गौर करना, सदमा पहुंचने पर यदि आप दुःख की अभिव्यक्ति कर लेते हैं तो उससे छूट जाते हैं, और गलती से दबा दिया तो वह दुःख अपने विकृत स्वरूप में आपका भाग्य हो जाता है।
-दीप त्रिवेदी