कोटेशन्स
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यदि तीर्थ-स्थानों की यात्राएं व जात्राएं इतनी ही शुभ होती तो क्यों उस पर जाने वाले हजारों-लाखों लोग हर वर्ष हादसे का शिकार होते हैं? कहीं मनुष्य जन्म के बावजूद उसे परेशान किये जाने पर भगवान अपना क्रोध तो उन पर नहीं निकाल रहे?

-दीप त्रिवेदी

‘‘बुद्ध’’ समय का वो कमाल है जिनका जन्म भी भारत में हुआ व पैंतालिस वर्षों तक उन्होंने प्रवचन भी भारत में ही दिया। लेकिन उन्होंने हिंदू पाखंडों का विरोध क्या किया, भारत ने उनकी अमूल्य धरोहर को ही भारत से खदेड़ दिया। पिछले दो-हजार वर्ष के भारत के इतिहास में यह उसका सबसे बड़ा नुकसान है।

-दीप त्रिवेदी

आप अपनी ‘स्वतंत्रता’ हरहाल में बरकरार रखने की शक्ति जुटाने व अपने मूड की किसी कीमत पर रक्षा करने की ताकत प्राप्त कर लें; फिर दूसरे का जो होना हो...हो, पर आप आनंद व सफलता के उच्चतम शिखर पर अवश्य विराजमान हो जाएंगे।

-दीप त्रिवेदी

हम भी अजीब हैं व हमारे धर्मगुरु भी। हम सिर्फ अपने अहंकार की पूर्ति हेतु अपने धर्म की अच्छाई सुनने उनके पास जाते हैं, व वे सयाने भी इसका ङ्गायदा उठाते हुए हमारा अहंकार सहलाकर अपनी समृद्धि बढ़ाये चले जाते हैं। इससे हम इतने तो अंधे हो जाते हैं कि हमें अपने धर्म की बुराई व दूसरे धर्मों की अच्छाई ही दिखना बंद हो जाती है। यह आपका कितना बड़ा नुकसान है इसकी आप कल्पना तक नहीं कर सकते।

-दीप त्रिवेदी

अहिंसा को उपलब्ध होने के लिए पक्षपात रहित आंख चाहिए। यदि आप अपने समेत सबके साथ न्यायाधीश जैसा व्यवहार कर सकें तो ही आपके जीवन में से हिंसाएं कम होंगी।

-दीप त्रिवेदी

यह नहीं है कि अधिकांश प्रतिभावान अमेरिका में है। उनमें से अधिकांश तो वे हैं जो दूसरे देशों से आये हुए हैं व जिन्होंने वहां की नागरिकता स्वीकार की हैं। अन्य कई ऐसे हैं जिन्हें अच्छे से प्रॅमोट किया गया है।

-दीप त्रिवेदी

‘मन’ ना सिर्फ प्रकृति के सारे रहस्यों को समझने वाला है, बल्कि उसके प्रभाव को घड़ी के कांटे के साथ विश्व के किसी भी मनुष्य के जीवन में क्या घट सकता है...बताने में भी सक्षम है। ...फिर समझ नहीं आता कि हम हमारे मन में डुबकी लगाने की बजाय किन-किन कार्यों में उलझे पड़े हैं?

-दीप त्रिवेदी

किसी भी वस्तु को प्राप्त करने से पहले ही उस बाबत उत्साहित हो जाना हमेशा जरूरत से ज्यादा दुःखद परिणाम लेकर आता है। विश्वास करने हेतु ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं, अपने ही जीवन की चन्द घटनाओं पर नजर घुमा लें...समझ जाएंगे।

-दीप त्रिवेदी

भारत के राजनेताओं व धर्मगुरुओं ने पिछले पचास वर्षों में देश की जनता को क्या सुकून पहुंचाया? और उसके सामने हमारे Legendary गायकों जैसे मोहम्मद रफी, किशोरकुमार व लता-आशा ने हमें क्या कुछ नहीं दिया? आज भी कम-से-कम औसत दो घंटे सबको सुकून से जीना उन्हीं की आवाज के सहारे नसीब हो रहा है।

-दीप त्रिवेदी

चूंकि हम ताकतवर के सामने क्रोध दबाते हैं, इसीलिए कमजोरों पर मौके-बे मौके क्रोध निकालते रहते हैं।

-दीप त्रिवेदी

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