जीवन में प्रसन्न रहने के लिये चैन के दो निवाले, गिरती बारिश या बहती हवायें ही पर्याप्त हैं। ...जबकि दुःख के कारणों पर तो हजारों किताबें लिखी जा सकती हैं।
-दीप त्रिवेदी
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जीवन में प्रसन्न रहने के लिये चैन के दो निवाले, गिरती बारिश या बहती हवायें ही पर्याप्त हैं। ...जबकि दुःख के कारणों पर तो हजारों किताबें लिखी जा सकती हैं।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य की बुद्धिमत्ता ऐसे चुनावों में छिपी है जहां से वह जो भी चाहे या पाये...उससे सिर्फ सुख ही उत्पन्न हो।
-दीप त्रिवेदी
आनंद की परिभाषा क्या है? जब आप अपने स्वभाव के अनुरूप बरत रहे होते हैं तब उससे जो उत्पन्न होता है; उसका नाम ‘‘आंनद’’ है।
-दीप त्रिवेदी
जीवन को गौर से देखने पर पाओगे कि यहां के हर सुख के साथ दुःख... व हर दुःख के साथ सुख जुड़ा ही हुआ है। अतः जो कुछ भी घट रहा है उसमें अपनी निगाह सिर्फ सुख पर बनाये रखने से ही आप सदैव सुखी हो सकते हैं।
-दीप त्रिवेदी
यदि हमेशा आनंद में रहना चाहते हो तो जीवन के संघर्षों से भी एक खेल मानकर उलझो। देखें; संघर्ष हमसे जीतता है या हम संघर्ष से?
-दीप त्रिवेदी
मस्ती की परिभाषा क्या है? आप जो करना चाहते हैं वह करने को मिल जाता है, तो उस समय आप जो अनुभव करते हैं उस अनुभव का नाम ‘‘मस्ती’’ है।
-दीप त्रिवेदी