के मुख्य लक्षण हैं डायरिया और उल्टी। फिर भी लो ब्लड प्रेशर, हाथों पर झुर्रियां, सूजी हुई आंखें, दिल की धड़कन तेज होना आदि। ये लक्षण डिहाइड्रेशन की वजह से दिखाई देते हैं। यह शरीर से ज्यादा मात्रा में पानी निकल जाने के कारण होता है।
कॉलरा के सभी मरीज को जनरल फिजीशियन से कन्सल्ट करना चाहिए।
कॉलरा की बीमारी ठीक हो सकती है। कॉलरा में इन्सान को बार-बार कुछ-न-कुछ खाना चाहिए और अपने शरीर में फ्ल्युइड्स और नमक की कमी को पूरा कर देना चाहिए क्योंकि इससे आंत ठीक से काम करने लगता है। इस हेतु सबसे आसान रेमेडी है ‘‘ओरल रीहाइड्रेशन थेरेपी।’’
कॉलरा कन्टेजियस नहीं है। यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को नहीं होती।
अगर कॉलरा गंभीर रूप का है तो इसका असर इन्सान पर हमेशा के लिए होता है। और अगर कॉलरा बहुत ही गंभीर है तो दो घंटे में मरीज की मौत हो सकती है। परंतु उसका इलाज अगर तुरंत किया जाए तो खतरा कम होता है। वहीं यदि इस बीमारी का इलाज ही नहीं किया गया तो यह बीमारी शरीर को कमजोर कर देती है और उसकी वजह से इन्सान की मौत हो सकती है।
हां। कॉलरा को रोकने के लिए साफ-सफाई का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए। गन्दे पानी (फीकल वॉटर) को ठीक से डिस्पोज करना चाहिए। कॉलरा के पेशंट को अपनी साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए और क्लोरीन ब्लीच से साफ किया हुआ पानी को उबालकर पीना चाहिए। हाथ को बार-बार साफ करने और पानी को शुद्ध रखने के अलावे उसे क्लोरिनेटिंग करने की भी सलाह दी जाती है। गंदे नाली में जो बैक्टीरिया होते हैं उनका उपाय करना चाहिए।
सोलार डिसइन्फेक्टेशन्स और एन्टीमायक्रोबियल फिल्टर के साथ पानी उबालना यह सबसे अच्छा उपाय है।
पब्लिक हेल्थ अवेरनेस और सैनिटेशन की अच्छी आदतों को अपनाने से कॉलरा को रोका जा सकता है। कॉलरा को रोकने के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध है। लेकिन यह वैक्सीन इस बीमारी की शत-प्रतिशत रोकथाम नहीं कर पाता। इसके खतरे को कम करने के लिए फुड हायजिन का खयाल भी रखना चाहिए। जिस जगह पर इसके मरीज होते है वहां पर आने-जाने से कॉलरा का इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।
कॉलरा का सबसे प्रसिद्ध केस है संगीतकार चायकोवस्की, भौतिकशास्त्री कारनोट, फ्रांस का राजा चार्ल्स (दशम) और अमेरिका का पूर्व राष्ट्रपति पोल्क।