‘‘न कुछ पाप है न कुछ पुण्य’’ यह तो स्वयं कृष्ण ने गीता में कई बार कहा। फिर ये संत क्यों रोज-रोज हमें पापों की फेहरिस्त पढ़ा-पढ़ाकर डरा रहे हैं?
-दीप त्रिवेदी
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‘‘न कुछ पाप है न कुछ पुण्य’’ यह तो स्वयं कृष्ण ने गीता में कई बार कहा। फिर ये संत क्यों रोज-रोज हमें पापों की फेहरिस्त पढ़ा-पढ़ाकर डरा रहे हैं?
-दीप त्रिवेदी
कृष्ण की पूजा करने से भगवद्गीता समझना बुद्धिमत्ता है।
-दीप त्रिवेदी
‘कर्म करो पर फल की चिंता मत करो’ यह विश्व के सबसे बड़े ज्ञानी ‘‘कृष्ण’’ ने विश्व के सबसे अनूठे ग्रंथ ‘‘भगवद्गीता’’ में कहा उनका सबसे अद्भुत श्लोक है। विडंबना यह कि हमारी सारी पूजाएं, यज्ञ, उपवास, वास्तु, ज्योतिष सब फल की आशा से निकले कर्म हैं।
-दीप त्रिवेदी
‘‘वक्त’’ वह धार है जो ‘‘कृष्ण’’ जैसे सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व को भी मौत की नींद सुला देता है। लेकिन उनका जीया जीवन व उनकी कही भगवद्गीता उन्हें अमर बना देती है। मरना आपको भी है, फिर कुछ ऐसा कर के क्यों नहीं मरते कि मर के भी न मरो।
-दीप त्रिवेदी
‘‘कर्म करो पर फल की चिंता मत करो’’...बात कृष्ण की सौ फीसदी सही है। वे यही कह रहे हैं कि जो करो उससे सिर्फ आनंद उत्पन्न होना चाहिए। क्योंकि आनंदपूर्वक किया कर्म ही एक ऐसा कर्म है जिसके प्रतिफल में भी सिर्फ आनंद ही पैदा होता है...और वह भी हाथों-हाथ।
-दीप त्रिवेदी