आप अस्तित्व का एक हिस्सा हैं, आपके जीवन की परेशानी यह है कि आप स्वार्थवश अपनी एक अलग दुनिया बनाने में लगे हुए हैं।
-दीप त्रिवेदी
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आप अस्तित्व का एक हिस्सा हैं, आपके जीवन की परेशानी यह है कि आप स्वार्थवश अपनी एक अलग दुनिया बनाने में लगे हुए हैं।
-दीप त्रिवेदी
क्या आपको जीवन में प्रकृति के ‘‘अचानक’’ का कभी कोई एहसास नहीं हुआ? गौर करो, आप कुछ याद करने की कोशिश करते हैं - याद नहीं आता; फिर अचानक याद आ जाता है। आप कुछ पाने के हजार प्रयत्न करते हैं पर नहीं पा पाते; ...फिर एक दिन जब उस पाने को भूल भी चुके होते हैं कि अचानक पा लेते हैं।
-दीप त्रिवेदी
क्या आप अपनी मन-रूपी धरती को स्थिर नहीं रख सकते? रख सकते हैं, यदि आप अपना ध्यान जीवन में आने वाले सुख-दुःखों से हटाकर मात्र अपने ‘‘होनेपन’’ पर स्थिर रख सकें।
-दीप त्रिवेदी
इस Infinite "Time व Space" के जगत में आपने अपने छः फूट के शरीर का 60 वर्ष के लिए आने का मकसद नहीं जाना, तो बाकी जो भी किया-करा-जाना; सब बेकार।
-दीप त्रिवेदी