आज के समय में धन का प्रभाव इतना तो बढ़ गया है कि अब धनवान में अलग से अन्य कोई गुण होने की आवश्यकता ही नहीं रह गयी है।
-दीप त्रिवेदी
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आज के समय में धन का प्रभाव इतना तो बढ़ गया है कि अब धनवान में अलग से अन्य कोई गुण होने की आवश्यकता ही नहीं रह गयी है।
-दीप त्रिवेदी
धन की दौड़ से विज्ञान भी अछूता नहीं। पिछले दो-सौ वर्षों की सारी व्यावसायिक सफलताएं विज्ञान की नयी-नयी खोजों को ही आभारी हैं।
-दीप त्रिवेदी
धन की दौड़ का आलम तो यह है कि कुछ राष्ट्र अपने हथियार बेचने हेतु दुनिया पर से युद्ध के बादल हटने ही नहीं देते।
-दीप त्रिवेदी
आज पूरी मनुष्यजाति सिर्फ धन के आसरे व सहारे जी रही है। अब तो धन की इस अंधी दौड़ से धर्म, राजनीति व सामाजिक संस्थाएं भी पूरी तरह ओत-प्रोत हैं। ऐसे में आम-मनुष्य के पास धन बचे भी तो कैसे?
-दीप त्रिवेदी
धन की दुनिया में इतनी अंधी दौड़ चल पड़ी है कि कुछ राष्ट्र नियमित Aids लेने हेतु आतंकवाद तक को बढ़ावा देते हैं।
-दीप त्रिवेदी