तुम्हारा वही है जो तुमसे मरने के बाद भी न बिछड़े; और वह सिवाय तुम्हारे ‘‘आत्म-संतोष’’ के और कुछ नहीं हो सकता है।
-दीप त्रिवेदी
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तुम्हारा वही है जो तुमसे मरने के बाद भी न बिछड़े; और वह सिवाय तुम्हारे ‘‘आत्म-संतोष’’ के और कुछ नहीं हो सकता है।
-दीप त्रिवेदी
इस ब्रह्मांड में सूर्य, पानी, हवा सब अपने कार्य में तो लगे हैं पर इनको आकांक्षा कोई नहीं। पाना कुछ नहीं। जब हम भी बिना किसी आकांक्षा के कार्यों में व्यस्त होना सीख जाएंगे, तो संतोष के परम-शिखर पर जा बैठेंगे।
-दीप त्रिवेदी
यदि आप वाकई अपनी भावनाओं से संतुष्ट होंगे तो आपके लिये दूसरों के Certificate कोई मायने नहीं रखेंगे। यहां तक कि सच्चे होने पर आपको सफाई देने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।
-दीप त्रिवेदी
जीवन हो या व्यवसाय, आगे वही बढ़ता है जो ना सिर्फ जहां खड़ा है वहां दृढ़ता से खड़ा रहता है, बल्कि उसी से संतुष्ट भी रहता है।
-दीप त्रिवेदी
जीवन हो या व्यवसाय ‘‘संतोष’’ सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। एक तो इससे आपकी पीछे हट नहीं होती, दूसरा लोभ व महत्वाकांक्षा के अभाव में आप उटपटांग कार्यों में लग चारों खाने चित नहीं होते व तीसरा शांति से बैठे होने के कारण आपको आगे बढ़ने के सुनहरे मौके दिखाई भी दे जाते हैं।
-दीप त्रिवेदी
निश्चित ही आत्मतृप्ति से बड़ा सुख इस विश्व में कोई नहीं। ...पर आत्मतृप्ति का अनुभव आता ही दूसरों का भला करने से है।
-दीप त्रिवेदी