यह ‘‘संसार’’ क्रमशः प्रगति के सिद्धांत से फैल रहा है। यह विस्तार ना सिर्फ इसके Time व Space में जारी है, बल्कि चेतना के स्तर पर भी जारी ही है। उसने भी अमीबा से मनुष्य तक का सफर क्रमशः ही तय किया है।
-दीप त्रिवेदी