हमारे व बुद्ध, कृष्ण या जीसस में फर्क क्या है? पहले तो वे मन के विकारों से उबरकर उसकी शक्तियों से ओतप्रोत हो गये, और फिर उसी शक्ति को उन्होंने जगत के उद्धार में लगाया। और हम - ऐसे तो निर्गुणी कि खुद ‘अपने उद्धार की शक्ति’ भी नहीं जुटा पा रहे।
-दीप त्रिवेदी