हम क्या हैं? हम भगवान व जगत के बीच के माध्यम हैं। खुल के समझाऊं तो हम Film के वो परदे हैं जिसका कर्तव्य सिर्फ Producerकी Film को दर्शक तक पहुंचाना है।
-दीप त्रिवेदी
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हम क्या हैं? हम भगवान व जगत के बीच के माध्यम हैं। खुल के समझाऊं तो हम Film के वो परदे हैं जिसका कर्तव्य सिर्फ Producerकी Film को दर्शक तक पहुंचाना है।
-दीप त्रिवेदी
आप कैसे हैं, यह इतना महत्वपूर्ण नहीं जितना कि ‘‘आप जैसे हैं वैसे दिखते हैं या नहीं।’’
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य जन्म लिया है तो मन के हजारों शौक पालना व पूरे करना अच्छी बात है। यह आपके मन का विकास ही करेगा। परंतु चैतन्य के स्तर पर ‘ध्येय’ बड़ा व एक ही रखना। बुद्ध, जीसस, एडीसन, बिल गेट्स, शेक्सपीयर...सब चैतन्य के स्तर पर ‘एक-लक्षी’ होने के परिणाम हैं।
-दीप त्रिवेदी
अगले क्षण क्या करना यह इस क्षण तय कर लेना प्रकृति के खिलाफ जाना है। आश्चर्य है लोग-बाग तो बड़े होकर क्या बनना से लेकर कब मंदिर जाना व कब उपवास व रोजे रखना यह भी तय कर लेते हैं। अब प्रकृति के इतने खिलाफ जाओगे तो उसके कोप का भाजन तो बनना ही पड़ेगा।
-दीप त्रिवेदी
यह जगत "Three Dimensions Theory" से अस्तित्व में है। हमारे समेत इस जगत का कण-कण सिर्फ इसी Theory से चलायमान है। हर वस्तु व घटना के तीनों Dimensions को समझना मनुष्य के बुद्धिमत्ता की सबसे बड़ी ऊंचाई है।
-दीप त्रिवेदी
जीवन में मानसिक तौर पर पागल होने से बचना चाहते हो तो अपने प्रेम व क्रोध को खुला छोड़ दो। ...यह दोनों दबाने से विकृत हो जाते हैं।
-दीप त्रिवेदी
क्या आपको जीवन में प्रकृति के ‘‘अचानक’’ का कभी कोई एहसास नहीं हुआ? गौर करो, आप कुछ याद करने की कोशिश करते हैं - याद नहीं आता; फिर अचानक याद आ जाता है। आप कुछ पाने के हजार प्रयत्न करते हैं पर नहीं पा पाते; ...फिर एक दिन जब उस पाने को भूल भी चुके होते हैं कि अचानक पा लेते हैं।
-दीप त्रिवेदी
आपके पास क्या और कितना है यह आपके धनी होने का सबूत नहीं...पर हां, आप क्या व कितना और पाना चाहते हैं, यह आपकी दरिद्रता को अवश्य दर्शाता है।
-दीप त्रिवेदी
मेहरबानी कर पुरानी व गलत शिक्षाओं के जाल में न पड़ें। यह स्पष्ट समझ लें कि मन के तल पर कोई भी भाव दबाने के सिर्फ दुष्परिणाम आते हैं।
-दीप त्रिवेदी
हिंदू शास्त्रों में 33 करोड़ के करीब देवी-देवता वर्णित हैं। आज की जनसंख्या के आधार पर भी यह तीन मनुष्य पर एक देवता हुए। फिर भी देश की हालत देखने पर वे कहीं और व्यस्त लगते हैं। ...लगता है अब हमें उनके भरोसे रहने के बजाय देश के उद्धार हेतु स्वयं लगना होगा।
-दीप त्रिवेदी