इस संसार में सच्चाई के साथ जीने का एक ही मार्ग है - ‘‘आप या तो अपने समेत सबको मृत समझें, या फिर आप अपने समेत सबको बराबरी का इन्सान समझें।’’
-दीप त्रिवेदी
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इस संसार में सच्चाई के साथ जीने का एक ही मार्ग है - ‘‘आप या तो अपने समेत सबको मृत समझें, या फिर आप अपने समेत सबको बराबरी का इन्सान समझें।’’
-दीप त्रिवेदी
हमारे जीवन व व्यवसाय के सिद्धांतों में कोई फर्क नहीं। दोनों सबके हित की सोचने से ही फलते-फूलते हैं। स्वार्थी प्रवृत्ति से दोनों विनाश के कगार पर आ खड़े होते हैं।
-दीप त्रिवेदी
बाईबल, कुरान व वेद तो कई बार कई मौकों पर गलत साबित हो चुके हैं। यह महत्वपूर्ण मनुष्य जीवन मस्ती से जीते हुए उनके बजाय मनुष्यता पर निछावर करना ज्यादा बेहतर है।
-दीप त्रिवेदी