कितनी ही बड़ी समस्या से आप क्यों न घिरे हों, पर उसे सुलझाने हेतु ‘चिंतन’ व ‘चिंता’ का फर्क मालूम होना आवश्यक है। उसका चिंतन करने से समस्या कितनी ही जटिल क्यों न हो, वह जल्द ही सुलझ जाती है; जबकि समस्या की चिंता करने से समस्या आपको खा जाती है।
-दीप त्रिवेदी