जो सब कर रहे हैं वही आप भी कर रहे हैं। फिर रोते क्यों हैं...? जो सबका हो रहा है वह आपका भी हो ही तो रहा है।
-दीप त्रिवेदी
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जो सब कर रहे हैं वही आप भी कर रहे हैं। फिर रोते क्यों हैं...? जो सबका हो रहा है वह आपका भी हो ही तो रहा है।
-दीप त्रिवेदी
जीवन में कोई भी मनुष्य सिर्फ बुरा नहीं हो सकता। बुरे-से-बुरे मनुष्य में भी हजार अच्छाइयां तो छिपी ही रहती हैं। मनुष्यों की सिर्फ अच्छाइयों को देखनेवाला परम शांति से जीता चला जाता है।
-दीप त्रिवेदी
जीवन में कोई भी वस्तु सिर्फ अच्छी या सिर्फ बुरी नहीं हो सकती। सूर्य जीवन देता है तो कड़ी धूप भी देता है। पानी प्यास बुझाता है तो बाढ़ लाकर तबाही भी मचाता है। अतः वस्तुओं की अच्छाई पकड़कर अपनाने वाला सुखी होता चला जाता है।
-दीप त्रिवेदी