‘बचपना’ मनुष्य का वह सबसे हसीन गुण है जो मरते दम तक छोड़ने जैसा नहीं। लेकिन जो बच्चे बचपन से ही गंभीर रहने के आदी हों, उनका तो भगवान भी मालिक नहीं।
-दीप त्रिवेदी
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‘बचपना’ मनुष्य का वह सबसे हसीन गुण है जो मरते दम तक छोड़ने जैसा नहीं। लेकिन जो बच्चे बचपन से ही गंभीर रहने के आदी हों, उनका तो भगवान भी मालिक नहीं।
-दीप त्रिवेदी