कोटेशन्स
क्रोध

हम आपस में एक दूसरे के प्रति आया क्रोध दबाते हैं, इसी कारण एक दिन हमारे आपस में बड़े झगड़े हो जाते हैं। जिन दो व्यक्तियों में रोज थोड़े-थोड़े झगड़े होते रहते हैं उनमें कभी जीवनभर की दुश्मनी नहीं होती।

-दीप त्रिवेदी

यदि जीवन में आप वाकई क्रोध से छुटकारा पाना चाहते हैं तो व्यर्थ की शिक्षाओं को भूल जाओ। क्रोध से छुटकारा पाने का एक ही उपाय है कि जब, जिस पर जितना क्रोध आए उसे निकालते चले जाओ।

-दीप त्रिवेदी

‘ताकतवर आदमी’ क्रोध करने को स्वतंत्र होता है, जबकि ‘कमजोर आदमी’ क्रोध दबाने को मजबूर होता है। इसी से ताकतवर प्रसन्न व कमजोर विकृत होता चला जाता है।

-दीप त्रिवेदी

चूंकि हम ताकतवर के सामने क्रोध दबाते हैं, इसीलिए कमजोरों पर मौके-बे मौके क्रोध निकालते रहते हैं।

-दीप त्रिवेदी

प्रेम और क्रोध एक ही ऊर्जा के दो नाम हैं। एक का ठीक तरीके से उपयोग करना सीख जाओ...दूसरे की ऊर्जा स्वतः ही परिणामकारी कर्मों में लग जाएगी।

-दीप त्रिवेदी

प्रकृति में ऊर्जा के दो ही केन्द्र बिन्दु हैं, एक ‘क्रोध’ व दूसरा ‘प्रेम’। परंतु दुर्भाग्य से Science... Psychology की दृष्टि से देखना जानता ही नहीं। यहां ऊर्जा उत्पन्न या तो दो वस्तुओं के घर्षण यानी ‘क्रोध’ से होती है, या यह ऊर्जा उत्पन्न दो वस्तुओं के मिलन यानी ‘प्रेम’ से होती है।

-दीप त्रिवेदी

जीवन में मानसिक तौर पर पागल होने से बचना चाहते हो तो अपने प्रेम व क्रोध को खुला छोड़ दो। ...यह दोनों दबाने से विकृत हो जाते हैं।

-दीप त्रिवेदी

बुद्धि लाख समझे कुछ नहीं होता, समझना ‘‘मन’’ को होता है। क्रोध में गलत निर्णय होने के कारण बुद्धि लाख निर्णय कर ले कि अगली बार क्रोध नहीं करना, पर मन ने क्रोध भेजा नहीं कि मनुष्य क्रोधित हुआ नहीं।

-दीप त्रिवेदी

जिस परिवार में बोलने व क्रोध करने की स्वतंत्रता है, वहां भले ही छोटे-मोटे झगड़े रोज होते होंगे पर उनमें बड़ा झगड़ा कभी नहीं होगा। जीवन की सारी कड़वाहटों की जड़ सिर्फ मनुष्य का दबा हुआ क्रोध ही है।

-दीप त्रिवेदी

‘‘क्रोध’’ व ‘‘प्रेम’’...मनुष्य जीवन में ऊर्जा के यही दो केन्द्र हैं। धर्म, शिक्षा व समाज ने मिलकर इन दोनों को ही मनुष्य में से खत्म कर दिया है। इसी से पूरी मनुष्य जाति मर-मरकर जीने को मजबूर है।

-दीप त्रिवेदी

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