इस पूरी प्रकृति में एक Harmony है, उनमें एक आपसी सामंजस्य है। हमारे शरीर के भी सारे अंगों में आपसी तालमेल है। सिर्फ हम ही हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध या ईसाई बने इतराते फिर रहे हैं। जिस दिन हम सिर्फ इन्सान हो जाएंगे, हममें भी आपसी तालमेल बैठ जाएगा।
-दीप त्रिवेदी