कोटेशन्स
नास्तिकता

नास्तिक और आस्तिक में फर्क क्या है? नास्तिक वह है जो प्रकृति की महासत्ता को पहचानता नहीं; अतः स्वयं की बुद्धि से अर्जित ज्ञान के भरोसे जीवन संवारने में लगा हुआ है। आस्तिक वह है जो बुद्धि लगाता ही नहीं। वह स्वयं को उसके अर्पित कर देता है, प्रकृति उसे जैसा व जो बनाना चाहे बना ले।

-दीप त्रिवेदी

पूरी दुनिया नास्तिकों से भरी पड़ी है। इसका सबूत यह कि कोई भी व्यक्ति प्रकृति की अपार कृपा Time व Space के Combinationको नहीं पहचानता है। इसी कारण हर कोई अपनी बुद्धि, इच्छाओं व तथाकथित धार्मिक पाखंडों के भरोसे जीवन को सफल बनाने में लगा हुआ है। ...और इसका अंतिम परिणाम हमारे सामने है।

-दीप त्रिवेदी

एक सच्चा आस्तिक, नास्तिक-सा भासता है; क्योंकि वह आपके धार्मिक पाखंडों व आपके धर्म के दलालों पर हमले बोलता है। वह भी क्या करे, उसका ईश्वर से Direct Contact जो हो जाता है।

-दीप त्रिवेदी

‘हां’ आस्तिकता है और ‘ना’ नास्तिकता है। आपने जीवन में जितनी चीजों का दृढ़तापूर्वक निषेध कर रखा है...उतने ही आप अधार्मिक। अधार्मिकता का अर्थ ही ईश्वर की रचनाओं का अस्वीकार है।

-दीप त्रिवेदी

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