क्या यह हास्यास्पद नहीं कि हम अपने जीवन से कष्टों को दूर करने हेतु जिन महापुरुषों की पूजा करते हैं, कभी उनके जीवन में नहीं झांकते कि उन्होंने जीवनभर कितने कष्ट भोगे हैं। दरअसल हम यह सीधा गणित क्यों नहीं समझते कि जबतक जीवन है तब तक कष्ट रहने ही हैं, चाहे वह कितना ही बड़ा महापुरुष क्यों न हो? ...यानी उनकी महानता कष्ट न मिलने के कारण नहीं; बल्कि कष्ट में भी उनकी हंसते रहने की क्षमता के कारण है।
-दीप त्रिवेदी