विज्ञान की कोई ऐसी खोज नहीं जिसे जैन मुनि अपने शास्त्रों में वर्णित न बताते हों। ज्ञान-विज्ञान से इतने परिपूर्ण शास्त्र होने के बावजूद विज्ञान तो छोड़ो, किसी भी क्षेत्र में एक भी जैन विश्व स्तर पर कुछ किया नहीं दिखता। लगता है अब उन्हें Nobel Prize के लिये अपने शास्त्र भिजवाने प्रारंभ कर देने चाहिए।
-दीप त्रिवेदी