मनुष्य की सबसे बड़ी गरिमा उसकी परम-स्वतंत्रता है, कृपया उसे हमेशा सम्भाल कर रखें। न तो किसी के जीवन में दखल दें और न ही किसी व्यक्ति, धर्म, समाज या शास्त्र को अपने जीवन में दखल देने दें। क्योंकि... आप अकेले, इकलौते व नवीन हैं। आप जैसा कोई न पहले हुआ है और न आगे होगा। अतः आपका एकमात्र कर्तव्य सबसे बचते हुए अपनी इस जीवन-यात्रा को यादगार बनाना है।
-दीप त्रिवेदी