कोटेशन्स
आलोचना

अपनी ही बात को सच्चा मान उसका दृढतापूर्वक साथ तो आप सदियों से देते आ रहे हैं। लेकिन यह क्यों नहीं समझते कि यथायोग्य आलोचना सहे बगैर वक्त के अनुसार राह नहीं पायी जा सकती। मनुष्य की चेतना का यह नियम है कि जो जितना अपने खिलाफ सुनने को तैयार रहता है, उतना ही वह निखरता चला जाता है। अपनी ही कट्टरता के कारण विश्वभर के मुसलमान भाई ‘‘बुद्धिमानों’’ की इस अपार करुणा से करीब-करीब वंचित हैं।

-दीप त्रिवेदी

Proudly owned by Aatman Innovations Pvt. Ltd. Mumbai, India.   |   प्रायवेसी पॉलिसी   |   डिस्कलेमर   |   साइट मैप   |   Best View - (1280x720) Latest Browsers
Feedback/Testimonials
* इस वेबसाइट के किसी भी विवरण का किसी भी रूप में अंशतः या पूर्णतः निजी हित में उपयोग करते पाए जाने वाले व्यक्ति/कंपनी/संस्था के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।