दिल से ‘‘सच्चा-व्यक्ति’’ बिछड़ने के तमाम गमों से हमेशा आजाद रहता है। क्योंकि वह जानता है कि शरीर से मिलना-बिछड़ना कुदरत की बनायी परिस्थितियों पर निर्भर है, सो उसका दुःख क्या पालना? और किसी से मन से भी बिछड़ गए तब तो उसका दुःख पालने का वैसे ही सवाल नहीं उठता।
-दीप त्रिवेदी