जीवन में आयी हर समस्या से खुद नहीं निपटना होता है। उनमें से अधिकांश को तो कुदरत के न्याय पर छोड़कर चैन से सो जाने में ही हमारी भलाई होती है।
-दीप त्रिवेदी
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जीवन में आयी हर समस्या से खुद नहीं निपटना होता है। उनमें से अधिकांश को तो कुदरत के न्याय पर छोड़कर चैन से सो जाने में ही हमारी भलाई होती है।
-दीप त्रिवेदी
इस संसार में कोई भी समस्या बगैर समाधान के पैदा नहीं होती। ...यानी समस्या कितनी ही जटिल क्यों न हो, उसे सुलझाने का एक-न-एक उपाय तो अवश्य होता ही है।
-दीप त्रिवेदी
अक्सर समस्याओं को सुलझाने की कोशिश में आप समस्याओं के निकट पहुंच जाते हैं। प्रायः समस्याएं आती व चली जाती हैं, उसमें आपके करने लायक कुछ नहीं होता है।
-दीप त्रिवेदी
हम पर आनेवाली अधिकांश मुसीबतों में हमारे करने लायक कुछ नहीं होता है। अक्सर वे दूसरों को परेशान करने आयी होती हैं, हम तो घबराकर उसमें अपनी टांग फंसाने के कारण उलझ जाते हैं।
-दीप त्रिवेदी
समस्या कितने ही विकराल स्वरूप में प्रकट क्यों न हो जाए, उसका कोई-न-कोई उपाय Time या Space में होता ही है। सवाल बिना घबराये मन की गहराइयों से उसपर चिंतन करने का ही है।
-दीप त्रिवेदी
यदि आप अपने ‘होनेपन’ व ‘स्वभाव’ को अलग-अलग पहचान लेंगे, तो उसके बाद आपके जीवन में कभी कोई समस्या नहीं आएगी।
-दीप त्रिवेदी
कितनी ही बड़ी समस्या से आप क्यों न घिरे हों, पर उसे सुलझाने हेतु ‘चिंतन’ व ‘चिंता’ का फर्क मालूम होना आवश्यक है। उसका चिंतन करने से समस्या कितनी ही जटिल क्यों न हो, वह जल्द ही सुलझ जाती है; जबकि समस्या की चिंता करने से समस्या आपको खा जाती है।
-दीप त्रिवेदी