यदि आप वाकई अपना व्यक्तित्व निखारकर जीवन में कोई अद्भुत कार्य करना चाहते हैं तो अपने ‘‘द्रष्टा’’ की उपस्थिति को पहचानें। वह है, तभी तो आपको कार्य करने का आभास हो रहा है।
-दीप त्रिवेदी