इतिहास में याद भी उसे किया जाता है व पूजा भी उसे ही जाता है जो भीड़ से अलग खड़े होकर ‘‘सत्य’’ कहने का साहस जुटाते हैं। जैसे बुद्ध; जिन्होंने हिंदू घर में पैदा होने के बाद भी तमाम हिंदू-परंपराओं व पाखंडों का विरोध कर बौद्ध विचारधारा स्थापित की। वैसे ही जीसस, जिन्होंने यहूदी घर में पैदा होने के बावजूद यहूदी परंपराओं का विरोध करते हुए अपनी जान गंवाई। या ‘‘कृष्ण’’ जिन्होंने ना सिर्फ हर परंपरा का विरोध किया बल्कि उन्हें जीवनभर तोड़ा भी। क्या अब भी आप हिंदू, मुस्लिम, ईसाई बने रहना चाहते हैं?
-दीप त्रिवेदी