कोटेशन्स
जैन धर्म

विज्ञान की कोई ऐसी खोज नहीं जिसे जैन मुनि अपने शास्त्रों में वर्णित न बताते हों। ज्ञान-विज्ञान से इतने परिपूर्ण शास्त्र होने के बावजूद विज्ञान तो छोड़ो, किसी भी क्षेत्र में एक भी जैन विश्व स्तर पर कुछ किया नहीं दिखता। लगता है अब उन्हें Nobel Prize के लिये अपने शास्त्र भिजवाने प्रारंभ कर देने चाहिए।

-दीप त्रिवेदी

विश्व इतिहास के एकमात्र सम्पूर्ण व्यक्तित्व के मालिक ‘‘कृष्ण’’ को भी जैन शास्त्रों ने नरक में जगह दी है। यहां तक कि पूरा विश्व जिनके तेज से प्रकाशमान है वैसे बुद्ध को भी जैन मुनि ‘‘महावीर’’ से दीक्षित बताते हैं। क्या यह उनकी Insecurity व Inferiority की Height नहीं?

-दीप त्रिवेदी

महावीर ने वस्त्रों का त्याग किया था। ...फिर यह अधिकांश जैनों के वस्त्रों की दुकान का नाम ‘‘महावीर वस्त्रालय’’ क्यों है?

-दीप त्रिवेदी

जैनों को अन्यों की शादियों में भी अपना खाना व अपने खाने के काउंटर अलग से चाहिए। समझ नहीं आता कि वे अच्छे-खासे होने के बावजूद उन्हें इन्सानों के साथ घुलने-मिलने में अड़चन कहां आ रही है?

-दीप त्रिवेदी

समझ नहीं आता कि यह जैन मुनि अच्छे खाने, अच्छे कपड़े पहनने से लेकर अच्छे से नहाने व खुशबूदार रहने को भी कैसे पाप कहते हैं? फिर तो उनके अनुसार सारे जानवर वैसे ही ‘‘पक्के जैन’’ हो गये।

-दीप त्रिवेदी

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