पता नहीं यह मुस्लिम समाज वक्त के साथ अपनी कुनीतियां छोड़ने में इतना वक्त क्यों लगाता है? अब जब आज सऊदी अरब में स्त्रियों को मताधिकार का हक दिया जा सकता है, तो यह पचास-सौ साल पहले क्यों नहीं दिया जा सकता था?
-दीप त्रिवेदी