Ganglion
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गंडिका (गैंग्लीअन) क्या है?

गैंग्लीअन सिस्ट नॉर्मली हाथों की कलाई में गांठ की तरह दिखाई देती है। हालांकि यह गांठ शरीर के दूसरी जगहों पर भी उभरकर आती है। ज्यादातर मामलों में यह गांठ बिना किसी इलाज के ही ठीक हो जाती है और आमतौर पर हानिकारक भी नहीं होती। क्योंकि यह सिर्फ बायोलॉजिकल टिशू मास होते हैं। गैंग्लीअन की संरचना एक-दूसरे से जुड़ी होती है। इस गांठ के सूजन में जेली जैसा तरल पदार्थ भरा होता है। यह गांठ अलग-अलग आकार की होती है।

जिस जगह पर यह गांठ है, उस भाग को आराम दिया जाए तो यह गांठ कम हो जाती है।

क्या गैंग्लीअन गंभीर स्थिति पैदा करता है?

अगर गैंग्लीअन जॉइन्ट्स में हुआ है तो इससे समस्या हो सकती है। क्योंकि इसका असर शरीर के तंत्रिका-तंत्र पर होता है, इसलिए इसका इलाज तुरंत करना चाहिए। अगर जॉइन्ट के गांठ के कारण जॉइन्ट्स में मौजूद नसों पर प्रेशर पड़ता है तो फिर उस वजह से वहां पर दर्द महसूस होता है और झुनझुनी (टिंगलिंग) होती है। इसके कारण मसल्स में कमजोरी आती है।

गैंग्लीअन कितने प्रकार के होते हैं?

गैंग्लीअन दो प्रकार के होते हैं। डॉर्सल रूट गैंग्लीअन नसों पर असर करता है। वहीं ऑटोनॉमिक गैंग्लीअन का ऑटोनॉमिक नर्व्ज की बाह्यरेखाओं पर असर पड़ता है। यह नर्व सिस्टम से लेकर गैंग्लीआ के तंतुओं (फाइबर) को या फिर गैंग्लीआ से इफेक्टर ऑर्गन को प्रभावित करता है। यह मसल या ग्लैंड है जो मोटर न्यूरॉन की वजह से शुरू होने पर असर करता है।

गैंग्लीअन के क्या लक्षण दिखाई देते हैं?

मरीज की कलाई पर या दूसरे जॉइन्ट या उंगलियों के पिछले भाग पर एक छोटी-सी नरम गांठ दिखना यह सबसे पहला लक्षण है। यह गांठ अपने-आप टूटती है और गायब हो जाती है। इसे कभी-कभार सूई या सीरिंज की मदद से रिवर्स करने की भी जरूरत पड़ती है। इस प्रोसेस को ऐस्परेशन (Aspiration) कहते हैं। इस में कॉर्टीशन इंजेक्शन को भी इस्तेमाल करना पड़ता है। कुछ मामलों में सर्जरी का सुझाव भी दिया जाता है।

गैंग्लीअन की बीमारी में किसे कन्सल्ट करना चाहिए?

सामान्य तौर पर सर्वप्रथम मरीज को किसी जनरल फीजिशियन से संपर्क करना चाहिए, हालांकि बच्चों और बूढ़ों को सीधे ऑर्थोपेडिक सर्जन से भी दिखाया जा सकता है।

क्या गैंग्लीअन का मरीज के शरीर के ऊपर हमेशा के लिए असर हो सकता है?

हां, गैंग्लीअन का असर मरीज पर हमेशा के लिए भी हो सकता है। इसका असर मरीज के ब्रेन मोटर वेसल्स पर पड़ता है। कलाई और टखनों में दर्द और शरीर के अन्य भागों पर सूजन आना यह सब आर्थराइटिस के शुरुआती लक्षण होते हैं जो दिखाई देते हैं। जॉइन्ट्स के आसपास में जकड़न महसूस होना; घुटने और हाथों के आसपास जकड़न और बेचैनी महसूस होना, यह भी लक्षण होते हैं। अगर इलाज किया जाए तो गैंग्लीअन की गांठ ठीक हो सकती है। घुटने पर जो बेकर्स सिस्ट होता है वह घुटनों के फ्लुइड पर असर करता है और इसकी वजह से मरीज विकलांग हो सकता है।

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