मनुष्य जिस मात्रा में धर्म के विषय में अंधा है ठीक उसी मात्रा में वह जीवन के सारे सत्यों को समझने में भी अंधा होता है। और यही कारण है कि विश्व आंख वाले अंधों से भरा पड़ा है।
-दीप त्रिवेदी