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गोनोरिया एक सेक्शुअली (लैंगिक रूप से) ट्रान्समिटेड इन्फेक्शन है जिसकी वजह होती है बैक्टीरियम नीसेरिया गोनोरिया। दो संक्रमित व्यक्तियों के बीच यौन क्रिया के दौरान यौनांगों से जो डिस्चार्ज निकलता है उसके कारण गोनोरिया की बीमारी होती है। यह बीमारी स्त्री से पुरुष को या फिर पुरुष से स्त्री को हो सकती है। गोनोरिया की बीमारी स्त्री और पुरुष दोनों को हो सकती है। यह बहुत ज्यादा संक्रामक होता है।
गोनोरिया के लक्षण जो पुरुष और स्त्री दोनों में दिखाई देते हैं :-
* मूत्र-विसर्जन (युरिन पास) करते वक्त दर्द होना
* यौन-संसर्ग के दौरान दर्द महसूस होना
* यौनांगों से अनियमित स्खलन
* महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान या बीच में ब्लीडींग होना
* पेल्विक पेन होना
* आंखों में तकलीफ होना
इसके कारण और रिस्क फैक्टर्स में शामिल हैं :-
* यंग गर्ल्स जो 16 से 19 साल की होती हैं
* यंग मेन जिनकी उम्र 19 से 24 तक होती है
* इन्फेक्टेड फीमेल या मेल पार्टनर के साथ असुरक्षित यौन संबंध
* इन्फेक्टेड मेल पार्टनर्स में असुरक्षित गुदा मैथुन (अनसेफ ऍनल सेक्स)
ऊपर दिए गए लक्षणों के आधार पर ही गोनोरिया को डायग्नॉज किया जाता है। इन लक्षणों के अलावा डॉक्टर स्त्री और पुरुष दोनों को युरिन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। कभी-कभी ऍनस, युरेथ्रा और वॅजिना से रूई के टुकड़े से लिए गए नमूने से गोनोरिया की बीमारी को निश्चित करने में मदद मिलती है। कभी-कभी इन्फेक्टेड पार्टनर के साथ ओरल सेक्स करने से भी ओरल गोनोरिया की बीमारी होती है। इस केस में टेस्ट के लिए गले से नमूना लिया जाता है।
गोनोरिया का स्थायी इलाज हो सकता है। गायनेकोलॉजिस्ट या फिर जनरल फिजीशियन मेडिसीन देकर मरीज को गाइड करते हैं। हालांकि रोकथाम इलाज से कहीं बेहतर है।
हां, गोनोरिया को रोका जा सकता है। इसके लिए कुछ कदम उठाने पड़ते हैं जैसे :-
* सेफ सेक्स के लिए कंडोम का इस्तेमाल करना
* कंडोम का सही उपयोग करना
* इन्फेक्टेड पार्टनर के साथ यौन संबंध से यथासंभव बचना
* गोनोरिया की बीमारी के बारे में अपने पार्टनर को सतर्क करना
* जब तक ट्रीटमेन्ट पूरी नहीं होती, तब तक सेक्स को अवॉइड करना
हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से जिसमें सेफ सेक्स शामिल हो और ढेर सारा पानी पीने से गोनोरिया के इन्फेक्शन से बचने में मदद मिलती है।