कोटेशन्स
घटना

जब हमारे साथ घटने वाली छोटी-से-छोटी घटना भी हजारों वर्षों से घट रही लाखों घटनाओं का जोड़ है, तो ऐसे में आप बुद्धि से क्या गणित बिठाने में लगे हुए हैं? जो व्यक्ति इन घट रही घटनाओं के कारण बदलती परिस्थितियों के गणित को समझता है, वह निश्चित ही बिना कुछ किये जब जो चाहिए पा लेता है।

-दीप त्रिवेदी

आप सिर्फ इतना क्यों नहीं समझते कि घटनायें बाहर घट रही हैं और आपका जीवन आपके भीतर है। फिर बाहर चाहे जो न क्यों हो जाए, उससे आपका जीवन क्यों प्रभावित होता है? क्योंकि आप उन घटनाओं को जबरदस्ती अपने से जोड़ कर देखते हैं।

-दीप त्रिवेदी

अगले क्षण क्या करना यह इस क्षण तय कर लेना प्रकृति के खिलाफ जाना है। आश्चर्य है लोग-बाग तो बड़े होकर क्या बनना से लेकर कब मंदिर जाना व कब उपवास व रोजे रखना यह भी तय कर लेते हैं। अब प्रकृति के इतने खिलाफ जाओगे तो उसके कोप का भाजन तो बनना ही पड़ेगा।

-दीप त्रिवेदी

क्या आप ‘करने’ और ‘होने’ का फर्क जानते हैं? आपको जीवन में जितना करना पड़ रहा है वह आपकी अशक्ति व गुलामी को दर्शाता है, व जितना आप से ‘‘हो रहा है’’ कायदे से तो बस उतना ही आप जी रहे हैं।

-दीप त्रिवेदी

एडीसन से प्रयोग होते हैं इसी से वह एडीसन है। हमें कार्य करने पड़ते हैं, इसीलिए हम असफल हैं। जबकि बुद्ध, कृष्ण व जीसस वे हैं जिनसे सबकुछ हो रहा है।

-दीप त्रिवेदी

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