प्रकृति से किसी मनुष्य को इतनी सत्ता नहीं कि वह किसी दूसरे मनुष्य के स्थायी सुख का उपाय कर सके। उस हेतु तो हर मनुष्य को स्वयं ही अपने प्रयास करने होते हैं।
-दीप त्रिवेदी
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प्रकृति से किसी मनुष्य को इतनी सत्ता नहीं कि वह किसी दूसरे मनुष्य के स्थायी सुख का उपाय कर सके। उस हेतु तो हर मनुष्य को स्वयं ही अपने प्रयास करने होते हैं।
-दीप त्रिवेदी
कोई भी कार्य दूर से जितना कठिन नजर आता है, ध्यान रहे...प्रारंभ करने पर उतना कठिन कभी सिद्ध नहीं होता।
-दीप त्रिवेदी
बड़े कार्य ऊंची महत्वाकांक्षाओं के चलते नहीं, बल्कि उच्च कोटि के ध्यान व बड़े पैमाने की कटिबद्धता के सहारे निपटाये जाते हैं।
-दीप त्रिवेदी
जो ‘नाम’ और ‘दाम’ के लिये काम करते हैं वे जीवन में कहीं नहीं पहुंच पाते। ...पर जो अपनी ही धुन में सिर्फ काम के लिए काम करता है, वह ‘‘नाम और दाम’’ दोनों पा जाता है।
-दीप त्रिवेदी