कोटेशन्स
अंधविश्वास

कई लोग शुभ-मुहूर्त के चक्कर में समय-संजोग व परिस्थिति बन जाने के बावजूद ‘‘कर्म’’ को टालते हैं, वहीं अन्य कई संजोग न बनने के बावजूद इस चक्कर में कर्म कर डालते हैं। यह सब अपनी मौत मरने के ‘‘गालीबे-Idea’’ अच्छे हैं।

-दीप त्रिवेदी

शुभ-मुहूर्त कोई अलग से देखने की चीज नहीं। समय-संजोग व परिस्थिति बनी नहीं कि वह घड़ी शुभ हुई नहीं। सीधी बात है, मियां-बीबी राजी तो काहे को काजी?

-दीप त्रिवेदी

कार्य का परिणाम आपने क्या व कैसे किया, इससे कहीं ज्यादा आपने कितने विश्वास से किया...इस पर निर्भर है। मुहूर्त व वास्तु निश्चित ही अविश्वास के द्योतक हैं, इसीलिए इनके पदार्पण-मात्र से कार्य असफल हो जाते हैं।

-दीप त्रिवेदी

यदि आपको मुहूर्त देखने व राशि मिलाने पर इतना ही भरोसा है तो घर में किसी को ऍटैक आने पर उसे तुरंत अस्पताल क्यों ले जाते हैं? क्यों नहीं पहले मुहूर्त निकलवाकर ही उन्हें घर से निकालते, व Doctor से भी राशि मिलाने के बाद ही उनका Operation करवाते?

-दीप त्रिवेदी

क्या हम इतने पागल हो गये हैं कि शुभ-मुहूर्त में कार्य करने पर भी बार-बार असफल होने के बावजूद...हम फिर-फिर पंडित से शुभ-मुहूर्त निकलवाने पहुंच जाते हैं।

-दीप त्रिवेदी

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