हमारे जीवन के सारे दुःख व असफलताओं के पीछे मात्र और एकमात्र कारण हमारी स्वार्थी प्रवृत्ति व उससे पैदा होने वाले हमारे स्वार्थजनित कार्य हैं।
-दीप त्रिवेदी
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हमारे जीवन के सारे दुःख व असफलताओं के पीछे मात्र और एकमात्र कारण हमारी स्वार्थी प्रवृत्ति व उससे पैदा होने वाले हमारे स्वार्थजनित कार्य हैं।
-दीप त्रिवेदी
कार्य प्रारंभ करने के बाद उसके ‘‘सफल-समापन’’ से पूर्व ही उस ओर से अपनी चेतना हटाना - असफलता को न्योता देने के समान है।
-दीप त्रिवेदी
अपना मन जाने बगैर जीवन की कोई सफलता हासिल नहीं की जा सकती। लेकिन मन समझने हेतु ना तो किताबें उपलब्ध हैं ना शिक्षाएं ही। मनुष्य की इतनी असफलता का यही एक कारण है।
-दीप त्रिवेदी
क्रोध, चिंता, भय, पूजा, असुरक्षा, ईर्ष्या, पक्षपात आपको मन के उन विकारों में ले जाते हैं, जहां से आपको अंधा भी आंख वाला नजर आने लगता है। अब जब आपको किसी चीज की पहचान ही नहीं रही तो सिवाय असफलता के जीवन में क्या मिल सकता है?
-दीप त्रिवेदी
हमारी असफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि हम इस जगत की संयुक्तता को नहीं देखते। यहां ना तो किसी का जाती और ना ही किसी समूह-विशेष का हित साध पाना संभव है।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य का बचपना तो यह कि जहां सफलता का श्रेय लेने की उसमें होड़ लगी रहती है, वहीं असफलता का मटका किसी और पर फोड़ने की फिराक में भी वह लगा ही रहता है। परिणाम यह कि कभी भी वह घटना का ठीक से आकलन कर नहीं पाता।
-दीप त्रिवेदी